मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 4:1-25

4  तब परमेश्‍वर की पवित्र शक्‍ति यीशु को वीराने में ले गयी। वहाँ शैतान ने उसे फुसलाने की कोशिश की।+  यीशु ने 40 दिन और 40 रात उपवास किया था, फिर उसे भूख लगी।   तब फुसलानेवाला+ आया और उसने कहा, “अगर तू परमेश्‍वर का एक बेटा है, तो इन पत्थरों से बोल कि ये रोटियाँ बन जाएँ।”   मगर जवाब में यीशु ने कहा, “यह लिखा है, ‘इंसान को सिर्फ रोटी से नहीं बल्कि यहोवा के मुँह से निकलनेवाले हर वचन से ज़िंदा रहना है।’”+  इसके बाद, शैतान उसे पवित्र शहर यरूशलेम+ ले गया और उसे मंदिर की छत की मुँडेर पर लाकर खड़ा किया।+  उसने यीशु से कहा, “अगर तू परमेश्‍वर का एक बेटा है, तो यहाँ से नीचे छलाँग लगा दे क्योंकि लिखा है, ‘वह तेरे बारे में अपने स्वर्गदूतों को हुक्म देगा।’ और ‘वे तुझे हाथों-हाथ उठा लेंगे ताकि तेरा पैर किसी पत्थर से चोट न खाए।’”+  यीशु ने शैतान से कहा, “यह भी लिखा है, ‘तू अपने परमेश्‍वर यहोवा की परीक्षा न लेना।’”+  फिर शैतान उसे अपने साथ बहुत ही ऊँचे पहाड़ पर ले गया और उसे दुनिया के सारे राज्य और उनकी शानो-शौकत दिखायी।+  फिर उसने यीशु से कहा, “अगर तू बस एक बार मेरे सामने गिरकर मेरी उपासना करे, तो मैं यह सबकुछ तुझे दे दूँगा।”  10  यीशु ने उससे कहा, “दूर हो जा शैतान! क्योंकि लिखा है, ‘तू सिर्फ अपने परमेश्‍वर यहोवा की उपासना कर+ और उसी की पवित्र सेवा कर।’”+ 11  तब शैतान उसे छोड़कर चला गया।+ और देखो! स्वर्गदूत आकर यीशु की सेवा करने लगे।+ 12  जब यीशु ने सुना कि यूहन्‍ना को गिरफ्तार कर लिया गया है,+ तो वह वहाँ से गलील चला गया।+ 13  फिर नासरत छोड़ने के बाद वह कफरनहूम+ में रहने लगा, जो झील के किनारे जबूलून और नप्ताली के ज़िलों में है।  14  इससे वह बात पूरी हुई जो भविष्यवक्‍ता यशायाह से कहलवायी गयी थी,  15  “हे गैर-यहूदियों के गलील, जबूलून और नप्ताली के देश, तुम जो समुंदर के रास्ते पर और यरदन के उस पार हो,  16  जो लोग अंधकार में बैठे थे, उन्होंने तेज़ रौशनी देखी। जो मौत के साए के देश में बैठे थे, उन पर रौशनी+ चमकी।”+ 17  उस वक्‍त से यीशु ने प्रचार करना और यह कहना शुरू किया, “पश्‍चाताप करो क्योंकि स्वर्ग का राज पास आ गया है।”+ 18  गलील झील के किनारे चलते-चलते उसने शमौन+ को, जो पतरस कहलाता है+ और उसके भाई अन्द्रियास+ को झील में जाल डालते देखा। वे दोनों मछुवारे थे।+ 19  उसने उनसे कहा, “मेरे पीछे हो लो और जिस तरह तुम मछलियाँ पकड़ते हो, मैं तुम्हें इंसानों को पकड़नेवाले बनाऊँगा।”+ 20  वे फौरन अपने जाल छोड़कर उसके पीछे चल दिए।+ 21  वहाँ से आगे बढ़ने पर यीशु ने याकूब और उसके भाई यूहन्‍ना को देखा। ये दोनों जब्दी के बेटे थे।+ वे अपने पिता के साथ नाव में अपने जाल ठीक कर रहे थे। यीशु ने उन्हें भी बुलाया।+ 22  वे फौरन नाव को और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे चल दिए। 23  फिर वह पूरे गलील का दौरा करता हुआ,+ उनके सभा-घरों+ में सिखाता और राज की खुशखबरी का प्रचार करता रहा। वह लोगों की हर तरह की बीमारी और शरीर की कमज़ोरी दूर करता रहा।+ 24  उसकी खबर सारे सीरिया प्रांत में फैल गयी। लोग उसके पास तरह-तरह की बीमारियों और पीड़ाओं से दुखी लोगों को लाने लगे।+ उनमें ऐसे लोग भी थे जिनमें दुष्ट स्वर्गदूत समाए थे+ और मिरगी+ और लकवे के मारे हुए भी थे। उसने सबको ठीक किया।  25  इसलिए गलील, दिकापुलिस, यरूशलेम और यहूदिया से और यरदन के पार से भीड़-की-भीड़ उसके पीछे हो ली।

कई फुटनोट

अध्ययन नोट

परमेश्‍वर की पवित्र शक्‍ति . . . ले गयी: या “परमेश्‍वर की ज़ोरदार शक्‍ति . . . ले गयी।” पवित्र शक्‍ति के लिए यहाँ यूनानी शब्द नफ्मा इस्तेमाल हुआ है। यह शक्‍ति एक व्यक्‍ति में ज़बरदस्त तरीके से काम करती है और उसे उभारती है कि वह परमेश्‍वर की मरज़ी के मुताबिक काम करे।​—शब्दावली में “रुआख; नफ्मा” देखें।

शैतान: यह इब्रानी शब्द सातन से निकला है जिसका मतलब है, “विरोधी; दुश्‍मन।” शैतान को इबलीस भी कहा गया है। यह यूनानी शब्द दियाबोलोस से निकला है जिसका मतलब है, “बदनाम करनेवाला।” (यूह 6:70; 2ती 3:3) इस शब्द से जुड़ी क्रिया दियाबल्लो का मतलब है, “शिकायत करना; इलज़ाम लगाना।” इस क्रिया का अनुवाद लूक 16:1 में “शिकायत की गयी” हुआ है।

यह लिखा है: जब शैतान ने यीशु को तीन बार फुसलाने की कोशिश की, तब हर बार यीशु ने इब्रानी शास्त्र की बात दोहराते समय ये शब्द कहे।​—मत 4:7, 10.

यहोवा: यहाँ व्य 8:3 की बात लिखी है। मूल इब्रानी पाठ में इस आयत में परमेश्‍वर के नाम के लिए चार इब्रानी व्यंजन (हिंदी में य-ह-व-ह) इस्तेमाल हुए हैं।​—अति. ग देखें।

पवित्र शहर यरूशलेम: यरूशलेम को अकसर पवित्र इसलिए कहा गया है क्योंकि यहीं पर यहोवा का मंदिर था।​—नहे 11:1; यश 52:1.

मंदिर की छत की मुँडेर: या “सबसे ऊँची जगह।” शा., “मंदिर का पार्श्‍वभाग।” “मंदिर” के यूनानी शब्द का मतलब है, मंदिर की मुख्य इमारत या पूरा मंदिर परिसर। इसलिए “मंदिर की छत की मुँडेर” का मतलब मंदिर के चारों तरफ की दीवार की कोई ऊँची जगह हो सकता है।

यहोवा: यहाँ व्य 6:16 की बात लिखी है। मूल इब्रानी पाठ में इस आयत में परमेश्‍वर के नाम के लिए चार इब्रानी व्यंजन (हिंदी में य-ह-व-ह) इस्तेमाल हुए हैं।​—अति. ग देखें।

उसे . . . दिखायी: दुष्ट स्वर्गदूतों के राजा ने शायद यीशु को एक दर्शन दिखाया जो असल लग रहा था।

दुनिया: इसका यूनानी शब्द कॉसमोस है और यहाँ इसका मतलब है, दुष्ट इंसानों का समाज।

राज्य: आम तौर पर “राज्य” का मतलब है, इंसानी सरकारें।

बस एक बार . . . मेरी उपासना करे: जिस यूनानी क्रिया का अनुवाद ‘उपासना करना’ किया जा सकता है, वह इस आयत में यूनानी में एओरिस्ट काल में लिखी गयी है। इस काल से ऐसे काम का पता चलता है जो पल-भर के लिए जाता। यहाँ इस क्रिया का अनुवाद ‘बस एक बार मेरी उपासना करे’ किया गया है। इससे पता चलता है कि शैतान यीशु को “बस एक बार” उसकी उपासना करने को कह रहा था, न कि लगातार करते रहने को।

यहोवा: यहाँ व्य 6:13 की बात लिखी है। मूल इब्रानी पाठ में इस आयत में परमेश्‍वर के नाम के लिए चार इब्रानी व्यंजन (हिंदी में य-ह-व-ह) इस्तेमाल हुए हैं।​—अति. ग देखें।

और उसी की पवित्र सेवा कर: या “और सिर्फ उसी की सेवा कर।” यूनानी क्रिया लाट्रीओ का मतलब है, आम तौर पर सेवा करना। लेकिन मसीही यूनानी शास्त्र में यह क्रिया भक्‍ति या उपासना से जोड़ा गया है। इसलिए इसका अनुवाद, ‘पवित्र सेवा; परमेश्‍वर की सेवा या उपासना’ भी किया जा सकता है। (लूक 1:74; 2:37; 4:8; प्रेष 7:7; रोम 1:9; फिल 3:3; 2ती 1:3; इब्र 9:14; 12:28; प्रक 7:15; 22:3) यीशु ने व्य 6:13 का ज़िक्र किया था। इसमें “सेवा” के लिए इब्रानी शब्द अवध इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब “उपासना करना” भी हो सकता है। (निर्ग 3:12; फु.; 2शम 15:8, फु.) यीशु ने पक्का इरादा कर लिया था कि वह सिर्फ यहोवा की भक्‍ति करेगा।

देखो!: मत 1:23 का अध्ययन नोट देखें।

जब यीशु ने सुना: आयत 11 और इस आयत के बीच करीब एक साल का फासला है। इस एक साल के दौरान जो घटनाएँ हुईं वे यूह 1:29 से 4:3 में दर्ज़ हैं। यूहन्‍ना ने अपनी किताब में यह भी बताया कि जब यीशु यहूदिया से गलील . . . गया तो वह सामरिया होते हुए गया, जहाँ वह सूखार के पास कुएँ पर एक सामरी औरत से मिला।​—यूह 4:4-43; अति. क7, “यीशु की सेवा की शुरूआत” चार्ट और नक्शा 2 देखें।

कफरनहूम: यह एक इब्रानी नाम से निकला है जिसका मतलब है, “नहूम का गाँव” या “दिलासे का गाँव।” (नहू 1:1, फु.) धरती पर यीशु की प्रचार सेवा से इस शहर का खास संबंध रहा। यह गलील झील के उत्तर-पश्‍चिमी तट पर था और मत 9:1 में इसे उसका ‘अपना शहर’ कहा गया।

जबूलून और नप्ताली के ज़िलों: यानी इसराएल के एकदम उत्तर में गलील झील के उत्तरी और पश्‍चिमी इलाके। इनमें गलील प्रदेश भी शामिल था। (यह 19:10-16, 32-39) नप्ताली के इलाके की एक सरहद पर गलील झील का पूरा पश्‍चिमी तट था।

वह बात पूरी हुई जो भविष्यवक्‍ता यशायाह से कहलवायी गयी थी: मत 1:22 का अध्ययन नोट देखें।

गैर-यहूदियों के गलील: ये शब्द यशायाह ने शायद इसलिए इस्तेमाल किए क्योंकि गलील प्रदेश, इसराएल और आस-पास के दूसरे राष्ट्रों के बीच सरहद की तरह था। गलील जिस इलाके में था और उससे होकर जो रास्ते जाते थे, उनकी वजह से इसराएलियों को कई खतरे थे। दूसरे राष्ट्र आकर उन पर हमला कर सकते थे और उनके इलाके में आकर बस सकते थे। पहली सदी के आते-आते बहुत-से गैर-यहूदी लोग वहाँ रहने लगे थे। इसलिए गलील के बारे में ऐसा कहना और भी सही था।

समुंदर के रास्ते: मुमकिन है कि यहाँ एक प्राचीन रास्ते की बात की गयी है जो गलील झील के किनारे से होते हुए भूमध्य सागर तक जाता था।

यरदन के उस पार: ज़ाहिर है कि यहाँ यरदन नदी के पश्‍चिमी इलाके की बात की गयी है।

तेज़ रौशनी: मसीहा के बारे में यशायाह ने जो भविष्यवाणी की उसके मुताबिक यीशु ने अपना ज़्यादातर प्रचार काम गलील में किया, जो जबूलून और नप्ताली के ज़िलों में पड़ता था। (मत 4:13, 15) इस तरह यीशु ने उन यहूदी लोगों पर सच्चाई की तेज़ रौशनी चमकायी जिनके बारे में माना जाता था कि वे अँधेरे में हैं यानी परमेश्‍वर से दूर हैं और जिन्हें यहूदिया में रहनेवाले उनके अपने ही लोग तुच्छ समझते थे।​—यूह 7:52.

मौत के साए: यीशु ने जो सच्चाई सिखायी उसकी बदौलत लोगों पर से मौत का साया हट सकता है और वे मौत से बच सकते हैं।

प्रचार करना: यानी लोगों को सरेआम संदेश सुनाना।​—मत 3:1 का अध्ययन नोट देखें।

स्वर्ग का राज पास आ गया है: दुनिया की एक नयी सरकार यानी परमेश्‍वर का राज ही यीशु की प्रचार सेवा का मुख्य विषय था। (मत 10:7; मर 1:15) यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने यीशु के बपतिस्मे के करीब छ: महीने पहले यही संदेश सुनाना शुरू किया था। (मत 3:1, 2) लेकिन अब यीशु उनके बीच था जिसे उस राज का राजा होने के लिए अभिषिक्‍त किया गया था। इसलिए वह और भी दमदार तरीके से ऐलान कर पाया कि राज “पास आ गया है।” बाइबल में कहीं नहीं बताया गया है कि यीशु की मौत के बाद भी उसके चेले यह संदेश सुनाते रहे कि राज “पास आ गया है।”

गलील झील: उत्तरी इसराएल में ताज़े पानी की झील। (जिस यूनानी शब्द का अनुवाद “झील” किया गया है, उसका मतलब “सागर” भी हो सकता है।) इसे किन्‍नेरेत झील (गि 34:11), गन्‍नेसरत झील (लूक 5:1) और तिबिरियास झील भी कहा जाता था (यूह 6:1)। यह झील समुद्र-तल से औसतन 700 फुट (210 मी.) नीचे है। उत्तर से दक्षिण में इसकी लंबाई 21 कि.मी. (13 मील) है और चौड़ाई 12 कि.मी. (8 मील)। इसकी सबसे ज़्यादा गहराई करीब 160 फुट (48 मी.) मापी गयी है।​—अति. क7, नक्शा 3ख, “गलील झील के पास” देखें।

शमौन . . . जो पतरस कहलाता है: शमौन, पतरस का असली नाम था। पतरस नाम उसे यीशु ने दिया था। पतरस (पेट्रोस) यूनानी नाम था जिसे अरामी में कैफा (केफस) कहा जाता था।​—मर 3:16; यूह 1:42; कृपया मत 10:2 का अध्ययन नोट देखें।

जाल डालते: एक काबिल मछुवारा पानी में खड़े होकर या नाव पर से अपना गोलाकार जाल इस तरह फेंकता था कि वह पानी की सतह पर फैल जाता था। जाल का व्यास शायद 20-25 फुट (6-8 मी.) तक होता था। जाल के बाहरी किनारों पर कुछ वज़न बँधा होता था जिससे वह पानी में डूब जाता था और मछलियाँ उसमें फँस जाती थीं।

मछुवारे: गलील में मछुवाई करना आम पेशा था। पतरस और उसका भाई अन्द्रियास दोनों अकेले मछुवाई नहीं करते थे बल्कि उनके साथ और भी लोग थे क्योंकि यह उनका कारोबार था। ज़ाहिर है कि जब्दी के बेटे याकूब और यूहन्‍ना उनके साझेदार थे।​—मर 1:16-21; लूक 5:7, 10.

इंसानों को पकड़नेवाले: यीशु ने यहाँ ऐसे शब्द इसलिए इस्तेमाल किए क्योंकि शमौन और अन्द्रियास मछुवारे थे। उसके शब्दों से पता चलता है कि अब से वे राज की खातिर ‘जीते-जागते इंसानों को पकड़ते’ जिस तरह वे मछलियाँ पकड़ते थे। (लूक 5:10) इनका यह भी मतलब हो सकता है कि मछुवाई के काम की तरह चेले बनाने के काम में भी कड़ी मेहनत और लगन की ज़रूरत होती, मगर उन्हें यह भी याद रखना था कि उन्हें हमेशा अच्छे नतीजे नहीं मिलेंगे।

उसके पीछे चल दिए: पतरस और अन्द्रियास को यीशु का चेला बने करीब छ: महीने या एक साल हो गया था। (यूह 1:35-42) अब यीशु उन्हें बुलावा दे रहा था कि वे अपना मछुवाई का कारोबार छोड़कर पूरे समय उसके साथ रहकर प्रचार करें।​—लूक 5:1-11; कृपया मत 4:22 का अध्ययन नोट देखें।

याकूब और उसके भाई यूहन्‍ना: याकूब का नाम हमेशा उसके भाई यूहन्‍ना के साथ आया है और ज़्यादातर बार उसका नाम पहले आया है। इससे पता चलता है कि वह शायद यूहन्‍ना से बड़ा था।​—मत 4:21; 10:2; 17:1; मर 1:29; 3:17; 5:37; 9:2; 10:35, 41; 13:3; 14:33; लूक 5:10; 6:14; 8:51; 9:28, 54; प्रेष 1:13.

जब्दी: शायद यीशु का मौसा, क्योंकि उसकी पत्नी सलोमी यीशु की माँ मरियम की बहन रही होगी। अगर ऐसा है तो यूहन्‍ना और याकूब यीशु के मौसेरे भाई थे।​—मर 15:40 का अध्ययन नोट देखें।

वे फौरन . . . छोड़कर: “फौरन” का यूनानी शब्द एवथियॉस इस आयत में और आयत 20 में आया है। पतरस और अन्द्रियास की तरह याकूब और यूहन्‍ना भी यीशु के बुलाने पर पूरे समय प्रचार करने के लिए फौरन उसके साथ हो लिए।

पूरे गलील का दौरा करता हुआ: इन शब्दों के मुताबिक, गलील में यीशु के प्रचार का पहला दौरा शुरू होता है। उसके साथ उसके चार नए चेले पतरस, अन्द्रियास, याकूब और यूहन्‍ना भी हैं।​—मत 4:18-22; कृपया अति. क7 देखें।

सभा-घरों: शब्दावली में “सभा-घर” देखें।

सिखाता और . . . प्रचार करता रहा: सिखाने और प्रचार करने में फर्क है। प्रचार करने का मतलब है संदेश सुनाना, जबकि सिखाने में हिदायतें देना, समझाना, दलीलें देकर कायल करना और सबूत देना भी शामिल है।​—मत 3:1; 28:20 के अध्ययन नोट देखें।

खुशखबरी: यहाँ यूनानी शब्द यूएजेलियोन पहली बार आया है, जिसे बाइबल के कई हिंदी अनुवादों में “सुसमाचार” लिखा गया है। इससे संबंधित यूनानी शब्द यूएजेलिस्तेस का अनुवाद “प्रचारक” किया गया है जिसका मतलब है, “खुशखबरी सुनानेवाला।”​—प्रेष 21:8; इफ 4:11, फु.; 2ती 4:5, फु.

सीरिया प्रांत: एक रोमी प्रांत। यह गैर-यहूदियों का इलाका था जो गलील के उत्तर में दमिश्‍क और भूमध्य सागर के बीच पड़ता था।

मिरगी: इसके यूनानी शब्द का शाब्दिक मतलब है, “चंद्रमा से ग्रस्त।” मगर मत्ती ने यह शब्द बीमारी बताने के लिए इस्तेमाल किया, न कि यह अंधविश्‍वास बताने के लिए कि यह बीमारी चंद्रमा की कुछ कलाओं से जुड़ी है। मत्ती, मरकुस और लूका ने बीमारी के जो लक्षण बताए वे मिरगी के हैं।

दिकापुलिस: शब्दावली और अति. ख10 देखें।

यरदन के पार: ज़ाहिर है कि यहाँ यरदन नदी के पूर्वी इलाके की बात की गयी है। यह पेरिया के नाम से भी जाना जाता था। (पेरिया यूनानी शब्द पीरान से निकला है जिसका मतलब है, “के पार; के आगे।”)

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

वीराना
वीराना

बाइबल में जिन मूल शब्दों (इब्रानी में मिधबार और यूनानी में ईरेमोस ) का अनुवाद ‘वीराना’ या ‘वीरान इलाका’ किया गया है, उनका आम तौर पर मतलब होता है ऐसा इलाका जहाँ कहीं-कहीं घर होते हैं और खेती नहीं होती। लेकिन अकसर इन शब्दों का मतलब होता है, ऐसे मैदान जहाँ घास-फूस और झाड़ियाँ उगती हैं और जानवर चराए जाते हैं। इन शब्दों का मतलब रेगिस्तान भी हो सकता है जहाँ पानी नहीं होता। खुशखबरी की किताबों में जब वीराने की बात की गयी है तो आम तौर पर उसका मतलब है यहूदिया का वीराना। इसी वीराने में यूहन्‍ना रहता था और प्रचार करता था और यहीं शैतान ने यीशु को फुसलाया था।​—मर 1:12.

यरदन नदी के पश्‍चिम में यहूदिया का वीराना
यरदन नदी के पश्‍चिम में यहूदिया का वीराना

इसी बंजर इलाके में यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने प्रचार करना शुरू किया था और यहीं शैतान ने यीशु को फुसलाया था।

मंदिर की छत की मुँडेर
मंदिर की छत की मुँडेर

हो सकता है कि शैतान ने सच में यीशु को “मंदिर की छत की मुँडेर [या “सबसे ऊँची जगह”] पर” खड़ा किया हो और वहाँ से नीचे छलाँग लगाने को कहा हो। लेकिन यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि यीशु मंदिर की ठीक किस जगह पर खड़ा था। यहाँ “मंदिर” के लिए जो शब्द इस्तेमाल हुआ है उसका मतलब पूरा मंदिर परिसर हो सकता है, इसलिए यीशु शायद मंदिर के दक्षिण-पूर्वी कोने (1) पर खड़ा हो। या फिर हो सकता है कि वह मंदिर परिसर के किसी भी कोने पर खड़ा हो। इनमें से किसी भी कोने पर से अगर यीशु गिरता और यहोवा उसे न बचाता तो उसकी मौत पक्की थी।

गलील झील के उत्तरी तट से उत्तर-पश्‍चिम का इलाका
गलील झील के उत्तरी तट से उत्तर-पश्‍चिम का इलाका

1. गन्‍नेसरत का मैदान। यह इलाका तिकोना था और इसकी एक तरफ की लंबाई करीब 5 कि.मी. (3 मील) थी और दूसरी तरफ की 2.5 कि.मी. (1.5 मील)। यह काफी उपजाऊ इलाका था। इसी इलाके में, झील के किनारे चलते-चलते यीशु ने चार मछुवारों यानी पतरस, अन्द्रियास, याकूब और यूहन्‍ना को उसके साथ प्रचार करने के लिए बुलाया।​—मत 4:18-22.

2. यहूदियों की मान्यता है कि यहीं पर यीशु ने पहाड़ी उपदेश दिया था।​—मत 5:1; लूक 6:17, 20.

3. कफरनहूम। यीशु इसी शहर में रहता था और यहीं या इसी के आस-पास वह मत्ती से मिला था।​—मत 4:13; 9:1, 9.

गलील झील की मछलियाँ
गलील झील की मछलियाँ

बाइबल में कई बार मछलियों, मछलियाँ पकड़ने और मछुवारों का ज़िक्र गलील झील के साथ किया गया है। गलील झील में करीब 18 किस्म की मछलियाँ पायी जाती हैं जिनमें से करीब 10 किस्मों में ही मछुवारों को दिलचस्पी होती है। व्यापार क्षेत्र में इन्हें तीन खास समूहों में बाँटा जाता है। पहला है बीन्‍नी जिसे बारबल भी कहा जाता है (चित्र में बारबस लोंजिसेप्स दिखायी गयी है) (1)। इसकी तीन प्रजातियों के मुँह के किनारों पर कड़े बाल होते हैं। इसलिए इसके शामी (Semitic) नाम बीनी का मतलब है “बाल।” इसका खाना सीपियाँ, घोंघे और छोटी-छोटी मछलियाँ होती हैं। लंबे सिरवाली बारबल की लंबाई करीब 30 इंच (75 सें.मी.) और वज़न 7 किलो से ज़्यादा होता है। दूसरा समूह है, मश्‍त (चित्र में तिलापिया गैलिलीया दिखायी गयी है) (2), जिसका अरबी में मतलब है “कंघा” क्योंकि इसकी पाँच प्रजातियों की पीठ का पंख कंघे जैसा होता है। एक किस्म की मश्‍त मछली की लंबाई करीब 18 इंच (45 सें.मी.) और वज़न करीब 2 किलो होता है। तीसरा समूह है, किन्‍नेरेत सार्डीन (चित्र में अकैंथोब्रामा टेरै सैंकटै दिखायी गयी है) (3), जो दिखने में छोटी हिलसा मछलियों की तरह है। पुराने ज़माने से लेकर आज तक सार्डीन मछलियों को नमकीन पानी या सिरके में रखा जाता है ताकि वे बहुत दिनों तक खाने के काम आ सकें।

मछली पकड़ने का जाल
मछली पकड़ने का जाल

गलील झील में मछुवारे दो तरह के छोटे जाल इस्तेमाल करते थे। एक, छोटी मछलियाँ पकड़ने के लिए जो महीन बुना हुआ होता था और दूसरा, बड़ी मछलियाँ पकड़ने के लिए जो मोटा बुना होता था। ये जाल बड़े जाल से अलग होते थे। बड़े जाल से मछलियाँ पकड़ने के लिए आम तौर पर कम-से-कम एक नाव और कई लोगों की ज़रूरत होती थी। लेकिन छोटे जाल से मछलियाँ पकड़ने के लिए एक ही आदमी काफी होता था। वह नाव पर से, झील के किनारे पानी में या पानी के बाहर खड़े होकर जाल फेंकता था। छोटे जाल का व्यास शायद 15 फुट (5 मी.) या उससे ज़्यादा होता था और जाल के बाहरी किनारों पर पत्थर या सीसे के टुकड़े बँधे होते थे। सही तरह से फेंकने पर यह पानी की सतह पर फैल जाता था। पहले किनारा पानी में डूबता था और फिर जैसे-जैसे जाल झील के अंदर जाता था, मछलियाँ उसके अंदर फँसती जाती थीं। मछुवारा या तो डुबकी लगाकर जाल में फँसी मछलियाँ निकालता था या फिर सावधानी से जाल को किनारे पर खींचता था। जाल को अच्छी तरह इस्तेमाल करने के लिए काफी हुनर और मेहनत लगती थी।

मछुवाई के जाल की मरम्मत
मछुवाई के जाल की मरम्मत

ये जाल बहुत महँगे होते थे और इनके रखरखाव में बड़ी मेहनत लगती थी। एक मछुवारे का ज़्यादातर समय जाल ठीक करने, उसे धोने और सुखाने में ही चला जाता था। ये काम वह हर बार मछली पकड़ने के बाद करता था। (लूक 5:2) मत्ती ने मछुवाई के जालों के बारे में बताने के लिए तीन यूनानी शब्द इस्तेमाल किए। एक है दिकटीयोन जिसका इस्तेमाल किसी भी तरह के जाल के लिए किया जा सकता है। (मत 4:21) शब्द सायीनी का मतलब है, बड़ा जाल जिसे नाव पर से डाला जाता था। (मत 13:47, 48) छोटे जाल के लिए शब्द है, ऐमफिव्लीस्ट्रॉन जिसका मतलब है “कुछ फेंका हुआ।” ज़ाहिर है कि मछुवारा इस तरह का जाल झील के किनारे पानी में या पानी के बाहर खड़े होकर उस जगह फेंकता था जहाँ पानी कम होता था।​—मत 4:18.

गलील झील में मछली पकड़ने की नाव के अवशेष
गलील झील में मछली पकड़ने की नाव के अवशेष

सन्‌ 1985-1986 में सूखा पड़ने की वजह से गलील झील में पानी काफी कम हो गया था। इससे उसमें प्राचीन समय की एक नाव का पेटा (मुख्य भाग) दिखायी देने लगा। यह नाव दलदल में धँस गयी थी। इसका जो अवशेष मिला है उसकी लंबाई 27 फुट (8.2 मी.), चौड़ाई 7.5 फुट (2.3 मी.) और गहराई लगभग 4.3 फुट (1.3 मी.) है। पुरातत्ववेत्ताओं का कहना है कि यह नाव ईसा पूर्व पहली सदी और ईसवी सन्‌ पहली सदी के बीच की है। यह पेटा फिलहाल इसराएल के एक संग्रहालय में रखा है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि करीब 2,000 साल पहले यह नाव कैसी दिखती होगी।

पहली सदी की नाव
पहली सदी की नाव

यह तसवीर दो सबूतों के आधार पर बनायी गयी है। पहला सबूत है, गलील झील के किनारे दलदल में पाया गया एक नाव का अवशेष, जो पहली सदी में मछलियाँ पकड़ने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। दूसरा, समुद्र किनारे बसे मिगदल नगर में पहली सदी के एक घर में मिली पच्चीकारी। इस तरह की नाव में शायद एक मस्तूल और पाल लगे होते थे और पाँच लोगों की एक टोली होती थी, चार चप्पू चलानेवाले और एक पतवार चलानेवाला। पतवार चलानेवाला नाव के पिछले हिस्से में बनी छोटी-सी मचान पर खड़ा होता था। यह नाव करीब 26.5 फुट (8 मी.) लंबी होती थी। बीच में इसकी चौड़ाई करीब 8 फुट (2.5 मी.) और गहराई करीब 4 फुट (1.25 मी.) होती थी। ऐसा मालूम होता है कि इसमें 13 या उससे ज़्यादा लोग आ सकते थे।

पहली सदी का सभा-घर
पहली सदी का सभा-घर

गलील झील से करीब 10 कि.मी. (6 मील) दूर उत्तर-पूरब में गामला नाम की जगह पर पहली सदी के सभा-घर के खंडहर पाए गए। उसी के आधार पर यह चित्र तैयार किया गया है जिससे पता चलता है कि प्राचीन समय के सभा-घर कैसे दिखते होंगे।