मरकुस के मुताबिक खुशखबरी 6:1-56

6  फिर यीशु वहाँ से निकला और अपने इलाके में आया जहाँ वह पला-बढ़ा था+ और उसके चेले भी उसके साथ आए।  जब सब्त का दिन आया, तो वह सभा-घर में सिखाने लगा। उसकी बात सुननेवाले ज़्यादातर लोग हैरान थे। उन्होंने कहा, “इस आदमी ने ये बातें कहाँ से सीखीं?+ भला यह बुद्धि इसे कहाँ से मिली और यह ऐसे शक्‍तिशाली काम कैसे कर पा रहा है?+  यह तो वही बढ़ई है न,+ जो मरियम का बेटा+ और याकूब,+ यूसुफ, यहूदा और शमौन का भाई है!+ और इसकी बहनें यहाँ हमारे बीच ही रहती हैं न!” इसलिए उन्होंने उस पर यकीन नहीं किया।  मगर यीशु ने उनसे कहा, “एक भविष्यवक्‍ता का हर कहीं आदर किया जाता है, सिर्फ उसके अपने इलाके, घर और रिश्‍तेदारों के बीच नहीं किया जाता।”+  इसलिए उसने चंद बीमारों पर हाथ रखकर उन्हें ठीक करने के सिवा वहाँ और कोई शक्‍तिशाली काम नहीं किया।  दरअसल उनके विश्‍वास की कमी देखकर उसे ताज्जुब हुआ। इसके बाद वह आस-पास के गाँवों में जाकर सिखाने लगा।+  फिर यीशु ने उन बारहों को बुलाया और वह उन्हें दो-दो की जोड़ी में भेजने लगा।+ उसने उन्हें दुष्ट स्वर्गदूतों पर अधिकार भी दिया।+  उसने ये हिदायतें भी दीं कि वे सफर के लिए एक लाठी को छोड़ और कुछ न लें, न रोटी, न खाने की पोटली, न अपने कमरबंद में पैसे,*+  न ही दो जोड़ी कपड़े लें* बल्कि जूतियाँ कस लें। 10  यीशु ने उनसे यह भी कहा, “जब भी तुम किसी घर में जाओ, तो वहाँ तब तक ठहरो जब तक तुम उस इलाके में रहो।+ 11  अगर किसी इलाके में लोग तुम्हें स्वीकार नहीं करें या तुम्हारी नहीं सुनें, तो वहाँ से बाहर निकलते वक्‍त अपने पैरों की धूल झाड़ देना ताकि उन्हें गवाही मिले।”+ 12  तब वे निकल पड़े और प्रचार करने लगे कि लोग पश्‍चाताप करें।+ 13  उन्होंने कई दुष्ट स्वर्गदूतों को निकाला+ और कई बीमारों पर तेल मलकर उन्हें ठीक किया। 14  यह बात राजा हेरोदेस+ के कानों में पड़ी क्योंकि यीशु का नाम मशहूर हो गया था। लोग कहते थे, “यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला, जो मर गया था, ज़िंदा कर दिया गया है और इसीलिए वह ऐसे शक्‍तिशाली काम* कर रहा है!”+ 15  मगर दूसरे कहते थे, “यह एलियाह है।” कुछ और लोग कहते थे, “यह तो पुराने ज़माने के भविष्यवक्‍ताओं जैसा कोई भविष्यवक्‍ता है।”+ 16  मगर जब हेरोदेस ने यह बात सुनी, तो उसने कहा, “जिस यूहन्‍ना का सिर मैंने कटवाया था, वह फिर से ज़िंदा हो गया है।” 17  हेरोदेस ने अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास से शादी कर ली थी। हेरोदियास की वजह से हेरोदेस ने यूहन्‍ना को गिरफ्तार कर लिया था और उसे ज़ंजीरों में बाँधकर जेल में डलवा दिया था।+ 18  क्योंकि यूहन्‍ना हेरोदेस से कहा करता था, “तूने अपने भाई की पत्नी को अपना बनाकर कानून तोड़ा है।”+ 19  इसलिए हेरोदियास, यूहन्‍ना से नफरत करने लगी थी। वह उसे मार डालना चाहती थी, मगर ऐसा नहीं कर पा रही थी। 20  क्योंकि हेरोदेस जानता था कि यूहन्‍ना नेक और पवित्र इंसान है।+ इसलिए वह उससे डरता था और उसे बचाने की कोशिश करता था। वह यूहन्‍ना की बातें सुनने के बाद बड़ी उलझन में पड़ जाता था कि क्या करे। फिर भी वह खुशी से उसकी सुनता था। 21  मगर एक दिन वह मौका आया जिसकी हेरोदियास को तलाश थी। उस दिन हेरोदेस का जन्मदिन था और उसने शाम की बड़ी दावत रखी+ जिसमें उसने बड़े-बड़े अधिकारियों और सेनापतियों और गलील के जाने-माने लोगों को बुलाया।+ 22  तब हेरोदियास की बेटी वहाँ आयी और उसने नाचकर हेरोदेस और दावत में मौजूद बाकी लोगों* का दिल खुश किया। राजा ने लड़की से कहा, “तू जो चाहे माँग, मैं तुझे दे दूँगा।” 23  राजा ने कसम खायी, “तू जो चाहे माँग ले, मैं अपना आधा राज तक तुझे दे दूँगा।” 24  तब लड़की ने बाहर जाकर अपनी माँ से पूछा, “मैं क्या माँगूँ?” उसकी माँ ने कहा, “यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर।” 25  उसी वक्‍त वह लड़की तेज़ी से अंदर राजा के पास गयी और उसने कहा, “मैं चाहती हूँ कि तू अभी, इसी वक्‍त मुझे एक थाल में यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर ला दे।”+ 26  यह सुनकर राजा बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने जो कसमें खायी थीं और जो मेहमान वहाँ थे,* उनकी वजह से उसने लड़की की गुज़ारिश नहीं ठुकरायी। 27  राजा ने फौरन एक अंगरक्षक को भेजा और उसे यूहन्‍ना का सिर लाने का हुक्म दिया। उस आदमी ने जाकर जेल में यूहन्‍ना का सिर काट दिया 28  और उसे एक थाल में रखकर लड़की को दे दिया और लड़की ने उसे ले जाकर अपनी माँ को दिया। 29  जब यूहन्‍ना के चेलों को इसकी खबर मिली, तो वे आकर उसकी लाश ले गए और उसे एक कब्र में रख दिया। 30  यीशु के प्रेषित उसके पास इकट्ठा हुए और उन्होंने लोगों के बीच जो-जो काम किए थे और उन्हें जो-जो सिखाया था, वह सब उसे बताया।+ 31  तब यीशु ने उनसे कहा, “आओ, तुम सब अलग किसी एकांत जगह में चलकर थोड़ा आराम कर लो,”+ क्योंकि वहाँ बहुत लोग आ-जा रहे थे और उन्हें खाने तक की फुरसत नहीं मिली थी।+ 32  इसलिए वे एक नाव पर चढ़कर किसी एकांत जगह के लिए निकल पड़े।+ 33  मगर लोगों ने उन्हें जाते देख लिया और बहुतों को इस बात का पता चल गया। तब सब शहरों से लोग दौड़कर उनसे पहले ही उस जगह जा पहुँचे। 34  जब यीशु नाव से उतरा तो उसने लोगों की एक भीड़ देखी और उन्हें देखकर वह तड़प उठा,+ क्योंकि वे ऐसी भेड़ों की तरह थे जिनका कोई चरवाहा न हो।+ और वह उन्हें बहुत-सी बातें सिखाने लगा।+ 35  अब काफी वक्‍त बीत चुका था और उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा, “यह जगह सुनसान है और बहुत देर हो चुकी है।+ 36  इसलिए इन्हें विदा कर ताकि वे आस-पास के देहातों और गाँवों में जाकर खाने के लिए कुछ खरीद लें।”+ 37  मगर यीशु ने उनसे कहा, “तुम्हीं उन्हें कुछ खाने को दो।” यह सुनकर चेलों ने कहा, “क्या हम 200 दीनार की रोटियाँ खरीदें और इन्हें खाने को दें?”+ 38  यीशु ने उनसे कहा, “जाओ देखो, तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं।” पता लगाकर उन्होंने कहा, “पाँच। और दो मछलियाँ भी हैं।”+ 39  फिर यीशु ने सब लोगों से कहा कि वे अलग-अलग टोलियाँ बनाकर हरी घास पर आराम से बैठ जाएँ।+ 40  वे सौ-सौ और पचास-पचास की टोलियों में बैठ गए। 41  यीशु ने वे पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ लीं और आकाश की तरफ देखकर प्रार्थना में धन्यवाद दिया।+ फिर वह रोटियाँ तोड़कर चेलों को देने लगा ताकि वे उन्हें लोगों में बाँटें। उसने वे दो मछलियाँ भी सबके लिए बाँट दीं। 42  तब सब लोगों ने जी-भरकर खाया 43  और उन्होंने बची हुई रोटियों के टुकड़े उठाए जिनसे 12 टोकरियाँ भर गयीं। इनके अलावा मछलियाँ भी थीं।+ 44  और रोटियाँ खानेवालों में आदमियों की गिनती 5,000 थी। 45  फिर यीशु ने बिना देर किए अपने चेलों से कहा कि वे नाव पर चढ़ जाएँ और उस पार बैतसैदा चले जाएँ, जबकि वह खुद भीड़ को विदा करने लगा।+ 46  मगर उनको अलविदा कहने के बाद, वह प्रार्थना करने के लिए एक पहाड़ पर चढ़ गया।+ 47  अब शाम ढल चुकी थी और नाव झील के बीच थी, मगर वह अकेला पहाड़ पर था।+ 48  उसने देखा कि तेज़ आँधी चल रही है और उसके चेलों को नाव खेने में बड़ी मुश्‍किल हो रही है क्योंकि हवा का रुख उनके खिलाफ था। तब रात के करीब चौथे पहर वह झील पर चलते हुए उनकी तरफ आया। मगर ऐसा लग रहा था जैसे वह उनसे आगे जाना चाहता है। 49  जैसे ही चेलों ने देखा कि वह पानी पर चल रहा है, उन्होंने सोचा, “यह ज़रूर हमारा वहम* है!”+ और वे ज़ोर से चिल्ला उठे। 50  क्योंकि वह उन सबको नज़र आ रहा था और वे घबरा गए। मगर उसने फौरन उनसे बात की और कहा, “हिम्मत रखो, मैं ही हूँ। डरो मत।”+ 51  फिर यीशु भी उनके पास नाव पर चढ़ गया और आँधी थम गयी।+ वे मन-ही-मन बहुत हैरान थे 52  क्योंकि रोटियों का चमत्कार देखने के बाद भी वे उसके मायने नहीं समझ सके थे। उनके मन अभी-भी समझने में मंद थे। 53  जब वे इस पार किनारे पहुँचे, तो गन्‍नेसरत आए और वहीं पास में नाव का लंगर डाला।+ 54  मगर जैसे ही वे नाव से उतरे, लोगों ने यीशु को पहचान लिया। 55  और वे उस पूरे इलाके में यहाँ-वहाँ दौड़े गए और बीमारों को खाट पर डालकर लाते गए और उन्हें जहाँ-जहाँ यीशु के होने की खबर मिली वे उन्हें वहाँ ले गए। 56  यीशु जिस किसी गाँव, शहर या देहात में जाता, लोग वहाँ के बाज़ारों में अपने बीमारों को रख देते और उससे बिनती करते कि वह उन्हें अपने कपड़े की झालर को ही छू लेने दे।+ और जितनों ने उसकी झालर छुई, वे सभी ठीक हो गए।*

कई फुटनोट

शा., “ताँबा।”
शा., “दो-दो कपड़े न पहनें।”
या “ऐसे चमत्कार।”
या “रात के खाने पर आए मेहमानों; उसके साथ मेज़ से टेक लगाए बैठे लोगों।”
या “जो मेज़ से टेक लगाए बैठे थे।”
या “भ्रम।”
या “बच गए।”

अध्ययन नोट

अपने इलाके: शा., “अपने पिता की जगह,” यानी नासरत। यीशु का परिवार यहीं का रहनेवाला था।

अपने इलाके: मत 13:54 का अध्ययन नोट देखें।

बढ़ई का बेटा: “बढ़ई” का यूनानी शब्द टीक्टॉन का आम तौर पर मतलब है, किसी भी तरह का कारीगर या कुछ बनानेवाला। लेकिन जब यह शब्द लकड़ी का काम करनेवाले के लिए इस्तेमाल हुआ तो इसका मतलब ऐसा कारीगर हो सकता है जो मकान खड़ा करता है, मेज़-कुर्सी या लकड़ी का कोई दूसरा सामान बनाता है। दूसरी सदी के ईसाई धर्म के समर्थक जस्टिन मार्टर ने लिखा कि यीशु “जब लोगों के बीच था तब वह एक बढ़ई था और हल और जूए बनाता था।” प्राचीन समय की भाषाओं में जो बाइबल अनुवाद किए गए उनसे भी पता चलता है कि शब्द टीक्टॉन का मतलब है, लकड़ी का काम करनेवाला। यीशु “बढ़ई का बेटा” और “बढ़ई,” दोनों कहलाता था। (मर 6:3) ज़ाहिर है कि उसने अपने दत्तक पिता यूसुफ से बढ़ई का काम सीखा होगा। इस तरह का काम एक लड़के को 12-15 साल की उम्र से ही सिखाना शुरू किया जाता था और कई साल तक सिखाया जाता था।

याकूब: ज़ाहिर है कि यीशु का यह भाई वही याकूब है जिसका ज़िक्र प्रेष 12:17 और गल 1:19 में किया गया है और जिसने अपने नाम से बाइबल की एक किताब लिखी।​—याकू 1:1.

यहूदा: ज़ाहिर है कि यीशु का यह भाई वही यहूदा है (यूनानी में इयूदस) जिसने अपने नाम से बाइबल की एक किताब लिखी।​—यहू 1.

बढ़ई: यीशु “बढ़ई” और “बढ़ई का बेटा,” दोनों कहलाता था। इन शब्दों से हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि 12 साल की उम्र में जब यीशु मंदिर गया था, तब से लेकर प्रचार सेवा शुरू करने तक उसने क्या किया होगा। (मत 13:55 का अध्ययन नोट देखें।) मत्ती ने जो जानकारी नहीं दी, वह मरकुस ने दी और मरकुस ने जो जानकारी नहीं दी, वह मत्ती ने दी।

मरियम का बेटा: यही एक मौका है जब यीशु को मरियम का बेटा कहा गया। यहाँ यूसुफ का कोई ज़िक्र नहीं मिलता, जिससे पता चलता है कि उसकी शायद पहले ही मौत हो चुकी थी। यह इस बात से भी पुख्ता होता है कि यीशु ने यूहन्‍ना से गुज़ारिश की कि वह उसकी मौत के बाद उसकी माँ मरियम की देखभाल करे।​—यूह 19:26, 27.

याकूब: मत 13:55 का अध्ययन नोट देखें।

यहूदा: मत 13:55 का अध्ययन नोट देखें।

भाई: बाइबल में यूनानी शब्द अदेल्फोस ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल हो सकता है, जो एक ही परमेश्‍वर की उपासना करते हैं। मगर यहाँ यह शब्द यीशु के भाइयों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो यूसुफ और मरियम के बेटे थे। कुछ लोगों का मानना है कि यीशु के जन्म के बाद मरियम कुँवारी रही, इसलिए वे दावा करते हैं कि यहाँ शब्द अदेल्फोस चचेरे, फुफेरे, ममेरे या मौसेरे भाइयों के लिए इस्तेमाल हुआ है। लेकिन ऐसे भाइयों के लिए मसीही यूनानी शास्त्र में एक अलग शब्द इस्तेमाल हुआ है (कुल 4:10 में यूनानी शब्द अनेपसियोस)। इसके अलावा, लूक 21:16 में लूका ने यूनानी शब्द अदेल्फोस और सीगजीनेस का बहुवचन इस्तेमाल किया (जिनका अनुवाद है: “भाई” और “रिश्‍तेदार”)। इन उदाहरणों से पता चलता है कि मसीही यूनानी शास्त्र में परिवार से जुड़ा रिश्‍ता बताने के लिए यूँ ही कोई शब्द इस्तेमाल नहीं कर लिया गया।

वहाँ और कोई शक्‍तिशाली काम नहीं किया: या “वहाँ और कोई शक्‍तिशाली काम नहीं कर पाया।” ऐसा नहीं कि यीशु के पास शक्‍ति नहीं थी बल्कि हालात ऐसे थे कि उसे चमत्कार करने की ज़रूरत नहीं पड़ी। नासरत के लोगों में विश्‍वास की कमी थी, इसलिए यीशु ने वहाँ ज़्यादा शक्‍तिशाली काम नहीं किए। (मत 13:58) जो लोग संदेश नहीं सुनना चाहते थे, उन पर परमेश्‍वर की शक्‍ति ज़ाहिर करना बेकार था।​—मत 10:14; लूक 16:29-31 से तुलना करें।

सिखाता और . . . प्रचार करता रहा: सिखाने और प्रचार करने में फर्क है। प्रचार करने का मतलब है संदेश सुनाना, जबकि सिखाने में हिदायतें देना, समझाना, दलीलें देकर कायल करना और सबूत देना भी शामिल है।​—मत 3:1; 28:20 के अध्ययन नोट देखें।

उनके विश्‍वास की कमी देखकर उसे ताज्जुब हुआ: खुशखबरी की किताबों के लेखकों में से सिर्फ मरकुस ने यह लिखा कि यीशु को “अपने इलाके” के लोगों का रवैया देखकर कैसा महसूस हुआ। (मत 13:57, 58; “मरकुस की किताब पर एक नज़र” भी देखें।) जिस यूनानी क्रिया का अनुवाद “ताज्जुब हुआ” किया गया है, वह अकसर यह बताने के लिए इस्तेमाल की गयी है कि यीशु के चमत्कार देखकर और उसकी शिक्षाएँ सुनकर लोगों को कैसा लगता था। (मर 5:20; 15:5) लेकिन दो मौकों पर यह क्रिया यीशु की भावनाएँ ज़ाहिर करने के लिए इस्तेमाल हुई है: एक, जब उसने एक सेना-अफसर का ज़बरदस्त विश्‍वास देखा (मत 8:10; लूक 7:9) और दूसरा यहाँ, जब उसने नासरत के लोगों में विश्‍वास की कमी देखी।

आस-पास के गाँवों में जाकर: या “चारों ओर गाँवों में जाकर।” इन शब्दों के मुताबिक, गलील में यीशु के प्रचार का तीसरा दौरा शुरू होता है। (मत 9:35; लूक 9:1) शब्द “चारों ओर” से शायद पता चले कि उसने उस इलाके के कोने-कोने तक प्रचार किया। कुछ विद्वानों का कहना है कि वह प्रचार करते हुए पूरे इलाके में घूमकर वापस उसी जगह आया जहाँ उसने शुरू किया था। यीशु की सेवा का एक अहम पहलू था, सिखाना।​मत 4:23 का अध्ययन नोट देखें।

वहाँ तब तक ठहरो जब तक तुम उस इलाके में रहो: यीशु अपने चेलों को हिदायत दे रहा था कि जब वे किसी नगर में पहुँचें, तो जिस घर में उनकी मेहमान-नवाज़ी की जाती है, उन्हें उसी घर में रुकना चाहिए। उन्हें “घर-पर-घर बदलते” नहीं रहना चाहिए। (लूक 10:1-7) उन्हें ऐसे घर की तलाश नहीं करनी चाहिए जहाँ ज़्यादा सहूलियतें या मन-बहलाव के इंतज़ाम हों। अगर वे यीशु की हिदायत मानते तो वे दिखाते कि उनके लिए आराम से ज़्यादा प्रचार काम मायने रखता है।

अपने पैरों की धूल झाड़ देना: चेलों का ऐसा करना दिखाता कि परमेश्‍वर उस घर के लोगों का जो न्याय करता उसके लिए वे ज़िम्मेदार नहीं होते। ये शब्द मत 10:14 और लूक 9:5 में भी पाए जाते हैं। इन शब्दों के साथ-साथ मरकुस ने यह भी लिखा: ताकि उन्हें गवाही मिले और लूका ने लिखा, “ताकि उनके खिलाफ गवाही हो।” पौलुस और बरनबास जब पिसिदिया इलाके के अंताकिया शहर में थे तो उन्होंने भी यह हिदायत मानी। (प्रेष 13:51) पौलुस जब कुरिंथ में था तो उसने कुछ इससे मिलता-जुलता ही किया। उसने अपने कपड़े झाड़े और वहाँ के लोगों से कहा, “तुम्हारा खून तुम्हारे ही सिर पड़े। मैं निर्दोष हूँ।” (प्रेष 18:6) पैरों की धूल झाड़ना, इस तरह के व्यवहार से चेले शायद वाकिफ थे। धर्मी होने का दम भरनेवाले यहूदी जब गैर-यहूदियों के देश से सफर करके आते थे, तो अपने इलाकों में घुसने से पहले पैरों की धूल झाड़ देते थे क्योंकि वे सोचते थे कि उस देश की मिट्टी अशुद्ध है। लेकिन ज़ाहिर है कि जब यीशु ने अपने चेलों को यह हिदायत दी तो उसके मन में यह बात नहीं थी।

कई बीमारों पर तेल मलकर: यहाँ इसका लाक्षणिक मतलब था। हालाँकि यह माना जाता था कि तेल में औषधीय गुण होते हैं (लूक 10:34 से तुलना करें), लेकिन बीमारों को सिर्फ तेल से नहीं बल्कि परमेश्‍वर की पवित्र शक्‍ति से ठीक किया गया था।​—लूक 9:1, 6.

हेरोदेस: यानी हेरोदेस महान का बेटा हेरोदेस अन्तिपास।​—शब्दावली देखें।

ज़िला-शासक: शा., “तित्रअर्खेस।” यह उपाधि एक छोटे ज़िला-शासक या एक इलाके के हाकिम को दी जाती थी, जो रोमी अधिकारियों की मंज़ूरी से ही शासन करता था।​—मत 14:1; मर 6:14 के अध्ययन नोट देखें।

बपतिस्मा देनेवाला: या “डुबकी लगवानेवाला।” यहाँ और मर 6:14, 24 में यूनानी कृदंत (participle) हो बपटाइज़ोन इस्तेमाल हुआ है, जिसका अनुवाद “जो बपतिस्मा देता है” भी किया जा सकता है। इसकी यूनानी संज्ञा बैप्टिस्टेस मर 6:25; 8:28 में और मत्ती और लूका की किताब में इस्तेमाल हुई है। हालाँकि इन दोनों शब्दों का रूप अलग है, मगर मतलब एक है। इसलिए मूल यूनानी पाठ में मर 6:24, 25 में ये दोनों शब्द इस्तेमाल हुए हैं।​—मत 3:1 का अध्ययन नोट देखें।

राजा हेरोदेस: यानी हेरोदेस महान का बेटा हेरोदेस अन्तिपास। (शब्दावली में “हेरोदेस” देखें।) मत्ती और लूका ने अन्तिपास के लिए रोमी सरकार से मिली उपाधि “तित्रअर्खेस” यानी “ज़िला-शासक” इस्तेमाल की। (मत 14:1; लूक 3:1 के अध्ययन नोट देखें।) अन्तिपास को गलील और पेरिया पर शासन करने का अधिकार दिया गया था। लेकिन वह “राजा” के तौर पर ज़्यादा मशहूर था। हेरोदेस के लिए यह उपाधि यानी “राजा” मत्ती ने एक बार (मत 14:9) और मरकुस ने हमेशा इस्तेमाल की।​—मर 6:22, 25, 26, 27.

लोग कहते थे: शा., “वे कहते थे।” कुछ हस्तलिपियों में लिखा है, “वह कहता था।”

बपतिस्मा देनेवाला: मर 1:4 का अध्ययन नोट देखें।

अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास: हेरोदेस अन्तिपास हेरोदियास पर फिदा हो गया था, जो उसके भाई हेरोदेस फिलिप्पुस की पत्नी थी। हेरोदियास ने अपने पति को और हेरोदेस ने अपनी पत्नी को तलाक देकर एक-दूसरे से शादी कर ली। ऐसा करना यहूदी कानून के खिलाफ था। जब यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने उनके रिश्‍ते को गलत कहा तो हेरोदेस ने उसे गिरफ्तार करवा दिया।

अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास: मत 14:3 का अध्ययन नोट देखें।

जानता था कि यूहन्‍ना नेक और पवित्र इंसान है: यही वजह थी कि हेरोदेस यूहन्‍ना की सुनता था और उसे बचाने की कोशिश करता था। हालाँकि हेरोदेस यूहन्‍ना से डरता था, लेकिन उसे मेहमानों के सामने इज़्ज़त गँवाने का ज़्यादा डर था। साथ ही उसमें विश्‍वास की कमी थी। इसलिए हेरोदियास की बातों में आकर उसने यूहन्‍ना का कत्ल करवा दिया। यहूदी इतिहासकार जोसीफस ने यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले को “भला आदमी” कहा।

यूहन्‍ना को गिरफ्तार कर लिया था और . . . जेल में डलवा दिया था: बाइबल यह नहीं बताती कि यूहन्‍ना को गिरफ्तार करके कहाँ बंदी बनाया गया था। जोसीफस का कहना है कि उसे मैक्यूरस के किले में बंदी बनाकर रखा गया और वहीं उसकी हत्या कर दी गयी। मैक्यूरस, मृत सागर के पूर्वी तट पर था। हो सकता है यूहन्‍ना कुछ समय उसी जेल में रहा हो। (मत 4:12) लेकिन काफी हद तक मुमकिन है कि जब यूहन्‍ना का कत्ल किया गया तब वह तिबिरियास में था। यह शहर गलील झील के पश्‍चिमी तट पर था। ऐसा मानने की दो वजह हैं: (1) मालूम होता है कि गलील के जिस इलाके में यीशु प्रचार कर रहा था, उसके पास ही कहीं यूहन्‍ना जेल में था। यूहन्‍ना ने यीशु के कामों की चर्चा सुनी और जेल से ही अपने चेलों को यीशु से बात करने के लिए भेजा। (मत 11:1-3) (2) मरकुस कहता है कि हेरोदेस के जन्मदिन पर ‘गलील के जाने-माने लोग’ मौजूद थे। इससे पता चलता है कि यह दावत तिबिरियास में हेरोदेस के महल में रखी गयी थी। ज़ाहिर है कि जहाँ दावत रखी गयी थी उसी जगह के पास यूहन्‍ना जेल में रहा होगा।​—मर 6:21-29; मत 14:6-11.

जन्मदिन: यह शायद तिबिरियास में हेरोदेस अन्तिपास के महल में मनाया गया था। (मत 14:3; मर 6:21 के अध्ययन नोट देखें।) बाइबल में सिर्फ दो जन्मदिनों का ज़िक्र है। एक यह जन्मदिन, जिसमें यूहन्‍ना का सिर कटवा दिया गया और दूसरा मिस्र के फिरौन का, जिसमें प्रधान रसोइए को मार डाला गया। (उत 40:18-22) इन दोनों मौकों पर एक जैसी घटनाएँ घटीं: एक बड़ी दावत रखी गयी और कुछ लोगों पर मेहरबानी की गयी। साथ ही, ये दोनों जन्मदिन हत्या के लिए जाने जाते हैं।

हेरोदेस का जन्मदिन: यह शायद गलील झील के पश्‍चिमी तट पर बसे तिबिरियास शहर में हेरोदेस अन्तिपास के महल में मनाया गया था। ऐसा मानने की एक वजह यह है कि इस आयत में मरकुस कहता है कि हेरोदेस के जन्मदिन पर गलील के जाने-माने लोग मौजूद थे। (मत 14:3, 6 के अध्ययन नोट देखें।) बाइबल में सिर्फ दो जन्मदिनों का ज़िक्र है। एक यह जन्मदिन, जिसमें यूहन्‍ना का सिर कटवा दिया गया और दूसरा मिस्र के फिरौन का, जिसमें प्रधान रसोइए को मार डाला गया। (उत 40:18-22) इन दोनों मौकों पर एक जैसी घटनाएँ घटीं: एक बड़ी दावत रखी गयी और कुछ लोगों पर मेहरबानी की गयी। साथ ही, ये दोनों जन्मदिन हत्या के लिए जाने जाते हैं।

सेनापतियों: यूनानी शब्द खिलाइ-अरखोस (सहस्त्रपति) का शाब्दिक मतलब है, “एक हज़ार (सैनिकों) का अधिकारी।” यह शब्द एक रोमी हाकिम के लिए इस्तेमाल होता था। हर रोमी पलटन में छ: हाकिम होते थे। लेकिन ऐसा नहीं था कि एक पलटन छ: टुकड़ियों में बँटी होती थी। इसके बजाय समय-अवधि को छ: हिस्सों में बाँटा जाता था और इसके तहत हर हाकिम को पूरी पलटन पर बारी-बारी से अधिकार दिया जाता था। ऐसे सेनापति के पास बहुत अधिकार होता था। वह शतपतियों को चुनता और नियुक्‍त भी करता था। मोटे तौर पर यूनानी शब्द खिलाइ-अरखोस ऊँचे दर्जे के किसी सेना-अफसर के लिए भी इस्तेमाल हो सकता था। ऐसे बड़े-बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में हेरोदेस अपनी कसम पूरी करने के लिए मजबूर हो गया। इसलिए उसने यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर कटवाने का हुक्म दे दिया।

हेरोदियास की बेटी: यह हेरोदेस फिलिप्पुस की बेटी थी और हेरोदियास की इकलौती संतान थी। हालाँकि उसका नाम सलोमी शास्त्र में नहीं दिया गया है, मगर जोसीफस के लेखों में पाया जाता है। बाद में हेरोदेस अन्तिपास ने अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी, यानी सलोमी की माँ से शादी कर ली और इस तरह व्यभिचार किया।

बपतिस्मा देनेवाला: या “डुबकी लगवानेवाला।” यहाँ और मर 6:14, 24 में यूनानी कृदंत (participle) हो बपटाइज़ोन इस्तेमाल हुआ है, जिसका अनुवाद “जो बपतिस्मा देता है” भी किया जा सकता है। इसकी यूनानी संज्ञा बैप्टिस्टेस मर 6:25; 8:28 में और मत्ती और लूका की किताब में इस्तेमाल हुई है। हालाँकि इन दोनों शब्दों का रूप अलग है, मगर मतलब एक है। इसलिए मूल यूनानी पाठ में मर 6:24, 25 में ये दोनों शब्द इस्तेमाल हुए हैं।​—मत 3:1 का अध्ययन नोट देखें।

बपतिस्मा देनेवाले: मर 1:4 का अध्ययन नोट देखें।

उसने जो कसमें खायी थीं: शब्द “कसमें” (जबकि मत 14:7 में एकवचन इस्तेमाल हुआ है) का मतलब हो सकता है कि हेरोदेस ने अपना वादा पुख्ता करने के लिए बार-बार कसमें खायी हों।

उसने जो कसमें खायी थीं: शब्द “कसमें” से पता चलता है कि हेरोदेस ने हेरोदियास की बेटी से किया अपना वादा (मर 6:23) पुख्ता करने के लिए शायद बार-बार कसमें खायी हों।​—मत 14:9 का अध्ययन नोट देखें।

एक अंगरक्षक: यहाँ इस्तेमाल हुआ यूनानी शब्द स्पैकाउलेटर लातीनी शब्द (स्पैक्युलेटर) से निकला है। इसका मतलब एक अंगरक्षक या दूत हो सकता है और कभी-कभी जल्लाद भी हो सकता है। करीब 30 लातीनी शब्दों से निकले यूनानी शब्द, मसीही यूनानी शास्त्र में इस्तेमाल हुए हैं। ये शब्द सेना, न्याय-व्यवस्था, पैसों और घर-बार से जुड़े हैं। इनमें से ज़्यादातर शब्द मरकुस और मत्ती की किताबों में हैं और खुशखबरी की किताबों के लेखकों के मुकाबले मरकुस ने सबसे ज़्यादा शब्द इस्तेमाल किए। इससे यह बात पुख्ता हो जाती है कि मरकुस ने अपनी खुशखबरी की किताब रोम में गैर-यहूदियों के लिए लिखी थी, खासकर रोमी लोगों के लिए।​—यूह 19:20 का अध्ययन नोट देखें।

कब्र: या “स्मारक कब्र।”​—शब्दावली में “स्मारक कब्र” देखें।

तड़प उठा: इन शब्दों के लिए यूनानी क्रिया स्प्लैगख्नी-ज़ोमाइ इस्तेमाल हुई है, जो यूनानी शब्द स्प्लैगख्ना (मतलब “अंतड़ियों”) से संबंधित है। इसका मतलब एक ऐसी भावना है जो दिल की गहराइयों से उठती है। यूनानी में यह शब्द गहरी और कोमल करुणा के लिए इस्तेमाल होता है।

तड़प उठा: या “करुणा महसूस की।”​—मत 9:36 का अध्ययन नोट देखें।

तुम्हीं उन्हें कुछ खाने को दो: यही एक चमत्कार है जिसके बारे में खुशखबरी की चारों किताबों में बताया गया है।​—मत 14:15-21; मर 6:35-44; लूक 9:10-17; यूह 6:1-13.

दीनार: शब्दावली और अति. ख14 देखें।

मछलियों: बाइबल के ज़माने में मछलियों को आम तौर पर आग में सेंका जाता था या नमक लगाकर सुखाया जाता था। अकसर इन्हें रोटी के साथ खाया जाता था। यीशु ने शायद नमक लगी हुई सूखी मछलियाँ इस्तेमाल कीं।

मछलियाँ: मत 14:17 का अध्ययन नोट देखें।

रोटियाँ तोड़कर: अकसर ये रोटियाँ मोटी और फूली हुई होती थीं। इन्हें तंदूर में सेंककर सख्त बनाया जाता था। इसलिए इन्हें तोड़कर खाया जाता था।​—मत 14:19; 15:36; 26:26; मर 8:6; लूक 9:16.

टोकरियों: यीशु ने चमत्कार करके दो मौकों पर जब भीड़ को खाना खिलाया तो एक बार बचा हुआ खाना टोकरियों में इकट्ठा किया गया और दूसरी बार बड़े टोकरों में। इन ब्यौरों का ज़िक्र करते समय मरकुस और मत्ती ने हर बार यह फर्क साफ-साफ बताया। (मर 6:43; 8:8, 20 के अध्ययन नोट और मत 14:20; 15:37; 16:9, 10 में यही ब्यौरे देखें।) करीब 5,000 लोगों को खाना खिलानेवाले ब्यौरे में यूनानी शब्द कोफिनोस (“टोकरियों”) इस्तेमाल हुआ और करीब 4,000 लोगों को खाना खिलानेवाले ब्यौरे में यूनानी शब्द स्फिरिस (“बड़े टोकरे”) इस्तेमाल हुआ। इससे पता चलता है कि इन चमत्कारों के दौरान या तो लेखक खुद मौजूद थे या भरोसेमंद चश्‍मदीद गवाहों ने उन्हें यह जानकारी दी।

बड़े टोकरे: मर 8:8, 19 के अध्ययन नोट देखें।

टोकरियाँ: ये शायद खपच्चियों से बनी होती थीं और इनमें डोरी लगी होती थी ताकि लोग इन्हें लटकाकर सफर में ले जा सकें। माना जाता है कि इनका आयतन करीब 7.5 ली. था।​—मर 8:19, 20 के अध्ययन नोट देखें।

आदमियों की गिनती 5,000 थी: यही एक चमत्कार है जिसके बारे में खुशखबरी की चारों किताबों में बताया गया है (मत 14:15-21; मर 6:35-44; लूक 9:10-17; यूह 6:1-13), लेकिन सिर्फ मत्ती ने औरतों और बच्चों का ज़िक्र किया। मुमकिन है कि चमत्कार से जिन लोगों को खाना खिलाया गया उनकी गिनती 15,000 से ज़्यादा रही होगी।

चौथे पहर: यानी सुबह करीब 3 बजे से 6 बजे तक जब सूरज उगता है। यूनानियों और रोमियों के मुताबिक, रात को चार पहरों में बाँटा जाता था। पहले इब्री लोग रात को तीन पहरों में बाँटते थे और हर पहर करीब चार घंटे का होता था। (निर्ग 14:24; न्या 7:19) लेकिन यीशु के दिनों तक इस मामले में उन्होंने रोमी तरीका अपना लिया था।

चौथे पहर: मत 14:25 का अध्ययन नोट देखें।

ऐसा लग रहा था जैसे वह उनसे आगे जाना चाहता है: या “आगे निकलनेवाला है।” ज़ाहिर है कि यहाँ चेलों के नज़रिए की बात की गयी है। उन्हें लगा कि यीशु उनसे आगे निकलनेवाला है।

रोटियों का चमत्कार देखने के बाद भी वे उसके मायने नहीं समझ सके थे: कुछ ही घंटों पहले चेलों ने देखा था कि यीशु ने ऐसा चमत्कार किया कि कुछ रोटियों से ढेर सारी रोटियाँ हो गयीं। इस घटना से साफ पता चलता है कि पवित्र शक्‍ति से यीशु को कितनी ताकत मिली थी। फिर भी चेले इस बात को समझने से चूक गए। इसलिए जब यीशु पानी पर चला और उसने आँधी को शांत किया, तब वे एकदम हैरान रह गए। यहाँ तक कि शुरू में जब उन्होंने यीशु को पानी पर चलते देखा, तो उन्हें लगा कि यह उनका “वहम है!”​—मर 6:49.

गन्‍नेसरत: एक छोटा मैदानी इलाका, जिसकी लंबाई करीब 5 कि.मी. (3 मील) और चौड़ाई करीब 2.5 कि.मी. (1.5 मील) थी। इसकी एक सीमा गलील झील के उत्तरी-पश्‍चिमी किनारे पर थी। लूक 5:1 में गलील झील को “गन्‍नेसरत झील” कहा गया है।

गन्‍नेसरत: मत 14:34 का अध्ययन नोट देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

लाठी और खाने की पोटली
लाठी और खाने की पोटली

प्राचीन समय के इब्री लोग आम तौर पर अपने पास लाठी या डंडा रखते थे। यह कई तरह से काम में आता था, जैसे सहारे के लिए (निर्ग 12:11; जक 8:4; इब्र 11:21), बचाव या लड़ने के लिए (2शमू 23:21), दाँवने के लिए (यश 28:27) और जैतून के पेड़ झाड़ने के लिए ताकि फल गिर सकें (व्य 24:20; यश 24:13)। खाने की पोटली एक थैला होता था, जो आम तौर पर चमड़े का होता था। मुसाफिर, चरवाहे, किसान और दूसरे लोग इसे अपने कंधे पर टाँग लेते थे। इसमें खाना, कपड़े और दूसरी चीज़ें रखी जाती थीं। यीशु ने जब अपने प्रेषितों को प्रचार के लिए भेजा, तो उसने उन्हें लाठी और खाने की पोटली के बारे में भी हिदायतें दीं। प्रेषितों के पास जो चीज़ें थीं बस वही लेकर उन्हें जाना था और यहोवा उनका खयाल रखता। अगर वे कुछ और लेने की कोशिश करते तो प्रचार से उनका ध्यान भटक सकता था।​—यीशु की हिदायतों का क्या मतलब था, यह जानने के लिए लूक 9:3 और 10:4 के अध्ययन नोट देखें।

टोकरी और टोकरा
टोकरी और टोकरा

बाइबल में अलग-अलग तरह की टोकरियों के लिए अलग-अलग शब्द इस्तेमाल हुए हैं। जब यीशु ने करीब 5,000 आदमियों को खाना खिलाया, तो बचा हुआ खाना 12 टोकरियों में इकट्ठा किया गया। इन टोकरियों के लिए जो यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है, उसका मतलब हाथ से उठायी जानेवाली छोटी टोकरियाँ हो सकता है। लेकिन जब यीशु ने करीब 4,000 लोगों को खाना खिलाया था, तो जिन सात टोकरों में बचा हुआ खाना रखा गया, उनके लिए एक अलग यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है, जिसका मतलब है, बड़े टोकरे। (मर 8:8, 9) यही यूनानी शब्द उस टोकरे के लिए इस्तेमाल हुआ, जिसमें पौलुस को बिठाकर दमिश्‍क की शहरपनाह से नीचे उतारा गया था।​—प्रेष 9:25.

बाज़ार
बाज़ार

कुछ बाज़ार सड़क पर लगते थे, जैसे यहाँ चित्र में दिखाया गया है। दुकानदार इतना सामान लगा देते थे कि रास्ता जाम हो जाता था। आस-पास के लोग बाज़ार से घरेलू सामान, मिट्टी के बरतन, काँच की महँगी चीज़ें और ताज़ी साग-सब्ज़ियाँ भी खरीदते थे। उस ज़माने में फ्रिज नहीं होते थे, इसलिए लोगों को खाने-पीने की चीज़ें खरीदने हर दिन बाज़ार जाना होता था। बाज़ार में लोगों को व्यापारियों या दूसरी जगहों से आए लोगों से खबरें भी मिल जाती थीं, यहाँ बच्चे खेलते थे और बेरोज़गार लोग इंतज़ार करते थे कि कोई उन्हें काम दे। बाज़ार में यीशु ने बीमारों को ठीक किया और पौलुस ने लोगों को प्रचार किया। (प्रेष 17:17) लेकिन घमंडी शास्त्रियों और फरीसियों को ऐसी सार्वजनिक जगहों पर लोगों की नज़रों में छाना और उनसे नमस्कार सुनना अच्छा लगता था।