लूका के मुताबिक खुशखबरी 7:1-50

7  जब वह लोगों को वे सारी बातें बता चुका जो वह बताना चाहता था, तो वह कफरनहूम आया।  वहाँ एक सेना-अफसर था जिसे अपने एक दास से बहुत प्यार था। वह दास इतना बीमार पड़ गया कि अब मरने पर था।+  जब सेना-अफसर ने यीशु के बारे में सुना, तो उसने यहूदियों के मुखियाओं को उससे यह बिनती करने भेजा कि आकर मेरे दास को ठीक कर दे।  जब वे यीशु के पास पहुँचे, तो उसके आगे गिड़गिड़ाने लगे, “वह सेना-अफसर एक भला आदमी है, मेहरबानी करके उसकी मदद कर।  वह हम यहूदियों से प्यार करता है, उसी ने हमारा सभा-घर बनवाया है।”  तब यीशु उनके साथ चल दिया। मगर जब वह उसके घर से थोड़ी ही दूर था, तो सेना-अफसर के कुछ दोस्त उसके पास आए, जिनके हाथ उसने यह संदेश भेजा था: “मालिक, और तकलीफ मत उठा क्योंकि मैं इस लायक नहीं कि तू मेरी छत तले आए।+  इसी वजह से मैंने अपने आपको इस काबिल नहीं समझा कि तेरे पास आऊँ। बस तू अपने मुँह से कह दे और मेरा सेवक ठीक हो जाएगा।  क्योंकि मैं भी किसी अधिकारी के नीचे काम करता हूँ और मेरे नीचे भी सिपाही हैं। जब मैं एक से कहता हूँ, ‘जा!’ तो वह जाता है और दूसरे से कहता हूँ, ‘आ!’ तो वह आता है और अपने दास से कहता हूँ, ‘यह कर!’ तो वह करता है।”  जब यीशु ने यह सुना तो उसे अफसर पर बहुत ताज्जुब हुआ। उसने मुड़कर अपने पीछे आनेवाली भीड़ से कहा, “मैं तुमसे कहता हूँ, मैंने इसराएल में भी ऐसा ज़बरदस्त विश्‍वास नहीं पाया।”+ 10  जो भेजे गए थे उन्होंने घर लौटने पर पाया कि वह दास बिलकुल ठीक हो चुका है।+ 11  कुछ ही समय बाद वह नाईन नाम के एक शहर गया। उसके चेले और एक बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी। 12  जब वह शहर के फाटक के पास पहुँचा, तो देखो! लोग एक मुरदे को ले जा रहे थे जो अपनी माँ का अकेला बेटा था।+ और-तो-और, वह विधवा थी। उस शहर से बड़ी तादाद में लोग उस औरत के साथ जा रहे थे। 13  जब प्रभु की नज़र उस औरत पर पड़ी, तो वह तड़प उठा+ और उसने कहा, “मत रो।”+ 14  तब उसने पास आकर अर्थी को छुआ और अर्थी उठानेवाले रुक गए। फिर उसने कहा, “हे जवान, मैं तुझसे कहता हूँ उठ!”+ 15  तब वह जवान जो मर गया था, उठ बैठा और बात करने लगा और यीशु ने उसे उसकी माँ को सौंप दिया।+ 16  यह देखकर सब लोगों पर डर छा गया और वे यह कहते हुए परमेश्‍वर की महिमा करने लगे, “हमारे बीच एक महान भविष्यवक्‍ता आया है”+ और “परमेश्‍वर ने अपने लोगों की तरफ ध्यान दिया है।”+ 17  उसके बारे में यह खबर पूरे यहूदिया और आस-पास के सब इलाकों में फैल गयी। 18  यूहन्‍ना के चेलों ने उसे इन सारी बातों की खबर दी।+ 19  तब यूहन्‍ना ने अपने दो चेलों को बुलाया और उन्हें प्रभु से यह पूछने के लिए भेजा, “वह जो आनेवाला था, क्या तू ही है+ या हम किसी और की आस लगाएँ?” 20  जब वे यीशु के पास आए, तो उन्होंने कहा, “यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने हमें तेरे पास यह पूछने के लिए भेजा है, ‘वह जो आनेवाला था, क्या तू ही है या हम किसी और की आस लगाएँ?’” 21  उसी वक्‍त यीशु ने बहुत-से लोगों की बीमारियाँ और दर्दनाक रोग दूर किए+ और लोगों में समाए दुष्ट स्वर्गदूतों को निकाला और बहुत-से अंधों को आँखों की रौशनी दी। 22  यीशु ने उनसे कहा, “जो कुछ तुमने देखा और सुना है, जाकर वह सब यूहन्‍ना को बताओ: अंधे अब देख रहे हैं,+ लँगड़े चल-फिर रहे हैं, कोढ़ी शुद्ध किए जा रहे हैं, बहरे सुन रहे हैं,+ मरे हुओं को ज़िंदा किया जा रहा है और गरीबों को खुशखबरी सुनायी जा रही है।+ 23  सुखी है वह जो मेरे बारे में शक नहीं करता।”*+ 24  जब यूहन्‍ना का संदेश लानेवाले चले गए, तो यीशु भीड़ से यूहन्‍ना के बारे में यह कहने लगा, “तुम वीराने में क्या देखने गए थे? हवा से इधर-उधर हिलते किसी नरकट को?+ 25  फिर तुम क्या देखने गए थे? क्या रेशमी मुलायम* कपड़े पहने किसी आदमी को?+ शानदार कपड़े पहननेवाले और ऐशो-आराम से जीनेवाले तो महलों में रहते हैं। 26  तो आखिर तुम क्या देखने गए थे? एक भविष्यवक्‍ता को? हाँ। बल्कि मैं तुमसे कहता हूँ, भविष्यवक्‍ता से भी बढ़कर किसी को देखने गए थे।+ 27  यह वही है जिसके बारे में लिखा है, ‘देख! मैं अपना दूत तेरे आगे-आगे* भेज रहा हूँ, जो तेरे लिए रास्ता तैयार करेगा।’+ 28  मैं तुमसे कहता हूँ, अब तक जितने भी इंसान पैदा हुए हैं, उनमें यूहन्‍ना से बड़ा कोई भी नहीं। मगर परमेश्‍वर के राज में जो सबसे छोटा है, वह यूहन्‍ना से भी बड़ा है।”+ 29  (जब सब लोगों ने और कर-वसूलनेवालों ने यह सुना, तो उन्होंने कहा कि परमेश्‍वर सच्चा है। इन लोगों ने वह बपतिस्मा लिया था जिसका प्रचार यूहन्‍ना करता था।+ 30  मगर फरीसी और जो कानून के जानकार थे, उन्होंने वह बपतिस्मा नहीं लिया था। और परमेश्‍वर ने उनके लिए जो मकसद ठहराया था,* उसे ठुकरा दिया।)+ 31  “इसलिए मैं इस पीढ़ी के लोगों की तुलना किससे करूँ, ये किसके जैसे हैं?+ 32  ये ऐसे हैं मानो बाज़ारों में बैठे बच्चे एक-दूसरे को पुकारकर कह रहे हों, ‘हमने तुम्हारे लिए बाँसुरी बजायी मगर तुम नहीं नाचे। हमने विलाप किया मगर तुम नहीं रोए।’ 33  वैसे ही यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला औरों की तरह न रोटी खाता, न दाख-मदिरा पीता आया,+ फिर भी तुम कहते हो, ‘उसमें दुष्ट स्वर्गदूत समाया है।’ 34  जबकि इंसान का बेटा औरों की तरह खाता-पीता आया, फिर भी तुम कहते हो, ‘देखो! यह आदमी पेटू और पियक्कड़ है और कर-वसूलनेवालों और पापियों का दोस्त है!’+ 35  लेकिन बुद्धि अपने सारे नतीजों से सही साबित होती है।”*+ 36  शमौन नाम का एक फरीसी था जिसने यीशु से बार-बार गुज़ारिश की कि वह उसके यहाँ खाने पर आए। इसलिए यीशु उसके घर गया और खाने बैठा।+ 37  उसी शहर में एक बदनाम औरत थी, जिसके बारे में सब जानते थे कि वह एक पापिन है। जब उसे मालूम पड़ा कि यीशु उस फरीसी के घर खाने पर आया है,* तो वह खुशबूदार तेल की बोतल लेकर आयी।+ 38  वह यीशु के पैरों के पास पीछे आयी और रो-रोकर अपने आँसुओं से उसके पैर भिगोने लगी और अपने बालों से उन्हें पोंछने लगी। वह बार-बार उसके पैरों को चूम रही थी और उन पर खुशबूदार तेल डाल रही थी। 39  यह देखकर वह फरीसी जिसने यीशु को न्यौता दिया था, मन-ही-मन कहने लगा, “अगर यह आदमी सचमुच एक भविष्यवक्‍ता होता, तो जान लेता कि यह औरत जो उसे छू रही है, कौन है और कैसी है, यह एक पापिन है।”+ 40  मगर यीशु ने उससे कहा, “शमौन, मैं तुझसे कुछ कहना चाहता हूँ।” उसने कहा, “गुरु, बोल!” 41  “दो आदमी किसी साहूकार के कर्ज़दार थे। एक पर 500 दीनार का कर्ज़ था और दूसरे पर 50 का। 42  लेकिन जब अपना कर्ज़ चुकाने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं था, तब साहूकार ने बड़ी उदारता से उन दोनों का कर्ज़ माफ कर दिया। इसलिए बता, उन दोनों में से कौन साहूकार से ज़्यादा प्यार करेगा?” 43  शमौन ने जवाब दिया, “मेरे खयाल से वही आदमी जिसका उसने ज़्यादा कर्ज़ माफ किया।” यीशु ने कहा, “तूने बिलकुल सही कहा।” 44  तब यीशु ने उस औरत की तरफ मुड़कर देखा और शमौन से कहा, “क्या तू इस औरत को देख रहा है? मैं तेरे घर आया और तूने मुझे पैर धोने के लिए पानी नहीं दिया। मगर इस औरत ने अपने आँसुओं से मेरे पैर धोए+ और अपने बालों से उन्हें पोंछा। 45  तूने मुझे नहीं चूमा। मगर जब से मैं आया हूँ तब से यह औरत मेरे पैरों को चूम रही है। 46  तूने मेरे सिर पर तेल नहीं उँडेला। मगर इस औरत ने मेरे पैरों पर खुशबूदार तेल डाला है। 47  इस वजह से, मैं तुझसे कहता हूँ कि भले ही इसके पाप बहुत हैं मगर वे माफ किए गए,+ इसलिए यह ज़्यादा प्यार कर रही है।+ मगर जिसके कम पाप माफ किए गए, वह कम प्यार करता है।” 48  तब यीशु ने औरत से कहा, “तेरे पाप माफ किए गए।”+ 49  यह सुनकर जो लोग उसके साथ मेज़ पर थे, मन-ही-मन कहने लगे, “यह आदमी कौन है जो पापों को भी माफ करता है?”+ 50  मगर यीशु ने औरत से कहा, “तेरे विश्‍वास ने तुझे बचा लिया है।+ जा, अब और चिंता मत करना।”

कई फुटनोट

या “मेरी वजह से ठोकर नहीं खाता।”
या “बढ़िया।”
शा., “तेरे चेहरे के सामने।”
या “उन्हें जो मार्गदर्शन दिया था।”
या “बुद्धि की जीत होती है।”
या “मेज़ से टेक लगाए बैठा है।”

अध्ययन नोट

सेना-अफसर: या “शतपति।” एक रोमी शतपति के अधीन करीब 100 सैनिक होते थे।

कुछ ही समय बाद: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों में लिखा है, “अगले दिन।” लेकिन यहाँ जो लिखा है, उसका और भी ठोस आधार हस्तलिपियों में पाया जाता है।

नाईन: गलील प्रदेश का एक शहर। यह कफरनहूम से करीब 35 कि.मी. (22 मील) दूर दक्षिण-पश्‍चिम में था और ज़ाहिर है कि यीशु वहीं से आ रहा था। (लूक 7:1-10) मसीही यूनानी शास्त्र में सिर्फ यहाँ पर नाईन का ज़िक्र आया है। माना जाता है कि आज जहाँ नेईन नाम का गाँव है वहीं नाईन शहर हुआ करता था। नेईन गाँव, मोरे पहाड़ी के उत्तर-पश्‍चिम में और नासरत से करीब 10 कि.मी. (6 मील) दूर दक्षिण-पूरब में है। आज यह गाँव बहुत छोटा है, मगर आस-पास के खंडहरों से पता चलता है कि बीती सदियों में यह काफी बड़ा था। नाईन के सामने यिजरेल का मैदान था और चारों तरफ का नज़ारा बहुत खूबसूरत था। इसी बढ़िया जगह पर यीशु ने पहली बार एक मरे हुए व्यक्‍ति को ज़िंदा किया था। बाकी दो मरे हुओं को यीशु ने कफरनहूम और बैतनियाह में ज़िंदा किया था। (लूक 8:49-56; यूह 11:1-44) इस घटना के करीब 900 साल पहले, पास के शूनेम नगर में भविष्यवक्‍ता एलीशा ने एक शूनेमी औरत के बेटे को ज़िंदा किया था।​—2रा 4:8-37.

शहर के फाटक: यूनानी शब्द पॉलिस (“शहर”) नाईन के लिए तीन बार इस्तेमाल हुआ है। इस शब्द का आम तौर पर मतलब होता है, किलेबंद शहर। लेकिन नाईन के चारों तरफ शहरपनाह थी या नहीं, यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। अगर शहरपनाह नहीं थी तो शायद “फाटक” का मतलब है, वह जगह जहाँ से रास्ता नाईन के अंदर जाता था। लेकिन कुछ पुरातत्ववेत्ताओं का मानना है कि नाईन के चारों तरफ शहरपनाह थी। जो भी हो, यीशु और उसके चेले, लाश को ले जानेवाली भीड़ से उस फाटक पर मिले होंगे जो नाईन के पूरब में था। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि आज के नेईन गाँव के दक्षिण-पूरब में एक पहाड़ी है जहाँ कब्रें होती थीं।

अकेला: यूनानी शब्द मोनोजीनेस का अनुवाद आम तौर पर “इकलौता” किया गया है और इसका मतलब है, “उसके जैसा और कोई नहीं; एक अकेला; किसी वर्ग या जाति का एकमात्र या अकेला सदस्य; अनोखा।” यह शब्द बेटे या बेटी का माता-पिता के साथ रिश्‍ता समझाने के लिए इस्तेमाल होता है। इस संदर्भ में इस शब्द का मतलब है, इकलौता बच्चा। यही यूनानी शब्द याइर की “इकलौती” बेटी और उस लड़के के लिए इस्तेमाल हुआ जिसके बारे में कहा गया है कि वह अपने पिता का “एक ही” बेटा था और जिसे यीशु ने ठीक किया था। (लूक 8:41, 42; 9:38) यूनानी सेप्टुआजेंट में शब्द मोनोजीनेस यिप्तह की बेटी के लिए इस्तेमाल हुआ है, जिसके बारे में लिखा है, “वह उसकी इकलौती औलाद थी, उसके सिवा यिप्तह के न तो कोई बेटा था न बेटी।” (न्या 11:34) प्रेषित यूहन्‍ना की किताबों में मोनोजीनेस पाँच बार यीशु के लिए इस्तेमाल हुआ है।​—यीशु के सिलसिले में इस शब्द का मतलब जानने के लिए यूह 1:14; 3:16 के अध्ययन नोट देखें।

तड़प उठा: या “करुणा महसूस की।” इन शब्दों के लिए यूनानी क्रिया स्प्लैगख्नी-ज़ोमाइ इस्तेमाल हुई है, जो यूनानी शब्द स्प्लैगख्ना (मतलब “अंतड़ियों”) से संबंधित है। इसका मतलब एक ऐसी भावना है जो दिल की गहराइयों से उठती है। यूनानी में यह शब्द गहरी और कोमल करुणा के लिए इस्तेमाल होता है।

अपने दो चेलों: इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मत 11:2, 3 में बस यह लिखा है कि यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने “अपने चेलों” को भेजा। मगर लूका ने यह बताया कि उसने कितने चेलों को भेजा।

तुम्हें . . . बपतिस्मा देता हूँ: या “डुबकी लगवाता हूँ।” यूनानी शब्द बपटाइज़ो का मतलब है, “गोता लगाना।” बाइबल को समझानेवाली दूसरी किताबें बताती हैं कि बपतिस्मे में पानी के अंदर पूरी तरह जाना शामिल है। एक बार यूहन्‍ना सालीम के पास यरदन घाटी में लोगों को बपतिस्मा दे रहा था “क्योंकि वहाँ बहुत पानी था।” (यूह 3:23) जब फिलिप्पुस इथियोपिया के खोजे को बपतिस्मा देनेवाला था तो “वे दोनों पानी में उतरे।” (प्रेष 8:38) सेप्टुआजेंट में 2रा 5:14 में यूनानी शब्द बपटाइज़ो ही इस्तेमाल हुआ है, जहाँ बताया गया है कि नामान ने ‘यरदन नदी में सात बार डुबकी लगायी।’

बपतिस्मा . . . इस बात की निशानी ठहरेगा कि उन्होंने . . . पश्‍चाताप किया है: शा., “पश्‍चाताप का बपतिस्मा।” बपतिस्मे से लोगों के पाप नहीं धुल जाते थे। इसके बजाय यूहन्‍ना ऐसे लोगों को बपतिस्मा देता था जो मूसा के कानून के खिलाफ किए अपने पापों का खुलकर पश्‍चाताप करते थे और ठान लेते थे कि वे अपनी ज़िंदगी में बदलाव करेंगे। पश्‍चाताप करने का उनका यह रवैया उन्हें मसीह तक ले गया। (गल 3:24) इस तरह यूहन्‍ना लोगों को तैयार कर रहा था ताकि वे देख सकें कि “परमेश्‍वर कैसे उद्धार करता है।”​—लूक 3:3-6; मत 3:2, 8, 11 के अध्ययन नोट और शब्दावली में “बपतिस्मा; बपतिस्मा देना”; “पश्‍चाताप” देखें।

बपतिस्मा: यूनानी शब्द बापतिस्मा का मतलब है, “डुबकी।”​—मत 3:11; मर 1:4 के अध्ययन नोट देखें।

अपने सारे नतीजों: शा., “अपने सारे बच्चों।” मूल यूनानी पाठ में बुद्धि को ऐसे बताया गया है मानो वह एक व्यक्‍ति हो और उसके बच्चे हैं। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मत 11:19 में बुद्धि के “कामों” का ज़िक्र किया गया है। बुद्धि के बच्चे या काम, वे सबूत हैं जो यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले और यीशु ने दिए थे और जिनसे उन पर लगाए गए इलज़ाम झूठे साबित हुए। एक तरह से यीशु कह रहा था, ‘मेरे नेक काम और मेरा चालचलन देखो, तो तुम जान जाओगे कि ये इलज़ाम झूठे हैं।’

फरीसी . . . यीशु उसके घर गया: खुशखबरी की किताबों के चारों लेखकों में से सिर्फ लूका ने बताया कि यीशु को अलग-अलग फरीसियों ने खाने पर बुलाया और वह उनके घर गया। ऐसे दूसरे वाकये लूक 11:37; 14:1 में दर्ज़ हैं।

एक बदनाम औरत थी, जिसके बारे में सब जानते थे कि वह एक पापिन है: बाइबल बताती है कि सभी इंसान पापी हैं। (2इत 6:36; रोम 3:23; 5:12) इसलिए यहाँ “पापिन” शब्द का एक खास मतलब है। ज़ाहिर है कि पापिन या पापी शब्द ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो पाप करने के लिए जाने जाते थे। वे शायद नैतिक उसूल तोड़ते थे या अपराध करते थे। (लूक 19:7, 8) इस औरत से जुड़ी घटना के बारे में सिर्फ लूका ने लिखा। यह औरत शायद वेश्‍या थी और इसने यीशु के पैरों पर तेल उँडेला था। जिन यूनानी शब्दों का अनुवाद “जिसके बारे में सब जानते थे” किया गया है, उनका शाब्दिक अनुवाद है “जो।” लेकिन यहाँ संदर्भ से पता चलता है कि उन शब्दों का शायद मतलब है, एक इंसान का कोई खास गुण या अवगुण, या उसका स्वभाव, या फिर वह किस वर्ग या समूह का है।

पाप: शा., “कर्ज़।” जब कोई किसी व्यक्‍ति के खिलाफ पाप करता है तो यह ऐसा है मानो उसने उस व्यक्‍ति से कर्ज़ लिया हो, जो उसे हर हाल में चुकाना है यानी उसे माफी माँगनी है। एक इंसान को परमेश्‍वर की तरफ से तभी माफी मिलेगी, जब वह अपने कर्ज़दारों यानी अपने खिलाफ पाप करनेवालों को माफ करेगा।​—मत 6:14, 15; 18:35; लूक 11:4.

उसका सारा कर्ज़ माफ कर दिया: कर्ज़ का लाक्षणिक मतलब पाप भी हो सकता है।​—मत 6:12 का अध्ययन नोट देखें।

जो भी हमारे खिलाफ पाप करके हमारा कर्ज़दार बन जाता है: जब कोई किसी व्यक्‍ति के खिलाफ पाप करता है तो यह ऐसा है मानो उसने उस व्यक्‍ति से कर्ज़ लिया हो, जो उसे हर हाल में चुकाना है यानी उसे माफी माँगनी है। पहाड़ी उपदेश देते समय यीशु ने जो आदर्श प्रार्थना बतायी, उसमें उसने मूल यूनानी भाषा में पाप के बजाय “कर्ज़” शब्द इस्तेमाल किया। (मत 6:12 का अध्ययन नोट देखें।) माफ कर दे के यूनानी शब्द का शाब्दिक मतलब है, “जाने देना” यानी कर्ज़ चुकाने की माँग करने के बजाय छोड़ देना।

दो आदमी . . . कर्ज़दार थे: पहली सदी के यहूदी जानते थे कि देनदारों और कर्ज़दारों के बीच कैसा नाता होता है। यीशु ने कभी-कभी अपनी मिसालों में इस बात का ज़िक्र किया। (मत 18:23-35; लूक 16:1-8) दो कर्ज़दारों की यह मिसाल सिर्फ लूका ने दर्ज़ की। इस मिसाल में एक पर दूसरे से दस गुना ज़्यादा कर्ज़ था। यीशु ने यह मिसाल अपने मेज़बान शमौन का रवैया देखकर दी। शमौन ने उस औरत के प्रति सही रवैया नहीं दिखाया जिसने उसके घर आकर यीशु के पैरों पर तेल उँडेला था। (लूक 7:36-40) यीशु ने पाप की तुलना उस बड़े कर्ज़ से की जिसे चुकाया नहीं जा सकता था और यह सिद्धांत सिखाया: “जिसके कम पाप माफ किए गए, वह कम प्यार करता है।”​—लूक 7:47; मत 6:12; 18:27; लूक 11:4 के अध्ययन नोट देखें।

दीनार: चाँदी का रोमी सिक्का जिसका वज़न करीब 3.85 ग्रा. था। इसके एक तरफ कैसर की सूरत बनी होती थी। जैसे मत 20:2 से पता चलता है, यीशु के ज़माने में खेतों में काम करनेवाले मज़दूरों को दिन के 12 घंटे काम करने के लिए एक दीनार दिया जाता था।​—शब्दावली और अति. ख14 देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

महल
महल

जब यीशु ने उन लोगों की बात की जो “महलों” में (लूक 7:25) या “राजाओं के महलों” में (मत 11:8) रहते हैं, तो सुननेवालों को उन आलीशान महलों की याद आयी होगी जो हेरोदेस महान ने बनवाए थे। यहाँ तसवीर में शीत महल के एक हिस्से के खंडहर दिखाए गए हैं, जो उसने यरीहो में बनवाया था। इस महल में 95 फुट (29 मी.) लंबा और 62 फुट (19 मी.) चौड़ा खंभोंवाला एक स्वागत कक्ष था, खंभोंवाले आँगन थे जिनके चारों तरफ बहुत-से कमरे थे और एक स्नानघर था जिसमें पानी को ठंडा और गरम करने की व्यवस्था थी। वहाँ एक सीढ़ीनुमा बगीचा था जो महल से लगा हुआ था। जब यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाले ने प्रचार करना शुरू किया था, तो उसके कई सालों पहले एक विद्रोह हुआ था, जिसमें शायद यह महल जला दिया गया था। इसे हेरोदेस के बेटे अरखिलाउस ने फिर से बनवाया था।

बाज़ार
बाज़ार

कुछ बाज़ार सड़क पर लगते थे, जैसे यहाँ चित्र में दिखाया गया है। दुकानदार इतना सामान लगा देते थे कि रास्ता जाम हो जाता था। आस-पास के लोग बाज़ार से घरेलू सामान, मिट्टी के बरतन, काँच की महँगी चीज़ें और ताज़ी साग-सब्ज़ियाँ भी खरीदते थे। उस ज़माने में फ्रिज नहीं होते थे, इसलिए लोगों को खाने-पीने की चीज़ें खरीदने हर दिन बाज़ार जाना होता था। बाज़ार में लोगों को व्यापारियों या दूसरी जगहों से आए लोगों से खबरें भी मिल जाती थीं, यहाँ बच्चे खेलते थे और बेरोज़गार लोग इंतज़ार करते थे कि कोई उन्हें काम दे। बाज़ार में यीशु ने बीमारों को ठीक किया और पौलुस ने लोगों को प्रचार किया। (प्रेष 17:17) लेकिन घमंडी शास्त्रियों और फरीसियों को ऐसी सार्वजनिक जगहों पर लोगों की नज़रों में छाना और उनसे नमस्कार सुनना अच्छा लगता था।

हड्डी से बनी बाँसुरी
हड्डी से बनी बाँसुरी

बाइबल के ज़माने में बाँसुरी नरकट या वच पौधे, यहाँ तक कि हड्डी या हाथी-दाँत की भी बनायी जाती थी। बाँसुरी सबसे पसंदीदा साज़ था। इसे दावतों और शादियों जैसे खुशी के मौकों पर बजाने का दस्तूर था। (1रा 1:40; यश 5:12; 30:29) इस दस्तूर की नकल करते हुए बच्चे सार्वजनिक जगहों पर बाँसुरी बजाते थे। मातम के समय भी बाँसुरी बजायी जाती थी। जब किराए पर बुलाए गए मातम मनानेवाले रोते थे तो बाँसुरी बजानेवाले दर्द-भरी धुनें बजाते थे। यहाँ तसवीर में जो बाँसुरी दिखायी गयी है वह यरूशलेम के मलबे में पायी गयी थी। बताया जाता है कि यह बाँसुरी उस समय की है जब रोमी लोगों ने मंदिर का नाश किया था। यह करीब 15 सें.मी. (6 इंच) लंबी है और मुमकिन है कि यह गाय के अगले पैर की हड्डी से बनायी गयी थी।

सिलखड़ी की बोतल
सिलखड़ी की बोतल

शुरू में इत्र की ये छोटी-छोटी बोतलें एक ऐसे पत्थर से बनायी जाती थीं, जो मिस्र में अलबास्त्रोन नाम की जगह के पास पाया जाता था। यह पत्थर कैल्शियम कार्बोनेट का एक रूप है। बाद में यह अलबास्त्रोन के नाम से जाना गया। यहाँ दिखायी गयी बोतल मिस्र में पायी गयी थी और यह ईसा पूर्व 150 और ईसवी सन्‌ 100 के बीच की है। इससे मिलती-जुलती बोतलें जिप्सम जैसे कम कीमतवाले पत्थरों से भी बनायी जाती थीं। इन्हें भी सिलखड़ी (अँग्रेज़ी में अलबास्तर) कहा जाता था, क्योंकि इनमें भी इत्र भरा जाता था। लेकिन कीमती तेल और इत्र के लिए ऐसी बोतलें इस्तेमाल की जाती थीं जो असली सिलखड़ी पत्थर से बनी थीं। जैसे, वह तेल जिससे दो बार यीशु का अभिषेक किया गया था, एक बार जब वह गलील में एक फरीसी के घर में था और दूसरी बार तब, जब वह बैतनियाह में शमौन के घर में था, जो पहले कोढ़ी था।