2 यूहन्‍ना 1:1-13

 मैं एक प्राचीन, यह चिट्ठी चुनी हुई स्त्री को लिख रहा हूँ। मैं उसके बच्चों को भी लिख रहा हूँ, जिनसे मैं सचमुच प्यार करता हूँ और सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि वे सभी उनसे प्यार करते हैं जो सच्चाई को जान गए हैं।  इसी सच्चाई पर चलने की वजह से हम तुमसे प्यार करते हैं और यह सच्चाई हमेशा हमारे साथ रहेगी।  तब परमेश्‍वर हमारे पिता और पिता के बेटे यीशु मसीह की तरफ से महा-कृपा, दया और शांति हमारे साथ होगी और सच्चाई और प्यार भी होगा।  मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तेरे कुछ बच्चे सच्चाई की राह पर चल रहे हैं, ठीक जैसे हमें पिता की तरफ से आज्ञा मिली है।  इसलिए, हे स्त्री, मैं तुझे कोई नयी आज्ञा लिखकर गुज़ारिश नहीं कर रहा बल्कि वही आज्ञा लिख रहा हूँ जो हमारे पास शुरू से थी कि हम एक-दूसरे से प्यार करें।  और प्यार का मतलब यह है कि हम पिता की आज्ञाओं के मुताबिक चलते रहें। ठीक जैसा तुमने शुरू से सुना है, आज्ञा यही है कि तुम प्यार दिखाते रहो।  इसलिए कि दुनिया में बहुत-से धोखा देनेवाले निकल पड़े हैं। ये वे लोग हैं जो यह स्वीकार नहीं करते कि यीशु मसीह हाड़-माँस का इंसान बनकर आया था। जो इस बात को स्वीकार नहीं करता, वही धोखेबाज़ और मसीह का विरोधी है।  तुम अपनी खुद की चौकसी करो, ताकि तुम उन चीज़ों को खो न दो जिन्हें तुममें पैदा करने के लिए हमने मेहनत की है। इसके बजाय, ऐसा हो कि तुम पूरा इनाम पाओ।  हर कोई जो मसीह की शिक्षाओं के दायरे से बाहर निकल जाता है और उनमें बना नहीं रहता, परमेश्‍वर उसे मंज़ूर नहीं करता। जो उसकी शिक्षाओं में बना रहता है, उसी को पिता और बेटा दोनों अपनी मंज़ूरी देते हैं। 10  अगर कोई तुम्हारे पास आता है और यह शिक्षा नहीं लाता, तो ऐसे इंसान को अपने घर में कभी आने मत देना, न ही उसे नमस्कार करना। 11  इसलिए कि जो उसे नमस्कार करता है वह उसके दुष्ट कामों में हिस्सेदार बनता है। 12  हालाँकि मुझे बहुत सारी बातें लिखनी थीं मगर मैं नहीं चाहता कि सबकुछ स्याही से कागज़ पर लिख दूँ, बल्कि यह उम्मीद करता हूँ कि मैं तुम्हारे पास आऊँ और आमने-सामने तुमसे बात करूँ, ताकि तुम्हारी खुशी और भी बढ़ जाए। 13  तेरी बहन जो चुनी हुई है, उसके बच्चे तुझे नमस्कार कहते हैं।

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