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नौजवानों के सवाल

क्या मैं घर छोड़ने के लिए तैयार हूँ?

क्या मैं घर छोड़ने के लिए तैयार हूँ?

घर छोड़कर जाने के ख्याल से आप खुश हो सकते हैं और थोड़ा डर भी सकते हैं। पर आपको कैसे पता चलेगा कि आप घर छोड़ने के लिए तैयार हैं?

 आप क्यों घर छोड़कर जाना चाहते हैं?

ऐसी बहुत सी बातें हो सकती हैं जिनसे आपको लगे कि आपको घर छोड़ देना चाहिए। लेकिन ज़रूरी नहीं कि वे सभी वजह सही हों। उदाहरण के लिए, मारिओ नाम का एक लड़का मानता है, “मैं इसलिए घर छोड़कर जाना चाहता था ताकि मैं उन कामों से छुटकारा पा सकूँ, जो मुझे घर पर करने पड़ते थे।”

लेकिन, सच तो यह है कि घर छोड़ देने से आपकी आज़ादी पहले से कम हो जाती है। 18 साल की आन्या कहती है, “अगर आप अकेले रहेंगे तो आपको खुद सारे काम करने पड़ेंगे। जैसे, अपने नए घर की साफ-सफाई करना, अपने लिए खाना बनाना और अपने बिल भरना। वहाँ मम्मी-पापा आपकी मदद करने के लिए नहीं होंगे।”

सौ बात की एक बात। आप घर छोड़ने के लिए तैयार हैं या नहीं यह जानने के लिए, आपको पता होना चाहिए कि आप क्यों घर छोड़ना चाहते हैं।

 क्या आप घर छोड़ने के लिए तैयार हैं?

यीशु मसीही ने कहा था, “तुममें ऐसा कौन है जो एक मीनार बनाना चाहता हो और बैठकर पहले इसमें लगनेवाले खर्च का हिसाब न लगाए ताकि देखे कि उसे पूरा करने के लिए उसके पास काफी पैसा है या नहीं?” (लूका 14:28) आप घर छोड़ने पर होने वाले “खर्च का हिसाब” कैसे लगा सकते हैं? इन मामलों में खुद की जाँच कीजिए।

क्या आप पैसे का सही इस्तेमाल करते हैं?

पवित्र शास्त्र कहता है, “पैसा हिफाज़त करता है।”—सभोपदेशक 7:12.

  • क्या आपको पैसे बचाना मुश्‍किल लगता है?

  • क्या आप बहुत ज़्यादा पैसे खर्च करते हैं?

  • क्या आप अकसर दूसरों से उधार लेते हैं?

अगर इनमें से एक भी सवाल का जवाब हाँ है, तो आपका अकेले रहने का सपना, सपना ही रह जाएगा।

“मेरे बड़े भाई ने 19 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया था। एक साल के अन्दर ही उसके सारे पैसे खत्म हो गए, बैंक वालों ने उसकी गाड़ी ज़ब्त कर ली क्योंकी वह लोन समय पर नहीं चुका पाया, सबने उसे उधार देने से मना कर दिया क्योंकि वे उस पर भरोसा नहीं करते थे। इसलिए वह घर आने के लिए तरसने लगा।”—डेन्येल।

आज आप क्या कर सकते हैं? अपने मम्मी-पापा से पूछिए कि एक महीने में कितना खर्चा होता है। उन्हें कौन-कौन से बिल भरने होते हैं और वे कैसे बजट बनाते हैं ताकि सभी बिल समय पर भर सकें। उनसे यह भी पूछिए कि वे कैसे पैसे बचाते हैं।

सौ बात की एक बात। अगर आप आज पैसे का सही इस्तेमाल करना सीख लेंगे, तो आप तब भी मुश्‍किलों का सामना कर पाएँगे जब आप अकेले रहेंगे।

क्या आप हर काम समय पर करते हैं?

पवित्र शास्त्र कहता है, “हर कोई अपना बोझ खुद उठाएगा।”—गलातियों 6:5.

  • क्या आप हर काम में टाल-मटोल करते हैं?

  • क्या खुद के काम करने के लिए भी मम्मी-पापा आपको याद दिलाते हैं?

  • क्या अकसर आप मम्मी-पापा के बनाए नियम तोड़ देते हैं?

अगर इनमें से एक भी सवाल का जवाब हाँ है, तो जब आप अकेले रहेंगे, आपके लिए खुद अपने काम करना और भी मुश्‍किल होगा।

“जब आप अकेले रहते हैं तो आपको ऐसे बहुत से काम करने पड़ते हैं, जिनमें आपको कोई मज़ा नहीं आता। कोई भी आपको वे काम करने के लिए नहीं कहता इसलिए एक अच्छा शेड्यूल बनाइए और खुद उन ज़रूरी कामों को कीजिए।”—जेसिका।

आज आप क्या कर सकते हैं? एक महीने के लिए पूरे घर की ज़िम्मेदारी उठाइए। जैसे, खुद घर की साफ-सफाई कीजिए, अपने कपड़े धोइए, बाज़ार से फल और सब्ज़ी लाइए, हर रात खाना बनाइए और उसके बाद बरतन भी साफ कीजिए। इससे आपको पता चलेगा कि जब आप अकेले रहेंगे तो आपको कौन-कौन से काम करने होंगे।

सौ बात की एक बात। अगर आप अकेले रहना चाहते हैं तो यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपना हर काम समय पर करें।

बिना किसी तैयारी के घर छोड़ देना बिलकुल ऐसा है जैसे, आप एक हवाई जहाज़ से बिना यह जाने कूद गए कि पैराशूट कैसे इस्तेमाल करते हैं।

क्या आप अपनी भावनाओं को काबू में रखते हैं?

पवित्र शास्त्र कहता है, “इन सब बातों को खुद से पूरी तरह दूर करो, जैसे क्रोध, गुस्सा, बुराई, गाली-गलौज।”—कुलुस्सियों 3:8.

  • क्या आपको दूसरों के साथ मिलकर रहना मुश्‍किल लगता है?

  • क्या आप अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाते?

  • क्या आप हमेशा यही चाहते हैं सारे काम आपके तरीके से हों?

अगर इनमें से एक भी सवाल का जवाब हाँ है, तो आपके लिए आज और आगे भी, एक घर में किसी और के साथ रहना बहुत मुश्‍किल होगा। फिर चाहे वह आपका जीवन साथी ही क्यों न हो।

“एक ही घर में किसी और के साथ रहने से मुझे अपनी कमज़ोरियाँ पता चलीं। मैंने सीखा कि जब मैं परेशान होती हूँ, तो मैं अपना गुस्सा दूसरों पर नहीं निकाल सकती। अपनी परेशानियों का सामना करने के लिए मुझे कुछ और करना होगा।”—हेलेना।

आज आप क्या कर सकते हैं? अपने मम्मी-पापा और भाई-बहनों के साथ मिलकर रहना सीखिए। जब वे गलती करते हैं तो उन्हें माफ कीजिए। इससे पता चलेगा कि आप उन लोगों की गलतियाँ माफ करेंगे या नहीं जो आनेवाले समय में आपके साथ रहेंगे।

सौ बात की एक बात। अकेले रहने का मतलब यह नहीं है कि आपको अपनी ज़िम्मेदारियों से छुटकारा मिल जाएगा। इसके लिए आपको और भी तैयारी करने की ज़रूरत है। क्यों न आप उन लोगों से बात करें जो ऐसा करने में कामयाब हुए हैं? उनसे पूछिए, ऐसी कौन सी बात है जो उन्हें लगती है कि उन्हें उस वक्‍त पता होनी चाहिए थी जब उन्होंने घर छोड़ा था या वे उस वक्‍त कौन सा काम अलग तरीके से करते। कोई भी बड़ा फैसले लेने से पहले ऐसा करना अच्छा होगा।