मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 9:1-38

9  तब यीशु नाव पर चढ़कर उस पार चला गया और अपने शहर गया।+  और देखो! कुछ लोग लकवे के मारे हुए एक आदमी को खाट पर लिटाकर ला रहे थे। जब यीशु ने उनका विश्‍वास देखा, तो उसने लकवे के मारे आदमी से कहा, “हिम्मत रख बेटे, तेरे पाप माफ किए गए।”+  तब कुछ शास्त्री मन में कहने लगे, “यह आदमी परमेश्‍वर की निंदा कर रहा है।”+  यह जानते हुए कि वे क्या सोच रहे हैं, यीशु ने कहा, “तुम क्यों अपने मन में बुरी बातें सोच रहे हो?+  क्या कहना ज़्यादा आसान है, ‘तेरे पाप माफ किए गए’ या यह कहना, ‘उठ और चल-फिर’?+  मगर इसलिए कि तुम जान लो कि इंसान के बेटे को धरती पर पाप माफ करने का अधिकार दिया गया है . . .।” फिर उसने लकवे के मारे हुए से कहा, “खड़ा हो! अपनी खाट उठा और घर जा।”+  तब वह आदमी खड़ा हो गया और अपने घर चला गया।  यह देखकर लोगों पर डर छा गया और वे परमेश्‍वर की महिमा करने लगे, जिसने एक इंसान को ऐसा करने का अधिकार दिया था।  फिर जब यीशु वहाँ से आगे जा रहा था, तो उसकी नज़र मत्ती नाम के एक आदमी पर पड़ी, जो कर-वसूली के दफ्तर में बैठा था। यीशु ने उससे कहा, “आ, मेरा चेला बन जा।” तब मत्ती उठकर उसके पीछे चल दिया।+ 10  बाद में जब यीशु एक घर में खाना खा रहा था,* तो देखो! बहुत-से कर-वसूलनेवाले और उनके जैसे दूसरे पापी आए और वे भी यीशु और उसके चेलों के साथ खाने बैठे।*+ 11  मगर यह देखकर फरीसी उसके चेलों से कहने लगे, “तुम्हारा गुरु कर-वसूलनेवालों और पापियों के साथ क्यों खाता है?”+ 12  उनकी बात सुनकर यीशु ने कहा, “जो भले-चंगे हैं उन्हें वैद्य की ज़रूरत नहीं होती, मगर बीमारों को होती है।+ 13  इसलिए जाओ और इस बात का मतलब सीखो, ‘मैं बलिदान नहीं चाहता बल्कि यह चाहता हूँ कि तुम दूसरों पर दया करो।’+ क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं, पापियों को बुलाने आया हूँ।” 14  फिर यूहन्‍ना के चेले यीशु के पास आए और पूछने लगे, “हम लोग और फरीसी तो उपवास रखते हैं, मगर तेरे चेले उपवास क्यों नहीं रखते?”+ 15  यीशु ने उनसे कहा, “जब तक दूल्हा+ अपने दोस्तों के साथ होता है, क्या उसके दोस्त मातम मनाते हैं? नहीं। मगर वे दिन आएँगे जब दूल्हे को उनसे जुदा कर दिया जाएगा,+ तब वे उपवास करेंगे। 16  कोई भी पुराने कपड़े के छेद पर नए कपड़े का टुकड़ा नहीं लगाता। अगर वह लगाए तो नया टुकड़ा सिकुड़कर पुराने कपड़े को फाड़ देगा और छेद और भी बड़ा हो जाएगा।+ 17  न ही लोग नयी दाख-मदिरा पुरानी मशकों में भरते हैं। अगर वे भरें, तो मशकें फट जाएँगी और मदिरा बह जाएगी और मशकें नष्ट हो जाएँगी। मगर लोग नयी मदिरा नयी मशकों में भरते हैं और दोनों सही-सलामत रहती हैं।” 18  जब वह उन्हें ये बातें बता रहा था, तब देखो! एक अधिकारी उसके पास आया और उसने झुककर उसे प्रणाम किया और कहा, “अब तक मेरी बच्ची मर चुकी होगी। फिर भी तू चल और उस पर अपना हाथ रख, तब वह फिर से ज़िंदा हो जाएगी।”+ 19  तब यीशु उठा और उसके पीछे गया और चेले भी उसके साथ गए। 20  और देखो! एक औरत जो 12 साल से खून बहने की बीमारी से पीड़ित थी,+ वह यीशु के पीछे आयी और उसने उसके कपड़े की झालर* छू ली,+ 21  क्योंकि वह मन-ही-मन कहती थी, “अगर मैं उसके कपड़े को ही छू लूँ, तो अच्छी हो जाऊँगी।”*+ 22  यीशु ने मुड़कर उसे देखा और कहा, “बेटी, हिम्मत रख, तेरे विश्‍वास ने तुझे ठीक किया है।”*+ उसी घड़ी वह औरत ठीक हो गयी।+ 23  जब वह उस अधिकारी के घर पहुँचा, तो उसकी नज़र बाँसुरी बजानेवालों और शोरगुल करती भीड़ पर पड़ी।+ 24  यीशु ने उनसे कहा, “तुम लोग यहाँ से जाओ, क्योंकि बच्ची मरी नहीं बल्कि सो रही है।”+ यह सुनकर वे उसकी खिल्ली उड़ाने लगे। 25  जैसे ही भीड़ को बाहर कर दिया गया, यीशु अंदर गया और उसने बच्ची का हाथ पकड़ा+ और वह उठ बैठी।+ 26  इस बात की चर्चा उस पूरे इलाके में फैल गयी। 27  जब यीशु वहाँ से आगे जा रहा था, तो दो अंधे आदमी+ उसके पीछे-पीछे यह पुकारते हुए आने लगे, “हे दाविद के वंशज, हम पर दया कर।” 28  जब वह घर के अंदर गया, तो वे अंधे आदमी उसके पास आए। तब यीशु ने उनसे पूछा, “क्या तुम्हें विश्‍वास है कि मैं यह कर सकता हूँ?”+ उन्होंने जवाब दिया, “हाँ, प्रभु।” 29  तब उसने उनकी आँखों को छूकर कहा, “जैसा तुमने विश्‍वास किया है, तुम्हारे लिए वैसा ही हो।” 30  और वे अपनी आँखों से देखने लगे।+ फिर यीशु ने उन्हें चेतावनी दी, “देखो, इस बारे में किसी को मत बताना।”+ 31  मगर बाहर जाने के बाद उन्होंने पूरे इलाके में उसके बारे में बता दिया। 32  फिर जब वे बाहर जा रहे थे तो देखो! लोग उसके पास एक गूँगे आदमी को ले आए, जिसमें एक दुष्ट स्वर्गदूत समाया था।+ 33  जब दुष्ट स्वर्गदूत निकाल दिया गया, तो वह आदमी बोलने लगा।+ यह देखकर भीड़ हैरान रह गयी और कहने लगी, “इसराएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया।”+ 34  मगर फरीसी कहने लगे, “यह तो दुष्ट स्वर्गदूतों के राजा की मदद से दुष्ट स्वर्गदूत निकालता है।”+ 35  यीशु सब शहरों और गाँवों का दौरा करने निकला और वह उनके सभा-घरों में सिखाता और राज की खुशखबरी का प्रचार करता गया। वह हर तरह की बीमारी और शरीर की कमज़ोरी दूर करता रहा।+ 36  जब उसने भीड़ को देखा तो वह तड़प उठा,+ क्योंकि वे ऐसी भेड़ों की तरह थे जिनकी खाल खींच ली गयी हो और जिन्हें बिन चरवाहे के यहाँ-वहाँ भटकने के लिए छोड़ दिया गया हो।+ 37  तब उसने अपने चेलों से कहा, “बेशक, कटाई के लिए फसल बहुत है मगर मज़दूर थोड़े हैं।+ 38  इसलिए खेत के मालिक से बिनती करो कि वह कटाई के लिए और मज़दूर भेजे।”+

कई फुटनोट

या “मेज़ से टेक लगाए बैठा था।”
या “मेज़ से टेक लगाए बैठे थे।”
या “छोर; किनारा।”
या “बच जाऊँगी।”
या “तुझे बचा लिया है।”

अध्ययन नोट

अपने शहर: यानी कफरनहूम। गलील प्रदेश के इसी शहर में यीशु रहता था। (मत 4:13; मर 2:1) यहीं से वह आस-पास के कई शहरों में जाकर प्रचार करता था। जैसे, नासरत जहाँ वह पला-बढ़ा, काना जहाँ उसने पानी को दाख-मदिरा में बदला, नाईन जहाँ उसने एक विधवा के बेटे को ज़िंदा किया और बैतसैदा जिसके पास उसने चमत्कार करके करीब 5,000 आदमियों को खाना खिलाया और एक अंधे आदमी की आँखों की रौशनी लौटायी।

देख!: इसका यूनानी शब्द आइडू है और इसका इस्तेमाल अकसर आगे की बात पर ध्यान खींचने के लिए किया गया है ताकि पढ़नेवाला बतायी जा रही घटना की कल्पना कर सके या उसकी बारीकी पर ध्यान दे सके। यह शब्द किसी बात पर ज़ोर देने के लिए या कोई नयी या हैरानी की बात बताने से पहले भी इस्तेमाल किया गया है। मसीही यूनानी शास्त्र में यह शब्द सबसे ज़्यादा बार मत्ती, लूका और प्रकाशितवाक्य की किताबों में आया है। इसी से मिलता-जुलता शब्द इब्रानी शास्त्र में भी अकसर इस्तेमाल हुआ है।

देखो!: मत 1:23 का अध्ययन नोट देखें।

उनका विश्‍वास देखा: शब्द “उनका” से पता चलता है कि यीशु ने गौर किया कि न सिर्फ लकवे के मारे आदमी का बल्कि उसे लानेवाले सभी लोगों का विश्‍वास मज़बूत है।

बेटे: यीशु ने प्यार से उसे “बेटे” कहकर पुकारा।​—2ती 1:2; तीत 1:4; फिले 10.

क्या कहना ज़्यादा आसान है: यह कहना किसी के लिए भी आसान था कि वह पाप माफ कर सकता है, क्योंकि इस दावे को सच साबित करने के लिए किसी सबूत की ज़रूरत नहीं थी। लेकिन यह कहना कि उठ और चल-फिर आसान नहीं था। इसके लिए यीशु को चमत्कार करना होता ताकि सब देख पाते कि उसके पास पाप माफ करने का भी अधिकार है। इस घटना और यश 33:24 के मुताबिक, हम इसलिए बीमार होते हैं क्योंकि हम पापी हैं।

इंसान के बेटे: ये शब्द खुशखबरी की किताबों में करीब 80 बार आते हैं। यीशु ने ये शब्द खुद के लिए इस्तेमाल किए। ज़ाहिर है उसने ऐसा इसलिए किया ताकि साबित हो सके कि वह वाकई एक इंसान है और औरत से जन्मा है और आदम के बराबर है। इसलिए उसके पास इंसानों को पाप और मौत से छुड़ाने का अधिकार है। (रोम 5:12, 14, 15) इन शब्दों से यह भी पता चलता है कि यीशु ही मसीहा या मसीह है।​—दान 7:13, 14; शब्दावली में “इंसान का बेटा” देखें।

इंसान के बेटे: मत 8:20 का अध्ययन नोट देखें।

पाप माफ करने का अधिकार दिया गया है . . .।: वाक्य के आखिर में दी बिंदुओं से पता चलता है कि यीशु ने बीच में ही अपनी बात रोक दी और फिर सबके सामने उस आदमी को ठीक करके अपनी बात दमदार तरीके से साबित की।

मत्ती: जिस यूनानी नाम का अनुवाद “मत्ती” किया गया है वह शायद उस इब्रानी नाम का छोटा रूप है जिसका अनुवाद “मतित्याह” किया गया है। (1इत 15:18) मतित्याह का मतलब है, “यहोवा का तोहफा।”

मत्ती: लेवी भी कहलाता था।​—लूक 5:2.

आ, मेरा चेला बन जा: इस बुलावे में जो यूनानी क्रिया इस्तेमाल हुई है उसका बुनियादी मतलब है, “किसी के पीछे चलना।” लेकिन यहाँ इसका मतलब है, “चेला बनकर किसी के पीछे जाना।”

मत्ती: मत के शीर्षक और 10:3 के अध्ययन नोट देखें।

कर-वसूली के दफ्तर: या “कर-वसूली की चौकी।” यह दफ्तर, एक छोटी-सी इमारत या चौकी हो सकता था जहाँ कर-वसूलनेवाला बैठता था। वह आयात-निर्यात पर और उस माल पर कर लेता था जो सौदागर उस देश से लेकर गुज़रते थे। मत्ती का कर-वसूली का दफ्तर कफरनहूम में या उसके पास था।

मेरा चेला बन जा: मर 2:14 का अध्ययन नोट देखें।

खाने पर गया था: या “मेज़ से टेक लगाए बैठा था।” किसी के साथ मेज़ से टेक लगाकर बैठना दिखाता था कि उनकी एक-दूसरे से अच्छी जान-पहचान है। इसलिए यीशु के दिनों में यहूदी, गैर-यहूदियों के साथ इस तरह कभी नहीं बैठते थे, न खाना खाते थे।

कर-वसूलनेवाले: कई यहूदी, रोमी अधिकारियों के लिए कर वसूलते थे। इन यहूदियों से नफरत की जाती थी क्योंकि वे ऐसी विदेशी सरकार का साथ दे रहे थे जिसे लोग पसंद नहीं करते थे। इसके अलावा, ये यहूदी कर के लिए तय की गयी रकम से ज़्यादा वसूल करते थे। यहूदी लोग कर-वसूलनेवालों को पापी और वेश्‍याओं के जैसा तुच्छ मानते थे और उनसे दूर ही रहते थे।​—मत 11:19; 21:32.

घर: यानी मत्ती का घर।​—मर 2:14, 15; लूक 5:29.

खाना खा रहा था: मर 2:15 का अध्ययन नोट देखें।

कर-वसूलनेवाले: मत 5:46 का अध्ययन नोट देखें।

पापी: बाइबल बताती है कि सभी इंसान पापी हैं। (रोम 3:23; 5:12) इसलिए यहाँ इस शब्द का एक खास मतलब है। ज़ाहिर है कि यह ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो पाप करने के लिए जाने जाते थे। वे शायद नैतिक उसूल तोड़ते थे या अपराध करते थे। (लूक 7:37-39; 19:7, 8) यहूदी धर्म गुरु यह शब्द उन यहूदियों या गैर-यहूदियों के लिए भी इस्तेमाल करते थे जिन्हें कानून के बारे में नहीं पता था या जो रब्बियों की बनायी परंपराएँ मानने से चूक जाते थे।

बलिदान नहीं . . . दया: यीशु ने दो बार हो 6:6 के ये शब्द कहे (यहाँ और मत 12:7 में)। खुशखबरी की किताबों के लेखकों में से सिर्फ मत्ती ने यह बात और निर्दयी दास की मिसाल लिखी। यीशु का करीबी दोस्त बनने से पहले मत्ती खुद कर-वसूलनेवाला था जिससे लोग नफरत करते थे। (मत 18:21-25) उसकी किताब यह बात उजागर करती है कि यीशु ने कई बार ज़ोर दिया कि बलिदान के साथ-साथ दया दिखाना भी ज़रूरी है।

उपवास: ठहराए गए वक्‍त तक बिना कुछ खाए-पीए रहना। (शब्दावली देखें।) यीशु ने कभी अपने चेलों को उपवास करने की आज्ञा नहीं दी और ऐसा करने से साफ मना भी नहीं किया। जब मूसा का कानून लागू था तब कुछ यहूदी सही इरादे से यहोवा से मदद माँगते थे और उपवास रखकर अपने पापों का पश्‍चाताप करते थे।​—1शम 7:6; 2इत 20:3.

उपवास रखते हैं: मत 6:16 का अध्ययन नोट देखें।

अपने दोस्तों: शा., “दुल्हन के कमरे के बेटे।” एक मुहावरा जिसका मतलब है, शादी के मेहमान, खासकर दूल्हे के दोस्त।

दाख-मदिरा . . . मशकों में भरते हैं: बाइबल के ज़माने में जानवरों की खाल से बनी मशकों में दाख-मदिरा रखना आम बात थी। (1शम 16:20) ये मशकें भेड़-बकरी जैसे पालतू जानवरों की खाल से बनायी जाती थीं, जो बिना काटे पूरी-की-पूरी जानवर पर से उतार ली जाती थी। पुरानी मशकों का चमड़ा सख्त हो जाता था और उनका लचीलापन खत्म हो जाता था, जबकि नयी मशकें काफी लचीली होती थीं और फैलती थीं। इसलिए नयी दाख-मदिरा के खमीरी होने पर जो दबाव पैदा होता था उससे नयी मशकें फटती नहीं थीं।–शब्दावली में “मशक” देखें।

झुककर उसे प्रणाम किया: या “उसे दंडवत किया; उसका आदर किया।” इब्रानी शास्त्र में बताए लोग भी जब भविष्यवक्‍ता, राजा या परमेश्‍वर के दूसरे प्रतिनिधियों से मिलते थे तो वे झुककर उन्हें प्रणाम करते थे। (1शम 25:23, 24; 2शम 14:4-7; 1रा 1:16; 2रा 4:36, 37) ज़ाहिर है कि यह कोढ़ी आदमी समझ गया कि वह परमेश्‍वर के प्रतिनिधि से बात कर रहा है, जिसमें लोगों को ठीक करने की ताकत है। इसलिए जब उसने यहोवा के ठहराए राजा का आदर करने के लिए झुककर प्रणाम किया तो उसने सही किया।​—मत 9:18; यहाँ इस्तेमाल हुए यूनानी शब्द के बारे में ज़्यादा जानने के लिए मत 2:2 का अध्ययन नोट देखें।

एक अधिकारी: मरकुस और लूका के ब्यौरे में बताया गया है कि इस “अधिकारी” (यूनानी में आरखोन) का नाम याइर है और वह सभा-घर में अगुवाई करनेवाला एक अधिकारी है।​—मर 5:22; लूक 8:41.

झुककर उसे प्रणाम किया: या “उसे दंडवत किया; उसका आदर किया।”​—मत 8:2 का अध्ययन नोट देखें।

खून बहने की बीमारी: शायद ऐसी दर्दनाक और गंभीर माहवारी जो 12 सालों से लगातार हो रही थी। मूसा के कानून के मुताबिक एक औरत माहवारी के समय अशुद्ध रहती थी, इसलिए उसे किसी को छूने की इजाज़त नहीं थी।​—लैव 15:19-27.

बेटी: लिखित में यही एक घटना है जहाँ यीशु ने सीधे-सीधे एक औरत को “बेटी” कहा, क्योंकि शायद हालात बहुत नाज़ुक थे और वह ‘काँप रही थी।’ (लूक 8:47) शब्द “बेटी” से उस औरत की उम्र का कोई नाता नहीं है। यीशु ने प्यार से उसे बेटी कहकर अपनी परवाह ज़ाहिर की।

दाविद के वंश से: ये शब्द दिखाते हैं कि यीशु दाविद के खानदान से है और उस राज का वारिस है जिसके बारे में दाविद से करार किया गया था।

राजा दाविद: इस वंशावली में कई राजाओं के नाम दिए हैं, लेकिन “राजा” सिर्फ दाविद को कहा गया है। इसराएल के शाही खानदान को ‘दाविद का घराना’ कहा जाता था। (1रा 12:19, 20) मत्ती ने आयत 1 में कहा कि यीशु “दाविद के वंश से था।” इस तरह उसने राज के विषय पर ज़ोर दिया और समझाया कि यीशु ही उस राज का वारिस है जिसके बारे में दाविद से करार किया गया था।​—2शम 7:11-16.

दाविद के वंशज: यीशु को ‘दाविद का वंशज’ कहकर ये आदमी अपना यकीन ज़ाहिर कर रहे थे कि वही दाविद की राजगद्दी पर बैठेगा यानी वही मसीहा है।​—मत 1:1, 6 के अध्ययन नोट देखें।

सिखाता और . . . प्रचार करता रहा: सिखाने और प्रचार करने में फर्क है। प्रचार करने का मतलब है संदेश सुनाना, जबकि सिखाने में हिदायतें देना, समझाना, दलीलें देकर कायल करना और सबूत देना भी शामिल है।​—मत 3:1; 28:20 के अध्ययन नोट देखें।

खुशखबरी: यहाँ यूनानी शब्द इयूएजीलियोन पहली बार आया है, जिसे बाइबल के कई हिंदी अनुवादों में “सुसमाचार” लिखा गया है। इससे संबंधित यूनानी शब्द इयूएजीलिसतीस का अनुवाद “प्रचारक” किया गया है जिसका मतलब है, “खुशखबरी सुनानेवाला।”​—प्रेष 21:8; इफ 4:11, फु.; 2ती 4:5, फु.

सिखाता . . . प्रचार करता: मत 4:23 का अध्ययन नोट देखें।

खुशखबरी: मत 4:23 का अध्ययन नोट देखें।

तड़प उठा: इन शब्दों के लिए यूनानी क्रिया स्प्लैगख्नी-ज़ोमाइ इस्तेमाल हुई है, जो यूनानी शब्द स्प्लैगख्ना (मतलब “अंतड़ियों”) से संबंधित है। इसका मतलब एक ऐसी भावना है जो दिल की गहराइयों से उठती है। यूनानी में यह शब्द गहरी और कोमल करुणा के लिए इस्तेमाल होता है।

खाल खींच ली गयी: इन शब्दों से मन में ऐसी भेड़ों की तसवीर उभर आती है जिन्हें जंगली जानवरों ने फाड़ डाला हो या कँटीली झाड़ियों और नुकीली चट्टानों में भटकने की वजह से जिनकी खाल छिल गयी हो। इसलिए ये शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल होने लगे जिनका मतलब है, “बुरा सलूक किया जाना, सताया जाना या घायल होना।”

यहाँ-वहाँ भटकने के लिए छोड़ दिया गया: यहाँ ऐसी भेड़ों की बात की गयी है जिन्हें फेंक दिया गया है और इस वजह से वे घायल और बेबस पड़ी हैं। इससे ऐसे लोगों की हालत का पता चलता है जिन्हें दुतकारा गया, नज़रअंदाज़ किया गया और बेसहारा छोड़ दिया गया।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

गलील झील के उत्तरी तट से उत्तर-पश्‍चिम का इलाका
गलील झील के उत्तरी तट से उत्तर-पश्‍चिम का इलाका

1. गन्‍नेसरत का मैदान। यह इलाका तिकोना था और इसकी एक तरफ की लंबाई करीब 5 कि.मी. (3 मील) थी और दूसरी तरफ की 2.5 कि.मी. (1.5 मील)। यह काफी उपजाऊ इलाका था। इसी इलाके में, झील के किनारे चलते-चलते यीशु ने चार मछुवारों यानी पतरस, अन्द्रियास, याकूब और यूहन्‍ना को उसके साथ प्रचार करने के लिए बुलाया।​—मत 4:18-22.

2. यहूदियों की मान्यता है कि यहीं पर यीशु ने पहाड़ी उपदेश दिया था।​—मत 5:1; लूक 6:17, 20.

3. कफरनहूम। यीशु इसी शहर में रहता था और यहीं या इसी के आस-पास वह मत्ती से मिला था।​—मत 4:13; 9:1, 9.

दाख-मदिरा रखने के लिए मशकें
दाख-मदिरा रखने के लिए मशकें

मशक आम तौर पर भेड़-बकरी जैसे पालतू जानवर की खाल से बनायी जाती थी। मरे हुए जानवर का सिर और पैर काट दिए जाते थे। फिर पूरी खाल बड़ी सावधानी से उतारी जाती थी ताकि पेट की तरफ चीरा न लगाना पड़े। खाल को कमाने के बाद उसके खुले हुए हिस्सों को सिल दिया जाता था, सिर्फ गरदन या एक पैर का हिस्सा खुला छोड़ दिया जाता था ताकि वह मशक का मुँह बन सके। मुँह बंद करने के लिए या तो उसमें कुछ लगाया जाता था या उसे डोरी से बाँध दिया जाता था। मशकों में दाख-मदिरा के अलावा, दूध, मक्खन, पनीर, तेल या पानी भी रखा जाता था।

पहली सदी का सभा-घर
पहली सदी का सभा-घर

गलील झील से करीब 10 कि.मी. (6 मील) दूर उत्तर-पूरब में गामला नाम की जगह पर पहली सदी के सभा-घर के खंडहर पाए गए। उसी के आधार पर यह चित्र तैयार किया गया है जिससे पता चलता है कि प्राचीन समय के सभा-घर कैसे दिखते होंगे।