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क्या मुझे टैटू बनवाना चाहिए?

क्या मुझे टैटू बनवाना चाहिए?

 टैटू में ऐसी क्या खास बात है?

रायन नाम का एक नौजवान कहता है, “मुझे लगता है कि कुछ टैटू खूबसूरत कला की मिसाल हैं!”

जब आप देखते हैं कि दूसरे किस वजह से टैटू बनवाते हैं, तो शायद आपको लगे कि उस इरादे से टैटू बनवाने में कोई बुराई नहीं। उदाहरण के लिए, जिलियन नाम की एक नौजवान कहती है, “मैं जिस लकड़ी के साथ स्कूल जाती हूँ, उसकी मम्मी बचपन में ही गुज़र गयीं। जब वह लड़की 13-14 साल की हुई तो उसने अपनी गरदन पर अपनी मम्मी का नाम गुदवा लिया। इस तरह के टैटू कितने अच्छे लगते हैं।”

चाहे आप किसी भी वजह से टैटू बनवाना चाहते हों, आपको अपने शरीर पर हमेशा के लिए कुछ भी गुदवाने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए! अगर आप टैटू बनवाने की सोच रहे हैं तो आपको किन सवालों पर गौर करना चाहिए? बाइबल के कौन-से सिद्धांत सही फैसला लेने में आपकी मदद कर सकते हैं?

 आपको क्या सवाल पूछने चाहिए?

इससे आपकी सेहत पर क्या असर पड़ेगा? मेओ क्लीनिक की वेबसाइट बताती है, “टैटू त्वचा को खराब कर देते हैं, मतलब इनसे इंफैक्शन या दूसरे नुकसान होने का खतरा रहता है। कभी-कभी टैटू की इंक या स्याही के आस-पास फोड़े हो जाते हैं। टैटू गुदवाने से आपकी त्वचा पर चमड़ी की गाँठ भी बन सकती है।” वेबसाइट यह भी बताती है, “अगर टैटू बनाने के लिए इस्तेमाल की गयी मशीन पर पहले से किसी का खून लगा हो, तो आपको कई तरह की खून की बीमारियाँ भी हो सकती हैं।”

इससे दूसरों में आपका कैसा नाम होगा? आप जैसे दिखते हैं उससे आपके बारे में बहुत कुछ पता चलता है। इससे आप या तो समझदार नज़र आते हैं या नासमझ, भरोसेमंद या फिर गैर-ज़िम्मेदार। समैंथा नाम की एक लड़की कहती है, “जब भी मैं किसी पर टैटू बना देखती हूँ, मुझे लगता है कि वह शराब पीनेवाला और मौज-मस्ती करनेवाला इंसान है।”

अठारह साल की मेलेनी का टैटू के बारे में कुछ और कहना है। वह कहती है, “मुझे लगता है कि टैटू बनवाने से आपकी खूबसूरती में दाग लग जाता है। ऐसा लगता है जैसे टैटू बनवाकर लोग दूसरों से अपना असली चेहरा छिपा रहे हों, वे दूसरों को बताना ही नहीं चाहते कि वे असल में कैसे हैं।”

कुछ वक्‍त बाद, कहीं आप उससे ऊब तो नहीं जाएँगे? समय के गुज़रते मोटापे या बढ़ती उम्र की वजह से त्वचा ढीली पड़ जाती है और टैटू का आकार बिगड़ जाता है। जोसफ नाम का एक नौजवान कहता है, “मैंने देखा है कि सालों बाद वही टैटू लोगों पर कितने भद्दे लगते हैं।”

इक्कीस साल का ऐलन कहता है, “ज़्यादातर टैटू का डिज़ाइन वक्‍त के साथ पुराना हो जाता है। जो टैटू एक वक्‍त किसी को बहुत पसंद था, वह कुछ सालों बाद उसे मामूली लगने लगता है।”

ऐलन ने सही कहा। सच तो यह है कि समय के चलते लोगों की उम्र बढ़ती है, उनका नज़रिया, उनकी पसंद-नापसंद बदल जाती है, मगर उनके टैटू नहीं बदलते। टैरिसा नाम की एक नौजवान कहती है, “टैटू बनवाने से मुझे ज़िंदगी-भर अपनी बेवकूफी का एहसास होता रहेगा। इससे तो अच्छा मैं वह चीज़ करूँ ही नहीं जिसका मुझे सालों बाद अफसोस हो।”

 पवित्र शास्त्र के कौन-से सिद्धांत यहाँ लागू होते हैं?

एक समझदार इंसान कोई भी फैसला करने से पहले हर पहलू के बारे में अच्छी तरह सोचता है। (नीतिवचन 21:5; इब्रानियों 5:14) इसलिए टैटू बनवाने से पहले इन बाइबल सिद्धांतों के बारे में सोचिए।

  • कुलुस्सियों 3:20: “हे बच्चो, हर बात में अपने माता-पिता का कहना माननेवाले बनो, क्योंकि प्रभु इससे खुश होता है।”

    अगर आप अपने मम्मी-पापा के साथ रहते हैं मगर उनकी बात नहीं मानते, तो आपको क्या अंजाम भुगतना पड़ सकता है?

  • 1 पतरस 3:3, 4: “तुम्हारा सजना-सँवरना ऊपरी न हो, जैसे बाल गूंथना, सोने के गहने या बढ़िया पोशाक पहनना। इसके बजाय, तुम अपने अंदर के इंसान को सजाओ-सँवारो और इसे शांत और कोमल स्वभाव पहनाओ। यह ऐसी सजावट है जो कभी पुरानी नहीं पड़ती।”

    आपको क्या लगता है, बाइबल “अंदर के इंसान” को सजाने पर इतना ज़ोर क्यों देती है?

  • 1 तीमुथियुस 2:9: “स्त्रियाँ . . . मर्यादा [या शालीनता] के साथ और स्वस्थ मन से अपना सिंगार करें।”

    “शालीनता” से सिंगार करने का क्या मतलब है? यह क्यों कहा जा सकता है कि आगे चलकर टैटू की खूबसूरती मिट सकती है, मगर शालीनता से सिंगार करनेवाले की नहीं?

  • रोमियों 12:1: “अपने शरीर को जीवित, पवित्र और परमेश्‍वर को भानेवाले बलिदान के तौर पर अर्पित करो। इस तरह तुम अपनी सोचने-समझने की शक्‍ति का इस्तेमाल करते हुए पवित्र सेवा कर सकोगे।”

    आप अपने शरीर के साथ जो करते हैं उससे परमेश्‍वर को क्यों फर्क पड़ता है?

इन बातों को ध्यान में रखते हुए कई लोगों ने फैसला किया कि वे टैटू नहीं बनवाएँगे। इसके बजाय, उन्होंने एक बेहतरीन तरीका ढूँढ़ निकाला है। टैरिसा जिसका ज़िक्र पहले भी आया था कहती है, “अगर आपको कोई उसूल या नारा पसंद है तो उसके शब्दों को शरीर पर गुदवाने के बजाय क्यों न आप उस उसूल या नारे के मुताबिक ज़िंदगी जीएँ। या अगर कोई इंसान आपकी ज़िंदगी में इतना ज़रूरी है तो उसके नाम का टैटू गुदवाने के बजाय उसे बताइए कि वह आपके लिए कितना मायने रखता है। टैटू बनवाने से अच्छा है कि आप जो मानते हैं उसके मुताबिक जीएँ।”