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खेल-कूद के बारे में मुझे क्या पता होना चाहिए?

खेल-कूद के बारे में मुझे क्या पता होना चाहिए?

खेल-कूद आपके लिए या तो अच्छा हो सकता है या बुरा। यह इस बात से तय होता है कि आप क्या खेलते हैं, किस तरह खेलते हैं और कितना खेलते हैं।

 इसके क्या फायदे हैं?

खेल-कूद से सेहत अच्छी रहती है। बाइबल इस बात को मानती है कि ‘शरीर की कसरत फायदेमंद होती है।’ (1 तीमुथियुस 4:8) रायन नाम का एक जवान आदमी कहता है, “खेल-कूद से हम चुस्त-दुरुस्त रह सकते हैं। घर में बैठे-बैठे वीडियो गेम खेलने से तो अच्छा है कि हम बाहर जाकर कुछ खेलें।”

खेल खेलने से हम दूसरों के साथ मिलकर काम करना और खुद पर संयम रखना सीखते हैं। बाइबल में एक खेल के बारे में बताया गया है जिससे हमें अच्छी सीख मिलती है। यह बताती है, “दौड़ में दौड़नेवाले सभी दौड़ते हैं, मगर इनाम एक ही को मिलता है।” इसके बाद यह बताती है, “प्रतियोगिता में हिस्सा लेनेवाला हर आदमी सब बातों में संयम से काम लेता है।” (1 कुरिंथियों 9:24, 25) इससे हम क्या सीखते हैं? यही कि नियम के मुताबिक कोई खेल खेलने के लिए संयम होना और दूसरों के साथ मिलकर खेलना भी ज़रूरी है। एबीगेल नाम की एक जवान लड़की भी इस बात से सहमत है। वह कहती है, “खेल-कूद से मैंने सीखा कि कैसे दूसरों के साथ मिलकर काम करें और उनसे खुलकर बात करें।”

खेल में हिस्सा लेने से हम दोस्त बना पाते हैं। इससे लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं। जॉर्डन नाम का एक जवान लड़का कहता है, “देखा जाए तो सभी किस्म के खेल से होड़ की भावना पैदा होती है। लेकिन अगर आप सिर्फ मज़े के लिए कोई खेल खेलें तो अच्छे दोस्त बना पाएँगे।”

 इसमें क्या खतरे छिपे हैं?

आप क्या खेल खेलते हैं। बाइबल बताती है, “यहोवा भले व बुरे लोगों को परखता है, और वह उन लोगों से घृणा करता है, जो हिंसा से प्रीति रखते हैं।”—भजन 11:5, हिंदी ईज़ी-टू-रीड वर्शन।

कुछ खेल हिंसा से भरे होते हैं। लॉरेन नाम की एक लड़की कहती है, “बॉक्सिंग का पूरा खेल तो यही है कि सामनेवाले को मारना। मसीही होने के नाते हम लड़ते नहीं हैं तो फिर हम ऐसे खेल का मज़ा क्यों लें जिसमें दूसरों को लात-घूँसे मारे जाते हैं?”

ज़रा सोचिए: क्या आपने कभी हिंसा से भरा कोई खेल देखा या खेला है और यह सोचा है कि मैं सचमुच में ऐसी हिंसा नहीं करूँगा? अगर हाँ, तो याद रखिए कि भजन 11:5 में क्या बताया गया है। यहोवा उनसे नफरत करता है जो न सिर्फ हिंसा करते हैं बल्कि हिंसा से प्रीति  रखते हैं।”

आप किस तरह खेलते हैं। बाइबल बताती है, “झगड़ालूपन या अहंकार की वजह से कुछ न करो, मगर मन की दीनता के साथ दूसरों को खुद से बेहतर समझो।”—फिलिप्पियों 2:3.

बेशक कोई भी खेल जिसमें दो टीम शामिल हो, वहाँ थोड़ी-बहुत होड़ की भावना पैदा हो ही जाती है। लेकिन हर हाल में जीतने का जुनून खेल का मज़ा खराब कर देता है। ब्रायन नाम का एक जवान लड़का कहता है, “आपमें होड़ की भावना बहुत जल्दी आ सकती है। आप किसी खेल में जितने अच्छे होंगे, उतना ही आपको नम्र होने की ज़रूरत है।”

ज़रा सोचिए: क्रिस नाम का एक जवान आदमी कहता है, “हम हर हफ्ते फुटबॉल खेलते हैं और हमें कई बार चोट लगी है।” इसलिए खुद से पूछिए, ‘चोट लगने की क्या वजह हो सकती है? मैं क्या कर सकता हूँ जिससे कि चोट लगने का खतरा न हो?’

आप कितना खेलते हैं? बाइबल बताती है, “तुम पहचान सको कि ज़्यादा अहमियत रखनेवाली बातें क्या हैं।”—फिलिप्पियों 1:10.

आपको पहचानना होगा कि ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी बातें क्या होनी चाहिए और यहोवा की सेवा सबसे पहली जगह पर आनी चाहिए। कई खेल ऐसे होते हैं जिन्हें खेलने या देखने में घंटों लग जाते हैं। डारया नाम की एक जवान लड़की कहती है, “मम्मी से मेरा झगड़ा अकसर इस बात पर होता था कि मैं टी.वी. पर खेल देखने में घंटों बिता देती थी जबकि मैं उस समय का और भी अच्छा इस्तेमाल कर सकती थी।”

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ज़रा सोचिए: जब मम्मी-पापा आपको सलाह देते हैं कि आपको किन बातों को ज़िंदगी में पहली जगह देनी चाहिए, तो क्या आप उनकी सुनते हैं? ट्रीना नाम की एक जवान लड़की कहती है, “जब मैं और मेरे भाई-बहन खेल देखते थे और दूसरे ज़रूरी काम नहीं करते थे, तो मम्मी हमसे कहती थी, ‘खिलाड़ियों को तो खेलने के पैसे मिल ही जाएँगे फिर चाहे तुम उनके खेल देखो या न देखो। लेकिन तुम्हें कौन पैसे देगा?’ मम्मी के कहने का मतलब था: खिलाड़ियों के पास तो नौकरी है। लेकिन अगर हम अपना होमवर्क नहीं करेंगे और दूसरी ज़िम्मेदारियाँ नहीं निभाएँगे, तो भविष्य में अपना गुज़ारा करने के लिए हमें कौन नौकरी देगा? दरअसल मम्मी हमें सिखाना चाहती थी कि खेल देखना या खेलना हमारी ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी नहीं होना चाहिए।”