लूका के मुताबिक खुशखबरी 9:1-62

9  फिर यीशु ने अपने 12 चेलों को बुलाया और उन्हें सब दुष्ट स्वर्गदूतों पर अधिकार दिया+ और शक्‍ति दी कि वे लोगों में से उन्हें निकालें और बीमारियाँ ठीक करें।+  और उन्हें परमेश्‍वर के राज का प्रचार करने और चंगा करने भेजा।  उसने उनसे कहा, “सफर के लिए कुछ मत लेना, न लाठी, न खाने की पोटली, न रोटी, न पैसे, न ही दो जोड़ी कपड़े लेना।+  मगर जब भी तुम किसी घर में जाओ, तो वहीं ठहरो और वहीं से विदा लो।+  अगर किसी शहर में लोग तुम्हें स्वीकार न करें, तो वहाँ से बाहर निकलते वक्‍त अपने पैरों की धूल झाड़ देना ताकि उनके खिलाफ गवाही हो।”+  तब वे पूरे इलाके में गाँव-गाँव जाकर खुशखबरी सुनाते रहे और हर कहीं लोगों को चंगा करते गए।+  जब ज़िला-शासक हेरोदेस ने सुना कि क्या-क्या हो रहा है, तो वह बड़ी उलझन में पड़ गया। इसलिए कि यीशु के बारे में कुछ लोग कहते थे कि वह यूहन्‍ना है जो मर गया था और जिसे अब ज़िंदा कर दिया गया है।+  जबकि दूसरे उसके बारे में कहते थे कि एलियाह प्रकट हुआ है, मगर कुछ और कहते थे कि पुराने भविष्यवक्‍ताओं में से कोई ज़िंदा हो गया है।+  हेरोदेस ने कहा, “यूहन्‍ना का तो मैंने सिर कटवा दिया था।+ तो फिर, यह कौन है जिसके बारे में मैं ऐसी बातें सुन रहा हूँ?” इसलिए वह यीशु को देखना चाहता था।+ 10  जब प्रेषित लौटे तो आकर यीशु को बताने लगे कि उन्होंने क्या-क्या किया है।+ तब वह उन्हें साथ लेकर बैतसैदा नाम के शहर में, किसी एकांत जगह के लिए निकल गया।+ 11  मगर भीड़ को इसका पता चल गया और वह उसके पीछे गयी। यीशु उन सबसे प्यार से मिला और उन्हें परमेश्‍वर के राज के बारे में बताने लगा और जिन्हें इलाज की ज़रूरत थी, उन्हें ठीक किया।+ 12  फिर दिन ढलने लगा और वे 12 उसके पास आए और कहने लगे, “भीड़ को भेज दे ताकि वे आस-पास के गाँवों और देहातों में जाकर अपने खाने और ठहरने का इंतज़ाम करें, क्योंकि हम यहाँ सुनसान जगह में हैं।”+ 13  मगर यीशु ने उनसे कहा, “तुम्हीं उन्हें कुछ खाने को दो।”+ उन्होंने कहा, “हमारे पास पाँच रोटियों और दो मछलियों के सिवा कुछ नहीं है। क्या तू यह चाहता है कि हम खुद जाकर इन सब लोगों के लिए खाना खरीदकर लाएँ?” 14  दरअसल वहाँ करीब 5,000 आदमी थे। यीशु ने अपने चेलों से कहा, “उन्हें पचास-पचास की टोलियों में बिठा दो।” 15  उन्होंने ऐसा ही किया और सबको बिठा दिया। 16  तब उसने पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ लीं और आकाश की तरफ देखकर प्रार्थना में धन्यवाद दिया। फिर उन्हें तोड़कर चेलों को देने लगा ताकि वे भीड़ के सामने परोस दें। 17  तब सब लोगों ने जी-भरकर खाया और उन्होंने बचे हुए टुकड़े उठाए जिनसे 12 टोकरियाँ भर गयीं।+ 18  बाद में जब यीशु अकेले में प्रार्थना कर रहा था, तब चेले उसके पास आए।* उसने चेलों से पूछा, “लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं, मैं कौन हूँ?”+ 19  उन्होंने कहा, “कुछ कहते हैं, यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला, दूसरे कहते हैं एलियाह और कुछ कहते हैं पुराने ज़माने के भविष्यवक्‍ताओं में से कोई ज़िंदा हो गया है।”+ 20  तब यीशु ने उनसे पूछा, “लेकिन तुम क्या कहते हो, मैं कौन हूँ?” पतरस ने जवाब दिया, “तू परमेश्‍वर का भेजा हुआ मसीह है।”+ 21  तब उसने उन्हें सख्ती से कहा कि यह बात किसी को न बताएँ+ 22  और यह भी कहा, “इंसान के बेटे को कई दुख-तकलीफें सहनी पड़ेंगी और मुखिया, प्रधान याजक और शास्त्री उसे ठुकरा देंगे और वह मार डाला जाएगा।+ फिर तीसरे दिन उसे ज़िंदा कर दिया जाएगा।”+ 23  तब यीशु ने सबसे कहा, “अगर कोई मेरे पीछे आना चाहता है, तो वह खुद से इनकार करे+ और हर दिन अपना यातना का काठ उठाए और मेरे पीछे चलता रहे।+ 24  क्योंकि जो कोई अपनी जान बचाना चाहता है वह उसे खोएगा, मगर जो कोई मेरी खातिर अपनी जान गँवाता है वही उसे बचाएगा।+ 25  वाकई, अगर एक इंसान सारी दुनिया हासिल कर ले मगर अपनी जान गँवा बैठे या वह बरबाद हो जाए, तो उसे क्या फायदा?+ 26  इसलिए कि जो कोई मेरा चेला होने और मेरे वचनों पर विश्‍वास करने में शर्मिंदा महसूस करता है, उसे इंसान का बेटा भी उस वक्‍त स्वीकार करने में शर्मिंदा महसूस करेगा जब वह अपनी, अपने पिता की और पवित्र स्वर्गदूतों की महिमा के साथ आएगा।+ 27  मगर मैं तुमसे सच कहता हूँ कि यहाँ जो खड़े हैं, उनमें से कुछ ऐसे हैं जो तब तक मौत का मुँह नहीं देखेंगे, जब तक कि वे परमेश्‍वर के राज को न देख लें।”+ 28  दरअसल यह कहने के करीब आठ दिन बाद ऐसा हुआ कि वह पतरस, यूहन्‍ना और याकूब को अपने साथ लेकर प्रार्थना करने के लिए एक पहाड़ पर चढ़ गया।+ 29  जब वह प्रार्थना कर रहा था, तो उसके चेहरे का रूप बदल गया और उसके कपड़े सफेद होकर जगमगाने* लगे। 30  और देखो! दो आदमी उससे बात कर रहे थे। वे मूसा और एलियाह थे। 31  वे पूरी महिमा के साथ दिखायी दिए और यीशु की विदाई के बारे में बात करने लगे, जो बहुत जल्द यरूशलेम से होनेवाली थी।+ 32  पतरस और उसके साथी नींद से बोझिल थे। मगर जब वे पूरी तरह जाग गए, तो उन्होंने यीशु की महिमा देखी+ और दो आदमियों को उसके साथ खड़ा देखा। 33  जब वे दोनों यीशु के पास से जाने लगे, तो पतरस ने उससे कहा, “गुरु, हम बहुत खुश हैं कि हम यहाँ आए। इसलिए हमें तीन तंबू खड़े करने दे, एक तेरे लिए, एक मूसा के लिए और एक एलियाह के लिए।” पतरस नहीं जानता था कि वह क्या कह रहा है। 34  जब वह बोल ही रहा था, तो एक बादल उभरा और उन पर छाने लगा।+ बादल के घिरने से वे घबरा गए। 35  उस बादल में से आवाज़ आयी:+ “यह मेरा बेटा है, जिसे मैंने चुना है।+ इसकी सुनो।”+ 36  जब वह आवाज़ आयी, तो उन्होंने देखा कि यीशु वहाँ अकेला है। उन्होंने वहाँ जो देखा था उसमें से एक भी बात कुछ समय तक किसी को नहीं बतायी और इस बारे में वे चुप रहे।+ 37  अगले दिन जब वे पहाड़ से नीचे उतरे, तो एक बड़ी भीड़ उसके पास आयी।+ 38  तभी अचानक भीड़ में से एक आदमी ने ज़ोर से पुकारा, “गुरु, मैं तुझसे बिनती करता हूँ एक नज़र मेरे बेटे को देख ले, वह मेरा एक ही बेटा है।+ 39  उसे एक दुष्ट स्वर्गदूत जकड़ लेता है और अचानक वह चीखने लगता है। वह दूत उसे ऐसे मरोड़ता है कि वह झाग उगलने लगता है और उसे घायल करने के बाद बड़ी मुश्‍किल से छोड़ता है।+ 40  मैंने तेरे चेलों से उसे निकालने की बिनती की मगर वे नहीं निकाल सके।” 41  तब यीशु ने कहा, “अरे अविश्‍वासी और टेढ़े लोगो,*+ मैं और कब तक तुम्हारे साथ रहूँ? कब तक तुम्हारी सहूँ? अपने बेटे को यहाँ ला।”+ 42  जब लड़का आ रहा था, तो दुष्ट स्वर्गदूत ने उसे ज़मीन पर पटक दिया और बुरी तरह मरोड़ा। लेकिन यीशु ने उस दुष्ट स्वर्गदूत को फटकारा और लड़के को ठीक कर दिया और उसके पिता को सौंप दिया। 43  परमेश्‍वर की यह महाशक्‍ति देखकर सब लोग दंग रह गए।+ जब वे उसके सब कामों पर ताज्जुब कर रहे थे, तो उसने अपने चेलों से कहा, 44  “मैं जो बताने जा रहा हूँ उस पर कान लगाओ। इंसान के बेटे के साथ विश्‍वासघात किया जाएगा और उसे लोगों के हवाले कर दिया जाएगा।”+ 45  मगर चेले अब भी उसकी बात का मतलब नहीं समझे थे। दरअसल इस बात का मतलब उनसे छिपाया गया था ताकि वे इसे समझ न सकें और वे इस बारे में उससे सवाल पूछने से भी डर रहे थे। 46  इसके बाद उनमें यह बहस छिड़ गयी कि उनमें सबसे बड़ा कौन है।+ 47  तब यीशु ने यह जानते हुए कि वे अपने दिलों में क्या सोच रहे हैं, एक छोटे बच्चे को अपने पास खड़ा किया 48  और उनसे कहा, “जो कोई मेरे नाम से इस छोटे बच्चे को स्वीकार करता है वह मुझे भी स्वीकार करता है। और जो मुझे स्वीकार करता है वह उसे भी स्वीकार करता है जिसने मुझे भेजा है।+ इसलिए कि तुममें से जो अपने आपको बाकियों से छोटा समझकर चलता है, वही तुम सब में बड़ा है।”+ 49  यूहन्‍ना ने कहा, “गुरु, हमने देखा कि एक आदमी तेरा नाम लेकर लोगों में समाए दुष्ट स्वर्गदूतों को निकाल रहा था और हमने उसे रोकने की कोशिश की, क्योंकि वह हमारे साथ नहीं चलता।*+ 50  मगर यीशु ने उससे कहा, “उसे रोकने की कोशिश मत करो क्योंकि जो तुम्हारे खिलाफ नहीं, वह तुम्हारे साथ है।” 51  जब वह वक्‍त पास आ रहा था* कि वह ऊपर उठा लिया जाए,+ तब उसने यरूशलेम जाने की ठान ली।+ 52  इसलिए उसने कुछ चेलों को अपने आगे-आगे भेजा। वे सामरियों के एक गाँव में गए ताकि उसके लिए तैयारियाँ करें। 53  मगर गाँववालों ने यीशु को कोई जगह नहीं दी+ क्योंकि वह यरूशलेम जाने की ठान चुका था। 54  यह देखकर चेले याकूब और यूहन्‍ना+ ने कहा, “प्रभु* अगर तेरी इजाज़त हो, तो क्या हम हुक्म दें कि आकाश से आग बरसे और इन्हें भस्म कर दे?”+ 55  मगर उसने पलटकर उन्हें डाँटा। 56  तब वे किसी और गाँव में चले गए। 57  जब वे सड़क पर जा रहे थे, तो किसी ने यीशु से कहा, “तू जहाँ कहीं जाएगा मैं तेरे साथ चलूँगा।”+ 58  मगर यीशु ने उससे कहा, “लोमड़ियों की माँदें और आकाश के पंछियों के बसेरे होते हैं, मगर इंसान के बेटे के पास कहीं सिर टिकाने की भी जगह नहीं है।”+ 59  तब उसने एक और से कहा, “मेरा चेला बन जा।” उस आदमी ने कहा, “प्रभु, मुझे इजाज़त दे कि मैं जाकर पहले अपने पिता को दफना दूँ।”+ 60  मगर यीशु ने उससे कहा, “मुरदों+ को अपने मुरदे दफनाने दे, मगर तू जाकर परमेश्‍वर के राज का ऐलान कर।”+ 61  फिर किसी और ने कहा, “हे प्रभु, मैं तेरा चेला ज़रूर बनूँगा, मगर मुझे इजाज़त दे कि पहले अपने घरवालों को अलविदा कह दूँ।” 62  यीशु ने उससे कहा, “कोई भी इंसान जो हल पर हाथ रखने के बाद, पीछे छोड़ी हुई चीज़ों को मुड़कर देखता है,+ वह परमेश्‍वर के राज के लायक नहीं।”+

कई फुटनोट

या शायद, “उसके साथ हो लिए; उसके साथ थे।”
या “कपड़े बिजली की तरह चमकने।”
शा., “टेढ़ी पीढ़ी।” या “भ्रष्ट पीढ़ी; दुष्ट पीढ़ी।”
या “हमारे साथ होकर तेरे पीछे नहीं चलता।”
शा., “जब दिन पूरे होने पर थे।”
या “मालिक।”

अध्ययन नोट

जूतियाँ: ऐसा मालूम होता है कि यीशु यहाँ एक और जोड़ी जूती की बात कर रहा था क्योंकि उसने चेलों से कहा कि अपने साथ . . . न ही जूतियाँ लेना। लंबे सफर में एक और जोड़ी जूती ले जाना आम था, क्योंकि अगर एक जोड़ी घिस गयी या फीते टूट गए तो दूसरी जोड़ी पहनी जा सकती थी। यीशु ने पहले जब इसी से मिलती-जुलती हिदायतें दी थीं, तब चेलों से कहा था कि उनके पास जो जूतियाँ हैं उन्हें वे “कस [या “पहन”] लें।” (मर 6:8, 9) और जैसे मत 10:9, 10 में लिखा है, उसने चेलों को यह भी हिदायत दी कि उनके पास जो एक जोड़ी जूती है उसके अलावा वे दूसरी जोड़ी न लें।

सफर के लिए कुछ मत लेना: जब यीशु अपने प्रेषितों को “परमेश्‍वर के राज” का प्रचार करने के लिए भेजनेवाला था (लूक 9:2), तो उसने उन्हें हिदायतें दीं कि उन्हें यह खास काम कैसे करना है। ये हिदायतें खुशखबरी की तीनों समदर्शी किताबों में दर्ज़ हैं। (मत 10:8-10; मर 6:8, 9, फु.; लूक 9:3) हालाँकि इन हिदायतों के शब्दों में थोड़ा-बहुत फर्क है, मगर मतलब एक ही है। वह यह कि प्रेषितों को ज़्यादा चीज़ें नहीं ले जानी थीं, नहीं तो उनका ध्यान भटक सकता था। उन्हें भरोसा रखना था कि यहोवा उनकी ज़रूरतें पूरी करेगा। तीनों किताबों में बताया गया है कि प्रेषितों को ‘दो जोड़ी कपड़े नहीं लेने [या ‘पहनने’] थेयानी उन्होंने जो कपड़े पहन रखे थे, उसके अलावा एक और जोड़ी कपड़े नहीं ले जाने थे। ऐसा मालूम होता है कि सफर में लाठी ले जाना इब्री लोगों का दस्तूर था (उत 32:10) और मर 6:8 बताता है, “वे सफर के लिए एक लाठी को छोड़ और कुछ न लें।” इसलिए लूक 9:3 में दी हिदायत (“सफर के लिए कुछ मत लेना, न लाठी . . . लेना”) का यह मतलब नहीं कि उन्हें बिना लाठी के जाना था बल्कि इसका मतलब था कि उनके पास जो लाठी थी, बस वही ले जानी थी। उन्हें सफर में दूसरी लाठी नहीं ले जानी थी या दूसरी लाठी कहीं और से नहीं लानी थी। यीशु अपने चेलों से कह रहा था कि वे सफर में ज़्यादा सामान न ले जाएँ, क्योंकि उनकी जो भी ज़रूरतें होंगी, यहोवा उन्हें पूरी करेगा।​—लूक 10:4 का अध्ययन नोट देखें, जहाँ यीशु एक दूसरे मौके पर इन्हीं से मिलती-जुलती हिदायतें देकर अपने 70 चेलों को प्रचार के लिए भेजता है।

पैसे: शा., “चाँदी” जिसे पैसे की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

वहाँ तब तक ठहरो जब तक तुम उस इलाके में रहो: यीशु अपने चेलों को हिदायत दे रहा था कि जब वे किसी नगर में पहुँचें, तो जिस घर में उनकी मेहमान-नवाज़ी की जाती है, उन्हें उसी घर में रुकना चाहिए। उन्हें “घर-पर-घर बदलते” नहीं रहना चाहिए। (लूक 10:1-7) उन्हें ऐसे घर की तलाश नहीं करनी चाहिए जहाँ ज़्यादा सहूलियतें या मन-बहलाव के इंतज़ाम हों। अगर वे यीशु की हिदायत मानते तो वे दिखाते कि उनके लिए आराम से ज़्यादा प्रचार काम मायने रखता है।

वहीं ठहरो: मर 6:10 का अध्ययन नोट देखें।

अपने पैरों की धूल झाड़ देना: धर्मी होने का दम भरनेवाले यहूदी जब गैर-यहूदियों के देश से सफर करके आते थे, तो अपने इलाकों में घुसने से पहले पैरों की धूल झाड़ देते थे क्योंकि वे सोचते थे कि उस देश की मिट्टी अशुद्ध है। लेकिन ज़ाहिर है कि जब यीशु ने अपने चेलों को यह हिदायत दी तो उसके मन में यह बात नहीं थी। चेलों का ऐसा करना दिखाता कि परमेश्‍वर उस घर के लोगों का जो न्याय करता उसके लिए वे ज़िम्मेदार नहीं होते। ये शब्द मत 10:14 और मर 6:11 में भी पाए जाते हैं। इन शब्दों के साथ-साथ मरकुस ने यह भी लिखा: “ताकि उन्हें गवाही मिले,” जबकि लूका ने लिखा: ताकि उनके खिलाफ गवाही हो। पौलुस और बरनबास जब पिसिदिया इलाके के अंताकिया शहर में थे तो उन्होंने भी यह हिदायत मानी। (प्रेष 13:51) पौलुस जब कुरिंथ में था तो उसने कुछ इससे मिलता-जुलता ही किया। उसने अपने कपड़े झाड़े और वहाँ के लोगों से कहा, “तुम्हारा खून तुम्हारे ही सिर पड़े। मैं निर्दोष हूँ।”​—प्रेष 18:6.

ज़िला-शासक: शा., “तित्रअर्खेस” (मतलब, किसी प्रांत के “चौथाई हिस्से का शासक”)। यह उपाधि एक छोटे ज़िला-शासक या एक इलाके के हाकिम को दी जाती थी, जो रोमी अधिकारियों की मंज़ूरी से ही शासन करता था। हेरोदेस अन्तिपास को गलील और पेरिया पर शासन करने का अधिकार दिया गया था।​—मर 6:14 के अध्ययन नोट से तुलना करें।

हेरोदेस: यानी हेरोदेस महान का बेटा हेरोदेस अन्तिपास।​—शब्दावली देखें।

ज़िला-शासक: मत 14:1 का अध्ययन नोट देखें।

हेरोदेस: मत 14:1 का अध्ययन नोट देखें।

यीशु अकेले में प्रार्थना कर रहा था: यह घटना कैसरिया फिलिप्पी के पास घटी। (मत 16:13; मर 8:27) सिर्फ लूका इस बारे में बताता है कि यीशु अकेले में प्रार्थना कर रहा था।

बपतिस्मा देनेवाला: या “डुबकी लगवानेवाला।” ज़ाहिर है कि यह यूहन्‍ना का एक उपनाम बन गया था, जिससे पता चलता है कि वह ही पानी में डुबकी लगवाकर बपतिस्मा देता था। यहूदी इतिहासकार फ्लेवियस जोसीफस ने लिखा: “यूहन्‍ना जिसका उपनाम था बपतिस्मा देनेवाला।”

यूहन्‍ना: इब्रानी में यहोहानान या योहानान। इस नाम का मतलब है, “यहोवा ने मदद की; यहोवा ने कृपा की।”

एलियाह: एक इब्रानी नाम जिसका मतलब है, “मेरा परमेश्‍वर यहोवा है।”

यूहन्‍ना बपतिस्मा देनेवाला: मत 3:1 का अध्ययन नोट देखें।

एलियाह: मत 11:14 का अध्ययन नोट देखें।

वह खुद से इनकार करे: इससे पता चलता है कि एक इंसान को अपनी ज़िंदगी पर जो अधिकार होता है उसे वह खुशी-खुशी त्याग दे या परमेश्‍वर को दे दे। इसमें अपनी इच्छाएँ, सुख-सुविधाएँ या अपने लक्ष्यों का त्याग करना भी शामिल हो सकता है। (2कुर 5:14, 15) यहाँ जो यूनानी क्रिया इस्तेमाल हुई है, मत्ती ने वही क्रिया उन आयतों में इस्तेमाल की जिनमें उसने बताया कि पतरस यीशु को जानने से इनकार करेगा और ऐसा करने के बाद वह इस बात को याद करता है।​—मत 26:34, 35, 75.

यातना का काठ: या “मौत का काठ।” प्राचीन यूनानी भाषा में यूनानी शब्द स्टौरोस का खास तौर से मतलब है, सीधा काठ या खंभा। यह शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है और कभी-कभी इसका मतलब है, यीशु का चेला होने की वजह से यातना, दुख-तकलीफें, शर्मिंदगी, यहाँ तक कि मौत सहना।​—शब्दावली देखें।

वह खुद से इनकार करे: इससे पता चलता है कि एक इंसान को अपनी ज़िंदगी पर जो अधिकार होता है उसे वह खुशी-खुशी त्याग दे या परमेश्‍वर को दे दे। इसमें अपनी इच्छाएँ, सुख-सुविधाएँ या अपने लक्ष्यों का त्याग करना भी शामिल हो सकता है। (2कुर 5:14, 15) यहाँ ‘इनकार करने’ के लिए जो यूनानी क्रिया इस्तेमाल हुई है, लूका ने वही क्रिया और उससे संबंधित एक और क्रिया लूक 22:34, 57, 61 में इस्तेमाल की। इन आयतों में उसने लिखा: यीशु ने कहा कि पतरस उसे जानने से इनकार करेगा, पतरस ने ऐसा ही किया, जिसके बाद उसने यीशु की बात याद की।​—मत 16:24 का अध्ययन नोट देखें।

यातना का काठ: मत 16:24 का अध्ययन नोट देखें।

जान: शब्दावली में “जीवन” देखें।

यह कहने के करीब आठ दिन बाद: मत्ती और मरकुस के ब्यौरे में लिखा है, “छ: दिन बाद।” (मत 17:1; मर 9:2) लूका ने आठ दिन इसलिए लिखे, क्योंकि उसने शायद वह दिन भी शामिल किया जब यीशु ने वादा किया था (लूक 9:27) और वह दिन भी, जब उसका रूप बदला था। लेकिन मत्ती और मरकुस ने इन दोनों दिनों के बीच का समय लिखा, यानी पूरे छ: दिन। यह भी गौर करनेवाली बात है कि लूका ने मोटे तौर पर समय बताया और उसने लिखा, “करीब आठ दिन।”

प्रार्थना करने के लिए: यीशु का रूप बदला था, यह ब्यौरा लिखते वक्‍त सिर्फ लूका ने यीशु के प्रार्थना करने के बारे में बताया। अगली आयत में भी लिखा है कि यीशु “प्रार्थना कर रहा था।” (लूक 9:29) ऐसे और भी उदाहरण हैं जिनमें सिर्फ लूका ने यीशु को प्रार्थना करते हुए बताया: लूक 3:21; 5:16; 6:12; 9:18; 11:1; 23:46.

यीशु की विदाई: यहाँ इस्तेमाल हुआ यूनानी शब्द एक्सोडोस 2पत 1:15 (चले जाने) और इब्र 11:22 (निकल जाएँगे) में भी इस्तेमाल हुआ है। ज़ाहिर है कि यीशु की विदाई में उसकी मौत और उसके बाद अदृश्‍य प्राणी के तौर पर उसका ज़िंदा किया जाना दोनों शामिल हैं।

स्वर्ग से यह आवाज़ सुनायी दी: खुशखबरी की किताबों में बताया गया है कि यहोवा ने तीन मौकों पर सीधे-सीधे इंसानों से बात की और यह पहला मौका था।​—लूक 9:35; यूह 12:28 के अध्ययन नोट देखें।

उस बादल में से आवाज़ आयी: खुशखबरी की किताबों में बताया गया है कि यहोवा ने तीन मौकों पर सीधे-सीधे इंसानों से बात की और यह दूसरा मौका था।​—लूक 3:22; यूह 12:28 के अध्ययन नोट देखें।

एक ही: यूनानी शब्द मोनोजीनेस का अनुवाद आम तौर पर “इकलौता” किया गया है और इसका मतलब है, “उसके जैसा और कोई नहीं; एक अकेला; किसी वर्ग या जाति का एकमात्र या अकेला सदस्य; अनोखा।” यह शब्द बेटे या बेटी का माता-पिता के साथ रिश्‍ता समझाने के लिए इस्तेमाल होता है। इस संदर्भ में इस शब्द का मतलब है, इकलौता बच्चा। यही यूनानी शब्द नाईन की विधवा के बेटे के लिए, जो उसका “अकेला बेटा” था और याइर की “इकलौती” बेटी के लिए भी इस्तेमाल हुआ है। (लूक 7:12; 8:41, 42) यूनानी सेप्टुआजेंट में शब्द मोनोजीनेस यिप्तह की बेटी के लिए इस्तेमाल हुआ है, जिसके बारे में लिखा है: “वह उसकी इकलौती औलाद थी, उसके सिवा यिप्तह के न तो कोई बेटा था न बेटी।” (न्या 11:34) प्रेषित यूहन्‍ना की किताबों में मोनोजीनेस पाँच बार यीशु के लिए इस्तेमाल हुआ है।​—यीशु के सिलसिले में इस शब्द का मतलब जानने के लिए यूह 1:14; 3:16 के अध्ययन नोट देखें।

परमेश्‍वर की यह महाशक्‍ति: या “परमेश्‍वर की महानता (का प्रताप)।” यीशु जब बीमार लोगों को ठीक करता था, तो वह इसका श्रेय खुद को नहीं देता था। इसके बजाय, वह बताता था कि उसने ये चमत्कार परमेश्‍वर की शक्‍ति से किए हैं।

वह ऊपर उठा लिया जाए: यूनानी शब्द अनालैंपसिस मसीही यूनानी शास्त्र में सिर्फ यहीं आया है। आम तौर पर इस शब्द को इस तरह समझा गया है, यीशु का स्वर्ग जाना। इससे जुड़ी क्रिया प्रेष 1:2, 11, 22 में इस्तेमाल हुई है, जहाँ इसका अनुवाद “उठा लिया गया” किया गया है।

वह यरूशलेम जाने की ठान चुका था: शा., “उसका चेहरा यरूशलेम जा रहा था; उसका चेहरा यरूशलेम की तरफ लगा था।” (लूक 9:51 से तुलना करें।) इन्हीं से मिलते-जुलते शब्द इब्रानी शास्त्र में भी आए हैं और उनका मतलब है, कोई लक्ष्य या मकसद या इच्छा होना (1रा 2:15, फु.; 2रा 12:17, फु.) और इसे पूरा करने का पक्का इरादा करना या ठान लेना।​—2इत 20:3; दान 11:17.

प्रभु: कुछ हस्तलिपियों में यह शब्द नहीं लिखा गया है, लेकिन यहाँ लिखे जाने का आधार शुरू की कई अधिकृत हस्तलिपियों में पाया जाता है।

अपने पिता को दफना दूँ: ज़ाहिर है कि इन शब्दों का यह मतलब नहीं कि उस आदमी के पिता की अभी-अभी मौत हुई थी और वह उसे दफनाने की तैयारी करने की गुज़ारिश कर रहा था। अगर यह मतलब होता तो वह वहाँ यीशु से बात नहीं कर रहा होता। प्राचीन मध्य पूर्वी देशों में परिवार में जब किसी की मौत होती थी, तो लाश को जल्द-से-जल्द या आम तौर पर उसी दिन दफना दिया जाता था। इसलिए कहा जा सकता है कि उस आदमी का पिता मरा नहीं था बल्कि शायद बीमार या बूढ़ा था। इसके अलावा, उसके पिता की देखभाल करने के लिए ज़रूर परिवार में दूसरे लोग रहे होंगे, वरना यीशु उस आदमी से अपने बीमार या बुज़ुर्ग पिता को छोड़कर आने के लिए नहीं कहता। (मर 7:9-13) एक तरह से वह आदमी कह रहा था, ‘मैं तेरे पीछे आऊँगा, लेकिन अभी नहीं क्योंकि मेरा पिता ज़िंदा है। जब उसकी मौत हो जाएगी और मैं उसे दफना दूँगा, तब तेरे पीछे आऊँगा।’ लेकिन यीशु की नज़र में वह आदमी परमेश्‍वर के राज के कामों को ज़िंदगी में पहली जगह देने का मौका गँवा रहा था।​—लूक 9:60, 62.

अपने पिता को दफना दूँ: ज़ाहिर है कि इन शब्दों का यह मतलब नहीं कि उस आदमी के पिता की अभी-अभी मौत हुई थी और वह उसे दफनाने की तैयारी करने की गुज़ारिश कर रहा था। अगर यह मतलब होता तो वह वहाँ यीशु से बात नहीं कर रहा होता। प्राचीन मध्य पूर्वी देशों में परिवार में जब किसी की मौत होती थी, तो लाश को जल्द-से-जल्द या आम तौर पर उसी दिन दफना दिया जाता था। इसलिए कहा जा सकता है कि उस आदमी का पिता मरा नहीं था बल्कि शायद बीमार या बूढ़ा था। इसके अलावा, उसके पिता की देखभाल करने के लिए ज़रूर परिवार में दूसरे लोग रहे होंगे, वरना यीशु उस आदमी से अपने बीमार या बुज़ुर्ग पिता को छोड़कर आने के लिए नहीं कहता। (मर 7:9-13) एक तरह से वह आदमी कह रहा था, ‘मैं तेरे पीछे आऊँगा, लेकिन अभी नहीं क्योंकि मेरा पिता ज़िंदा है। जब उसकी मौत हो जाएगी और मैं उसे दफना दूँगा, तब तेरे पीछे आऊँगा।’ लेकिन यीशु की नज़र में वह आदमी परमेश्‍वर के राज के कामों को ज़िंदगी में पहली जगह देने का मौका गँवा रहा था।​—लूक 9:60, 62.

मुरदों को अपने मुरदे दफनाने दे: जैसे लूक 9:59 के अध्ययन नोट में बताया गया है, यीशु जिस आदमी से बात कर रहा था उसका पिता मरा नहीं था बल्कि शायद बीमार या बूढ़ा था। इसलिए ज़ाहिर है कि यीशु कह रहा था, ‘जो लाक्षणिक तौर पर मरे हुए हैं, उन्हें अपने मुरदे दफनाने दे।’ इसका मतलब, उस आदमी को यह ज़िम्मेदारी अपने रिश्‍तेदारों पर छोड़ देनी चाहिए थी कि वे उसके पिता की देखभाल करें और मौत होने पर उसे दफना दें। अगर वह आदमी यीशु का चेला बनता, तो उसे हमेशा की ज़िंदगी की आशा मिलती और वह उन लोगों में नहीं गिना जाता, जो परमेश्‍वर की नज़र में मरे हुए थे। यीशु ने अपनी बात से ज़ाहिर किया कि परमेश्‍वर की नज़र में ज़िंदा रहने के लिए ज़रूरी है कि एक व्यक्‍ति परमेश्‍वर के राज को ज़िंदगी में पहली जगह दे और उसके बारे में दूर-दूर तक ऐलान करे।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

लाठी और खाने की पोटली
लाठी और खाने की पोटली

प्राचीन समय के इब्री लोग आम तौर पर अपने पास लाठी या डंडा रखते थे। यह कई तरह से काम में आता था, जैसे सहारे के लिए (निर्ग 12:11; जक 8:4; इब्र 11:21), बचाव या लड़ने के लिए (2शमू 23:21), दाँवने के लिए (यश 28:27) और जैतून के पेड़ झाड़ने के लिए ताकि फल गिर सकें (व्य 24:20; यश 24:13)। खाने की पोटली एक थैला होता था, जो आम तौर पर चमड़े का होता था। मुसाफिर, चरवाहे, किसान और दूसरे लोग इसे अपने कंधे पर टाँग लेते थे। इसमें खाना, कपड़े और दूसरी चीज़ें रखी जाती थीं। यीशु ने जब अपने प्रेषितों को प्रचार के लिए भेजा, तो उसने उन्हें लाठी और खाने की पोटली के बारे में भी हिदायतें दीं। प्रेषितों के पास जो चीज़ें थीं बस वही लेकर उन्हें जाना था और यहोवा उनका खयाल रखता। अगर वे कुछ और लेने की कोशिश करते तो प्रचार से उनका ध्यान भटक सकता था।​—यीशु की हिदायतों का क्या मतलब था, यह जानने के लिए लूक 9:3 और 10:4 के अध्ययन नोट देखें।

हेरोदेस अन्तिपास का ढलवाया सिक्का
हेरोदेस अन्तिपास का ढलवाया सिक्का

यहाँ जिस सिक्के को दोनों तरफ से दिखाया गया है वह ताँबे और दूसरी धातुओं से मिलकर बना है। यह सिक्का करीब उस समय ढाला गया था जब यीशु प्रचार कर रहा था। यह सिक्का हेरोदेस अन्तिपास ने चलवाया था, जो गलील और पेरिया का तित्रअर्खेस यानी ज़िला-शासक था। एक बार जब फरीसियों ने यीशु को बताया कि हेरोदेस उसे मार डालना चाहता है, तो उस वक्‍त यीशु शायद हेरोदेस के शासन-क्षेत्र पेरिया से होकर यरूशलेम जा रहा था। यह सुनकर यीशु ने हेरोदेस को “उस लोमड़ी” कहा। (लूक 13:32 का अध्ययन नोट देखें।) हेरोदेस की ज़्यादातर प्रजा यहूदी थी और वे सिक्कों को देखकर न चिढ़ें, इसलिए उसने ऐसे सिक्के ढलवाए जिन पर खजूर की डाली (1) और पत्तों का ताज (2) बना होता था।

टोकरी और टोकरा
टोकरी और टोकरा

बाइबल में अलग-अलग तरह की टोकरियों के लिए अलग-अलग शब्द इस्तेमाल हुए हैं। जब यीशु ने करीब 5,000 आदमियों को खाना खिलाया, तो बचा हुआ खाना 12 टोकरियों में इकट्ठा किया गया। इन टोकरियों के लिए जो यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है, उसका मतलब हाथ से उठायी जानेवाली छोटी टोकरियाँ हो सकता है। लेकिन जब यीशु ने करीब 4,000 लोगों को खाना खिलाया था, तो जिन सात टोकरों में बचा हुआ खाना रखा गया, उनके लिए एक अलग यूनानी शब्द इस्तेमाल हुआ है, जिसका मतलब है, बड़े टोकरे। (मर 8:8, 9) यही यूनानी शब्द उस टोकरे के लिए इस्तेमाल हुआ, जिसमें पौलुस को बिठाकर दमिश्‍क की शहरपनाह से नीचे उतारा गया था।​—प्रेष 9:25.

हेरमोन पहाड़
हेरमोन पहाड़

हेरमोन, इसराएली इलाके का सबसे ऊँचा पहाड़ है। इसकी ऊँचाई करीब 9,232 फुट (2,814 मी.) है और यह कैसरिया फिलिप्पी के पास है। जब नम हवा हेरमोन पहाड़ की बर्फीली चोटियों से होकर गुज़रती थी, तो उससे ओस बनती थी। यही ओस लंबे समय तक चलनेवाले सूखे मौसम में पेड़-पौधों को सींचती थी जिससे वे हरे-भरे रहते थे। (भज 133:3) इसकी पिघली हुई बर्फ यरदन नदी का मुख्य स्रोत है। एक संभावना है कि इस पहाड़ पर यीशु का रूप बदला था।​—मत 17:2.

हूला घाटी आरक्षित क्षेत्र से हेरमोन पहाड़ का नज़ारा
हूला घाटी आरक्षित क्षेत्र से हेरमोन पहाड़ का नज़ारा

हेरमोन पहाड़ वादा किए हुए देश की उत्तरी छोर पर है। इस पहाड़ पर कई चोटियाँ हैं जो साफ नज़र आती हैं। सबसे ऊँची चोटी समुद्र-तल से 9,232 फुट (2,814 मी.) की ऊँचाई पर है। इन्हीं चोटियों से पूर्वी लबानोन पर्वतमाला का दक्षिणी हिस्सा बनता है। मुमकिन है कि हेरमोन पहाड़ पर यीशु का रूप बदला था।

लोमड़ियों की माँदें और पंछियों के घोंसले
लोमड़ियों की माँदें और पंछियों के घोंसले

यीशु ने अपने हालात की तुलना जानवरों से करते हुए कहा कि लोमड़ियों की माँदें और पंछियों के बसेरे होते हैं, लेकिन उसका अपना कोई घर नहीं है। यहाँ जिस प्रजाति की लोमड़ी (वल्पीज़ वल्पीज़ ) दिखायी गयी है वह न सिर्फ मध्य पूर्वी देशों में बल्कि अफ्रीका, एशिया, यूरोप और उत्तर अमरीका में भी पायी जाती है। इस प्रजाति को ऑस्ट्रेलिया भी लाया गया है। लोमड़ियाँ आम तौर पर ज़मीन खोदकर अपनी माँद बनाती हैं। लेकिन कभी-कभी वे चट्टान की दरारों में या दूसरे जानवरों के खाली बिलों में रहती हैं या कई बार वे ज़बरदस्ती उनमें रहने लगती हैं। पंछियों की बात लें, तो अनुमान लगाया गया है कि इसराएल में साल के अलग-अलग मौसम में 470 किस्म के पंछी पाए जाते हैं। उनमें से एक है, चेट्टी वॉर्ब्लर (चेटिया चेट्टी )। पंछियों के घोंसले भी अलग-अलग किस्म के होते हैं। वे पेड़ों पर, पेड़ के कोटर में या चट्टान पर अपना घोंसला बनाते हैं। वे अपना घोंसला टहनियों, पत्तियों, समुद्री पौधों, ऊन, अनाज के डंठलों, काई और पंखों वगैरह से बनाते हैं। इसराएल में कहीं पहाड़ों की चोटियाँ हैं जहाँ कड़ाके की ठंड पड़ती है, तो कहीं गहरी घाटियाँ हैं जो काफी गरम होती हैं और कहीं सूखा रेगिस्तान है, तो कहीं समुद्र-तट के मैदान। यह सब भूमध्य सागर के दक्षिण-पूर्व में पाया जाता है। ये सारी चीज़ें पंछियों को आकर्षित करती हैं जो या तो हमेशा के लिए यहाँ रहते हैं या फिर यहाँ के अलग-अलग इलाकों में प्रवास करते हैं।

हल जोतना
हल जोतना

अकसर पतझड़ के मौसम में खेतों में हल चलाया जाता था। वह इसलिए क्योंकि गरमियों में तपती धूप की वजह से ज़मीन सख्त हो जाती थी, लेकिन बारिश में ज़मीन नरम हो जाती थी और इसके बाद जुताई करना आसान होता था। (अति. ख15 देखें।) आम तौर पर हल लकड़ी का बना होता था। इसका निचला हिस्सा नुकीला होता था, जिसके सिरे पर शायद धातु लगी होती थी। हल को एक या उससे ज़्यादा जानवर खींचते थे। जुताई के बाद बीज बोया जाता था। इस काम से लोग वाकिफ थे और इब्रानी शास्त्र में लाक्षणिक तौर पर भी हल जोतने का ज़िक्र मिलता है। (न्या 14:18; यश 2:4; यिर्म 4:3; मी 4:3) यीशु ने भी कई मौकों पर लोगों को अहम बातें सिखाने के लिए खेती-बाड़ी से जुड़े कामों के बारे में बताया। मिसाल के लिए, उसने हल जोतने की बात कहकर यह समझाया कि उसका चेला बनने में क्या शामिल है। (लूक 9:62) अगर हल जोतनेवाले का ध्यान भटक जाए, तो हल से बननेवाली रेखाएँ टेढ़ी हो जाएँगी। उसी तरह, अगर मसीह के एक चेले का ध्यान भटक जाए या वह अपनी ज़िम्मेदारी निभाने से चूक जाए, तो वह परमेश्‍वर के राज के लायक नहीं रहेगा।