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यहोवा के साक्षी

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परमेश्वर का वचन कौन है या क्या है?

परमेश्वर का वचन कौन है या क्या है?

शास्त्र से जवाब

“परमेश्वर का वचन” इन शब्दों का अकसर मतलब होता है परमेश्वर की तरफ से एक या कई संदेश। (लूका 11:28) कुछ आयतों में “परमेश्वर का वचन” या सिर्फ “वचन” उपाधि की तरह इस्तेमाल किया गया है।—प्रकाशितवाक्य 19:13; यूहन्ना 1:14.

परमेश्वर की तरफ से संदेश। भविष्यवक्ताओं ने कई बार कहा कि वे जो संदेश सुना रहे हैं वह “परमेश्वर का वचन” है। जैसे कि अहियाह, येहू और एलियाह ने ‘यहोवा का वचन’ सुनाया। (1 राजा 14:18; 16:12; 2 राजा 9:36) दुष्ट लोगों को चेतावनी देते वक्‍त भविष्यवक्ता यशायाह ने कहा, “हे डींगें मारनेवालो, हे यरूशलेम के लोगों के शासको, यहोवा का वचन सुनो!”—यशायाह 28:14.

उपाधि। बाइबल यीशु को भी “वचन” कहती है। जब वह धरती पर था और स्वर्ग में भी उसे “वचन” कहा गया है। हम कैसे कह सकते हैं कि यह उपाधि यीशु के लिए ही इस्तेमाल हुई है? आइए इसकी कुछ वजहों पर ध्यान दें:

  • वचन बाकी सब सृष्टि से पहले जीया। “शुरूआत में वचन था . . . यही शुरूआत में परमेश्वर के साथ था।” (यूहन्ना 1:1, 2) यीशु “सारी सृष्टि में पहलौठा है . . . वह बाकी सब चीज़ों से पहले था।”—कुलुस्सियों 1:13-15, 17.

  • वचन धरती पर इंसान बनकर आया। “वचन इंसान बना और हमारे बीच रहा।” (यूहन्ना 1:14) मसीह यीशु ने “अपना सबकुछ त्याग दिया और एक दास का रूप लिया और इंसान बन गया।”—फिलिप्पियों 2:5-7.

  • वचन परमेश्वर का बेटा है। यह कहने के बाद कि “वचन इंसान बना” प्रेषित यूहन्ना ने कहा, “हमने उसका तेज देखा, ऐसा तेज जैसा एक पिता के इकलौते बेटे का होता है।” (यूहन्ना 1:14) यूहन्ना ने यह भी लिखा, “यीशु परमेश्वर का बेटा है।”—1 यूहन्ना 4:15.

  • वचन में परमेश्वर के जैसे गुण हैं। वचन “ईश्वर जैसा” था। (यूहन्ना 1:1; फुटनोट) यीशु में “परमेश्वर की महिमा झलकती है और वह परमेश्वर की हू-ब-हू छवि है।”—इब्रानियों 1:2, 3.

  • वचन राजा बनकर राज करता है। बाइबल कहती है परमेश्वर के वचन के सिर पर “बहुत-से मुकुट हैं।” (प्रकाशितवाक्य 19:12, 13) वचन को “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु” भी कहा गया है। (प्रकाशितवाक्य 19:16) यीशु को भी “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु” कहा गया है।—1 तीमुथियुस 6:14, 15.

  • वचन परमेश्वर की तरफ से बोलता था। यीशु को मिली “वचन” की उपाधि से पता चलता है कि परमेश्वर उसके ज़रिए जानकारी और हिदायतें देता है। इस बारे में यीशु ने कहा, “खुद पिता ने, जिसने मुझे भेजा है, मुझे आज्ञा दी है कि मैं क्या-क्या बताऊँ और क्या-क्या बोलूँ . . . इसलिए मैं सिर्फ वही बातें बताता हूँ जो पिता ने मुझे बतायी हैं।”—यूहन्ना 12:49, 50.