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यहोवा के साक्षी

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मेरी टीचर के साथ नहीं बनती, मैं क्या करूँ?

मेरी टीचर के साथ नहीं बनती, मैं क्या करूँ?

रेचल के अनुभव पर गौर कीजिए। रेचल के अच्छे नंबर आया करते थे। लेकिन जब वह सातवें क्लास में पहुँची, तो सब बदल गया। रेचल कहती है, “मेरा टीचर मुझे उसकी क्लास में फेल करने की हर मुमकिन कोशिश करता था।” इसकी क्या वजह थी? उस टीचर ने रेचल और उसकी माँ को अपने बर्ताव से यह साफ ज़ाहिर किया कि उसे उनका धर्म पसंद नहीं है।

टीचर आपके के लिए इन पत्थरों की तरह हैं, जो आपको नादान से समझदार बनने में मदद करते हैं, लेकिन इन पत्थरों पर चलने का काम आपका है

फिर क्या हुआ? रेचल कहती है, “यह बात साफ थी कि हर बार वह इस भेदभाव की वजह से मुझे कम नंबर दिया करता था। इसलिए मुझे और मेरी माँ को टीचर से इस बारे में बात करनी पड़ती थी। आगे चलकर उसने मुझे इस तरह परेशान करना छोड़ दिया।

अगर आपको इस तरह के हालात का सामना करना पड़े, तो हिम्मत करके अपने मम्मी-पापा से इस बारे में बात कीजिए। बेशक, वे आपके टीचर से ज़रूर बात करेंगे और ज़रूरत पड़े तो स्कूल के अधिकारियों से भी बात करके कोई हल निकालेंगे।

माना, सभी उलझनें आसानी से नहीं सुलझतीं। इसलिए शायद हमें कभी-कभी बस बरदाश्त करना पड़ेगा। (रोमियों 12:17, 18) तान्या कहती है, “मेरा एक टीचर क्लास के बच्चों से बहुत बुरी तरह से पेश आता था। वह अकसर हमारी बेइज़्ज़ती करता था और हमें बेवकूफ बुलाता था। एक बार, उसने मुझे रुला दिया, लेकिन फिर मैंने उसकी बातों को दिल पर लेना छोड़ दिया। मैं उसकी क्लास में अपने काम पर ध्यान देने और उसमें व्यस्त रहने लगी। जिस वजह से, वह मुझे कम परेशान करने लगा और मुझे भी कुछ गिने-चुने बच्चों की तरह अच्छे नंबर मिलने लगे। दो साल बाद, उस टीचर को स्कूल से निकाल दिया गया।

सौ बात की एक बात: अगर आप ऐसे टीचरों से पेश आना सीख जाएँगे, जिनके साथ एक अच्छा रिश्ता बनाए रखना मुश्किल है, तो आप ज़िंदगी का एक ज़रूरी हुनर सीख जाएँगे। इस हुनर से आपको आगे चलकर ऐसे बॉस के साथ पेश आने में मदद मिलेगी, जिसके साथ आपकी नहीं बनती। (1 पतरस 2:18) इसके अलावा आगे चलकर, जब आपको कोई अच्छा टीचर मिलेगा, तो आप उसकी कदर भी करना सीखेंगे।