मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 16:1-28

16  यहाँ फरीसी और सदूकी यीशु के पास आए और उसकी परीक्षा लेने के लिए कहने लगे कि वह उन्हें स्वर्ग से एक चिन्ह दिखाए।+  यीशु ने उनसे कहा, “जब शाम होती है तो तुम कहते हो, ‘मौसम साफ रहेगा क्योंकि आसमान का रंग चटक लाल है।’+  फिर सुबह के वक्‍त कहते हो, ‘आज मौसम सर्द और बरसाती होगा क्योंकि आसमान का रंग लाल तो है, मगर बादल छाए हैं।’ तुम आसमान को देखकर उसका मतलब समझाना तो जानते हो, मगर समय की निशानियाँ देखकर उनका मतलब समझाना नहीं जानते।  यह दुष्ट और विश्‍वासघाती पीढ़ी हमेशा कोई चिन्ह* देखने की ताक में लगी रहती है। मगर इसे योना के चिन्ह को छोड़ और कोई चिन्ह नहीं दिया जाएगा।”+ यह कहने के बाद वह उन्हें छोड़कर आगे चला गया।  चेले उस पार जाते समय अपने साथ रोटियाँ लेना भूल गए थे।+  यीशु ने उनसे कहा, “अपनी आँखें खुली रखो और फरीसियों और सदूकियों के खमीर से चौकन्‍ने रहो।”+  तब वे एक-दूसरे से कहने लगे, “हम अपने साथ रोटियाँ नहीं लाए।”  यह जानकर यीशु ने कहा, “अरे कम विश्‍वास रखनेवालो, तुम क्यों आपस में चर्चा कर रहे हो कि तुम्हारे पास रोटियाँ नहीं हैं?  क्या तुम अब तक नहीं समझे? क्या तुम्हें याद नहीं कि कैसे पाँच रोटियों से 5,000 लोगों ने खाया था और तुमने भरी हुई कितनी टोकरियाँ उठायी थीं?+ 10  क्या तुम्हें याद नहीं कि कैसे सात रोटियों से 4,000 लोगों ने खाया था और तुमने भरे हुए कितने टोकरे उठाए थे?+ 11  तो फिर, तुम यह क्यों नहीं समझ पाए कि मैंने तुमसे रोटियों के बारे में नहीं कहा बल्कि यह कहा कि तुम फरीसियों और सदूकियों के खमीर से चौकन्‍ने रहो?”+ 12  तब उन्हें समझ आया कि वह फरीसियों और सदूकियों की शिक्षाओं से चौकन्‍ने रहने के लिए कह रहा है, न कि रोटियों के खमीर की बात कर रहा है। 13  जब यीशु कैसरिया फिलिप्पी के इलाके में आया, तो उसने अपने चेलों से पूछा, “लोग क्या कहते हैं, इंसान का बेटा कौन है?”+ 14  उन्होंने कहा, “कुछ कहते हैं, यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला,+ दूसरे कहते हैं एलियाह+ और कुछ कहते हैं यिर्मयाह या कोई और भविष्यवक्‍ता।” 15  यीशु ने उनसे पूछा, “लेकिन तुम क्या कहते हो, मैं कौन हूँ?” 16  शमौन पतरस ने जवाब दिया, “तू मसीह है,+ जीवित परमेश्‍वर का बेटा।”+ 17  यीशु ने उससे कहा, “हे शमौन, योना के बेटे, सुखी है तू क्योंकि तू यह बात हाड़-माँस के इंसान की मदद से नहीं, बल्कि स्वर्ग में रहनेवाले मेरे पिता की मदद से समझ पाया है।+ 18  मैं तुझसे यह कहता हूँ, तू पतरस है।+ और इस चट्टान+ पर मैं अपनी मंडली खड़ी करूँगा और कब्र के दरवाज़े उस पर हावी न हो सकेंगे।+ 19  मैं तुझे स्वर्ग के राज की चाबियाँ दूँगा और जो कुछ तू धरती पर बाँधेगा, वह पहले ही स्वर्ग में बँधा होगा और जो कुछ तू धरती पर खोलेगा, वह पहले ही स्वर्ग में खुला होगा।”+ 20  इसके बाद उसने चेलों को सख्ती से कहा कि वे किसी को न बताएँ कि वह मसीह है।+ 21  उस वक्‍त से यीशु अपने चेलों को बताने लगा कि उसे यरूशलेम जाना होगा और वहाँ मुखियाओं, प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हाथ कई दुख सहने होंगे, उसे मार डाला जाएगा और फिर तीसरे दिन ज़िंदा कर दिया जाएगा।+ 22  तब पतरस उसे अलग ले गया और झिड़कने लगा, “प्रभु खुद पर दया कर, तेरे साथ ऐसा कभी नहीं होगा।”+ 23  मगर उसने पतरस से मुँह फेर लिया और* कहा, “अरे शैतान, मेरे सामने से दूर हो जा!* तू मेरे लिए ठोकर की वजह है क्योंकि तेरी सोच परमेश्‍वर जैसी नहीं, बल्कि इंसानों जैसी है।”+ 24  इसके बाद, यीशु ने अपने चेलों से कहा, “अगर कोई मेरे पीछे आना चाहता है, तो वह खुद से इनकार करे और अपना यातना का काठ उठाए और मेरे पीछे चलता रहे।+ 25  क्योंकि जो कोई अपनी जान बचाना चाहता है वह उसे खोएगा, मगर जो कोई मेरी खातिर अपनी जान गँवाता है वह उसे पाएगा।+ 26  वाकई, अगर एक इंसान सारी दुनिया हासिल कर ले मगर अपनी जान गँवा बैठे, तो उसे क्या फायदा?+ या एक इंसान अपनी जान के बदले क्या देगा?+ 27  क्योंकि यह तय है कि इंसान का बेटा अपने पिता से महिमा पाकर अपने स्वर्गदूतों के साथ आएगा।+ तब वह हरेक को उसके चालचलन के मुताबिक बदला* देगा।+ 28  मैं तुमसे सच कहता हूँ कि यहाँ जो खड़े हैं, उनमें से कुछ ऐसे हैं जो तब तक मौत का मुँह नहीं देखेंगे, जब तक कि वे इंसान के बेटे को उसके राज में आता हुआ न देख लें।”+

कई फुटनोट

या “हमेशा सबूत के तौर पर चमत्कार।”
या “वह मुड़ा और पतरस से।”
शा., “मेरे पीछे जा।”
या “फल; इनाम।”

अध्ययन नोट

उनसे कहा: कुछ प्राचीन और अहम हस्तलिपियों में से आयत 2 का आगे का भाग और आयत 3 को निकाल दिया गया है। हालाँकि पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि इनमें लिखी बातें सही हैं या नहीं, मगर कई विशेषज्ञों के मुताबिक इन्हें शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि बहुत-सी प्राचीन और बाद की हस्तलिपियों में ये आयतें पायी जाती हैं।

विश्‍वासघाती: शा., “व्यभिचारी।” बाइबल में कई बार शब्द “व्यभिचार” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है। जब लोग परमेश्‍वर के साथ करार करते हैं और फिर उससे विश्‍वासघात करते हैं तो इसे व्यभिचार कहा जाता है। जब पैदाइशी इसराएलियों ने झूठी उपासना की तो उन्होंने कानून का करार तोड़ दिया और इस तरह लाक्षणिक तौर पर व्यभिचार किया। (यिर्म 3:8, 9; 5:7, 8; 9:2; 13:27; 23:10; हो 7:4) ऐसे ही कामों की वजह से यीशु ने अपने दिनों के यहूदियों को विश्‍वासघाती या व्यभिचारी पीढ़ी कहा। (मत 12:39; 16:4) जिन मसीहियों के साथ नया करार किया गया है वे अगर मौजूदा व्यवस्था से खुद को दूषित करें, तो वे भी लाक्षणिक तौर पर व्यभिचार करने के दोषी होंगे। यही सिद्धांत उन सब पर लागू होता है जिन्होंने अपना जीवन यहोवा को समर्पित किया है।​—याकू 4:4.

योना . . . के चिन्ह: योना को जब बड़ी मछली के पेट से करीब तीन दिन बाद बचाया गया तो उसने कहा कि यह ऐसा था मानो उसे कब्र से निकाला गया हो। (यो 1:17–2:2) योना का बचाया जाना जितना सच था उतना ही सच यह था कि यीशु को तीसरे दिन कब्र से ज़िंदा किया जाता। फिर भी जब उसे ज़िंदा किया गया तो उसमें नुक्स निकालनेवाले पत्थरदिल लोगों ने उस पर विश्‍वास नहीं किया।

विश्‍वासघाती: शा., “व्यभिचारी,” यानी परमेश्‍वर से विश्‍वासघात करनेवाली पीढ़ी।​—मर 8:38 का अध्ययन नोट देखें।

योना के चिन्ह: मत 12:39 का अध्ययन नोट देखें।

उस पार: यानी गलील झील के दूसरी तरफ। ज़ाहिर है कि झील के उत्तर-पूर्वी किनारे पर बसे बैतसैदा की बात की गयी है।

खमीर: यानी पुराने आटे की बची हुई लोई। इसे नए आटे में मिला दिया जाता था ताकि वह फूल सके। यीशु यहाँ रोटी बनाने की आम प्रक्रिया की बात कर रहा था। हालाँकि बाइबल में अकसर खमीर को पाप और भ्रष्टता की निशानी बताया गया है (मत 16:6 का अध्ययन नोट देखें), लेकिन हमेशा इसका यही मतलब नहीं होता (लैव 7:11-15)। ज़ाहिर है कि इस आयत में आटे का खमीरा होना किसी अच्छी चीज़ के फैलने या बढ़ने को दर्शाता है।

खमीर: इसे बाइबल में अकसर पाप और भ्रष्टता की निशानी बताया गया है। यहाँ इसका मतलब है गलत शिक्षाएँ।​—मत 16:12; 1कुर 5:6-8; मत 13:33 के अध्ययन नोट से तुलना करें।

टोकरे: या “बड़े टोकरे।”​—मत 15:37; 16:9 के अध्ययन नोट देखें।

टोकरियाँ: ये शायद खपच्चियों से बनी होती थीं और इनमें डोरी लगी होती थी ताकि लोग इन्हें लटकाकर सफर में ले जा सकें। माना जाता है कि इनका आयतन करीब 7.5 ली. था।​—मत 16:9, 10 के अध्ययन नोट देखें।

बड़े टोकरे: यहाँ यूनानी शब्द स्फिरिस इस्तेमाल हुआ है। यह शायद दिखाता है कि ये टोकरे उन टोकरियों से बड़े थे, जिनका इस्तेमाल उस वक्‍त किया गया जब यीशु ने करीब 5,000 लोगों को खाना खिलाया था। (मत 14:20 का अध्ययन नोट देखें।) दमिश्‍क में जब पौलुस को एक “बड़े टोकरे” में बिठाकर शहरपनाह में बनी एक खिड़की से नीचे उतारा गया, तो उस ब्यौरे में यही यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है।​—प्रेष 9:25.

टोकरियाँ: यीशु ने चमत्कार करके दो मौकों पर जब भीड़ को खाना खिलाया तो एक बार बचा हुआ खाना टोकरियों में इकट्ठा किया गया और दूसरी बार बड़े टोकरों में। इन ब्यौरों का ज़िक्र करते समय मत्ती और मरकुस ने हर बार यह फर्क साफ-साफ बताया। (मत 14:20; 15:37; 16:10 के अध्ययन नोट और मर 6:43; 8:8, 19, 20 में यही ब्यौरे देखें।) करीब 5,000 लोगों को खाना खिलानेवाले ब्यौरे में यूनानी शब्द कोफिनोस (“टोकरियों”) इस्तेमाल हुआ और करीब 4,000 लोगों को खाना खिलानेवाले ब्यौरे में यूनानी शब्द स्फिरिस (“बड़े टोकरे”) इस्तेमाल हुआ। इससे पता चलता है कि इन चमत्कारों के दौरान या तो लेखक खुद मौजूद थे या भरोसेमंद चश्‍मदीद गवाहों ने उन्हें यह जानकारी दी।

बड़े टोकरे: यहाँ यूनानी शब्द स्फिरिस इस्तेमाल हुआ है। यह शायद दिखाता है कि ये टोकरे उन टोकरियों से बड़े थे, जिनका इस्तेमाल उस वक्‍त किया गया जब यीशु ने करीब 5,000 लोगों को खाना खिलाया था। (मत 14:20 का अध्ययन नोट देखें।) दमिश्‍क में जब पौलुस को एक “बड़े टोकरे” में बिठाकर शहरपनाह में बनी एक खिड़की से नीचे उतारा गया, तो उस ब्यौरे में यही यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है।​—प्रेष 9:25.

टोकरियाँ: यीशु ने चमत्कार करके दो मौकों पर जब भीड़ को खाना खिलाया तो एक बार बचा हुआ खाना टोकरियों में इकट्ठा किया गया और दूसरी बार बड़े टोकरों में। इन ब्यौरों का ज़िक्र करते समय मत्ती और मरकुस ने हर बार यह फर्क साफ-साफ बताया। (मत 14:20; 15:37; 16:10 के अध्ययन नोट और मर 6:43; 8:8, 19, 20 में यही ब्यौरे देखें।) करीब 5,000 लोगों को खाना खिलानेवाले ब्यौरे में यूनानी शब्द कोफिनोस (“टोकरियों”) इस्तेमाल हुआ और करीब 4,000 लोगों को खाना खिलानेवाले ब्यौरे में यूनानी शब्द स्फिरिस (“बड़े टोकरे”) इस्तेमाल हुआ। इससे पता चलता है कि इन चमत्कारों के दौरान या तो लेखक खुद मौजूद थे या भरोसेमंद चश्‍मदीद गवाहों ने उन्हें यह जानकारी दी।

टोकरे: या “बड़े टोकरे।”​—मत 15:37; 16:9 के अध्ययन नोट देखें।

कैसरिया फिलिप्पी: यह नगर उस जगह बसा है जहाँ यरदन नदी के पानी का स्रोत है। यह नगर समुद्र-तल से करीब 1,150 फुट (350 मी.) की ऊँचाई पर है। यह गलील झील से करीब 40 कि.मी. (25 मील) दूर उत्तर में और हेरमोन पहाड़ की दक्षिण-पश्‍चिमी तराई में है। हेरोदेस महान के बेटे फिलिप्पुस ने रोमी सम्राट के सम्मान में इस नगर का नाम कैसरिया रखा था। कैसरिया नाम का एक और बंदरगाह शहर था, इसलिए इस नगर को कैसरिया फिलिप्पी (मतलब, “फिलिप्पुस का कैसरिया”) कहा जाता था।​—अति. ख10 देखें।

इंसान का बेटा: मत 8:20 का अध्ययन नोट देखें।

इंसान के बेटे: ये शब्द खुशखबरी की किताबों में करीब 80 बार आते हैं। यीशु ने ये शब्द खुद के लिए इस्तेमाल किए। ज़ाहिर है उसने ऐसा इसलिए किया ताकि साबित हो सके कि वह वाकई एक इंसान है और औरत से जन्मा है और आदम के बराबर है। इसलिए उसके पास इंसानों को पाप और मौत से छुड़ाने का अधिकार है। (रोम 5:12, 14, 15) इन शब्दों से यह भी पता चलता है कि यीशु ही मसीहा या मसीह है।​—दान 7:13, 14; शब्दावली में “इंसान का बेटा” देखें।

यूहन्‍ना: इब्रानी में यहोहानान या योहानान। इस नाम का मतलब है, “यहोवा ने मदद की; यहोवा ने कृपा की।”

बपतिस्मा देनेवाला: या “डुबकी लगवानेवाला।” ज़ाहिर है कि यह यूहन्‍ना का एक उपनाम बन गया था, जिससे पता चलता है कि वह ही पानी में डुबकी लगवाकर बपतिस्मा देता था। यहूदी इतिहासकार फ्लेवियस जोसीफस ने लिखा: “यूहन्‍ना जिसका उपनाम था बपतिस्मा देनेवाला।”

यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला: मत 3:1 का अध्ययन नोट देखें।

शमौन जो पतरस कहलाता है: बाइबल में पतरस के पाँच नाम दिए हैं: (1) “शिमौन”; (2) “शमौन” (शिमौन और शमौन, दोनों एक ही इब्रानी क्रिया से निकले हैं जिसका मतलब है, “सुनना; कान लगाना”); (3) “पतरस” (यूनानी नाम जिसका मतलब है, “चट्टान का टुकड़ा” और शास्त्र में यह नाम सिर्फ उसी का है); (4) “कैफा” जो पतरस का अरामी भाषा में अनुवाद है (शायद यह इब्रानी शब्द केफिम [चट्टानों] से जुड़ा है जो अय 30:6; यिर्म 4:29 में इस्तेमाल हुआ है) और (5) “शमौन पतरस” जो दो नामों से मिलकर बना है।​—प्रेष 15:14; यूह 1:42; मत 16:16.

मसीह: मसीह और मसीहा, दोनों एक-जैसी उपाधियाँ हैं। इनके यूनानी शब्द ख्रिस्तौस और इब्रानी शब्द मशीआक का मतलब है, “अभिषिक्‍त जन।” बाइबल के ज़माने में राजाओं का अभिषेक तेल से किया जाता था।

मसीह: यूनानी में यहाँ उपाधि “मसीह” से पहले निश्‍चित उपपद लिखा है। ज़ाहिर है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि यीशु के ओहदे पर ज़ोर दिया जा सके कि वही मसीहा है।

शमौन पतरस: मत 10:2 का अध्ययन नोट देखें।

मसीह: पतरस ने कहा कि यीशु ही “मसीह” (यूनानी में हो ख्रिस्तौस) है। यह उपाधि, “मसीहा” (इब्रानी में मशीआक) के जैसी है और दोनों का मतलब है, “अभिषिक्‍त जन।” यूनानी में यहाँ उपाधि “मसीह” से पहले निश्‍चित उपपद लिखा है। ज़ाहिर है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि यीशु के ओहदे पर ज़ोर दिया जा सके कि वही मसीहा है।​—मत 1:1; 2:4 के अध्ययन नोट देखें।

जीवित परमेश्‍वर: ये शब्द यह दिखाने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं कि यहोवा एक जीवित और शक्‍तिशाली तरीके से काम करनेवाला परमेश्‍वर है, जबकि राष्ट्रों के देवता बेजान थे। (प्रेष 14:15) मिसाल के लिए, कैसरिया फिलिप्पी के इलाके में पूजे जानेवाले देवता। (मत 16:13) “जीवित परमेश्‍वर,” ये शब्द इब्रानी शास्त्र में भी आते हैं।​—व्य 5:26; यिर्म 10:10.

योना के बेटे: या “बार-योना।” कई इब्रानी नामों की शुरूआत इब्रानी शब्द बेन या अरामी शब्द बर (या बार) से होती है और उसके बाद पिता का नाम या कुलनाम आता है। मिसाल के लिए, बरतुलमै, बरतिमाई और बार-यीशु। ये सारे नाम दिखाते हैं कि यीशु के दिनों में इब्रानी भाषा पर अरामी भाषा का काफी असर था।

हाड़-माँस के इंसान: शा., “माँस और लहू।” यहूदी लोग ये शब्द बहुत इस्तेमाल करते थे। यहाँ यीशु के कहने का मतलब है कि पतरस इस नतीजे पर खुद-ब-खुद नहीं पहुँचा और न ही किसी इंसान ने उसे यह बात बतायी है।

तू पतरस है। और इस चट्टान पर: यूनानी शब्द पेट्रोस पुल्लिंग है और इसका मतलब है, “चट्टान का टुकड़ा; पत्थर।” यहाँ यह एक नाम (पतरस) के रूप में इस्तेमाल हुआ है जो यीशु ने शमौन को दिया था। (यूह 1:42) यूनानी शब्द पेट्रा स्त्रीलिंग है और उसका अनुवाद “चट्टान” किया गया है। इसका मतलब मिट्टी के नीचे चट्टान, या एक खड़ी चट्टान या फिर एक विशाल चट्टान हो सकता है। यह शब्द मत 7:24, 25; 27:60; लूक 6:48; 8:6; रोम 9:33; 1कुर 10:4; 1पत 2:8 में भी आता है। ज़ाहिर है कि पतरस ने खुद को वह चट्टान नहीं समझा जिस पर यीशु अपनी मंडली खड़ी करता। उसने 1पत 2:4-8 में लिखा कि यीशु ही ‘नींव में डाला जानेवाला कोने का पत्थर है,’ जिसके बारे में बरसों पहले भविष्यवाणी की गयी थी और जिसे खुद परमेश्‍वर ने चुना था। उसी तरह प्रेषित पौलुस ने यीशु को “नींव” और ‘परमेश्‍वर की चट्टान’ कहा। (1कुर 3:11; 10:4) इसलिए ज़ाहिर है कि यहाँ यीशु के कहने का मतलब था, ‘मैंने तुझे पतरस यानी चट्टान का टुकड़ा कहा और तूने मसीह यानी “इस चट्टान” को सही तरह से पहचाना जो मसीही मंडली की नींव बनेगी।’

मंडली: यूनानी शब्द एकलीसीया यहाँ पहली बार आया है। यह दो यूनानी शब्दों से मिलकर बना है, पहला है एक जिसका मतलब है “बाहर” और दूसरा है कलीयो जिसका मतलब है “बुलाना।” इसलिए एकलीसीया का मतलब है, ऐसे लोगों का समूह जिन्हें किसी खास मकसद या काम के लिए बुलाया या इकट्ठा किया गया है। (शब्दावली देखें।) इस संदर्भ में यीशु ने भविष्यवाणी की कि आगे चलकर मसीही मंडली की शुरूआत होगी जो अभिषिक्‍त मसीहियों से मिलकर बनेगी। उनके बारे में कहा गया है कि वे “जीवित पत्थर” हैं और “पवित्र शक्‍ति से एक भवन के रूप में [उनका] निर्माण किया जा रहा है।” (1पत 2:4, 5) सेप्टुआजेंट में शब्द एकलीसीया उस इब्रानी शब्द के लिए बहुत बार इस्तेमाल हुआ है जिसका अनुवाद “मंडली” किया गया है और जो अकसर परमेश्‍वर के लोगों के पूरे राष्ट्र के लिए इस्तेमाल हुआ है। (व्य 23:3; 31:30) जिन इसराएलियों को मिस्र से बाहर बुलाया या छुड़ाया गया था उन्हें प्रेष 7:38 में “मंडली” कहा गया है। उसी तरह जिन मसीहियों को ‘अंधकार से निकालकर रौशनी में बुलाया’ गया और “दुनिया से चुन लिया” गया है, उनसे ‘परमेश्‍वर की मंडली’ बनी है।​—1पत 2:9; यूह 15:19; 1कुर 1:2.

कब्र: या “हेडीज़,” यानी एक लाक्षणिक जगह जहाँ ज़्यादातर इंसान मौत की नींद सो जाते हैं। (शब्दावली देखें।) बाइबल में मरे हुओं के बारे में कहा गया है कि वे “कब्र के दरवाज़ों” में बंद हैं (भज 107:18; यश 38:10) यानी मौत ने उन्हें कैद कर रखा है। यीशु वादा करता है कि वह कब्र पर जीत पाएगा तब उसके ‘दरवाज़े’ खोल दिए जाएँगे और मरे हुए उसमें से निकल आएँगे यानी ज़िंदा कर दिए जाएँगे। जब खुद यीशु को ज़िंदा किया गया तो यह और भी पुख्ता हो गया कि उसका वादा सच है। (मत 16:21) मंडली पर मौत हावी नहीं हो सकती या हमेशा के लिए उसे बंद करके नहीं रख सकती क्योंकि उसकी बुनियाद यीशु है जो उसके सदस्यों को मौत से छुड़ा सकता है।​—प्रेष 2:31; प्रक 1:18; 20:13, 14.

स्वर्ग के राज की चाबियाँ: बाइबल में जिन लोगों को सचमुच की या लाक्षणिक चाबियाँ दी गयीं, उन्हें कुछ अधिकार दिए गए थे। (1इत 9:26, 27; यश 22:20-22) इसलिए शब्द “चाबी” अधिकार और ज़िम्मेदारी की निशानी बन गया। पतरस को जो चाबियाँ दी गयी थीं उनका उसने यहूदियों (प्रेष 2:22-41), सामरियों (प्रेष 8:14-17) और गैर-यहूदियों (प्रेष 10:34-38) के लिए इस्तेमाल किया ताकि वे परमेश्‍वर की पवित्र शक्‍ति पा सकें और स्वर्ग के राज में दाखिल हो सकें।

बाँधेगा . . . खोलेगा: ज़ाहिर है कि यहाँ कुछ फैसलों की बात की गयी है जिनकी वजह से या तो कुछ कामों या घटनाओं को रोका जाएगा या होने दिया जाएगा।​—मत 18:18 के अध्ययन नोट से तुलना करें।

पहले ही स्वर्ग में बँधा होगा . . . पहले ही स्वर्ग में खुला होगा: यहाँ ‘बाँधने’ और ‘खोलने’ की यूनानी क्रियाएँ जिस तरह लिखी हैं, उस तरह आम तौर पर नहीं लिखी जाती है। इससे पता चलता है कि पतरस जो भी फैसला करेगा (“जो कुछ तू धरती पर बाँधेगा”; “जो कुछ तू धरती पर खोलेगा”), वह उस फैसले के मुताबिक होगा जो स्वर्ग में पहले ही लिया जा चुका होगा।​—मत 18:18 के अध्ययन नोट से तुलना करें।

पहले ही स्वर्ग में बँधा होगा . . . पहले ही स्वर्ग में खुला होगा: यहाँ ‘बाँधने’ और ‘खोलने’ की यूनानी क्रियाएँ जिस तरह लिखी हैं, उस तरह आम तौर पर नहीं लिखी जाती है। इससे पता चलता है कि चेले जो भी फैसले करते (“जो कुछ तुम धरती पर बाँधोगे”; “जो कुछ तुम धरती पर खोलोगे”) वे उन फैसलों के मुताबिक होते जो स्वर्ग में पहले ही लिए जा चुके होते। साथ ही, चेलों के फैसले स्वर्ग में बनाए गए सिद्धांतों के मुताबिक होते। इस आयत का यह मतलब नहीं कि धरती पर लिए जानेवाले फैसलों को स्वर्ग से मंज़ूरी दी जाती या पुख्ता किया जाता। इसके बजाय इसका मतलब है कि चेलों को स्वर्ग से मार्गदर्शन मिलता और यह ज़रूरी भी था, क्योंकि तभी धरती पर लिए जानेवाले फैसले स्वर्ग के फैसलों से मेल खाते।​—मत 16:19 के अध्ययन नोट से तुलना करें।

जो कुछ तुम धरती पर बाँधोगे . . . खोलोगे: ज़ाहिर है कि इस संदर्भ में ‘बाँधने’ का मतलब है, “दोषी मानना; दोषी ठहराना” और ‘खोलने’ का मतलब है, “दोष से मुक्‍त करना; निर्दोष ठहराना।” यहाँ “तुम” बहुवचन में है जो दिखाता है कि ऐसे फैसले करने में पतरस ही नहीं बल्कि दूसरे भी शामिल थे।​—मत 16:19 के अध्ययन नोट से तुलना करें।

मसीह: पतरस ने कहा कि यीशु ही “मसीह” (यूनानी में हो ख्रिस्तौस) है। यह उपाधि, “मसीहा” (इब्रानी में मशीआक) के जैसी है और दोनों का मतलब है, “अभिषिक्‍त जन।” यूनानी में यहाँ उपाधि “मसीह” से पहले निश्‍चित उपपद लिखा है। ज़ाहिर है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि यीशु के ओहदे पर ज़ोर दिया जा सके कि वही मसीहा है।​—मत 1:1; 2:4 के अध्ययन नोट देखें।

मसीह: मत 16:16 का अध्ययन नोट देखें।

यीशु: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों में “यीशु मसीह” लिखा है।

मुखियाओं: शा., “बुज़ुर्गों।” बाइबल में यूनानी शब्द प्रेसबाइटेरोस खासकर ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो समाज या देश में अधिकार और ज़िम्मेदारी के पद पर थे। हालाँकि यह शब्द कभी-कभी बड़ी उम्र के लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है (जैसे लूक 15:25 में “बड़ा बेटा” और प्रेष 2:17 में “बुज़ुर्ग”), लेकिन इसका हमेशा यही मतलब नहीं है। यहाँ इस शब्द का मतलब है यहूदी राष्ट्र के अगुवे, जिनका ज़िक्र अकसर प्रधान याजकों और शास्त्रियों के साथ किया जाता है। महासभा इन्हीं तीन समूहों के आदमियों से मिलकर बनी होती थी।​—मत 21:23; 26:3, 47, 57; 27:1, 41; 28:12; शब्दावली में “मुखिया; बुज़ुर्ग” देखें।

प्रधान याजकों: मत 2:4 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “प्रधान याजक” देखें।

शास्त्रियों: मत 2:4 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “शास्त्री” देखें।

शास्त्रियों: शुरू में नकल-नवीसों को शास्त्री कहा जाता था जो शास्त्र की नकल तैयार करते थे। लेकिन यीशु के ज़माने में ऐसे आदमियों को शास्त्री कहा जाने लगा जिन्हें मूसा के कानून का अच्छा ज्ञान था और जो यह कानून लोगों को सिखाते थे।

प्रधान याजकों: इनके लिए इस्तेमाल हुआ यूनानी शब्द जब एकवचन में आया है तो उसका अनुवाद “महायाजक” किया गया है, यानी परमेश्‍वर के सामने जानेवाला लोगों का मुख्य प्रतिनिधि। लेकिन यहाँ यह शब्द बहुवचन में है और इसका मतलब है याजकवर्ग के बड़े-बड़े आदमी। इनमें वे आदमी शामिल हैं जो पहले महायाजक रह चुके थे और शायद वे भी जो याजकों के 24 दलों के मुखिया थे।

शैतान: यीशु पतरस को शैतान नहीं बल्कि विरोधी कह रहा था, जो इब्रानी शब्द सातन का मतलब है। इस तरह वह शायद यह ज़ाहिर कर रहा था कि इस मौके पर पतरस ने खुद पर शैतान का असर होने दिया, इसलिए वह यीशु को परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करने से रोक रहा था।

ठोकर की वजह: मत 18:7 का अध्ययन नोट देखें।

विश्‍वास की राह में बाधाएँ: या “ठोकर के पत्थर।” माना जाता है कि शुरू में इनके यूनानी शब्द स्कानडेलॉन का मतलब था, एक फंदा। कुछ लोगों का मानना है कि इस फंदे में एक छड़ी लगी होती थी जिसमें चारा लगाया जाता था। इसलिए यह शब्द ऐसी बाधा के लिए इस्तेमाल होने लगा जिससे कोई ठोकर खाकर गिर सकता था। लाक्षणिक तौर पर इसका मतलब है, ऐसा कोई काम या ऐसे हालात जिनमें फँसकर एक इंसान गलत रास्ता अपना सकता है, या नैतिक तौर पर ठोकर खा सकता है, या पाप कर सकता है। इसी शब्द से जुड़ी यूनानी क्रिया स्कानडेलाइज़ो का अनुवाद मत 18:8, 9 में “पाप करवाता है” (फु. में “ठोकर खिलाता है”) किया गया है। इस क्रिया का अनुवाद यह भी किया जा सकता है, “फंदा बन जाता है।”

वह खुद से इनकार करे: इससे पता चलता है कि एक इंसान को अपनी ज़िंदगी पर जो अधिकार होता है उसे वह खुशी-खुशी त्याग दे या परमेश्‍वर को दे दे। इसमें अपनी इच्छाएँ, सुख-सुविधाएँ या अपने लक्ष्यों का त्याग करना भी शामिल हो सकता है। (2कुर 5:14, 15) यहाँ जो यूनानी क्रिया इस्तेमाल हुई है, मत्ती ने वही क्रिया उन आयतों में इस्तेमाल की जिनमें उसने बताया कि पतरस यीशु को जानने से इनकार करेगा और ऐसा करने के बाद वह इस बात को याद करता है।​—मत 26:34, 35, 75.

यातना का काठ: या “मौत का काठ।” प्राचीन यूनानी भाषा में यूनानी शब्द स्टौरोस का खास तौर से मतलब है, सीधा काठ या खंभा। यह शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है और कभी-कभी इसका मतलब है, यीशु का चेला होने की वजह से यातना, दुख-तकलीफें, शर्मिंदगी, यहाँ तक कि मौत सहना।​—शब्दावली देखें।

जान: शब्दावली में “जीवन” देखें।

जान: शब्दावली में “जीवन” देखें।

सच: यूनानी शब्द आमीन, इब्रानी शब्द आमेन से लिया गया है जिसका मतलब है, “ऐसा ही हो” या “ज़रूर।” यीशु अकसर कोई बात, वादा या भविष्यवाणी करने से पहले इस शब्द का इस्तेमाल करता था ताकि वह जो कह रहा है उस पर लोगों को भरोसा हो। यीशु ने जिस तरह “सच” यानी आमीन शब्द का इस्तेमाल किया, वैसा दूसरी धार्मिक किताबों में नहीं हुआ है। जहाँ यह शब्द साथ-साथ आया है (आमीन-आमीन), वहाँ उस शब्द का अनुवाद “सच-सच” किया गया है, जैसे हम यूहन्‍ना की खुशखबरी की किताब में कई बार देख सकते हैं।​—यूह 1:51.

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

टोकरी और टोकरा
टोकरी और टोकरा

बाइबल में अलग-अलग तरह की टोकरियों के लिए अलग-अलग शब्द इस्तेमाल हुए हैं। जब यीशु ने करीब 5,000 आदमियों को खाना खिलाया, तो बचा हुआ खाना 12 टोकरियों में इकट्ठा किया गया। इन टोकरियों के लिए जो यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है, उसका मतलब हाथ से उठायी जानेवाली छोटी टोकरियाँ हो सकता है। लेकिन जब यीशु ने करीब 4,000 लोगों को खाना खिलाया था, तो जिन सात टोकरों में बचा हुआ खाना रखा गया, उनके लिए एक अलग यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है, जिसका मतलब है, बड़े टोकरे। (मर 8:8, 9) यही यूनानी शब्द उस टोकरे के लिए इस्तेमाल हुआ, जिसमें पौलुस को बिठाकर दमिश्‍क की शहरपनाह से नीचे उतारा गया था।​—प्रेष 9:25.

गलील झील से कैसरिया फिलिप्पी के इलाके तक
गलील झील से कैसरिया फिलिप्पी के इलाके तक

यीशु और उसके चेले नाव में बैठकर मगदन से बैतसैदा गए, जो गलील झील के उत्तरी किनारे पर है। (मर 8:22) यह झील समुद्र-तल से करीब 700 फुट (210 मी.) नीचे है। बैतसैदा से करीब 40 कि.मी. (25 मील) दूर कैसरिया फिलिप्पी था जो समुद्र-तल से 1,150 फुट (350 मी.) ऊँचाई पर था। मुमकिन है कि बैतसैदा से ऊपर कैसरिया फिलिप्पी जाने में उन्हें कुछ दिन लगे होंगे।​—यीशु ने किन इलाकों में प्रचार किया, नक्शे में यह देखने के लिए अतिरिक्‍त लेख क7-च देखें।