लूका के मुताबिक खुशखबरी 23:1-56

23  तब वे सब-के-सब उठे और उसे पीलातुस के पास ले गए।+  वहाँ पहुँचकर वे उस पर इलज़ाम लगाने लगे,+ “यह आदमी हमारे राष्ट्र को बगावत के लिए भड़काता है, सम्राट को कर देने से मना करता है+ और कहता है कि मैं मसीह हूँ, मैं राजा हूँ।”+  तब पीलातुस ने उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” जवाब में यीशु ने कहा, “तू खुद कह रहा है।”+  तब पीलातुस ने प्रधान याजकों और सारी भीड़ से कहा, “मुझे इस आदमी में कोई दोष नज़र नहीं आता।”+  मगर वे और भी ज़ोर देकर कहने लगे, “यह सारे यहूदिया में, गलील से लेकर इस जगह तक लोगों को सिखा-सिखाकर भड़का रहा है।”  यह सुनकर पीलातुस ने पूछा कि क्या यह आदमी गलीली है  और यह पक्का कर लेने के बाद कि यीशु उस इलाके से है जिस पर हेरोदेस का अधिकार है,+ उसने उसे हेरोदेस के पास भेज दिया। हेरोदेस उन दिनों यरूशलेम में था।  यीशु को देखकर हेरोदेस बहुत खुश हुआ इसलिए कि वह एक अरसे से उसे देखना चाहता था। हेरोदेस ने उसके बारे में बहुत कुछ सुना था+ और उम्मीद कर रहा था कि यीशु उसके सामने कोई चमत्कार दिखाएगा।  इसलिए हेरोदेस उससे बहुत देर तक सवाल करता रहा, मगर यीशु ने कोई जवाब नहीं दिया।+ 10  लेकिन प्रधान याजक और शास्त्री तैश में आ गए और खड़े हो-होकर उस पर इलज़ाम लगाने लगे। 11  तब हेरोदेस ने अपने सैनिकों के साथ मिलकर उसकी बेइज़्ज़ती की+ और उसे एक शानदार* कपड़ा पहनाकर उसकी खिल्ली उड़ायी+ और उसे वापस पीलातुस के पास भेज दिया।+ 12  उसी दिन हेरोदेस और पीलातुस के बीच दोस्ती हो गयी, जबकि अब तक उनमें दुश्‍मनी थी। 13  फिर पीलातुस ने प्रधान याजकों, अधिकारियों और लोगों को इकट्ठा किया 14  और उनसे कहा, “तुम इस आदमी को मेरे पास यह कहकर लाए कि यह लोगों को बगावत करने के लिए भड़का रहा है। देखो! मैंने तुम्हारे सामने इससे सवाल-जवाब किए, मगर तुम इस पर जो इलज़ाम लगा रहे हो उसका मुझे कोई सबूत नहीं मिला।+ 15  यहाँ तक कि हेरोदेस को भी कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए उसने इसे वापस हमारे पास भेज दिया है। इसने ऐसा कोई काम नहीं किया कि इसे मौत की सज़ा दी जाए। 16  इसलिए मैं इसे कोड़े लगवाकर*+ छोड़ देता हूँ।” 17  — 18  मगर सारी भीड़ चिल्ला उठी, “इस आदमी को मार डाल* और हमारे लिए बरअब्बा को रिहा कर दे!”+ 19  (बरअब्बा को शहर में बगावत और कत्ल करने की वजह से जेल में डाला गया था।) 20  एक बार फिर पीलातुस ने भीड़ से बात की क्योंकि वह यीशु को रिहा करना चाहता था।+ 21  तब वे चीख-चीखकर कहने लगे, “इसे काठ पर लटका दे! काठ पर लटका दे!”*+ 22  उसने तीसरी बार उनसे कहा, “क्यों, इस आदमी ने ऐसा क्या बुरा किया है? इसने ऐसा कोई काम नहीं किया कि इसे मौत की सज़ा दी जाए।+ इसलिए मैं इसे कोड़े लगवाकर* छोड़ देता हूँ।” 23  मगर वे अपनी बात पर अड़े रहे और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर कहने लगे कि उसे मार डाला जाए।* उनका चिल्लाना बढ़ता ही गया।+ 24  इसलिए पीलातुस ने यह फैसला सुनाया कि उनकी माँग पूरी की जाए। 25  उसने उस आदमी को तो रिहा कर दिया, जो बगावत और कत्ल के इलज़ाम में जेल में था और जिसकी लोग माँग कर रहे थे, जबकि उसने यीशु को उनके हवाले कर दिया ताकि वे उसके साथ जो चाहे करें। 26  जब वे उसे ले जा रहे थे, तो उन्होंने शमौन नाम के एक आदमी को पकड़ा जो कुरेने का रहनेवाला था और देहात से आ रहा था। उन्होंने यातना का काठ उस पर रख दिया कि वह उसे उठाकर यीशु के पीछे-पीछे चले।+ 27  उसके पीछे लोगों की बड़ी भीड़ चल रही थी जिसमें औरतें भी थीं, जो दुख के मारे छाती पीट रही थीं और उसके लिए बिलख-बिलखकर रो रही थीं। 28  यीशु ने पलटकर उन औरतों को देखा और कहा, “यरूशलेम की बेटियो, मेरे लिए मत रोओ। इसके बजाय, अपने और अपने बच्चों के लिए रोओ।+ 29  क्योंकि देखो! वे दिन आ रहे हैं जब लोग कहेंगे, ‘सुखी हैं वे औरतें जो बाँझ हैं और जिन्होंने किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया और किसी को दूध नहीं पिलाया!’+ 30  तब वे पहाड़ों से कहने लगेंगे, ‘हम पर गिर पड़ो!’ और पहाड़ियों से कहेंगे, ‘हमें ढक लो!’+ 31  जब पेड़ हरा है तब वे ऐसा कर रहे हैं, तो उस वक्‍त क्या करेंगे जब यह सूख जाएगा?” 32  उसके साथ दो और आदमियों को, जो अपराधी थे मार डालने के लिए ले जाया जा रहा था।+ 33  जब वे खोपड़ी कहलानेवाली जगह पर पहुँचे,+ तो वहाँ उन्होंने यीशु को दो अपराधियों के साथ काठ पर ठोंक दिया। एक अपराधी उसके दायीं तरफ था और दूसरा बायीं तरफ।+ 34  मगर यीशु कह रहा था, “पिता, इन्हें माफ कर दे क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।”+ उन्होंने उसके कपड़े आपस में बाँटने के लिए चिट्ठियाँ डालीं।+ 35  और लोग वहाँ खड़े देख रहे थे। मगर उनके धर्म-अधिकारी* यह कहकर उसकी खिल्ली उड़ाते रहे, “इसने दूसरों को तो बचाया। और अगर यह परमेश्‍वर का भेजा हुआ मसीह और उसका चुना हुआ है, तो अब खुद को बचाए।”+ 36  यहाँ तक कि सैनिकों ने भी उसकी खिल्ली उड़ायी और उसे खट्टी दाख-मदिरा देते हुए+ कहा, 37  “अगर तू यहूदियों का राजा है, तो खुद को बचा ले।” 38  और उसके ऊपर यह लिखकर लगा दिया गया, “यह यहूदियों का राजा है।”+ 39  तब उसके साथ लटकाए गए एक अपराधी ने उसे ताना मारा,+ “तू तो मसीह है न? तो फिर खुद को बचा और हमें भी।” 40  तब दूसरे अपराधी ने उसे डाँटा, “क्या तुझे परमेश्‍वर का ज़रा भी डर नहीं, जबकि तू भी वही सज़ा पा रहा है? 41  हमें जो सज़ा मिली वह सही है, क्योंकि हमने जो काम किए हैं उन्हीं का अंजाम भुगत रहे हैं। मगर इस आदमी ने तो कुछ बुरा नहीं किया।” 42  फिर उसने कहा, “यीशु, जब तू अपने राज में आए+ तो मुझे याद करना।” 43  तब यीशु ने उससे कहा, “मैं आज तुझसे सच कहता हूँ, तू मेरे साथ फिरदौस में होगा।”+ 44  यह दिन का करीब छठा घंटा था, फिर भी पूरे देश में* अंधकार छा गया और नौवें घंटे तक छाया रहा+ 45  क्योंकि सूरज ने रौशनी देना बंद कर दिया। तब मंदिर का परदा+ बीच से फटकर दो टुकड़े हो गया।+ 46  यीशु ज़ोर से चिल्लाया और उसने कहा, “पिता, मैं अपनी जान तेरे हवाले करता हूँ।”+ यह कहने के बाद उसने दम तोड़ दिया।+ 47  जो कुछ हुआ था उसे देखकर सेना-अफसर ने परमेश्‍वर की बड़ाई की और कहा, “यह वाकई एक नेक इंसान था।”+ 48  वहाँ जमा भीड़ ने जब यह सब देखा, तो वे छाती पीटते हुए घर लौट गए। 49  इतना ही नहीं, उसकी जान-पहचानवाले सब लोग कुछ दूरी पर खड़े थे। और जो औरतें गलील से उसके साथ-साथ आयी थीं, वे भी खड़ी होकर यह सब देख रही थीं।+ 50  वहाँ यूसुफ नाम का एक आदमी था, जो धर्म-सभा का सदस्य और एक अच्छा और नेक इंसान था।+ 51  (उसने धर्म-अधिकारियों की साज़िश और उनके काम में उनका साथ नहीं दिया था।) वह यहूदिया के लोगों के एक शहर अरिमतियाह का रहनेवाला था और परमेश्‍वर के राज के आने का इंतज़ार कर रहा था। 52  वह पीलातुस के सामने गया और उसने यीशु की लाश माँगी। 53  उसने उसकी लाश नीचे उतारी+ और उसे बढ़िया मलमल में लपेटकर चट्टान में खोदी गयी कब्र में रखा,+ जिसमें अब तक कोई लाश नहीं रखी गयी थी। 54  यह तैयारी का दिन था+ और सब्त+ शुरू होनेवाला था। 55  मगर जो औरतें यीशु के साथ गलील से आयी थीं, वे भी पीछे-पीछे गयीं और उन्होंने कब्र को अच्छी तरह देखा और यह भी देखा कि उसकी लाश कैसे रखी गयी थी।+ 56  फिर वे लौट गयीं ताकि मसाले और खुशबूदार तेल तैयार करें। मगर हाँ, जैसी आज्ञा थी, उन्होंने सब्त के दिन आराम किया।+

कई फुटनोट

या “उजला; चमकदार।”
शा., “सज़ा देकर।”
शा., “को ले जा।”
या “इसे काठ पर लटकाकर मार डाल! काठ पर लटकाकर मार डाल!”
शा., “सज़ा देकर।”
या “काठ पर मार डाला जाए।”
शा., “शासक।”
शा., “पूरी धरती पर।”

अध्ययन नोट

सम्राट: यूनानी में “कैसर।” धरती पर यीशु की प्रचार सेवा के दौरान रोम का सम्राट तिबिरियुस था। मगर शब्द “कैसर” सिर्फ हुकूमत करनेवाले सम्राट के लिए ही नहीं बल्कि रोमी सरकार और उसके प्रतिनिधियों के लिए भी इस्तेमाल होता था। इन्हें पौलुस ने ‘ऊँचे अधिकारी’ और पतरस ने “राजा” और उसके ‘राज्यपाल’ कहा।​—रोम 13:1-7; 1पत 2:13-17; तीत 3:1; शब्दावली में “कैसर” देखें।

सम्राट: मत 22:17 का अध्ययन नोट देखें।

क्या तू यहूदियों का राजा है?: पीलातुस का यह सवाल खुशखबरी की चारों किताबों में हू-ब-हू दर्ज़ है। (मत 27:11; मर 15:2; लूक 23:3; यूह 18:33) रोमी साम्राज्य में सम्राट की इजाज़त के बिना कोई भी राजा नहीं बन सकता था। इसीलिए शायद पीलातुस ने यीशु के राज करने के अधिकार के बारे में पूछताछ की।

हेरोदेस: यानी हेरोदेस महान का बेटा हेरोदेस अन्तिपास। अन्तिपास गलील और पेरिया का ज़िला-शासक (तित्रअर्खेस) था। सिर्फ लूका ने बताया कि यीशु को हेरोदेस के सामने लाया गया था।​—लूक 3:1; शब्दावली देखें।

कुछ हस्तलिपियों में यहाँ लिखा है, “हर साल पर्व के दौरान उसे उनके लिए एक आदमी रिहा करना पड़ता था।” लेकिन ये शब्द शुरू की कई अधिकृत हस्तलिपियों में नहीं पाए जाते और ज़ाहिर है कि ये लूका के मूल पाठ में भी नहीं मिलते। दूसरी हस्तलिपियों में ये शब्द आयत 19 के बाद जोड़े गए हैं। ये शब्द मत 27:15 और मर 15:6 में अलग तरीके से दिए गए हैं और इसमें कोई शक नहीं कि मूल पाठ में ये शब्द वहाँ आते हैं। माना जाता है कि नकल-नवीसों ने मत्ती और मरकुस के ब्यौरों के आधार पर लूका में ये शब्द जोड़े थे।

कुरेने: यह शहर उत्तर अफ्रीका में समुद्री तट के पास बसा था, जो क्रेते द्वीप के दक्षिण-पश्‍चिम में था। (अति. ख13 देखें।) हो सकता है कि शमौन जिसका जन्म कुरेने में हुआ था, बाद में इसराएल जाकर बस गया।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।”​—शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें; लूक 9:23; 14:27 भी देखें, जहाँ ये शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुए हैं।

जब पेड़ हरा है, . . . जब यह सूख जाएगा: मुमकिन है कि यीशु यहाँ यहूदी राष्ट्र की बात कर रहा था। यह एक ऐसे पेड़ की तरह था जो धीरे-धीरे सूख रहा था लेकिन फिर भी थोड़ा-बहुत हरा था क्योंकि यीशु और उस पर विश्‍वास करनेवाले कुछ यहूदी अब भी इस राष्ट्र में थे। लेकिन जल्द ही यीशु को मार डाला जाता और वफादार यहूदी परमेश्‍वर के इसराएल का हिस्सा बन जाते जब पवित्र शक्‍ति से उनका अभिषेक किया जाता। (रोम 2:28, 29; गल 6:16) तब इसराएल राष्ट्र परमेश्‍वर की नज़र में मर जाता। इस मायने में वह आगे चलकर सूखे हुए पेड़ की तरह हो जाता।​—मत 21:43.

गुलगुता: यह एक इब्रानी शब्द से निकला है जिसका मतलब है, “खोपड़ी।” (यूह 19:17 देखें; न्या 9:53 से तुलना करें जहाँ इब्रानी शब्द गुलगोलेथ का अनुवाद “खोपड़ी” किया गया है।) यीशु के दिनों में यह जगह यरूशलेम की शहरपनाह के बाहर थी। लेकिन यह ठीक कहाँ थी, इसका पता नहीं। (अति. ख12 देखें।) बाइबल यह नहीं बताती कि गुलगुता पहाड़ी पर था, लेकिन यह ज़रूर बताती है कि कुछ लोगों ने दूर से देखा था कि यीशु को कैसे मार डाला गया।​—मर 15:40; लूक 23:49.

खोपड़ी: इसका यूनानी शब्द क्रेनियन है और इब्रानी शब्द गुलगुता है। (यूह 19:17 देखें साथ ही मत 27:33 का अध्ययन नोट देखें।) बाइबल के कुछ अँग्रेज़ी अनुवादों में यहाँ “कैलवेरी” शब्द इस्तेमाल हुआ है। यह लातीनी शब्द कैलवेरिया से निकला है जिसका मतलब है, “खोपड़ी।” शब्द कैलवेरिया लातीनी वल्गेट बाइबल में इस्तेमाल हुआ है।

. . . कर रहे हैं: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों में इस आयत का पहला हिस्सा नहीं पाया जाता, लेकिन शुरू की कुछ अधिकृत हस्तलिपियों में पाया जाता है। इस वजह से नयी दुनिया अनुवाद और दूसरे कई अनुवादों में यह हिस्सा दिया गया है।

खट्टी दाख-मदिरा: या “सिरका।” मुमकिन है कि यह पतली और खट्टी दाख-मदिरा थी जिसे लातीनी भाषा में ऐसीटम (सिरका) या अगर उसमें पानी मिलाया जाता था तो उसे पॉस्का कहा जाता था। यह एक सस्ता पेय पदार्थ था जिसे गरीब लोग, यहाँ तक कि रोमी सैनिक अपनी प्यास बुझाने के लिए पीते थे। सेप्टुआजेंट में भज 69:21 में यूनानी शब्द ओक्सॉस भी इस्तेमाल हुआ है, जहाँ भविष्यवाणी की गयी थी कि मसीहा को पीने के लिए “सिरका” दिया जाएगा।

खट्टी दाख-मदिरा: मत 27:48 का अध्ययन नोट देखें।

उसके ऊपर यह लिखकर लगा दिया गया: कुछ हस्तलिपियों में और भी शब्द जोड़े गए हैं जिनका अनुवाद इस तरह किया जा सकता है: “जो यूनानी, लातीनी और इब्रानी अक्षरों में लिखा गया था।” लेकिन ये शब्द शुरू की अधिकृत हस्तलिपियों में नहीं पाए जाते। माना जाता है कि नकल-नवीसों ने ये शब्द इसलिए जोड़े ताकि यूह 19:20 से मेल खाएँ।

लटकाए गए: यहाँ यूनानी क्रिया स्टौरोऊ (“काठ पर मार डालना”) नहीं बल्कि क्रेमननिमी (“लटकाना”) इस्तेमाल हुई है। यीशु की मौत का ज़िक्र करते वक्‍त इस क्रिया के साथ-साथ एपी ज़ाइलो (”काठ या पेड़ पर”) शब्द भी आए हैं। (प्रेष 5:30, फु.; 10:39, फु.; गल 3:13) सेप्टुआजेंट में यह क्रिया अकसर तभी इस्तेमाल होती थी जब किसी को काठ या पेड़ पर लटकाए जाने की बात की जा रही थी।​—उत 40:19; व्य 21:22; एस 8:7.

मैं आज तुझसे सच कहता हूँ,: पुराने ज़माने के शास्त्री सिर्फ कुछ जगहों पर विराम-चिन्ह लगाते थे। तो हमारे ज़माने की बाइबलों में विराम-चिन्ह किस आधार पर डाले गए हैं? इन्हें यूनानी पाठ के व्याकरण और आयतों के संदर्भ को ध्यान में रखकर डाला गया है। इस आयत में यूनानी व्याकरण के मुताबिक दो जगहों पर अल्प-विराम लगाए जा सकते हैं और वाक्य में जहाँ अल्प-विराम लगाया जाएगा उसके मुताबिक वाक्य के दो मतलब निकल सकते हैं। एक है, “मैं आज तुझसे सच कहता हूँ, तू मेरे साथ फिरदौस में होगा” और दूसरा है, “मैं तुझसे सच कहता हूँ, आज तू मेरे साथ फिरदौस में होगा।” लेकिन अलग-अलग अनुवादकों ने यीशु के शब्दों और बाइबल की शिक्षाओं को जिस तरह समझा है, उसी के मुताबिक अल्प-विराम का इस्तेमाल किया है। वेस्कॉट और हॉर्ट, नेसले और आलान्ड और ‘यूनाइटेड बाइबल सोसाइटीस’ ने अपने यूनानी पाठ में जहाँ अल्प-विराम लगाया है, उसका मतलब निकलता है, “आज तू मेरे साथ फिरदौस में होगा।” लेकिन अगर हम बाइबल की शिक्षाओं को और यीशु की कही कुछ बातों को ध्यान में रखें, तो समझ सकते हैं कि अल्प-विराम का यह इस्तेमाल सही नहीं है। यीशु ने कहा था कि उसकी मौत के बाद वह “धरती के गर्भ में” यानी कब्र में तीन दिन रहेगा। (मत 12:40; मर 10:34) दूसरे मौकों पर उसने चेलों से कहा था कि मरने के बाद उसे तीसरे दिन ज़िंदा किया जाएगा। (लूक 9:22; 18:33) इसके अलावा, बाइबल यह भी कहती है कि “जो मौत की नींद सो गए [थे] उनमें वह पहला फल है” जिसे मरे हुओं में से ज़िंदा किया जाता। इसके 40 दिन बाद यीशु स्वर्ग लौट गया। (1कुर 15:20; यूह 20:17; प्रेष 1:1-3, 9; कुल 1:18) तो फिर, यीशु को उसकी मौत के तीन दिन बाद ज़िंदा किया गया था, उसी दिन नहीं जिस दिन वह मरा था। तो ज़ाहिर है कि वह उसी दिन अपराधी के साथ फिरदौस में नहीं हो सकता था।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए पाँचवीं सदी का सीरियाई अनुवाद, क्युरेटोनियन सीरियाई इस आयत का अनुवाद इस तरह करता है: “आमीन, मैं आज तुझसे कहता हूँ कि तू मेरे साथ अदन के बाग में होगा।” (एफ. सी. बर्किट, खुशखबरी की चार किताबों का क्युरेटोनियन अनुवाद, भाग 1, केमब्रिज, 1904) गौर करनेवाली बात है कि कई यूनानी लेखकों और टीकाकारों ने बताया है कि इन शब्दों के अनुवाद को लेकर कई मतभेद थे। मिसाल के लिए, ईसवी सन्‌ चौथी और पाँचवीं सदी में यरूशलेम के रहनेवाले हेसीकियस ने लूक 23:43 के बारे में लिखा, “कुछ लोग इसे इस तरह पढ़ते हैं: ‘आज मैं तुझसे सच कहता हूँ, तू मेरे साथ फिरदौस में होगा।’” (पैट्रोलोजे ग्रेके का यूनानी पाठ, भाग 93, कॉल. 1432-1433.) ग्यारहवीं और बारहवीं सदी के रहनेवाले थियोफिलैक्ट ने लिखा कि कुछ लोगों का मानना है कि इस आयत का मतलब होना चाहिए: ”आज मैं तुझसे सच कहता हूँ, तू मेरे साथ फिरदौस में होगा।” (पैट्रोलोजे ग्रेके, भाग 123, कॉल. 1104) खुशखबरी की रौशनी​—अरामी और स्थिर पूर्वी दस्तूरों पर आधारित यीशु की शिक्षाओं पर टिप्पणी नाम की अँग्रेज़ी किताब के पेज 303-304 में जी. एम. लामसा ने बताया कि लूक 23:43 में “आज” शब्द का किस तरह इस्तेमाल किया गया है। वह कहता है, “इस आयत में ‘आज’ शब्द पर ज़ोर दिया गया है, इसलिए यह आयत ऐसे पढ़ी जानी चाहिए, ‘आज मैं तुझसे सच कहता हूँ, तू मेरे साथ फिरदौस में होगा।’ तो वादा ‘आज’ किया गया था, जबकि यह पूरा बाद में होता। यह शैली पूर्वी भाषाओं में अकसर इस्तेमाल की जाती है, इस बात पर ज़ोर देने के लिए कि जो वादा किया गया है, वह ज़रूर पूरा होगा।” इसलिए लूक 23:43 में यूनानी शब्द “आज” शामी (Semitic) भाषा में शायद ज़ोर देने के लिए इस्तेमाल किया गया है। इब्रानी शास्त्र में ऐसी कई आयतें हैं जहाँ वादा करते वक्‍त और आज्ञा देते वक्‍त “आज” शब्द इस्तेमाल किया गया है। (व्य 4:26; 6:6; 7:11; 8:1, 19; 30:15; जक 9:12) तो यह साफ पता चलता है कि जब यीशु ने “आज” शब्द का इस्तेमाल किया, तो वह यह नहीं बता रहा था कि कब अपराधी फिरदौस में होगा बल्कि यह बता रहा था कि वह वादा कब कर रहा है।

बाइबल के कई अनुवाद जैसे, अँग्रेज़ी में रॉदरहैम और लामसा की (1993 संस्करण की) बाइबलें, जर्मन में एल. राइनहार्ट और डब्ल्यू. माइकलिस की बाइबलें भी कबूल करती हैं कि इस आयत में उस समय पर ज़ोर दिया गया है जब यह वादा किया गया था, न कि उस समय पर जब वादा पूरा होगा। इन बाइबलों में इस आयत का अनुवाद नयी दुनिया अनुवाद की तरह किया गया है।

फिरदौस: इसका यूनानी शब्द परादीसोस है और इससे मिलते-जुलते शब्द इब्रानी (नहे 2:8; सभ 2:5; श्रेष 4:13 में पारदेस) और फारसी (पाइरीदेज़ा) भाषा में पाए जा सकते हैं। इन तीनों शब्दों से एक खूबसूरत बाग या बगीचे की तसवीर मन में आती है। सेप्टुआजेंट के अनुवादकों ने उत 2:8 में “अदन के बाग” में इब्रानी शब्द ”बाग” (गान) के लिए यूनानी शब्द परादीसोस इस्तेमाल किया। मसीही यूनानी शास्त्र के कुछ इब्रानी अनुवादों में (जिन्हें अति. ग में J17, 18, 22 कहा जाता है) लूक 23:43 का इस तरह अनुवाद हुआ है: “तू मेरे साथ अदन के बाग में होगा।” लेकिन यीशु ने यह वादा नहीं किया कि वह अपराधी “परमेश्‍वर के फिरदौस” में होगा जिसका ज़िक्र प्रक 2:7 में मिलता है। क्योंकि इस फिरदौस का वादा उन लोगों से किया गया था “जो जीत हासिल” करते यानी जो यीशु के साथ स्वर्ग में राज करते। (लूक 22:28-30) उस अपराधी ने यीशु मसीह के साथ दुनिया पर जीत हासिल नहीं की थी न ही वह “पानी और पवित्र शक्‍ति से पैदा” हुआ था। (यूह 3:5; 16:33) जब मसीह हज़ार साल के लिए धरती पर शासन करेगा, तो मुमकिन है कि वह अपराधी उन “बुरे” लोगों में से एक होगा जिन्हें मरे हुओं में से ज़िंदा किया जाएगा।​—प्रेष 24:15; प्रक 20:4, 6.

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

करीब छठा घंटा: यानी दोपहर करीब 12 बजे।​—मत 20:3 का अध्ययन नोट देखें।

नौवें घंटे: यानी दोपहर करीब 3 बजे।​—मत 20:3 का अध्ययन नोट देखें।

मंदिर: यहाँ यूनानी शब्द नेयोस का मतलब है, मंदिर की मुख्य इमारत जिसमें पवित्र और परम-पवित्र भाग हैं।

परदा: कढ़ाई किया हुआ यह खूबसूरत परदा मंदिर के पवित्र भाग को परम-पवित्र भाग से अलग करता था। यहूदियों की मान्यता है कि यह परदा करीब 18 मी. (60 फुट) लंबा, 9 मी. (30 फुट) चौड़ा और 7.4 सें.मी. (2.9 इंच) मोटा था। इस भारी परदे को दो हिस्सों में फाड़कर यहोवा ने न सिर्फ यह ज़ाहिर किया कि वह अपने बेटे के कातिलों पर कितना क्रोधित है बल्कि यह भी कि अब स्वर्ग में दाखिल होना मुमकिन है।​—इब्र 10:19, 20; शब्दावली देखें।

मंदिर: मत 27:51 का अध्ययन नोट देखें।

परदा: मत 27:51 का अध्ययन नोट देखें।

उसने दम तोड़ दिया: या “उसने साँस लेना बंद कर दिया।” यहाँ यूनानी शब्द नफ्मा का शायद मतलब है, “साँस” या “जीवन-शक्‍ति।” हम ऐसा इसलिए कह सकते हैं क्योंकि इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मर 15:37 में यूनानी क्रिया एकपनीयो (शा., “साँस छोड़ना”) इस्तेमाल हुई है (जहाँ इस क्रिया का अनुवाद “दम तोड़ दिया” या फुटनोट में “आखिरी साँस ली” किया गया है)। कुछ लोगों का मानना है कि जिस यूनानी शब्द का अनुवाद “उसने दम तोड़ दिया” किया गया है, उसका मतलब है कि यीशु ने ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष करना छोड़ दिया क्योंकि सारी बातें पूरी हो चुकी थीं। (यूह 19:30) उसने अपनी मरज़ी से “जान कुरबान कर दी।”​—यश 53:12; यूह 10:11.

जान: यीशु यहाँ भज 31:5 में लिखी बात कह रहा है जिसमें दाविद बिनती करता है कि परमेश्‍वर उसकी जान या जीवन-शक्‍ति की हिफाज़त करे। एक तरह से यीशु कह रहा था कि वह अपनी जान यहोवा को सौंप रहा है और भविष्य में उसे दोबारा जीवन मिलेगा या नहीं, वह उसने परमेश्‍वर पर छोड़ दिया।​—शब्दावली में “रुआख; नफ्मा” देखें।

दम तोड़ दिया: यूनानी क्रिया एकपनीयो (शा., “साँस छोड़ना”) का अनुवाद “आखिरी साँस ली” भी किया जा सकता है। (मत 27:50 का अध्ययन नोट देखें।) बाइबल साफ बताती है कि जब यीशु की साँस निकल गयी, तो वह तुरंत स्वर्ग नहीं गया। इसके बजाय, उसने दम तोड़ दिया यानी वह मर गया। यीशु ने खुद भविष्यवाणी की थी कि उसे “तीसरे दिन” ज़िंदा किया जाता। (मत 16:21; लूक 9:22) जैसे प्रेष 1:3, 9 में बताया है, यीशु अपनी मौत के 40 दिन बाद स्वर्ग गया।

सेना-अफसर: या रोमी “शतपति” जिसके अधीन करीब 100 सैनिक होते थे। मत्ती और मरकुस में इससे मिलते-जुलते ब्यौरों के मुताबिक सेना-अफसर ने भी कबूल किया कि यीशु “परमेश्‍वर का बेटा” है।​—मत 27:54; मर 15:39.

यूसुफ: खुशखबरी की किताबों के चारों लेखकों ने यूसुफ के बारे में अलग-अलग जानकारी दी। इससे पता चलता है कि हर लेखक ने अपने अंदाज़ में किताब लिखी। जैसे, मत्ती कर-वसूलनेवाला था, इसलिए उसने लिखा कि यूसुफ “एक अमीर आदमी” था। मरकुस ने खासकर रोमी लोगों के लिए लिखा था, इसलिए उसने कहा कि वह “धर्म-सभा का एक इज़्ज़तदार सदस्य” था जो परमेश्‍वर के राज के आने का इंतज़ार कर रहा था। लूका हमदर्द वैद्य था, इसलिए उसने लिखा कि वह “एक अच्छा और नेक इंसान था” और उसने धर्म-सभा के लोगों का साथ नहीं दिया जो यीशु के खिलाफ साज़िश कर रहे थे। सिर्फ यूहन्‍ना ने यह लिखा कि वह “यीशु का एक चेला था, मगर यहूदियों के डर से यह बात छिपाए रखता था।”​—मत 27:57-60; मर 15:43-46; लूक 23:50-53; यूह 19:38-42.

महासभा: यरूशलेम में यहूदियों की सबसे बड़ी अदालत। “महासभा” के यूनानी शब्द सिनेड्रियोन का शाब्दिक मतलब है, “के साथ बैठना।” हालाँकि यह शब्द एक आम सभा के लिए भी इस्तेमाल होता था, लेकिन इसराएल में इसका मतलब फैसला सुनानेवाला धार्मिक समूह या अदालत भी हो सकता था।​—मत 5:22 का अध्ययन नोट और शब्दावली देखें; साथ ही महासभा का भवन कहाँ रहा होगा, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।

यूसुफ: मर 15:43 का अध्ययन नोट देखें।

धर्म-सभा का सदस्य: यानी यरूशलेम में यहूदियों की सबसे बड़ी अदालत, महासभा का एक सदस्य।​—मत 26:59 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “महासभा” देखें।

अरिमतियाह: इस शहर का नाम एक इब्रानी शब्द से निकला है जिसका मतलब है, “ऊँचाई।” लूक 23:51 में इसे ‘यहूदिया के लोगों का शहर’ कहा गया है।​—अति. ख10 देखें।

अरिमतियाह: मत 27:57 का अध्ययन नोट देखें।

कब्र: या “स्मारक कब्र।” यह गुफा में बनी कब्र नहीं थी बल्कि चूने-पत्थर की चट्टान में बनायी गयी थी जिसे काटना आसान होता है। ऐसी कब्रों में अकसर ताक बने होते थे जिन पर लाशें रखी जाती थीं।​—शब्दावली में “स्मारक कब्र” देखें।

कब्र: मत 27:60 का अध्ययन नोट देखें।

तैयारी के दिन: हर हफ्ते सब्त से पहले का दिन, तैयारी का दिन होता था। इसी दिन यहूदी सब्त की तैयारी करते थे। वे ज़्यादा खाना बनाते थे और ऐसे काम निपटाते थे जो सब्त के अगले दिन तक टाले नहीं जा सकते थे। ईसवी सन्‌ 33 में नीसान 14, तैयारी के दिन पड़ा।​—मर 15:42; शब्दावली में “तैयारी का दिन” देखें।

तैयारी: मत 27:62 का अध्ययन नोट देखें।

कब्र: या “स्मारक कब्र।”​—शब्दावली में “स्मारक कब्र” देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

एड़ी की हड्डी में कील
एड़ी की हड्डी में कील

इस तसवीर में दिखाया गया है कि कैसे एक इंसान की एड़ी में 4.5 इंच (11.5 सें.मी.) लंबी एक लोहे की कील ठोंकी गयी है। यह सचमुच की एड़ी की हड्डी नहीं बल्कि उसका नमूना है। असली हड्डी का टुकड़ा तो 1968 में पुरातत्ववेत्ताओं को उत्तरी यरूशलेम में खुदाई के वक्‍त मिला था। यह टुकड़ा रोमी लोगों के ज़माने का था। इससे पता चलता है कि लोगों को कीलों से काठ पर ठोंका जाता था। रोमी सैनिकों ने शायद इसी तरह की कीलों से यीशु मसीह को काठ पर ठोंका था। हड्डी का वह टुकड़ा पत्थर के एक बक्से में मिला था जिसमें लाश के सड़ जाने पर उसकी हड्डियाँ रखी जाती थीं। इससे पता चलता है कि किसी को काठ पर लटकाकर मार डालने के बाद कभी-कभी उसे दफनाया जाता था।

कब्र
कब्र

यहूदी आम तौर पर गुफाओं या चट्टानों को काटकर बनायी गयी कब्रों में लाश दफनाते थे। राजाओं की कब्रों को छोड़ बाकी सभी कब्रें शहरों से बाहर होती थीं। गौर करने लायक बात यह है कि जो यहूदी कब्रें मिली हैं, वे बहुत सादी हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि सबूत दिखाते हैं कि यहूदी न तो मरे हुओं की पूजा करते थे और न ही अमर आत्मा की शिक्षा को बढ़ावा देते थे।