मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 11:1-30

11  जब यीशु अपने 12 चेलों को हिदायतें दे चुका, तो वह वहाँ से दूसरे शहरों में सिखाने और प्रचार करने निकल पड़ा।+  लेकिन जब जेल में यूहन्‍ना+ ने मसीह के कामों की चर्चा सुनी, तो उसने अपने चेलों को उसके पास भेजा+  कि वे उससे पूछें, “वह जो आनेवाला था, क्या तू ही है या हम किसी और की आस लगाएँ?”+  यीशु ने उनसे कहा, “जो कुछ तुम देखते और सुनते हो, जाकर वह सब यूहन्‍ना को बताओ:+  अंधे अब देख रहे हैं,+ लँगड़े चल-फिर रहे हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जा रहे हैं,+ बहरे सुन रहे हैं, मरे हुओं को ज़िंदा किया जा रहा है और गरीबों को खुशखबरी सुनायी जा रही है।+  सुखी है वह जो मेरे बारे में शक नहीं करता।”*+  जब वे वहाँ से चल दिए, तो यीशु भीड़ से यूहन्‍ना के बारे में यह कहने लगा, “तुम वीराने में क्या देखने गए थे?+ हवा से इधर-उधर हिलते किसी नरकट को?+  फिर तुम क्या देखने गए थे? क्या रेशमी मुलायम* कपड़े पहने किसी आदमी को? रेशमी मुलायम कपड़े पहननेवाले तो राजाओं के महलों में होते हैं।  तो आखिर तुम क्यों गए थे? एक भविष्यवक्‍ता को देखने? हाँ। बल्कि मैं तुमसे कहता हूँ, भविष्यवक्‍ता से भी बढ़कर किसी को देखने गए थे।+ 10  यह वही है जिसके बारे में लिखा है, ‘देख! मैं अपना दूत* तेरे आगे-आगे* भेज रहा हूँ, जो तेरे लिए रास्ता तैयार करेगा!’+ 11  मैं तुमसे सच कहता हूँ, अब तक जितने भी इंसान पैदा हुए हैं, उनमें यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले से बड़ा कोई भी नहीं। मगर जो स्वर्ग के राज में सबसे छोटा है, वह यूहन्‍ना से भी बड़ा है।+ 12  यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले के दिनों से अब तक, स्वर्ग का राज वह लक्ष्य है जिसे पाने के लिए लोग ज़ोर लगा रहे हैं और जो पूरी कोशिश कर रहे हैं, वे उसे पा रहे हैं।*+ 13  क्योंकि सारे भविष्यवक्‍ताओं और कानून ने यूहन्‍ना के समय तक भविष्यवाणी की।+ 14  चाहे तुम इस बात को मानो या न मानो, ‘जिस एलियाह का आना तय है,’ वह यही है।+ 15  कान लगाकर सुनो कि मैं क्या कह रहा हूँ।+ 16  मैं इस पीढ़ी की तुलना किससे करूँ?+ यह ऐसी है मानो बाज़ारों में बैठे बच्चे अपने साथ खेलनेवालों को पुकारकर कह रहे हों, 17  ‘हमने तुम्हारे लिए बाँसुरी बजायी मगर तुम नहीं नाचे। हम रोए मगर तुमने दुख के मारे छाती नहीं पीटी।’ 18  वैसे ही यूहन्‍ना औरों की तरह खाता-पीता नहीं आया+ फिर भी लोग कहते हैं, ‘उसमें दुष्ट स्वर्गदूत समाया है,’ 19  जबकि इंसान का बेटा औरों की तरह खाता-पीता आया,+ फिर भी लोग कहते हैं, ‘देखो! यह आदमी पेटू और पियक्कड़ है और कर-वसूलनेवालों और पापियों का दोस्त है।’+ लेकिन बुद्धि अपने कामों* से सही साबित होती है।”*+ 20  फिर वह उन शहरों को धिक्कारने लगा, जहाँ उसने ज़्यादातर शक्‍तिशाली काम किए थे, क्योंकि उन्होंने पश्‍चाताप नहीं किया:+ 21  “हे खुराजीन, धिक्कार है तुझ पर! हे बैतसैदा, धिक्कार है तुझ पर! क्योंकि जो शक्‍तिशाली काम तुममें हुए थे, अगर वे सोर और सीदोन में हुए होते, तो वहाँ के लोगों ने टाट ओढ़कर और राख में बैठकर कब का पश्‍चाताप कर लिया होता।+ 22  इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि न्याय के दिन सोर और सीदोन का हाल,+ तुम्हारे हाल से ज़्यादा सहने लायक होगा।+ 23  और कफरनहूम+ तू, तू क्या सोचता है कि तुझे आकाश तक ऊँचा किया जाएगा? तू तो नीचे कब्र में जाएगा+ क्योंकि जो शक्‍तिशाली काम तुझमें किए गए थे, अगर वे सदोम में हुए होते तो वह आज तक बना रहता। 24  मैं तुझसे कहता हूँ कि न्याय के दिन सदोम का हाल, तेरे हाल से ज़्यादा सहने लायक होगा।”+ 25  उस वक्‍त यीशु ने कहा, “हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के मालिक, मैं सबके सामने तेरी बड़ाई करता हूँ कि तूने ये बातें बुद्धिमानों और ज्ञानियों से तो छिपाए रखीं, मगर नन्हे-मुन्‍नों पर प्रकट की हैं।+ 26  क्योंकि हे पिता, तुझे यही तरीका मंज़ूर है। 27  मेरे पिता ने सबकुछ मेरे हाथ में सौंपा है।+ और कोई बेटे को पूरी तरह नहीं जानता सिवा पिता के,+ न ही कोई पिता को पूरी तरह जानता है सिवा बेटे के और उसके, जिस पर बेटा उसे प्रकट करना चाहे।+ 28  हे कड़ी मज़दूरी करनेवालो* और बोझ से दबे लोगो, तुम सब मेरे पास आओ, मैं तुम्हें तरो-ताज़ा करूँगा। 29  मेरा जुआ उठाओ और मुझसे सीखो* क्योंकि मैं कोमल स्वभाव का+ और दिल से दीन हूँ+ और तुम ताज़गी पाओगे। 30  इसलिए कि मेरा जुआ उठाना आसान है* और मेरा बोझ हलका है।”

कई फुटनोट

या “मेरी वजह से ठोकर नहीं खाता।”
या “बढ़िया; शानदार।”
शा., “तेरे चेहरे के सामने।”
या “स्वर्गदूत।”
या “उसे कब्ज़े में कर रहे हैं।”
या “बुद्धि की जीत होती है।”
या “नतीजों।”
या “कड़ा संघर्ष करनेवालो।” या शायद, “थके-हारो; थके-माँदो।”
या “मेरे चेले (या सीखनेवाले) बनो।”
या “जुआ सुखदायक है।”

अध्ययन नोट

सिखाता और . . . प्रचार करता रहा: सिखाने और प्रचार करने में फर्क है। प्रचार करने का मतलब है संदेश सुनाना, जबकि सिखाने में हिदायतें देना, समझाना, दलीलें देकर कायल करना और सबूत देना भी शामिल है।​—मत 3:1; 28:20 के अध्ययन नोट देखें।

दूसरे शहरों: ज़ाहिर है कि यहाँ उस प्रदेश (यानी गलील) के यहूदी शहरों की बात की गयी है।

सिखाने और प्रचार करने: मत 4:23 का अध्ययन नोट देखें।

मसीह: यूनानी में यहाँ उपाधि “मसीह” से पहले निश्‍चित उपपद लिखा है। ज़ाहिर है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि यीशु के ओहदे पर ज़ोर दिया जा सके कि वही मसीहा है।

मसीह: यूनानी में यहाँ उपाधि “मसीह” (मतलब, “अभिषिक्‍त जन”) से पहले निश्‍चित उपपद लिखा है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि यह ज़ाहिर हो कि यीशु ही वादा किया गया मसीहा है, जिसे खास काम के लिए अभिषिक्‍त किया गया है।​—मत 1:1; 2:4 के अध्ययन नोट देखें।

मसीह: मसीह और मसीहा, दोनों एक-जैसी उपाधियाँ हैं। इनके यूनानी शब्द ख्रिस्तौस और इब्रानी शब्द मशीआक का मतलब है, “अभिषिक्‍त जन।” बाइबल के ज़माने में राजाओं का अभिषेक तेल से किया जाता था।

जो आनेवाला था: यानी मसीहा।​—भज 118:26; मत 3:11; 21:9; 23:39.

एक कोढ़ी: एक गंभीर चर्मरोग से पीड़ित व्यक्‍ति। बाइबल में जिस कोढ़ का ज़िक्र मिलता है वह आज के कोढ़ जैसा नहीं था। जब किसी को कोढ़ हो जाता था तो उसे समाज से निकाल दिया जाता था। ठीक होने के बाद ही वह वापस आ सकता था।​—लैव 13:2, फु., 45, 46; शब्दावली में “कोढ़; कोढ़ी” देखें।

कोढ़ी: मत 8:2 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “कोढ़; कोढ़ी” देखें।

देख!: इसका यूनानी शब्द आइडू है और इसका इस्तेमाल अकसर आगे की बात पर ध्यान खींचने के लिए किया गया है ताकि पढ़नेवाला बतायी जा रही घटना की कल्पना कर सके या उसकी बारीकी पर ध्यान दे सके। यह शब्द किसी बात पर ज़ोर देने के लिए या कोई नयी या हैरानी की बात बताने से पहले भी इस्तेमाल किया गया है। मसीही यूनानी शास्त्र में यह शब्द सबसे ज़्यादा बार मत्ती, लूका और प्रकाशितवाक्य की किताबों में आया है। इसी से मिलता-जुलता शब्द इब्रानी शास्त्र में भी अकसर इस्तेमाल हुआ है।

देख!: मत 1:23 का अध्ययन नोट देखें।

सच: मत 5:18 का अध्ययन नोट देखें।

बपतिस्मा देनेवाले: या “डुबकी लगवानेवाले।”​—मत 3:1 का अध्ययन नोट देखें।

बपतिस्मा देनेवाला: या “डुबकी लगवानेवाला।” ज़ाहिर है कि यह यूहन्‍ना का एक उपनाम बन गया था, जिससे पता चलता है कि वह ही पानी में डुबकी लगवाकर बपतिस्मा देता था। यहूदी इतिहासकार फ्लेवियस जोसीफस ने लिखा: “यूहन्‍ना जिसका उपनाम था बपतिस्मा देनेवाला।”

सच: यूनानी शब्द आमीन, इब्रानी शब्द आमेन से लिया गया है जिसका मतलब है, “ऐसा ही हो” या “ज़रूर।” यीशु अकसर कोई बात, वादा या भविष्यवाणी करने से पहले इस शब्द का इस्तेमाल करता था ताकि वह जो कह रहा है उस पर लोगों को भरोसा हो। यीशु ने जिस तरह “सच” यानी आमीन शब्द का इस्तेमाल किया, वैसा दूसरी धार्मिक किताबों में नहीं हुआ है। जहाँ यह शब्द साथ-साथ आया है (आमीन-आमीन), वहाँ उस शब्द का अनुवाद “सच-सच” किया गया है, जैसे हम यूहन्‍ना की खुशखबरी की किताब में कई बार देख सकते हैं।​—यूह 1:51.

लक्ष्य . . . जिसे पाने के लिए लोग ज़ोर लगा रहे हैं . . . पूरी कोशिश कर रहे हैं: यहाँ दो यूनानी शब्द इस्तेमाल हुए हैं जो एक-दूसरे से जुड़े हैं। इनका बुनियादी मतलब है, जी-जान लगाकर काम करना या अपना भरसक करना। बाइबल के कुछ अनुवादकों ने इन शब्दों को अलग तरीके से समझा है (यानी लोग हिंसा कर रहे हैं या हिंसा झेल रहे हैं)। मगर इस आयत के संदर्भ से और लूक 16:16 (यह सिर्फ ऐसी दूसरी आयत है जहाँ यही यूनानी क्रिया इस्तेमाल हुई है) से पता चलता है कि इन शब्दों का मतलब है, “जोश के साथ किसी चीज़ के पीछे जाना; उत्साह से कुछ पाने की कोशिश करना।” ज़ाहिर है कि इन शब्दों से पता चलता है कि जिन लोगों ने यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले का संदेश सुना, उन्होंने बदलाव करने के लिए जी-जान से मेहनत की या अपना भरसक किया। इसलिए उन्हें राज के वारिस बनने की आशा मिली।

भविष्यवक्‍ताओं और कानून: आम तौर पर इन दोनों में से “कानून” पहले लिखा जाता है (मत 5:17; 7:12; 22:40; लूक 16:16), लेकिन सिर्फ इस आयत में “भविष्यवक्‍ताओं” पहले लिखा गया है। चाहे किसी को भी पहले लिखा गया हो, मतलब लगभग एक है। (मत 5:17 का अध्ययन नोट देखें।) मगर ऐसा लगता है कि यहाँ भविष्यवाणी के पहलू पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है। इसके अलावा, यह आयत कहती है कि कानून ने भविष्यवाणी की, जो दिखाता है कि इसमें लिखी बातें दरअसल भविष्यवाणियाँ हैं।

कानून . . . भविष्यवक्‍ताओं: “कानून” का मतलब है, बाइबल में उत्पत्ति से लेकर व्यवस्थाविवरण तक की किताबें। “भविष्यवक्‍ताओं” का मतलब है, इब्रानी शास्त्र में भविष्यवक्‍ताओं की लिखी किताबें। लेकिन जब इन दोनों का ज़िक्र साथ में आता है तो इसका मतलब पूरा इब्रानी शास्त्र हो सकता है।​—मत 7:12; 22:40; लूक 16:16.

एलियाह: एक इब्रानी नाम जिसका मतलब है, “मेरा परमेश्‍वर यहोवा है।”

दुख के मारे छाती . . . पीटी: एक इंसान जब बार-बार अपनी छाती पीटता है तो इससे ज़ाहिर होता है कि उसका गम बरदाश्‍त से बाहर है, या वह बहुत दोषी महसूस कर रहा है, या बहुत पछता रहा है।​—यश 32:12; नहू 2:7; लूक 23:48.

खाता-पीता नहीं आया: ज़ाहिर है कि यहाँ यूहन्‍ना की ज़िंदगी की बात की गयी है कि वह कैसे खुद को कई चीज़ों से दूर रखता था। वह उपवास करता था और शराब नहीं पीता था, जैसे नाज़ीरों से माँग की जाती थी।​—गि 6:2-4; मत 9:14, 15; लूक 1:15; 7:33.

इंसान का बेटा: मत 8:20 का अध्ययन नोट देखें।

कर-वसूलनेवालों: मत 5:46 का अध्ययन नोट देखें।

कर-वसूलनेवाले: कई यहूदी, रोमी अधिकारियों के लिए कर वसूलते थे। इन यहूदियों से नफरत की जाती थी क्योंकि वे ऐसी विदेशी सरकार का साथ दे रहे थे जिसे लोग पसंद नहीं करते थे। इसके अलावा, ये यहूदी कर के लिए तय की गयी रकम से ज़्यादा वसूल करते थे। यहूदी लोग कर-वसूलनेवालों को पापी और वेश्‍याओं के जैसा तुच्छ मानते थे और उनसे दूर ही रहते थे।​—मत 11:19; 21:32.

इंसान के बेटे: ये शब्द खुशखबरी की किताबों में करीब 80 बार आते हैं। यीशु ने ये शब्द खुद के लिए इस्तेमाल किए। ज़ाहिर है उसने ऐसा इसलिए किया ताकि साबित हो सके कि वह वाकई एक इंसान है और औरत से जन्मा है और आदम के बराबर है। इसलिए उसके पास इंसानों को पाप और मौत से छुड़ाने का अधिकार है। (रोम 5:12, 14, 15) इन शब्दों से यह भी पता चलता है कि यीशु ही मसीहा या मसीह है।​—दान 7:13, 14; शब्दावली में “इंसान का बेटा” देखें।

कफरनहूम: यह एक इब्रानी नाम से निकला है जिसका मतलब है, “नहूम का गाँव” या “दिलासे का गाँव।” (नहू 1:1, फु.) धरती पर यीशु की प्रचार सेवा से इस शहर का खास संबंध रहा। यह गलील झील के उत्तर-पश्‍चिमी तट पर था और मत 9:1 में इसे उसका ‘अपना शहर’ कहा गया।

कफरनहूम: मत 4:13 का अध्ययन नोट देखें।

आकाश: एक रूपक अलंकार जिसका मतलब है, बहुत ऊँचा दर्जा।

कब्र: या “हेडीज़” यानी एक लाक्षणिक जगह, जहाँ ज़्यादातर इंसान मौत की नींद सो जाते हैं। (शब्दावली देखें।) मगर यहाँ “कब्र” का मतलब है कि कफरनहूम को ऊँचे दर्जे से नीचे गिरा दिया जाएगा।

तेरे: ज़ाहिर है कि यहाँ शहर की बात की गयी है।

नन्हे-मुन्‍नों पर: या “बच्चों जैसा स्वभाव रखनेवाले लोगों पर,” यानी जो नम्र थे और सीखने के लिए तैयार थे।

बोझ से दबे: यीशु ने जिन लोगों को अपने पास आने का बुलावा दिया वे जीवन की चिंताओं और काम के “बोझ से दबे” हुए थे। यहोवा की उपासना भी उनके लिए बोझ बन गयी थी क्योंकि मूसा के कानून में इंसानों की बनायी परंपराएँ जोड़ दी गयी थीं। (मत 23:4) यहाँ तक कि सब्त का दिन मनाना भी एक बोझ बन गया था, जबकि उन्हें इससे ताज़गी मिलनी चाहिए थी।​—निर्ग 23:12; मर 2:23-28; लूक 6:1-11.

मैं तुम्हें तरो-ताज़ा करूँगा: “तरो-ताज़ा” के यूनानी शब्द का मतलब हो सकता है, आराम (मत 26:45; मर 6:31) या राहत जिससे शरीर को फिर से ताकत मिलती है (2कुर 7:13; फिले 7)। संदर्भ से पता चलता है कि यीशु का “जुआ” उठाने (मत 11:29) में काम करना शामिल है, न कि आराम करना। इसलिए यहाँ यीशु कह रहा था कि वह थके-हारे लोगों में दोबारा ताज़गी और दम भर देगा ताकि वे खुशी-खुशी उसका जुआ उठा सकें, जो हलका और आसान है।

कोमल स्वभाव: ऐसा स्वभाव उन लोगों का होता है जो परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करने और उसके मार्गदर्शन पर चलने के लिए तैयार रहते हैं और दूसरों पर धौंस जमाने की कोशिश नहीं करते। इसका मतलब यह नहीं कि वे बुज़दिल या कमज़ोर हैं। सेप्टुआजेंट में ये शब्द उस इब्रानी शब्द के लिए इस्तेमाल हुए हैं जिसका अनुवाद “दीन” या “नम्र” किया गया है। यह शब्द मूसा (गि 12:3) और मसीहा के लिए (जक 9:9; मत 21:5), साथ ही उन लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो सीखने के लिए तैयार रहते हैं (भज 25:9) और जो धरती के वारिस होंगे (भज 37:11)। यीशु ने खुद के बारे में कहा कि वह कोमल स्वभाव का या दीन है।​—मत 11:29.

मेरा जुआ उठाओ: यीशु ने यहाँ शब्द “जुआ” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल किया जिसे उठाने का मतलब है, अधिकार मानना और निर्देश का पालन करना। अगर यीशु के मन में दो जानवरों पर रखनेवाला जुआ था तो वह मानो कह रहा था कि यहोवा ने उस पर जो जुआ रखा है, उसमें उसके चेले उसके साथ जुत जाएँ और वह उनकी मदद करेगा। तो फिर, “मेरा जुआ उठाओ” का अनुवाद इस तरह किया जा सकता है: “मेरे साथ मेरे जुए में जुत जाओ।” लेकिन अगर उसके मन में एक जानवर पर रखा जानेवाला जुआ था तो वह मानो कह रहा था कि उसने चेलों पर जो जुआ रखा है उन्हें उसके अधीन रहना है, यानी उन्हें उसका अधिकार मानना चाहिए और उसके निर्देशों का पालन करना चाहिए।​—शब्दावली में “जुआ” देखें।

कोमल स्वभाव: मत 5:5 का अध्ययन नोट देखें।

दिल से दीन: “दीन” के यूनानी शब्द का मतलब है, नम्र और सीधा-सादा। यह शब्द याकू 4:6 और 1पत 5:5 में भी आया है, जहाँ इसका अनुवाद “नम्र लोगों” किया गया है। परमेश्‍वर और लोगों से पेश आते वक्‍त एक व्यक्‍ति जैसा स्वभाव या रवैया दिखाता है, उससे पता चलता है कि उसका लाक्षणिक दिल कैसा है, वह दीन है या नहीं।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

महल
महल

जब यीशु ने उन लोगों की बात की जो “महलों” में (लूक 7:25) या “राजाओं के महलों” में (मत 11:8) रहते हैं, तो सुननेवालों को उन आलीशान महलों की याद आयी होगी जो हेरोदेस महान ने बनवाए थे। यहाँ तसवीर में शीत महल के एक हिस्से के खंडहर दिखाए गए हैं, जो उसने यरीहो में बनवाया था। इस महल में 95 फुट (29 मी.) लंबा और 62 फुट (19 मी.) चौड़ा खंभोंवाला एक स्वागत कक्ष था, खंभोंवाले आँगन थे जिनके चारों तरफ बहुत-से कमरे थे और एक स्नानघर था जिसमें पानी को ठंडा और गरम करने की व्यवस्था थी। वहाँ एक सीढ़ीनुमा बगीचा था जो महल से लगा हुआ था। जब यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने प्रचार करना शुरू किया था, तो उसके कई सालों पहले एक विद्रोह हुआ था, जिसमें शायद यह महल जला दिया गया था। इसे हेरोदेस के बेटे अरखिलाउस ने फिर से बनवाया था।

हड्डी से बनी बाँसुरी
हड्डी से बनी बाँसुरी

बाइबल के ज़माने में बाँसुरी नरकट या वच पौधे, यहाँ तक कि हड्डी या हाथी-दाँत की भी बनायी जाती थी। बाँसुरी सबसे पसंदीदा साज़ था। इसे दावतों और शादियों जैसे खुशी के मौकों पर बजाने का दस्तूर था। (1रा 1:40; यश 5:12; 30:29) इस दस्तूर की नकल करते हुए बच्चे सार्वजनिक जगहों पर बाँसुरी बजाते थे। मातम के समय भी बाँसुरी बजायी जाती थी। जब किराए पर बुलाए गए मातम मनानेवाले रोते थे तो बाँसुरी बजानेवाले दर्द-भरी धुनें बजाते थे। यहाँ तसवीर में जो बाँसुरी दिखायी गयी है वह यरूशलेम के मलबे में पायी गयी थी। बताया जाता है कि यह बाँसुरी उस समय की है जब रोमी लोगों ने मंदिर का नाश किया था। यह करीब 15 सें.मी. (6 इंच) लंबी है और मुमकिन है कि यह गाय के अगले पैर की हड्डी से बनायी गयी थी।

बाज़ार
बाज़ार

कुछ बाज़ार सड़क पर लगते थे, जैसे यहाँ चित्र में दिखाया गया है। दुकानदार इतना सामान लगा देते थे कि रास्ता जाम हो जाता था। आस-पास के लोग बाज़ार से घरेलू सामान, मिट्टी के बरतन, काँच की महँगी चीज़ें और ताज़ी साग-सब्ज़ियाँ भी खरीदते थे। उस ज़माने में फ्रिज नहीं होते थे, इसलिए लोगों को खाने-पीने की चीज़ें खरीदने हर दिन बाज़ार जाना होता था। बाज़ार में लोगों को व्यापारियों या दूसरी जगहों से आए लोगों से खबरें भी मिल जाती थीं, यहाँ बच्चे खेलते थे और बेरोज़गार लोग इंतज़ार करते थे कि कोई उन्हें काम दे। बाज़ार में यीशु ने बीमारों को ठीक किया और पौलुस ने लोगों को प्रचार किया। (प्रेष 17:17) लेकिन घमंडी शास्त्रियों और फरीसियों को ऐसी सार्वजनिक जगहों पर लोगों की नज़रों में छाना और उनसे नमस्कार सुनना अच्छा लगता था।

कफरनहूम, खुराजीन और बैतसैदा
कफरनहूम, खुराजीन और बैतसैदा

इस वीडियो में जो दृश्‍य दिखाया गया है वह ओफिर लुकआउट से लिया गया है जो गलील झील के उत्तर-पूर्वी किनारे पर है। जिस जगह को प्राचीन समय का कफरनहूम (1) माना जाता है, उससे करीब 3 कि.मी. (2 मील) दूरी पर ही खुराजीन (2) था। कफरनहूम में ही शायद यीशु उस वक्‍त रहता था जब उसने करीब दो साल गलील में बड़े पैमाने पर प्रचार किया था। प्रेषित पतरस और अन्द्रियास भी यहीं रहते थे। कर-वसूलनेवाले मत्ती का दफ्तर इसी शहर में या इसके आस-पास था। (मर 1:21, 29; 2:1, 13, 14; 3:16; लूक 4:31, 38) पतरस, अन्द्रियास और फिलिप्पुस पास के शहर बैतसैदा (3) के रहनेवाले थे। (यूह 1:44) यीशु ने बहुत-से चमत्कार इन तीन शहरों में या इनके आस-पास किए थे।​—अतिरिक्‍त लेख क7-घ, नक्शा 3ख और क7-च, नक्शा 4 देखें।

खुराजीन और बैतसैदा
खुराजीन और बैतसैदा

खुराजीन और बैतसैदा नगर कफरनहूम के पास थे। (कफरनहूम वह शहर था जहाँ यीशु शायद उस वक्‍त रहता था जब उसने करीब दो साल गलील में बड़े पैमाने पर प्रचार किया था।) इन नगरों में रहनेवाले यहूदियों ने यीशु को ऐसे शक्‍तिशाली काम करते हुए देखा, जो अगर सोर और सीदोन में किए जाते तो वहाँ के मूर्तिपूजा करनेवाले लोग पश्‍चाताप करते। इनमें से कुछ काम थे: बैतसैदा के इलाके में यीशु ने चमत्कार करके 5,000 से ज़्यादा लोगों को खाना खिलाया और बाद में एक अंधे आदमी को ठीक किया।​—मत 14:13-21; मर 8:22; लूक 9:10-17.

जुआ
जुआ

आम तौर पर जुआ लकड़ी का होता था और दो तरह का होता था, एक इंसान के लिए और दूसरा जानवरों के लिए। इंसान के लिए जुआ या तो एक छड़ होता था या उसे ऐसा आकार दिया जाता कि उसे कंधों पर रखा जा सके और दो सिरों से भार लटकाया जा सके। दूसरा जुआ भी एक छड़ होता था या उसे ऐसा आकार दिया जाता था कि वह दो जानवरों की गरदन पर रखा जाए ताकि वे भार खींच सकें।