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पाएँ बाइबल का खज़ाना | यशायाह 1-5

“आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर . . . जाएँ”

“आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर . . . जाएँ”

2:2, 3

“अन्त के दिनों में”

आज हम जिस समय में जी रहे हैं

“यहोवा के भवन का पर्वत”

यहोवा की सर्वश्रेष्ठ शुद्ध उपासना

“हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे”

शुद्ध उपासना करनेवाले सच्चे परमेश्वर की उपासना करने के लिए एक होंगे

“आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर . . . जाएँ”

सच्चे उपासक दूसरों को अपने साथ जुड़ने का न्यौता देते हैं

“वह हमको अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे”

यहोवा अपने वचन के ज़रिए हमें सिखाता है और हमारी मदद करता है ताकि हम उसके पथों पर चलें

2:4

“न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे”

यशायाह बताता है कि युद्ध के हथियार पीटकर खेती-बाड़ी के औज़ार बनाए जाएँगे। इससे ज़ाहिर होता है कि यहोवा के लोग सबके साथ शांति बनाए रखेंगे। यशायाह के दिनों में ये औज़ार क्या थे?

“तलवारें पीटकर हल के फाल”

1 फाल हल का निचला हिस्सा होता था जिससे खेत की जुताई की जाती थी। इनमें से कुछ धातु के बने होते थे।—1शम 13:20

“भालों को हँसिया बनाएँगे”

2 हँसिया शायद आधे चाँद के आकार का औज़ार होता था जिसका हत्था लकड़ी का बना होता था। यह औज़ार अंगूर की बेलें काटने के काम आता था।—यश 18:5