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मम्मी-पापा मुझे मौज-मस्ती क्यों नहीं करने देते?

मम्मी-पापा मुझे मौज-मस्ती क्यों नहीं करने देते?

ज़रा इस सीन के बारे में कल्पना कीजिए:

आप एक पार्टी में जाना चाहते हैं, लेकिन आपको नहीं पता कि मम्मी-पापा आपको वहाँ जाने की इजाज़त देंगे या नहीं। ऐसे में आप आगे दिए सुझावों में से किसे चुनेंगे?

  1.  बिना पूछे चले जाइए

  2.  पूछिए भी मत और जाइए भी मत

  3.  पूछकर देखिए

 1. बिना पूछे चले जाइए

आप ऐसा क्यों करना चाहेंगे: आप अपने दोस्तों को दिखाना चाहते हैं कि आप अपनी मरज़ी के मालिक हैं। आप सोचते हैं कि आप अपने मम्मी-पापा से बेहतर जानते हैं या आपको उनके फैसलों की कदर नहीं है।—नीतिवचन 14:18.

अंजाम: हो सकता है, आप अपने दोस्तों के बीच छा जाएँ, लेकिन वे यह भी जान जाएँगे कि आप बहुत चालाक हैं। अगर आप अपने मम्मी-पापा को धोखा दे सकते हैं, तो शायद आप अपने दोस्तों को भी धोखा दे सकते हैं। और जब आपके मम्मी-पापा को पता चलेगा कि आपने क्या किया है, तो उन्हें बहुत दुख होगा कि आपने उनका विश्वास तोड़ा है और फिर शायद वे आपको पहले जैसी आज़ादी न दें!—नीतिवचन 12:15.

 2. पूछिए भी मत और जाइए भी मत

आप ऐसा क्यों करना चाहेंगे: आप वहाँ जाने के बारे में सोचते हैं और फैसला करते हैं कि आप वहाँ नहीं जाएँगे, क्योंकि वहाँ जो होगा वह आपके स्तर के मुताबिक नहीं होगा या जो लोग वहाँ आएँगे, उनमें से कुछ के साथ संगति करना अच्छा नहीं होगा। (1 कुरिंथियों 15:33; फिलिप्पियों 4:8) वहीं दूसरी तरफ, शायद आप जाना चाहते हैं, लेकिन आप मम्मी-पापा से पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

अंजाम: अगर आप इसलिए नहीं जाते, क्योंकि आपको पता है कि वहाँ जाना सही नहीं होगा, तो आप पूरे यकीन के साथ अपने दोस्तों को इसकी वजह बता पाएँगे। लेकिन वहीं दूसरी तरफ, अगर आप इसलिए नहीं जाते क्योंकि आपको मम्मी-पापा से इस बारे में पूछने की हिम्मत नहीं है, तो शायद आप घर बैठे इस बारे में सोचकर बुरा महसूस करते रहेंगे कि एक आप ही हैं जो मौज-मस्ती नहीं कर रहे हैं।

 3. पूछकर देखिए

आप ऐसा क्यों करना चाहेंगे: आप इस बात को मानते हैं कि आपके मम्मी-पापा को आप पर अधिकार है और आप इस बात की इज़्ज़त करते हैं कि वे जो फैसले लेंगे, वह आपके भले के लिए है। (कुलुस्सियों 3:20) आप अपने मम्मी-पापा से प्यार करते हैं और आप उन्हें बिना बताए चोरी-छिपे कहीं जाकर उन्हें दुखी नहीं करना चाहते। (नीतिवचन 10:1) उनकी इजाज़त माँगने से शायद आपको अपनी बात कहने का मौका भी मिल सकता है।

अंजाम: आपके मम्मी-पापा को लगेगा कि आप उनसे प्यार करते हैं और उनकी इज़्ज़त करते हैं। और अगर उन्हें आपकी बात ठीक लगे, तो शायद वो आपको इजाज़त दे दें।

मम्मी-पापा शायद ‘ना’ क्यों कहें

लाइफगार्ड की तरह, आपके मम्मी-पापा भी दूर से ही खतरों को देख लेते हैं

एक वजह समझने के लिए इस मिसाल की मदद लीजिए: आप शायद एक ऐसे समुंदर में तैरना पसंद करें, जहाँ अलग-अलग जगहों पर लाइफगार्ड यानी ऐसे लोग हैं जो तैरते वक्‍त किसी खतरे से आपको बचा सकते हैं। क्यों? क्योंकि जब आप पानी में मज़ा कर रहे होते हैं, उस वक्‍त आप खतरे को इतनी आसानी से भाँप नहीं सकते। लेकिन लाइफगार्ड अपनी जगह से खतरों का आसानी से पता लगा सकते हैं। उसी तरह, मम्मी-पापा को इतना तो ज्ञान और अनुभव है कि वे दूर से ही ऐसे खतरों को देख सकते हैं जो आपको नज़र नहीं आते। लाइफगार्ड की तरह, आपके मम्मी-पापा आपका मज़ा किरकिरा नहीं करना चाहते, बल्कि वे आपको ऐसे खतरों से बचाना चाहते हैं, जो आपको ज़िंदगी का मज़ा लूटने से रोके।

एक और वजह पर गौर कीजिए: आपके मम्मी-पापा आपकी हिफाज़त करना चाहते हैं। वे आपसे प्यार करते हैं इसलिए जब उन्हें सही लगता है, तब वे आपको इजाज़त देते हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर वे आपको मना भी करते हैं। जब आप किसी चीज़ के लिए उनसे इजाज़त माँगते हैं, तो वे खुद से पूछते हैं कि अगर वे आपको इजाज़त दे दें, तो क्या वे उससे होनेवाले अंजाम को भुगतने के लिए तैयार हैं। वे तभी तैयार होंगे और आपको जाने की इजाज़त देंगे, जब उन्हें खुद इस बात का पूरा यकीन हो कि आपको कुछ नहीं होगा।

आप ऐसा क्या कर सकते हैं जिससे आपको इजाज़त मिल सकती है

चार तरीके आपकी मदद कर सकते हैं

ईमानदारी: खुद से पूछिए: ‘मैं असल में क्यों जाना चाहता हूँ? क्या इस वजह से क्योंकि मुझे वह काम करना बहुत पसंद है या फिर इसलिए कि मैं भी वही करना चाहता हूँ जो मेरे दोस्त कर रहे हैं? क्या मैं इसलिए जाना चाहता हूँ क्योंकि वहाँ वह व्यक्‍ति भी होगा, जिसे मैं पसंद करता हूँ?’ फिर इस बारे में अपने मम्मी-पापा को सच-सच बताइए। वे भी एक समय पर आपकी उम्र के थे और वे आपको बखूबी जानते हैं, इसलिए वे आसानी से समझ जाएँगे कि आपके इरादे क्या हैं। उन्हें अच्छा लगेगा अगर आप उनसे खुलकर बात करेंगे और उनसे सच बोलेंगे। उनकी सलाह से आपको फायदा होगा क्योंकि उन्हें समझ और तजुरबा है। (नीतिवचन 7:1, 2) वहीं दूसरी तरफ, अगर आप सच नहीं बोलेंगे, तो इससे वे आप पर भरोसा नहीं कर पाएँगे, न ही आप उनसे “हाँ” की उम्मीद कर सकेंगे।

सही समय: जब आपके मम्मी-पापा काम से थककर घर पहुँचते हैं या फिर जब उनका ध्यान किसी और काम पर लगा है, तो उस वक्‍त उनसे इजाज़त मत माँगिए। उनसे तब बात कीजिए जब वे फुरसत में बैठे हों। लेकिन ऐन वक्‍त का इंतज़ार करके, जवाब के लिए उन पर दबाव मत डालिए। आपके मम्मी-पापा को जल्दबाज़ी में फैसला लेना नहीं पसंद आएगा। पहले से ही पूछिए और उन्हें सोचने के लिए वक्‍त दीजिए।

पूरी जानकारी: आधी-अधूरी जानकारी मत दीजिए। साफ-साफ बताइए कि आप क्या करना चाहते हैं। जब आपके मम्मी-पापा आपसे पूछते हैं कि “वहाँ कौन-कौन होंगे?” “कोई बड़ा व्यक्‍ति होगा कि नहीं?” या “तुम घर कब आओगे?” तो यह मत कहिए “मुझे नहीं पता!” इस तरह के जवाब उन्हें परेशानी में डाल देते हैं।

रवैया: अपने मम्मी-पापा को दुश्मन मत सोचिए। अगर आप अपने मम्मी-पापा को दोस्त की तरह माने, तो आप उनके फैसलों का विरोध नहीं करेंगे और वे भी आपका साथ देंगे, क्योंकि उन्हें आपकी परवाह है।

अपने मम्मी-पापा को साबित कीजिए कि आप इतने समझदार हैं कि उनके फैसलों को मानने के लिए तैयार हैं और उन फैसलों की इज़्ज़त भी करते हैं। अगर आप ऐसा करेंगे, तो बदले में वे भी आपकी इज़्ज़त करेंगे। और अगली बार, वे खुद आपको इजाज़त देने के तरीके ढूँढ़ेंगे।