मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 26:1-75

26  जब यीशु ये सारी बातें बता चुका, तो उसने अपने चेलों से कहा,  “तुम जानते हो कि अब से दो दिन बाद फसह का त्योहार है+ और इंसान के बेटे को काठ पर लटकाकर मार डालने के लिए सौंप दिया जाएगा।”+  तब प्रधान याजक और लोगों के मुखिया, कैफा नाम के महायाजक के आँगन में इकट्ठा हुए।+  उन्होंने मिलकर साज़िश की+ कि कैसे यीशु को छल* से पकड़ें* और मार डालें।  मगर वे कह रहे थे, “त्योहार के वक्‍त नहीं ताकि लोग हंगामा न मचा दें।”  यीशु बैतनियाह में शमौन के घर में था, जो पहले एक कोढ़ी था।+  जब वह खाना खा रहा था,* तो एक औरत उसके पास खुशबूदार तेल की बोतल लेकर आयी जो बहुत महँगा था। वह उसके सिर पर तेल उँडेलने लगी।  यह देखकर चेले भड़क उठे और कहने लगे, “यह औरत क्यों तेल बरबाद कर रही है?  इसे ऊँचे दामों में बेचकर पैसा गरीबों को दिया जा सकता था।” 10  यीशु ने यह जानकर कि वे आपस में क्या बात कर रहे हैं कहा, “तुम इस औरत को क्यों परेशान कर रहे हो? इसने तो मेरी खातिर एक बढ़िया काम किया है। 11  गरीब तो हमेशा तुम्हारे साथ होंगे,+ मगर मैं हमेशा तुम्हारे साथ नहीं रहूँगा।+ 12  इसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर मेरे दफनाए जाने की तैयारी की है।+ 13  मैं तुमसे सच कहता हूँ, सारी दुनिया में जहाँ कहीं खुशखबरी का प्रचार किया जाएगा, वहाँ इस औरत की याद में इसके काम की चर्चा की जाएगी।”+ 14  फिर उन बारहों में से एक, जो यहूदा इस्करियोती+ कहलाता था, प्रधान याजकों के पास गया+ 15  और उसने उनसे कहा, “अगर मैं उसे तुम्हारे हाथों पकड़वा दूँ, तो तुम मुझे क्या दोगे?”+ उन्होंने कहा कि वे उसे चाँदी के 30 सिक्के देंगे।+ 16  तब से यहूदा, यीशु को पकड़वाने के लिए सही मौका ढूँढ़ने लगा। 17  बिन-खमीर की रोटी के त्योहार+ के पहले दिन, चेले यीशु के पास आए और उससे पूछने लगे, “तू कहाँ चाहता है कि हम तेरे लिए फसह का खाना खाने की तैयारी करें?”+ 18  उसने कहा, “शहर में फलाँ-फलाँ आदमी के पास जाओ और उससे कहो, ‘गुरु कहता है, “मेरे लिए तय किया गया वक्‍त पास आ गया है। मैं अपने चेलों के साथ तेरे घर में फसह का त्योहार मनाऊँगा।”’” 19  तब चेलों ने ठीक वैसा ही किया जैसा यीशु ने उनसे कहा था और फसह की तैयारी की। 20  जब शाम हुई+ तो वह अपने 12 चेलों के साथ खाना खाने बैठा।*+ 21  जब वे खा रहे थे, तो उसने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ, तुममें से एक मेरे साथ विश्‍वासघात करके मुझे पकड़वा देगा।”+ 22  यह सुनकर वे बहुत दुखी हुए और एक-एक करके उससे पूछने लगे, “प्रभु, वह मैं तो नहीं हूँ न?” 23  उसने कहा, “जो मेरे साथ कटोरे में हाथ डालता है, वही मेरे साथ विश्‍वासघात करेगा।+ 24  यह सच है कि इंसान का बेटा तो जा ही रहा है, ठीक जैसा उसके बारे में लिखा है, मगर उस आदमी का बहुत बुरा होगा+ जो इंसान के बेटे के साथ विश्‍वासघात करके उसे पकड़वा देगा!+ उस आदमी के लिए अच्छा तो यह होता कि वह पैदा ही न हुआ होता।”+ 25  तब यहूदा ने, जो उसके साथ गद्दारी करनेवाला था, उससे कहा, “रब्बी, वह मैं तो नहीं हूँ न?” यीशु ने उससे कहा, “तूने खुद कह दिया है।” 26  जब वे खाना खा रहे थे, तो यीशु ने एक रोटी ली और प्रार्थना में धन्यवाद देकर उसे तोड़ा+ और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ। यह मेरे शरीर की निशानी है।”+ 27  फिर उसने एक प्याला लिया और प्रार्थना में धन्यवाद देकर उन्हें दिया और कहा, “तुम सब इसमें से पीओ+ 28  क्योंकि यह मेरे खून की निशानी है,+ जो करार को पक्का करता है+ और जो बहुतों के पापों की माफी के लिए बहाया जाएगा।+ 29  मगर मैं तुमसे कहता हूँ, अब से मैं यह दाख-मदिरा उस दिन तक हरगिज़ नहीं पीऊँगा, जिस दिन मैं अपने पिता के राज में तुम्हारे साथ नयी दाख-मदिरा न पीऊँ।”+ 30  आखिर में उन्होंने परमेश्‍वर की तारीफ में गीत गाए और फिर जैतून पहाड़ की तरफ निकल गए।+ 31  इसके बाद यीशु ने उनसे कहा, “आज की रात मेरे साथ जो होगा उसकी वजह से तुम सबका विश्‍वास डगमगा जाएगा* क्योंकि लिखा है, ‘मैं चरवाहे को मारूँगा और झुंड की भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी।’+ 32  लेकिन जब मुझे ज़िंदा कर दिया जाएगा, तो मैं तुमसे पहले गलील जाऊँगा।”+ 33  मगर पतरस ने उससे कहा, “तेरे साथ जो होगा उसकी वजह से चाहे बाकी सबका विश्‍वास डगमगा जाए, मगर मेरा विश्‍वास कभी नहीं डगमगाएगा।”+ 34  यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे सच कहता हूँ, इसी रात मुर्गे के बाँग देने से पहले तू तीन बार मुझे जानने से इनकार कर देगा।”+ 35  पतरस ने उससे कहा, “चाहे मुझे तेरे साथ मरना पड़े, तब भी मैं तुझे जानने से हरगिज़ इनकार नहीं करूँगा।”+ बाकी सभी चेलों ने भी यही कहा। 36  तब यीशु अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम की जगह आया+ और उसने चेलों से कहा, “मैं वहाँ प्रार्थना करने जा रहा हूँ, तुम यहीं बैठे रहना।”+ 37  और उसने पतरस और जब्दी के दोनों बेटों+ को अपने साथ लिया। उसका जी बहुत बेचैन हो उठा और वह दुख से बेहाल होने लगा।+ 38  तब उसने उनसे कहा, “मेरा मन बहुत दुखी है, यहाँ तक कि मेरी मरने जैसी हालत हो रही है। तुम यहीं ठहरो और मेरे साथ जागते रहो।”+ 39  फिर वह थोड़ा आगे गया और मुँह के बल गिरकर यह प्रार्थना करने लगा,+ “मेरे पिता, अगर हो सके तो यह प्याला+ मेरे सामने से हटा दे। फिर भी मेरी मरज़ी नहीं बल्कि तेरी मरज़ी पूरी हो।”+ 40  जब वह अपने चेलों के पास वापस आया, तो उसने देखा कि वे सो रहे हैं। उसने पतरस से कहा, “क्या तुम लोग मेरे साथ थोड़ी देर के लिए भी नहीं जाग सके?+ 41  जागते रहो+ और प्रार्थना करते रहो+ ताकि तुम परीक्षा में न पड़ो।+ दिल तो बेशक तैयार* है, मगर शरीर कमज़ोर है।”+ 42  फिर वह दूसरी बार गया और यह कहकर प्रार्थना करने लगा, “मेरे पिता, अगर मुझे यह प्याला पीना ही है और इसे हटाया नहीं जा सकता, तो तेरी मरज़ी पूरी हो।”+ 43  वह फिर चेलों के पास आया और उसने उन्हें सोता हुआ पाया क्योंकि उनकी आँखें नींद से बोझिल थीं। 44  तब वह उन्हें वहीं छोड़कर एक बार फिर गया और तीसरी बार भी उसने वही प्रार्थना की। 45  इसके बाद वह फिर अपने चेलों के पास आया और उसने कहा, “तुम ऐसे वक्‍त में सो रहे हो और आराम कर रहे हो! देखो, वह घड़ी आ गयी है कि इंसान के बेटे के साथ विश्‍वासघात करके उसे पापियों के हाथ सौंप दिया जाए। 46  उठो, आओ चलें। देखो, मुझसे गद्दारी करनेवाला पास आ गया है।” 47  वह बोल ही रहा था कि तभी यहूदा आ गया, जो उन बारहों में से एक था। उसके साथ तलवारें और लाठियाँ लिए हुए लोगों की एक बड़ी भीड़ थी जिसे प्रधान याजकों और लोगों के मुखियाओं ने भेजा था।+ 48  उसके साथ विश्‍वासघात करनेवाले ने उन्हें यह कहकर एक निशानी दी थी, “जिसे मैं चूमूँगा, वही है। उसे गिरफ्तार कर लेना।” 49  यहूदा ने सीधे यीशु के पास जाकर उससे कहा, “नमस्कार, रब्बी!” और उसे प्यार से चूमा। 50  मगर यीशु ने उससे कहा, “तू यहाँ किस इरादे से आया है?”+ तब उन्होंने आगे बढ़कर यीशु को पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। 51  मगर तभी जो यीशु के साथ थे उनमें से एक ने हाथ बढ़ाकर अपनी तलवार खींची और महायाजक के दास पर वार करके उसका कान उड़ा दिया।+ 52  तब यीशु ने उससे कहा, “अपनी तलवार म्यान में रख ले,+ इसलिए कि जो तलवार उठाते हैं वे तलवार से ही नाश किए जाएँगे।+ 53  क्या तुझे नहीं लगता कि मैं अपने पिता से यह बिनती कर सकता हूँ कि वह इसी पल स्वर्गदूतों की 12 से भी ज़्यादा पलटनें मेरे पास भेज दे?+ 54  ऐसे में शास्त्र में लिखी यह बात कैसे पूरी होगी कि यह सबकुछ होना ज़रूरी है?” 55  तब यीशु ने भीड़ से कहा, “क्या तुम तलवारें और लाठियाँ लेकर मुझे गिरफ्तार करने आए हो, मानो मैं कोई लुटेरा हूँ? मैं हर दिन मंदिर में बैठकर सिखाया करता था,+ फिर भी तुमने मुझे हिरासत में नहीं लिया।+ 56  मगर यह सब इसलिए हुआ है ताकि भविष्यवक्‍ताओं ने जो लिखा है वह पूरा हो।”*+ तब सारे चेले उसे छोड़कर भाग गए।+ 57  जिन लोगों ने यीशु को गिरफ्तार किया वे उसे महायाजक कैफा+ के पास ले गए, जहाँ शास्त्री और मुखिया इकट्ठा थे।+ 58  मगर पतरस कुछ दूरी पर रहकर यीशु के पीछे-पीछे गया और महायाजक के आँगन तक आ गया। अंदर जाने के बाद वह घर के सेवकों के साथ बैठ गया कि देखे आगे क्या होगा।+ 59  प्रधान याजक और पूरी महासभा यीशु को मार डालने के लिए उसके खिलाफ झूठी गवाही ढूँढ़ रही थी।+ 60  बहुत-से झूठे गवाह आए मगर एक भी ऐसी गवाही नहीं मिली, जिससे यीशु को दोषी ठहराया जाए।+ बाद में दो गवाह आए 61  और उन्होंने कहा, “इस आदमी ने कहा था, ‘मैं परमेश्‍वर के मंदिर को ढा सकता हूँ और तीन दिन के अंदर इसे खड़ा कर सकता हूँ।’”+ 62  यह सुनकर महायाजक उठ गया और उसने यीशु से कहा, “क्या तू जवाब में कुछ नहीं कहेगा? क्या तू सुन नहीं रहा कि ये तुझ पर क्या-क्या इलज़ाम लगा रहे हैं?”+ 63  मगर तब भी यीशु चुप रहा।+ महायाजक ने फिर उससे कहा, “मैं तुझे जीवित परमेश्‍वर की शपथ दिलाता हूँ, हमें बता, क्या तू परमेश्‍वर का बेटा मसीह है?”+ 64  यीशु ने उससे कहा, “तूने खुद कह दिया है। फिर भी मैं तुम लोगों से कहता हूँ, अब से तुम इंसान के बेटे को शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ बैठा+ और आकाश के बादलों पर आता देखोगे।”+ 65  तब महायाजक ने यह कहते हुए अपना चोगा फाड़ा, “इसने परमेश्‍वर की निंदा की है!+ अब हमें और गवाहों की क्या ज़रूरत है? देखो! तुम लोगों ने ये निंदा की बातें सुनी हैं। 66  तुम्हारी क्या राय है?” उन्होंने कहा, “यह मौत की सज़ा के लायक है।”+ 67  इसके बाद, उन्होंने यीशु के मुँह पर थूका+ और उसे घूँसे मारे।+ दूसरों ने यह कहते हुए उसके मुँह पर थप्पड़ मारे,+ 68  “अरे मसीह, भविष्यवाणी कर, हममें से किसने तुझे मारा?” 69  पतरस बाहर आँगन में बैठा हुआ था। तब एक दासी उसके पास आकर कहने लगी, “तू भी उस यीशु गलीली के साथ था!”+ 70  मगर उसने सबके सामने इनकार करते हुए कहा, “मैं नहीं जानता तू क्या कह रही है।” 71  जब वह बाहर निकलकर आँगन के द्वार की तरफ गया, तो एक और लड़की ने उसे देखकर वहाँ मौजूद लोगों से कहा, “यह आदमी यीशु नासरी के साथ था।”+ 72  एक बार फिर वह शपथ खाकर इनकार करने लगा, “मैं उस आदमी को नहीं जानता!” 73  थोड़ी देर बाद आस-पास खड़े लोग पतरस के पास आकर उससे कहने लगे, “बेशक तू भी उनमें से एक है, तेरी बोली तेरा राज़ खोल रही है।” 74  तब वह खुद को कोसने लगा और कसम खाकर कहने लगा, “मैं उस आदमी को नहीं जानता!” उसी घड़ी एक मुर्गे ने बाँग दी। 75  तब पतरस को यीशु की वह बात याद आयी, “मुर्गे के बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझे जानने से इनकार कर देगा।”+ और वह बाहर जाकर फूट-फूटकर रोने लगा।

कई फुटनोट

या “धोखे; चालाकी।”
या “गिरफ्तार करें।”
या “मेज़ से टेक लगाए बैठा था।”
या “मेज़ से टेक लगाए बैठा।”
शा., “तुम ठोकर खाओगे।”
या “उत्सुक।”
या “भविष्यवक्‍ताओं के वचन पूरे हों।”

अध्ययन नोट

यीशु बैतनियाह में: ज़ाहिर है कि मत 26:6-13 में बतायी घटना सूरज ढलने के बाद हुई जब नीसान 9 शुरू हुआ। इसका सुराग हमें यूहन्‍ना के ब्यौरे से मिलता है, जहाँ लिखा है कि यीशु “फसह के त्योहार से छ: दिन पहले” बैतनियाह पहुँचा। (यूह 12:1) वह ज़रूर नीसान 8 शुरू होने (यानी सूरज ढलने) से पहले पहुँच गया होगा क्योंकि वह दिन सब्त का दिन था और फिर उसके अगले दिन शमौन के घर खाना खाने गया होगा।​—यूह 12:2-11; अति. क7 और ख12 देखें।

जब: मत 26:1-5 में बतायी घटनाएँ नीसान 12 को हुईं क्योंकि आयत 2 में लिखा है कि “अब से दो दिन बाद [यानी नीसान 14 को] फसह का त्योहार है।”​—अति. क7, ख12 और मत 26:6 का अध्ययन नोट देखें।

इंसान के बेटे: ये शब्द खुशखबरी की किताबों में करीब 80 बार आते हैं। यीशु ने ये शब्द खुद के लिए इस्तेमाल किए। ज़ाहिर है उसने ऐसा इसलिए किया ताकि साबित हो सके कि वह वाकई एक इंसान है और औरत से जन्मा है और आदम के बराबर है। इसलिए उसके पास इंसानों को पाप और मौत से छुड़ाने का अधिकार है। (रोम 5:12, 14, 15) इन शब्दों से यह भी पता चलता है कि यीशु ही मसीहा या मसीह है।​—दान 7:13, 14; शब्दावली में “इंसान का बेटा” देखें।

काठ पर लटकाकर मार डालें: या “खंभे पर लटका दें।” यूनानी क्रिया स्टौरोऊ मसीही यूनानी शास्त्र में 40 बार आयी है और इस आयत में पहली बार इस्तेमाल हुई है। इस क्रिया की यूनानी संज्ञा स्टौरोस है जिसका अनुवाद “यातना का काठ” किया गया है। (मत 10:38; 16:24; 27:32 के अध्ययन नोट और शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें।) सेप्टुआजेंट में यही क्रिया एस 7:9 में इस्तेमाल हुई है, जहाँ हामान को करीब 65 फुट (20 मी.) ऊँचे काठ पर लटकाने का आदेश दिया गया है। प्राचीन यूनानी भाषा में इस क्रिया का मतलब है, “बल्लियाँ गाड़कर या तो बाड़ा बाँधना या सुरक्षा के लिए आड़ बनाना।”

फसह: जिस दिन इसराएली मिस्र से निकले थे उससे पहले की शाम इस त्योहार की शुरूआत की गयी थी। (यूनानी में पासखा जो इब्रानी शब्द पेसाक से निकला है। इसकी इब्रानी क्रिया पासाक का मतलब है, “छोड़कर आगे बढ़ना; पार करना।”) यह त्योहार इसलिए मनाया जाना था ताकि इसराएली याद कर सकें कि कैसे यहोवा ने उन्हें मिस्र की गुलामी से आज़ाद किया और उनके पहलौठों को ‘छोड़ दिया,’ जबकि उसने मिस्र के पहलौठों को मार डाला।​—निर्ग 12:14, 24-47; शब्दावली देखें।

इंसान के बेटे: मत 8:20 का अध्ययन नोट देखें।

काठ पर लटकाकर मार डालने के लिए: या “खंभे पर लटकाए जाने के लिए।”​—मत 20:19 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें।

प्रधान याजकों: इनके लिए इस्तेमाल हुआ यूनानी शब्द जब एकवचन में आया है तो उसका अनुवाद “महायाजक” किया गया है, यानी परमेश्‍वर के सामने जानेवाला लोगों का मुख्य प्रतिनिधि। लेकिन यहाँ यह शब्द बहुवचन में है और इसका मतलब है याजकवर्ग के बड़े-बड़े आदमी। इनमें वे आदमी शामिल हैं जो पहले महायाजक रह चुके थे और शायद वे भी जो याजकों के 24 दलों के मुखिया थे।

मुखियाओं: शा., “बुज़ुर्गों।” बाइबल में यूनानी शब्द प्रेसबाइटेरोस खासकर ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो समाज या देश में अधिकार और ज़िम्मेदारी के पद पर थे। हालाँकि यह शब्द कभी-कभी बड़ी उम्र के लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है (जैसे लूक 15:25 में “बड़ा बेटा” और प्रेष 2:17 में “बुज़ुर्ग”), लेकिन इसका हमेशा यही मतलब नहीं है। यहाँ इस शब्द का मतलब है यहूदी राष्ट्र के अगुवे, जिनका ज़िक्र अकसर प्रधान याजकों और शास्त्रियों के साथ किया जाता है। महासभा इन्हीं तीन समूहों के आदमियों से मिलकर बनी होती थी।​—मत 21:23; 26:3, 47, 57; 27:1, 41; 28:12; शब्दावली में “मुखिया; बुज़ुर्ग” देखें।

प्रधान याजक: मत 2:4 का अध्ययन नोट और शब्दावली देखें।

मुखिया: मत 16:21 का अध्ययन नोट देखें।

कैफा: कैफा को रोमी अधिकारियों ने करीब ईसवी सन्‌ 18 में महायाजक ठहराया था और वह ईसवी सन्‌ 36 तक इस पद पर रहा। राजनेताओं के साथ उसके अच्छे संबंध थे, इसलिए वह पिछले महायाजकों के मुकाबले ज़्यादा समय तक महायाजक रहा।​—कैफा का घर किस जगह रहा होगा, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।

महायाजक: जब इसराएल एक स्वतंत्र राष्ट्र था तो जो महायाजक होता था वह अपनी मौत तक उस पद पर बना रहता था। (गि 35:25) लेकिन जब इसराएल पर रोम का कब्ज़ा हुआ तब रोमी शासकों के पास यह अधिकार था कि वे किसी को भी महायाजक ठहरा सकते हैं या इस पद से हटा सकते हैं।​—शब्दावली देखें।

एक कोढ़ी: एक गंभीर चर्मरोग से पीड़ित व्यक्‍ति। बाइबल में जिस कोढ़ का ज़िक्र मिलता है वह आज के कोढ़ जैसा नहीं था। जब किसी को कोढ़ हो जाता था तो उसे समाज से निकाल दिया जाता था। ठीक होने के बाद ही वह वापस आ सकता था।​—लैव 13:2, फु., 45, 46; शब्दावली में “कोढ़; कोढ़ी” देखें।

यीशु बैतनियाह में: ज़ाहिर है कि मत 26:6-13 में बतायी घटना सूरज ढलने के बाद हुई जब नीसान 9 शुरू हुआ। इसका सुराग हमें यूहन्‍ना के ब्यौरे से मिलता है, जहाँ लिखा है कि यीशु “फसह के त्योहार से छ: दिन पहले” बैतनियाह पहुँचा। (यूह 12:1) वह ज़रूर नीसान 8 शुरू होने (यानी सूरज ढलने) से पहले पहुँच गया होगा क्योंकि वह दिन सब्त का दिन था और फिर उसके अगले दिन शमौन के घर खाना खाने गया होगा।​—यूह 12:2-11; अति. क7 और ख12 देखें।

शमौन . . . जो पहले एक कोढ़ी था: इस शमौन का ज़िक्र सिर्फ यहाँ और इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मर 14:3 में किया गया है। शायद उसका कोढ़ यीशु ने ठीक किया था।​—मत 8:2 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “कोढ़; कोढ़ी” देखें।

इसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर: इस औरत ने (मत 26:7 का अध्ययन नोट देखें) इसलिए दरियादिली दिखायी क्योंकि उसके दिल में यीशु के लिए प्यार और कदर थी। यीशु ने समझाया कि उसने अनजाने में उसके दफनाए जाने की तैयारी की क्योंकि अकसर लाश को दफनाने से पहले ऐसे खुशबूदार तेल और मसाले लगाए जाते थे।​—2इत 16:14.

एक औरत: यूह 12:3 के मुताबिक, यह औरत मारथा और लाज़र की बहन मरियम है।

खुशबूदार तेल . . . जो बहुत महँगा था: मरकुस और यूहन्‍ना ने अपने ब्यौरे में साफ बताया कि करीब 327 ग्रा. यह तेल “असली जटामाँसी का खुशबूदार तेल था” जिसकी कीमत 300 दीनार थी। यह कीमत एक आम मज़दूर की साल-भर की मज़दूरी होती थी। (मर 14:3-5; यूह 12:3-5) माना जाता है कि यह तेल खुशबूदार पौधे (नार्डोस्टैकिस जटामाँसी) से निकाला जाता था, जो हिमालय पर्वतमाला में पाया जाता है। इसमें अकसर सस्ता तेल मिलाया जाता था या नकली जटामाँसी तेल को असली बताकर बेचा जाता था। लेकिन मरकुस और यूहन्‍ना ने लिखा कि इस ब्यौरे में बताया तेल “असली” था।

बोतल: शब्दावली में “सिलखड़ी” देखें।

उसके सिर पर तेल उँडेलने लगी: मत्ती और मरकुस के मुताबिक, उस औरत ने यीशु के सिर पर तेल उँडेला। (मर 14:3) सालों बाद जब यूहन्‍ना ने यह ब्यौरा लिखा तो उसने एक और बात कही, उस औरत ने यीशु के पैरों पर भी तेल उँडेला। (यूह 12:3) यीशु ने समझाया कि उस औरत ने प्यार की वजह से ऐसा किया और यह उसे दफनाए जाने की तैयारी को दर्शाता था।​—मत 26:12 का अध्ययन नोट देखें।

चेले: सिर्फ यूहन्‍ना ने बताया कि यहूदा इस्करियोती ने मरियम का इस तरह कीमती तेल इस्तेमाल करने पर एतराज़ जताया। (यूह 12:4-7) ज़ाहिर है कि दूसरे प्रेषितों ने बस सहमति जतायी क्योंकि उन्हें लगा कि वह सही है।

एक औरत: यूह 12:3 के मुताबिक, यह औरत मारथा और लाज़र की बहन मरियम है।

इसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर: इस औरत ने (मत 26:7 का अध्ययन नोट देखें) इसलिए दरियादिली दिखायी क्योंकि उसके दिल में यीशु के लिए प्यार और कदर थी। यीशु ने समझाया कि उसने अनजाने में उसके दफनाए जाने की तैयारी की क्योंकि अकसर लाश को दफनाने से पहले ऐसे खुशबूदार तेल और मसाले लगाए जाते थे।​—2इत 16:14.

सच: यूनानी शब्द आमीन, इब्रानी शब्द आमेन से लिया गया है जिसका मतलब है, “ऐसा ही हो” या “ज़रूर।” यीशु अकसर कोई बात, वादा या भविष्यवाणी करने से पहले इस शब्द का इस्तेमाल करता था ताकि वह जो कह रहा है उस पर लोगों को भरोसा हो। यीशु ने जिस तरह “सच” यानी आमीन शब्द का इस्तेमाल किया, वैसा दूसरी धार्मिक किताबों में नहीं हुआ है। जहाँ यह शब्द साथ-साथ आया है (आमीन-आमीन), वहाँ उस शब्द का अनुवाद “सच-सच” किया गया है, जैसे हम यूहन्‍ना की खुशखबरी की किताब में कई बार देख सकते हैं।​—यूह 1:51.

सारे जगत . . . सब राष्ट्रों: इन शब्दों से पता चलता है कि प्रचार काम कितने बड़े पैमाने पर किया जाएगा। “सारे जगत” के यूनानी शब्द (ओइकूमीने) का आम तौर पर मतलब होता है, पृथ्वी। (लूक 4:5; प्रेष 17:31; रोम 10:18; प्रक 12:9; 16:14) पहली सदी में यह शब्द विशाल रोमी साम्राज्य के लिए भी इस्तेमाल होता था, जहाँ यहूदी अलग-अलग जगहों में रहते थे। (लूक 2:1; प्रेष 24:5) “राष्ट्र” के लिए यूनानी शब्द (ईथनोस) का आम तौर पर मतलब होता है, ऐसे लोगों का समूह जिनका एक-दूसरे से खून का रिश्‍ता है और जो एक भाषा बोलते हैं। ऐसे लोग अकसर एक ही देश में रहते हैं।

सच: मत 5:18 का अध्ययन नोट देखें।

सारी दुनिया में जहाँ कहीं . . . प्रचार किया जाएगा: यीशु ने जैसे मत 24:14 में भविष्यवाणी की, वैसे ही उसने यहाँ भी कहा कि खुशखबरी का प्रचार सारी दुनिया में किया जाएगा। उसने यह भी कहा कि इस औरत ने जिस तरह भक्‍ति दिखायी यह बात भी इस खुशखबरी में शामिल की जाएगी। इस औरत ने जो किया उसके बारे में लिखने के लिए परमेश्‍वर ने खुशखबरी की किताबों के तीन लेखकों को प्रेरित किया।​—मर 14:8, 9; यूह 12:7; मत 24:14 का अध्ययन नोट देखें।

जब: मत 26:1-5 में बतायी घटनाएँ नीसान 12 को हुईं क्योंकि आयत 2 में लिखा है कि “अब से दो दिन बाद [यानी नीसान 14 को] फसह का त्योहार है।”​—अति. क7, ख12 और मत 26:6 का अध्ययन नोट देखें।

यीशु बैतनियाह में: ज़ाहिर है कि मत 26:6-13 में बतायी घटना सूरज ढलने के बाद हुई जब नीसान 9 शुरू हुआ। इसका सुराग हमें यूहन्‍ना के ब्यौरे से मिलता है, जहाँ लिखा है कि यीशु “फसह के त्योहार से छ: दिन पहले” बैतनियाह पहुँचा। (यूह 12:1) वह ज़रूर नीसान 8 शुरू होने (यानी सूरज ढलने) से पहले पहुँच गया होगा क्योंकि वह दिन सब्त का दिन था और फिर उसके अगले दिन शमौन के घर खाना खाने गया होगा।​—यूह 12:2-11; अति. क7 और ख12 देखें।

इस्करियोती: शायद इसका मतलब है, “करियोत का रहनेवाला।” यहूदा का पिता शमौन भी “इस्करियोती” कहलाता था। (यूह 6:71) आम तौर पर विद्वानों का मानना है कि इस शब्द से पता चलता है कि शमौन और यहूदा, यहूदिया प्रदेश के करियोत-हेसरोन नगर से थे। (यह 15:25) अगर यह सच है तो 12 प्रेषितों में से सिर्फ यहूदा ही यहूदिया से था, बाकी प्रेषित गलील से थे।

फिर: यानी नीसान 12. यह वही दिन है जिस दिन मत 26:1-5 में बतायी घटनाएँ हुईं।​—अति. क7, ख12 और मत 26:1, 6 के अध्ययन नोट देखें

यहूदा इस्करियोती: मत 10:4 का अध्ययन नोट देखें।

चाँदी के 30 सिक्के: खुशखबरी की किताबों के लेखकों में से सिर्फ मत्ती ने बताया कि यीशु से गद्दारी करने के लिए कितनी कीमत दी गयी। मुमकिन है कि ये 30 सिक्के चाँदी के शेकेल थे जो सोर में ढाले गए थे। इससे पता चलता है कि प्रधान याजक यीशु को कितना तुच्छ समझते थे क्योंकि कानून के मुताबिक यह एक दास की कीमत होती थी। (निर्ग 21:32) जब जकरयाह ने विश्‍वासघाती इसराएलियों से परमेश्‍वर के लोगों के बीच भविष्यवाणी करने की मज़दूरी माँगी थी, तो उन्होंने उसे “चाँदी के 30 टुकड़े” तौलकर दिए जो दिखाता है कि वे भी उसे एक दास से ज़्यादा कुछ नहीं समझते थे।​—जक 11:12, 13.

बिन-खमीर की रोटी के त्योहार के पहले दिन: बिन-खमीर की रोटी का त्योहार नीसान 15 को शुरू होता था यानी फसह (नीसान 14) के अगले दिन और यह त्योहार सात दिन तक मनाया जाता था। (अति. ख15 देखें।) लेकिन यीशु के दिनों में फसह इस त्योहार से इस कदर जुड़ गया था कि पूरे आठ दिनों को कभी-कभी “बिन-खमीर की रोटी का त्योहार” कहा जाता था। (लूक 22:1) इस संदर्भ में शब्द “पहले दिन” का अनुवाद “एक दिन पहले” भी किया जा सकता है। इसलिए यूनानी शास्त्र के मूल पाठ और यहूदियों के दस्तूर के मुताबिक, यीशु के चेलों ने उससे यह सवाल नीसान 13 को पूछा होगा। फिर नीसान 13 को दिन के वक्‍त चेलों ने फसह की तैयारी की और उसी दिन “शाम होने पर” जब नीसान 14 शुरू हुआ तो उन्होंने फसह मनाया।​—मर 14:16, 17.

जब शाम हुई: यानी जब नीसान 14 शुरू हुआ।​—अति. क7 और ख12 देखें।

मेरे साथ . . . हाथ डालता है: आम तौर पर लोग हाथ से खाना खाते थे या रोटी के एक टुकड़े को चम्मच की तरह इस्तेमाल करते थे। यहाँ लिखी बात एक मुहावरा भी हो सकती है जिसका मतलब है, “साथ मिलकर खाना खाना।” किसी के साथ खाना खाना दिखाता था कि उनके बीच गहरी दोस्ती है। ऐसे करीबी दोस्त के खिलाफ हो जाना, विश्‍वासघात का सबसे घिनौना रूप माना जाता था।​—भज 41:9; यूह 13:18.

तूने खुद कह दिया है: एक मुहावरा है जो यहूदी लोगों में आम था। यहाँ यह मुहावरा सवाल करनेवाले की बात को पुख्ता करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। एक तरह से यीशु कह रहा था, “यह तूने ही कह दिया है और तूने जो कहा वह सच है।” ज़ाहिर है कि यीशु का जवाब दिखाता है कि यहूदा सवाल पूछकर दरअसल खुद स्वीकार कर रहा था कि यीशु से गद्दारी करने के लिए वही ज़िम्मेदार है। इस बातचीत के कुछ ही समय बाद, यहूदा कमरे से बाहर चला गया होगा और फिर यीशु ने प्रभु के संध्या भोज की शुरूआत की, ठीक जैसे यूह 13:21-30 में बताया गया है। मत्ती के इस ब्यौरे में यहूदा का दोबारा ज़िक्र मत 26:47 में मिलता है, जहाँ बताया गया है कि वह एक भीड़ के साथ गतसमनी बाग में आया।

रोटियाँ तोड़कर: अकसर ये रोटियाँ मोटी और फूली हुई होती थीं। इन्हें तंदूर में सेंककर सख्त बनाया जाता था। इसलिए इन्हें तोड़कर खाया जाता था।​—मत 15:36; 26:26; मर 6:41; 8:6; लूक 9:16.

एक रोटी ली . . . उसे तोड़ा: प्राचीन मध्य पूर्व में रोटियाँ पतली होती थीं और अगर वे बिना खमीर की हों तो कुरकुरी होती थीं। यीशु के रोटी तोड़ने का कोई लाक्षणिक मतलब नहीं था बल्कि इस तरह की रोटी आम तौर पर तोड़कर ही खायी जाती थी।​—मत 14:19 का अध्ययन नोट देखें।

प्रार्थना में धन्यवाद देकर: या “आशीष माँगकर।” ज़ाहिर है कि इस तरह की प्रार्थना में परमेश्‍वर की महिमा करना और उसे धन्यवाद देना शामिल है।

निशानी: यूनानी शब्द एस्टीन (शाब्दिक मतलब “है”) का यहाँ मतलब है, “सूचित करना; दर्शाना; चिन्ह; मतलब।” प्रेषित अच्छी तरह समझते थे कि एस्टीन का यही मतलब है क्योंकि इस मौके पर यीशु ज़िंदा था और इस मायने में उसका परिपूर्ण शरीर उनके सामने था। साथ ही, बिन-खमीर की जिस रोटी को वे खानेवाले थे वह भी उनके सामने थी। इसलिए वह रोटी उसका सचमुच का शरीर नहीं हो सकती थी। गौर करने लायक बात है कि यही यूनानी शब्द मत 12:7 में इस्तेमाल हुआ है और कई अनुवादों में इसके लिए शब्द “मतलब” लिखा है।

खून . . . जो करार को पक्का करता है: यहोवा और अभिषिक्‍त मसीहियों के बीच नया करार यीशु के बलिदान से लागू हुआ। (इब्र 8:10) यीशु ने यहाँ वही शब्द इस्तेमाल किए जो मूसा ने सीनै पहाड़ पर इस्तेमाल किए थे, जब उसने बिचवई बनकर यहोवा और इसराएलियों के बीच कानून का करार लागू करवाया था। (निर्ग 24:8; इब्र 9:19-21) जिस तरह बैलों और बकरों के खून से यहोवा और इसराएल राष्ट्र के बीच कानून का करार पक्का हुआ, उसी तरह यीशु के खून से यहोवा और ‘परमेश्‍वर के इसराएल’ के बीच नया करार पक्का हुआ। यह करार ईसवी सन्‌ 33 के पिन्तेकुस्त के दिन से लागू हुआ।​—इब्र 9:14, 15.

नयी दाख-मदिरा न पीऊँ: बाइबल में दाख-मदिरा कभी-कभी खुशी को दर्शाती है।​—भज 104:15; सभ 10:19.

परमेश्‍वर की तारीफ में गीत: या “भजन।” एक प्राचीन यहूदी लेख के मुताबिक, हालेल के पहले कुछ भजन (113, 114) फसह के खाने के दौरान और आखिरी चार भजन (115-118) खाने के बाद गाए जाते थे या ज़बानी तौर पर दोहराए जाते थे। आखिरी भजनों में मसीहा के बारे में कुछ भविष्यवाणियाँ दर्ज़ थीं। भज 118 के शुरू में और आखिर में ये शब्द आते हैं: “यहोवा का शुक्रिया अदा करो क्योंकि वह भला है, उसका अटल प्यार सदा बना रहता है।” (भज 118:1, 29) यीशु ने अपनी मौत से पहले की रात अपने वफादार प्रेषितों के साथ परमेश्‍वर की तारीफ में जो गीत गाए, उनके आखिरी शब्द शायद भजन के यही शब्द रहे होंगे।

मुर्गे के बाँग देने से पहले: खुशखबरी की चारों किताबों में यह बात लिखी है, मगर मरकुस की किताब में एक और बात लिखी है और वह है कि मुर्गा दो बार बाँग देगा। (मत 26:74, 75; मर 14:30, 72; लूक 22:34, 60, 61; यूह 13:38; 18:27) मिशना में बताया गया है कि यीशु के दिनों में यरूशलेम में मुर्गे पाले जाते थे। यह बात दिखाती है कि बाइबल का ब्यौरा सही है। मुमकिन है कि मुर्गे ने सुबह तड़के ही बाँग दी होगी।

गतसमनी: ज़ाहिर है कि यह बाग यरूशलेम के पूरब में किदरोन घाटी के पार जैतून पहाड़ पर था। मुमकिन है कि इस बाग में जैतून का तेल निकालने का हौद था क्योंकि इसका नाम इब्रानी या अरामी शब्दों (गत शेमानेह) से निकला है जिनका मतलब है, “तेल निकालने का हौद।” हालाँकि यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि यह बाग कहाँ था, मगर यहूदियों की मान्यता है कि जो बाग जैतून पहाड़ की पश्‍चिमी ढलान के नीचे दोराहे के पास है शायद वही गतसमनी था।​—अति. ख12 देखें।

जब्दी के दोनों बेटों: यानी प्रेषित याकूब और यूहन्‍ना।​—मत 4:21; 10:2.

जागते रहो: यूनानी शब्द का बुनियादी मतलब है, “जागते रहना।” मगर कई जगहों पर इसका मतलब है, “सावधान रहना; चौकन्‍ना रहना।” मत्ती ने यह शब्द मत 24:43; 25:13; 26:38, 40, 41 में इस्तेमाल किया। मत 24:44 में लिखी बात से पता चलता है कि इसका नाता ‘तैयार रहने’ से भी है।​—मत 26:38 का अध्ययन नोट देखें।

जागते रहो: दस कुँवारियों की मिसाल का खास संदेश यही है कि हम लाक्षणिक तौर पर जागते रहें।​—मत्ती 24:42; 26:38 के अध्ययन नोट देखें।

जागते रहो: यीशु ने ज़ोर देकर कहा कि उसके चेलों को लाक्षणिक तौर पर जागते रहना है क्योंकि वे नहीं जानते कि वह किस दिन या किस घड़ी आएगा। (मत 24:42; 25:13 के अध्ययन नोट देखें) उसने यह बात यहाँ और मत 26:41 में दोहरायी जहाँ उसने बताया कि जागते रहने के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए। जागते रहने का बढ़ावा मसीही यूनानी शास्त्र में कई बार दिया गया है, जो दिखाता है कि सच्चे मसीहियों के लिए ऐसा करना बहुत ज़रूरी है।​—1कुर 16:13; कुल 4:2; 1थि 5:6; 1पत 5:8; प्रक 16:15.

वह प्याला पी सकते हो: बाइबल में अकसर “प्याला” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब है, एक व्यक्‍ति के लिए परमेश्‍वर की मरज़ी या उसका “तय हिस्सा।” यहाँ ‘प्याला पीने’ का मतलब है, परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करना। और उसकी मरज़ी सिर्फ यह नहीं थी कि यीशु को तड़पाया जाए और परमेश्‍वर की निंदा करने के झूठे इलज़ाम में मार डाला जाए बल्कि उसे ज़िंदा करके स्वर्ग में अमर जीवन दिया जाना भी शामिल था।

मुँह के बल गिरकर: शायद इसका मतलब या तो मुँह के बल ज़मीन पर पूरी तरह लेट जाना या कोहनी के बल लेटना हो सकता है। बाइबल में अलग-अलग तरीकों से प्रार्थना करने के बारे में बताया गया है, जैसे खड़े होकर और घुटने टेककर। लेकिन जब एक इंसान गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करता था तो वह शायद मुँह के बल ज़मीन पर पूरी तरह लेट जाता हो।

यह प्याला . . . हटा दे: बाइबल में अकसर “प्याला” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब है, एक व्यक्‍ति के लिए परमेश्‍वर की मरज़ी या उसका “तय हिस्सा।” (मत 20:22 का अध्ययन नोट देखें।) यीशु को बेशक इस बात की चिंता रही होगी कि परमेश्‍वर की निंदा करने और देशद्रोह के इलज़ाम में उसे जो मौत दी जानेवाली है उससे परमेश्‍वर की बदनामी हो सकती है। इसलिए उसने प्रार्थना की कि यह “प्याला” उसके सामने से हटा लिया जाए।

तुम लोग: इन शब्दों से पता चलता है कि यीशु सिर्फ पतरस से नहीं बल्कि दूसरे चेलों से भी बात कर रहा था।

दिल: यह आयत दिखाती है कि एक इंसान का लाक्षणिक दिल उसे फलाँ तरीके से कोई बात कहने या कोई काम करने के लिए उभारता है।

शरीर: बाइबल में यह शब्द अकसर इंसान की पापी और अपरिपूर्ण हालत को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होता है।

देख!: इसका यूनानी शब्द आइडू है और इसका इस्तेमाल अकसर आगे की बात पर ध्यान खींचने के लिए किया गया है ताकि पढ़नेवाला बतायी जा रही घटना की कल्पना कर सके या उसकी बारीकी पर ध्यान दे सके। यह शब्द किसी बात पर ज़ोर देने के लिए या कोई नयी या हैरानी की बात बताने से पहले भी इस्तेमाल किया गया है। मसीही यूनानी शास्त्र में यह शब्द सबसे ज़्यादा बार मत्ती, लूका और प्रकाशितवाक्य की किताबों में आया है। इसी से मिलता-जुलता शब्द इब्रानी शास्त्र में भी अकसर इस्तेमाल हुआ है।

देखो: मत 1:23 का अध्ययन नोट देखें।

उसे प्यार से चूमा: जिस यूनानी क्रिया का अनुवाद “प्यार से चूमा” किया गया है, वह मत 26:48 में ‘चूमने’ के लिए इस्तेमाल हुई क्रिया का और भी ज़बरदस्त रूप है। यहूदा ने जिस तरह यीशु को प्यार से चूमकर नमस्कार किया, उसके साथ दोस्त की तरह पेश आया, उससे पता चलता है कि वह कितना बड़ा धोखेबाज़ और मक्कार था।

पलटनें: ‘पलटन’ रोमी सेना की सबसे बड़ी टुकड़ी होती थी। पहली सदी में आम तौर पर एक पलटन में करीब 6,000 सैनिक होते थे। मुमकिन है कि यहाँ ‘12 पलटनों’ का मतलब है, अनगिनत या बड़ी तादाद। यीशु कह रहा था कि अगर वह अपने पिता से कहता तो वह उसकी हिफाज़त के लिए काफी तादाद में स्वर्गदूत भेज देता।

शास्त्र: अकसर यह शब्द परमेश्‍वर की प्रेरणा से लिखे गए पूरे इब्रानी शास्त्र के लिए इस्तेमाल किया गया है।

यहोवा का यह वचन पूरा हो, जो उसने अपने भविष्यवक्‍ता से कहलवाया था: ये और इनसे मिलते-जुलते शब्द मत्ती की किताब में कई बार दर्ज़ किए गए हैं। ऐसा शायद इसलिए किया गया ताकि यहूदी समझ सकें कि यीशु ही वादा किया गया मसीहा है।​—मत 2:15, 23; 4:14; 8:17; 12:17; 13:35; 21:4; 26:56; 27:9.

ताकि भविष्यवक्‍ताओं ने जो लिखा है वह पूरा हो: मत 1:22 का अध्ययन नोट देखें।

कैफा: कैफा को रोमी अधिकारियों ने करीब ईसवी सन्‌ 18 में महायाजक ठहराया था और वह ईसवी सन्‌ 36 तक इस पद पर रहा। राजनेताओं के साथ उसके अच्छे संबंध थे, इसलिए वह पिछले महायाजकों के मुकाबले ज़्यादा समय तक महायाजक रहा।​—कैफा का घर किस जगह रहा होगा, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।

महायाजक: जब इसराएल एक स्वतंत्र राष्ट्र था तो जो महायाजक होता था वह अपनी मौत तक उस पद पर बना रहता था। (गि 35:25) लेकिन जब इसराएल पर रोम का कब्ज़ा हुआ तब रोमी शासकों के पास यह अधिकार था कि वे किसी को भी महायाजक ठहरा सकते हैं या इस पद से हटा सकते हैं।​—शब्दावली देखें।

महायाजक कैफा: मत 26:3 का अध्ययन नोट देखें।

प्रधान याजकों: इनके लिए इस्तेमाल हुआ यूनानी शब्द जब एकवचन में आया है तो उसका अनुवाद “महायाजक” किया गया है, यानी परमेश्‍वर के सामने जानेवाला लोगों का मुख्य प्रतिनिधि। लेकिन यहाँ यह शब्द बहुवचन में है और इसका मतलब है याजकवर्ग के बड़े-बड़े आदमी। इनमें वे आदमी शामिल हैं जो पहले महायाजक रह चुके थे और शायद वे भी जो याजकों के 24 दलों के मुखिया थे।

सबसे बड़ी अदालत: यानी यरूशलेम की महासभा। यह महासभा, महायाजक और 70 दूसरे सदस्यों से बनी होती थी जिनमें मुखिया और शास्त्री होते थे। महासभा जो फैसला सुनाती थी उसे यहूदी लोग आखिरी फैसला मानते थे।​—शब्दावली में “महासभा” देखें।

प्रधान याजक: यानी याजकवर्ग के बड़े-बड़े आदमी।​—मत 2:4 का अध्ययन नोट और शब्दावली देखें।

महासभा: यरूशलेम में यहूदियों की सबसे बड़ी अदालत। “महासभा” के यूनानी शब्द सिनेड्रियोन का शाब्दिक मतलब है, “के साथ बैठना।” हालाँकि यह शब्द एक आम सभा के लिए भी इस्तेमाल होता था, लेकिन इसराएल में इसका मतलब फैसला सुनानेवाला धार्मिक समूह या अदालत भी हो सकता था।​—मत 5:22 का अध्ययन नोट और शब्दावली देखें; साथ ही महासभा का भवन कहाँ रहा होगा, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।

मसीह: यूनानी में यहाँ उपाधि “मसीह” (मतलब, “अभिषिक्‍त जन”) से पहले निश्‍चित उपपद लिखा है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि यह ज़ाहिर हो कि यीशु ही वादा किया गया मसीहा है, जिसे खास काम के लिए अभिषिक्‍त किया गया है।​—मत 1:1; 2:4 के अध्ययन नोट देखें।

मसीह: मत 11:2 का अध्ययन नोट देखें।

तूने खुद कह दिया है: एक मुहावरा है जो यहूदी लोगों में आम था। यहाँ यह मुहावरा सवाल करनेवाले की बात को पुख्ता करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। एक तरह से यीशु कह रहा था, “यह तूने ही कह दिया है और तूने जो कहा वह सच है।” ज़ाहिर है कि यीशु का जवाब दिखाता है कि यहूदा सवाल पूछकर दरअसल खुद स्वीकार कर रहा था कि यीशु से गद्दारी करने के लिए वही ज़िम्मेदार है। इस बातचीत के कुछ ही समय बाद, यहूदा कमरे से बाहर चला गया होगा और फिर यीशु ने प्रभु के संध्या भोज की शुरूआत की, ठीक जैसे यूह 13:21-30 में बताया गया है। मत्ती के इस ब्यौरे में यहूदा का दोबारा ज़िक्र मत 26:47 में मिलता है, जहाँ बताया गया है कि वह एक भीड़ के साथ गतसमनी बाग में आया।

तू खुद यह कहता है: ज़ाहिर है कि यीशु ने अपने इस जवाब से पुख्ता किया कि पीलातुस की कही बात सच है। (मत 26:25, 64 के अध्ययन नोट से तुलना करें।) हालाँकि यीशु ने पीलातुस के सामने यह माना कि वह वाकई राजा है, मगर उस मायने में नहीं जिस मायने में पीलातुस सोच रहा था। यीशु का राज “इस दुनिया का नहीं है,” इसलिए वह रोमी साम्राज्य के लिए कोई खतरा नहीं था।​—यूह 18:33-37.

तूने खुद कह दिया है: यीशु कैफा का सवाल टाल नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था कि महायाजक को अधिकार है कि वह उसे शपथ दिलाकर सच बोलने के लिए कहे। (मत 26:63) ज़ाहिर है कि “तूने खुद कह दिया है” एक मुहावरा है जो यहूदियों में आम था। यह मुहावरा कही गयी बात की सच्चाई पुख्ता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यह बात मरकुस के ब्यौरे से पता चलती है जहाँ यीशु का जवाब इस तरह लिखा है: “हाँ मैं हूँ।”​—मर 14:62; मत 26:25; 27:11 के अध्ययन नोट देखें।

इंसान के बेटे . . . आकाश के बादलों पर आता: यीशु यहाँ दान 7:13, 14 में मसीहा के बारे में दर्ज़ भविष्यवाणी की बात कर रहा था। इस तरह वह पुख्ता कर रहा था कि उसे ही परमेश्‍वर के पास जाने की इजाज़त मिलती और स्वर्ग में राज करने का अधिकार दिया जाता।​—शब्दावली में “इंसान का बेटा” देखें।

शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ: किसी शासक के दाएँ हाथ होने का मतलब है, दूसरा सबसे बड़ा अधिकारी होना। (भज 110:1; प्रेष 7:55, 56) यूनानी पाठ में “शक्‍तिशाली परमेश्‍वर” के बजाय सिर्फ “शक्‍ति” लिखा है। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे लूक 22:69 में ये शब्द इस तरह दर्ज़ हैं: “परमेश्‍वर के शक्‍तिशाली दाएँ हाथ।” “शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ,” इन शब्दों का यह भी मतलब हो सकता है कि यीशु को शक्‍ति या अधिकार दिया जाएगा क्योंकि वह शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ बैठा है।

अपना चोगा फाड़ा: यहाँ चोगा फाड़ने का मतलब है, हैरानी और गुस्सा ज़ाहिर करना। मुमकिन है कि कैफा ने अपना चोगा गले से फाड़ा होगा। उसने यह दिखावा करने के लिए ऐसा किया कि वह बहुत धर्मी है और यीशु की बात सुनकर एकदम हैरान है और उसे बहुत गुस्सा आ रहा है।

भविष्यवाणी कर, . . . किसने तुझे मारा?: यहाँ ‘भविष्यवाणी करने’ का मतलब भविष्य बताना नहीं बल्कि परमेश्‍वर की मदद से यह बताना है कि उसे किसने मारा। इसके मिलते-जुलते ब्यौरों, मर 14:65 और लूक 22:64 में बताया गया है कि यीशु पर ज़ुल्म करनेवालों ने उसका सिर ढाँप दिया था। शायद इसी वजह से उन्होंने ताना कसते हुए उससे पूछा कि उसे किसने मारा।

आँगन के द्वार: मरकुस ने अपने ब्यौरे में ऐसा शब्द इस्तेमाल किया जिसका मतलब “फाटक” या ‘ओसारा’ हो सकता है। (मर 14:68, फु.) इससे पता चलता है कि यह सिर्फ द्वार नहीं था। ज़ाहिर है कि यह आँगन और बाहरी दरवाज़े के बीच बनी एक इमारत थी। यह इमारत शायद एक गलियारा या बरामदा थी।

तेरी बोली: या “बोलने का लहज़ा।” पतरस की गलीली बोली यानी उसने जो शब्द इस्तेमाल किए या फिर उसके बोलने का लहज़ा यानी उसने जिस तरह शब्दों का उच्चारण किया, वह यहूदिया में बोली जानेवाली इब्रानी भाषा से अलग था। कुछ लोगों का मानना है कि गलील के लोगों की बोली या उनका लहज़ा इसलिए अलग था क्योंकि उनकी भाषा पर दूसरे देश के लोगों का असर था जो उस इलाके में रहते थे।

खुद को कोसने लगा: एक तरह से पतरस कह रहा था, ‘अगर मैं झूठ बोल रहा हूँ कि मैं उस आदमी को नहीं जानता, तो मुझ पर शाप पड़े।’

कसम खाकर कहने लगा: पतरस डर गया था, इसलिए वह आस-पास खड़े लोगों को यकीन दिलाने की कोशिश करने लगा कि वह सच बोल रहा है। वह कसम खाकर कहने लगा कि अगर उसकी बात सच नहीं है तो उस पर मुसीबत आ पड़े।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

सिलखड़ी की बोतल
सिलखड़ी की बोतल

शुरू में इत्र की ये छोटी-छोटी बोतलें एक ऐसे पत्थर से बनायी जाती थीं, जो मिस्र में अलबास्त्रोन नाम की जगह के पास पाया जाता था। यह पत्थर कैल्शियम कार्बोनेट का एक रूप है। बाद में यह अलबास्त्रोन के नाम से जाना गया। यहाँ दिखायी गयी बोतल मिस्र में पायी गयी थी और यह ईसा पूर्व 150 और ईसवी सन्‌ 100 के बीच की है। इससे मिलती-जुलती बोतलें जिप्सम जैसे कम कीमतवाले पत्थरों से भी बनायी जाती थीं। इन्हें भी सिलखड़ी (अँग्रेज़ी में अलबास्तर) कहा जाता था, क्योंकि इनमें भी इत्र भरा जाता था। लेकिन कीमती तेल और इत्र के लिए ऐसी बोतलें इस्तेमाल की जाती थीं जो असली सिलखड़ी पत्थर से बनी थीं। जैसे, वह तेल जिससे दो बार यीशु का अभिषेक किया गया था, एक बार जब वह गलील में एक फरीसी के घर में था और दूसरी बार तब, जब वह बैतनियाह में शमौन के घर में था, जो पहले कोढ़ी था।

फसह का खाना
फसह का खाना

फसह के खाने में ये चीज़ें ज़रूर होती थीं: (1) भुना हुआ मेम्ना (इसकी कोई हड्डी नहीं तोड़ी जानी थी), (2) बिन-खमीर की रोटी और (3) कड़वा साग। (निर्ग 12:5, 8; गि 9:11) मिशना के मुताबिक, कड़वा साग लेट्यूस (सलाद पत्ता), कासनी, चंद्रशूर या सिंहपर्णी हो सकता है। ज़ाहिर है कि इस साग से इसराएलियों को मिस्र में गुलामी के अपने कड़वे अनुभव की याद आती होगी। यीशु ने बिन-खमीर की रोटी अपने परिपूर्ण शरीर की निशानी के तौर पर इस्तेमाल की। (मत 26:26) प्रेषित पौलुस ने यीशु को “हमारे फसह का मेम्ना” कहा। (1कुर 5:7) पहली सदी के आते-आते फसह के खाने में दाख-मदिरा (4) भी शामिल की जाने लगी। यीशु ने दाख-मदिरा को अपने खून की निशानी के तौर पर इस्तेमाल किया, जो बलिदान के तौर पर बहाया जाता।​—मत 26:27, 28.