इस जानकारी को छोड़ दें

नौजवानों के सवाल

अगर मेरे पापा या मम्मी बीमार हों?

अगर मेरे पापा या मम्मी बीमार हों?

ज़्यादातर नौजवान दूसरों की देखभाल करने के बारे में ज़्यादा नहीं सोचते। उन्हें लगता है कि उनके पापा या मम्मी को अभी तो कोई बीमारी है नहीं और शायद सालों तक न हो।

लेकिन अगर आपके पापा या मम्मी को अचानक कोई बीमारी हो जाए तो आप क्या करेंगे? ऐसे दो नौजवानों की मिसाल पर गौर कीजिए जिन्होंने इस मुश्‍किल का सामना किया।

 ऐमालाइन की कहानी

मेरी मम्मी लंबे समय से बीमार हैं। उन्हें एलेर्स डैनलौस सिंड्रोम (EDS) है। यह बड़ी ही दर्दनाक बीमारी है जिसका असर शरीर के जोड़ों, चमड़ी और खून की नलियों पर होता है।

इस बीमारी का कोई इलाज नहीं। पिछले दस सालों से मेरी मम्मी की तबियत बिगड़ती जा रही है। कभी-कभी ऐसा वक्‍त भी आया जब उनके शरीर में इतना कम खून रह गया कि उनकी जान पर बन आयी या उनका दर्द इतना बढ़ गया कि वे मर जाना चाहती थीं।

मेरा पूरा परिवार यहोवा का साक्षी है। इस मुश्‍किल घड़ी में हमारी मंडली के भाई-बहनों ने हमें बहुत दिलासा दिया! मिसाल के लिए, एक लड़की ने जो मेरी उम्र की है, हमें एक कार्ड भेजा और उसमें लिखा कि वह हमसे बहुत प्यार करती है और हमें जो भी मदद चाहिए हम उससे बेझिझक माँग सकते हैं। ऐसे दोस्तों का होना वाकई एक आशीष है!

मुझे बाइबल पढ़ने से बहुत मदद मिली है। जैसे, भजन 34:18 मेरी मनपसंद आयतों में से एक है। वहाँ लिखा है, “यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है।” मुझे इब्रानियों 13:6 भी बहुत पसंद है। वह आयत कहती है, “यहोवा मेरा मददगार है, मैं न डरूँगा।”

इब्रानियों की इस आयत से मेरा बहुत हौसला बढ़ा है। मुझे सबसे ज़्यादा डर इस बात का है कि कहीं मैं अपनी मम्मी को खो न दूँ। मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ और उनके साथ बिताया एक-एक पल मेरे लिए कीमती है। इस आयत से मुझे आनेवाले कल का सामना करने की हिम्मत मिलती है, फिर चाहे वह कैसा भी हो।

लेकिन मुझे एक और बात का डर है। यह ऐसी बीमारी है जो बच्चों को माँ-बाप से मिलती है। मेरी मम्मी को नानी से मिली और मुझे अपनी मम्मी से। जी हाँ, मुझे भी यह बीमारी है। मगर इब्रानियों 13:6 के शब्द मुझे यकीन दिलाते हैं कि यहोवा इस हालात में भी “मेरा मददगार” होगा।

इस दौरान मैं उन बातों के बारे में सोचकर खुश रहने की कोशिश करती हूँ जो आज मेरे पास हैं। मैं बीते समय या आनेवाले कल के बारे में सोच-सोचकर दुखी नहीं रहती। अगर मैं सिर्फ यही सोचती रहूँ कि मम्मी पहले के मुकाबले अब ज़्यादा नहीं कर पातीं, तो मैं बहुत आसानी से निराश हो सकती हूँ। बाइबल कहती है कि आज हम जिन परेशानियों से गुज़र रहे हैं वे बस “पल-भर” की हैं। मगर हमारा आनेवाला कल बहुत सुनहरा होगा, जब बीमारियाँ नहीं रहेंगी और हम सब हमेशा की ज़िंदगी का आनंद उठाएँगे!—2 कुरिंथियों 4:17; प्रकाशितवाक्य 21:1-4.

ज़रा सोचिए: किस वजह से ऐमालाइन सही नज़रिया रख पाती है? मुश्‍किलों का सामना करते वक्‍त आप कैसे सही नज़रिया रख सकते हैं?

 ऐमिली की कहानी

मैं हाई स्कूल में पढ़ती थी। उस वक्‍त पापा के लिए निराशा का दौर शुरू होने लगा। ऐसा लगा जैसे मेरे पुराने पापा कहीं खो गए हैं और उनकी जगह एक नए आदमी ने ले ली है। उस समय के बाद से पापा को रह-रहकर दुख की भावना आ घेरती है, वे बेवजह डरने लगते हैं और चिंता में डूब जाते हैं। ऐसा पिछले 15 सालों से हो रहा है। वे जानते हैं कि दुखी होने की कोई वजह नहीं, फिर भी खुद को दुख के सागर में डूबा देखकर उन्हें कितना बुरा लगता होगा!

हम यहोवा के साक्षी हैं। जिस मंडली में हम जाते हैं वहाँ के भाई-बहनों ने हमारा बहुत साथ दिया है। वे हमारे साथ बड़े प्यार से पेश आते हैं और जानते हैं कि हम मुश्‍किल घड़ी से गुज़र रहे हैं। उन्होंने कभी पापा को यह महसूस नहीं करवाया कि वे मंडली में किसी काम के नहीं। जब मैं देखती हूँ कि मेरे पापा कितनी हिम्मत के साथ निराशा से लड़ रहे हैं, तो उनके लिए मेरा प्यार और बढ़ जाता है।

मेरे पापा पहले ऐसे कभी नहीं थे! वे कभी इस हद तक निराश नहीं होते थे, हालात चाहे जैसे भी हों वे कभी दुखी नहीं होते थे, हमेशा खुश रहते थे। मगर अब हर दिन उन्हें एक ऐसे दुश्‍मन से लड़ना पड़ता है जो दिखायी नहीं देता, बल्कि अंदर-ही-अंदर उन्हें खाए जा रहा है। उनका यह हाल मुझसे देखा नहीं जाता।

फिर भी पापा एक सही नज़रिया बनाए रखने की बहुत कोशिश करते हैं। हाल ही में जब वह गहरी निराशा में डूब गए थे, तो उन्होंने जैसे-तैसे करके हिम्मत जुटायी कि वे हर दिन बाइबल पढ़ेंगे, फिर चाहे वे कुछ ही आयतें क्यों न पढ़ें। भले ही यह बहुत छोटी-सी बात लगे, मगर निराशा से उबरने के लिए यह बहुत बढ़िया दवा साबित हुई। मुझे पापा पर बड़ा नाज़ है कि उन्होंने निराशा के इस दौर में खुद को इतनी अच्छी तरह सँभाला!

मुझे नहेमायाह 8:10 बहुत पसंद है जो कहता है, “यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है।” यह बात कितनी सच है! जब मैं मंडली में होती हूँ और वहाँ के कामों में खुद को व्यस्त रखती हूँ तो मेरी उदासी खुशी में बदल जाती है। और यह खुशी मुझे पूरे दिन सँभाले रखती है। मेरे पापा इस बात के जीते-जागते सबूत हैं कि ज़िंदगी में चाहे जो भी मुश्‍किल आए, यहोवा हमारा साथ कभी नहीं छोड़ेगा।

ज़रा सोचिए: ऐमिली ने इस बीमारी से लड़ने में अपने पापा की मदद कैसे की? अगर कोई गहरी निराशा से जूझ रहा है, तो आप कैसे उसकी मदद कर सकते हैं?