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नौजवानों के सवाल

सृष्टि या विकासवाद?—भाग 3: सृष्टि पर यकीन क्यों करें?

सृष्टि या विकासवाद?—भाग 3: सृष्टि पर यकीन क्यों करें?

“अगर आप सृष्टि पर यकीन करते हैं, तो लोग आपको बेवकूफ समझेंगे। वे सोचेंगे कि आपके माँ-बाप ने आपको बचपन में जो कहानियाँ सुनायीं, उन पर आप अब भी यकीन करते हैं या धर्म ने आपको बहका दिया है।”—जैनट।

क्या आप भी जैनट की तरह सोचते हैं? अगर हाँ, तो शायद आपके मन में भी सवाल उठे कि क्या वाकई सब चीज़ों की सृष्टि हुई थी? कोई नहीं चाहता कि लोग उसे बेवकूफ समझें। ऐसे में क्या बात आपकी मदद कर सकती है?

 क्या रुकावटें आती हैं

1. अगर आप सृष्टि पर यकीन करते हैं, तो लोग सोचेंगे कि आप विज्ञान के खिलाफ हैं।

“मेरी टीचर कहती है कि लोग सृष्टि पर इसलिए यकीन करते हैं क्योंकि वे यह समझाने की तकलीफ नहीं उठाना चाहते कि यह पूरी दुनिया कैसे चलती है।”—मारिया।

आपको क्या पता होना चाहिए: जो लोग इस तरह का दावा करते हैं, वे दरअसल हकीकत से अनजान हैं। और हकीकत यह है कि गैलिलियो और आइज़क न्यूटन जैसे मशहूर वैज्ञानिक मानते थे कि एक सृष्टिकर्ता है। इसका यह मतलब नहीं था कि वे विज्ञान के खिलाफ थे। उसी तरह आज कुछ वैज्ञानिक विज्ञान पर विश्‍वास करने के साथ-साथ सृष्टि पर भी यकीन करते हैं।

इसे आज़माइए: वॉचटावर ऑनलाइन लाइब्रेरी में खोजें कॉलम में जाकर ये शब्द (उद्धरण चिन्हों के साथ) टाइप कीजिए “अपने विश्‍वास के बारे में बताती है” या “अपने विश्‍वास के बारे में बताता है।” आपको चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्रों में काम करनेवाले ऐसे लोगों की मिसालें मिलेंगी जो यकीन करते हैं कि सब चीज़ों की सृष्टि हुई है। गौर कीजिए कि किस बात ने उन्हें इस नतीजे पर पहुँचने में मदद दी।

सौ बातों की एक बात: सृष्टि पर यकीन करने का मतलब यह नहीं कि आप विज्ञान के खिलाफ हैं। दरअसल हमारे चारों ओर की चीज़ों के बारे में सीखने से हमें सृष्टि पर यकीन करने के पक्के सबूत मिलेंगे।–रोमियों 1:20.

2. अगर आप बाइबल में बताए सृष्टि के ब्यौरे पर यकीन करते हैं, तो लोग सोचेंगे कि आपका धर्म जो सिखाता है, उसे आप आँख मूँदकर विश्‍वास कर लेते हैं।

“सृष्टि पर यकीन करना कई लोगों को एक मज़ाक लगता है। उनका मानना है कि उत्पत्ति किताब में सृष्टि का ब्यौरा सिर्फ एक कहानी है।”—जैसमिन।

आपको क्या पता होना चाहिए: बाइबल में दिए सृष्टि के ब्यौरे के बारे में लोगों को अकसर गलतफहमियाँ होती हैं। मिसाल के लिए, सृष्टि के सिद्धांत को माननेवाले कुछ लोगों का दावा है कि धरती को हाल ही में बनाया गया था या सभी जीवों को 24 घंटोंवाले छ: दिनों में बनाया गया था। बाइबल इनमें से किसी भी बात को सच नहीं बताती।

  • उत्पत्ति 1:1 सीधे-सीधे कहता है, “शुरूआत में परमेश्‍वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।” यह बात विज्ञान से मिले इस सबूत से मेल खाती है कि धरती को अरबों-खरबों साल पहले बनाया गया था।

  • उत्पत्ति में “दिन” का मतलब 24 घंटे नहीं बल्कि एक लंबा दौर हो सकता है। दरअसल उत्पत्ति 2:4 में सृष्टि के सभी छ: दिनों को “दिन” बताया गया है।

सौ बात की एक बात: बाइबल में दिया सृष्टि का ब्यौरा वैज्ञानिक खोजों से मेल खाता है।

 आप जो मानते हैं, उस बारे में सोचिए

सृष्टि पर यकीन करने का मतलब “आँख मूँदकर विश्‍वास” करना नहीं है। उलटा इसका मतलब है, सबूतों की अच्छी तरह जाँच करना और सोच-समझकर यकीन करना। ज़रा सोचिए:

आपने अब तक जो देखा या अनुभव किया है, उससे आप जानते हैं कि जहाँ कोई रचना या डिज़ाइन होता है वहाँ एक रचनाकार होता है। जब आप एक कैमरा, हवाई-जहाज़ या घर देखते हैं तो आप इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि किसी ने इसे बनाया है। तो क्या आपको इंसान की आँख, आसमान में उड़नेवाली चिड़िया या हमारी धरती के बारे में यही नतीजा नहीं निकालना चाहिए?

ज़रा सोचिए: इंजीनियर कुदरत को गौर से देखते हैं और उसकी नकल उतारकर अपने आविष्कारों को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। वे चाहते हैं कि लोग उनके आविष्कारों के लिए उनका सम्मान करें। हम इंसान और उसकी बनायी चीज़ों को तो सम्मान देते हैं मगर सृष्टिकर्ता के वजूद से इनकार करते हैं और उसकी रचनाओं के बारे में कहते हैं कि ये अपने आप आ गयीं जबकि ये इंसान की रचनाओं से कहीं बेहतर हैं। क्या इस बात में आपको कोई समझदारी नज़र आती है?

क्या यह मानना कोई समझदारी है कि एक हवाई-जहाज़ को बनाया गया था मगर एक चिड़िया अपने आप से आ गयी?

 सबूतों की जाँच करने में मदद करनेवाले प्रकाशन

कुदरत में सृष्टि के जो सबूत पाए जाते हैं, उनकी जाँच करने से आप सृष्टि पर अपना यकीन पक्का कर सकते हैं।

इसे आज़माइए: वॉचटावर ऑनलाइन लाइब्रेरी में जाकर ये शब्द टाइप कीजिए (उद्धरण चिन्हों के साथ) “क्या इसे रचा गया था”। सजग होइए! के श्रृंखला लेख “क्या इसे रचा गया था?” में से कुछ शीर्षक चुनिए जो आपको दिलचस्प लगते हैं। हर लेख में देखिए कि कुदरत में पाए जानेवाली चीज़ों की खासियत क्या है। इससे आपको किस तरह यकीन होता है कि एक बनानेवाला है?

और ढूँढ़िए: चीज़ों को रचा गया था, इन सबूतों की गहराई से जाँच करने के लिए इन प्रकाशनों का इस्तेमाल कीजिए।

    • धरती को बिलकुल सही जगह पर रखा गया है और उसे इस तरह बनाया गया है कि उस पर जीवन मुमकिन हो सके।—प्र07 3/1 पेज 4-7 देखिए।

    • कुदरत में पायी जानेवाली रचनाओं की मिसालें।—सज00 2/8 पेज 4-9 देखिए।

    • बाइबल की उत्पत्ति किताब में दिया सृष्टि का ब्यौरा विज्ञान से मेल खाता है।—सज06 10/1 पेज 18-20 देखिए।

  • जीवन की शुरूआत—पाँच सवाल जवाब जानना ज़रूरी

    • किसी निर्जीव चीज़ से जीवन की शुरूआत अपने आप से नहीं हो सकती।—पेज 4-7 देखिए।

    • हर जीवित चीज़ की बनावट इतनी जटिल है कि यह अपने आप वजूद में नहीं आ सकती।—पेज 8-12 देखिए।

    • डी.एन.ए. में जानकारी जमा करने की इतनी अनोखी काबिलीयत है कि इंसान की नयी-से-नयी टेकनॉलजी भी इसकी बराबरी नहीं कर सकती।—पेज 13-21 देखिए।

    • सारे प्राणियों का पूर्वज एक नहीं है। फॉसिल (प्राणियों की हड्डियों के अवशेष) की जाँच से पता चलता है कि प्राणी जगत में मुख्य वर्ग के जानवर अचानक उत्पन्‍न हुए न कि धीरे-धीरे एक किस्म के जानवर से दूसरे किस्म के जानवर में उनका विकास हुआ।—पेज 22-29 देखिए।

“धरती पर रहनेवाले जानवरों से लेकर विश्‍वमंडल तक और उनमें जो बेहतरीन व्यवस्था पायी जाती है, इन सबसे मेरा यकीन और बढ़ जाता है कि परमेश्‍वर सचमुच में है।”—थॉमस।