लूका के मुताबिक खुशखबरी 19:1-48

19  यीशु यरीहो पहुँचा और उस शहर से होकर जा रहा था।  वहाँ जक्कई नाम का एक आदमी था। वह कर-वसूलनेवालों का एक प्रधान था और बहुत अमीर था।  वह देखना चाहता था कि यह यीशु कौन है, मगर भीड़ की वजह से देख नहीं पा रहा था क्योंकि वह ठिंगना था।  इसलिए वह भागकर आगे गया और उसे देखने के लिए रास्ते में एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया क्योंकि यीशु वहीं से गुज़रनेवाला था।  जब यीशु वहाँ पहुँचा, तो उसने ऊपर देखकर कहा, “जक्कई, जल्दी से नीचे उतर आ क्योंकि आज मुझे तेरे घर ठहरना है।”  तब वह जल्दी-जल्दी नीचे उतरा और उसने खुशी से अपने घर में यीशु का स्वागत किया।  जब उन्होंने यह देखा, तो सब बड़बड़ाने लगे, “यह एक ऐसे आदमी के घर ठहरा है जो पापी है।”+  मगर जक्कई खड़ा हुआ और उसने प्रभु से कहा, “प्रभु देख! मैं अपनी आधी संपत्ति गरीबों को देता हूँ और मैंने जिस-जिस को लूटा है, उसे मैं चार गुना वापस लौटा देता हूँ।”+  तब यीशु ने उससे कहा, “आज परमेश्‍वर ने इस आदमी और इसके घराने का उद्धार किया है क्योंकि यह भी अब्राहम का एक वंशज है। 10  इसलिए कि जो खो गए हैं, इंसान का बेटा उन्हें ढूँढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।”+ 11  जब चेले ये बातें सुन रहे थे, तो उसने एक मिसाल भी दी क्योंकि वह यरूशलेम के करीब था और चेले यह सोच रहे थे कि परमेश्‍वर का राज बस कुछ ही पल में ज़ाहिर होनेवाला है।+ 12  उसने कहा, “एक आदमी था जो शाही खानदान से था। वह दूर देश के लिए रवाना हुआ+ ताकि राज-अधिकार पाकर लौट आए। 13  उसने अपने दस दासों को बुलाकर उन्हें दस मीना चाँदी के सिक्के दिए और उनसे कहा, ‘जब तक मैं वापस न आऊँ, तब तक इनसे कारोबार करो।’+ 14  मगर उसके देश के लोग उससे नफरत करते थे और उन्होंने उसके पीछे-पीछे यह कहने के लिए राजदूतों का एक दल भेजा, ‘हम नहीं चाहते कि यह आदमी हमारा राजा बने।’ 15  राज-अधिकार हासिल करने के बाद वह आदमी लौट आया। उसने उन दासों को बुलाया जिन्हें वह पैसे देकर गया था। वह देखना चाहता था कि उन्होंने उन पैसों से कारोबार करके और कितना कमाया है।+ 16  तब पहला दास उसके सामने आया और कहने लगा, ‘मालिक, तूने मुझे एक मीना चाँदी के सिक्के दिए थे, उनसे मैंने दस मीना चाँदी के सिक्के कमाए हैं।’+ 17  तब मालिक ने उससे कहा, ‘शाबाश, अच्छे दास! तू एक छोटी-सी बात में भी भरोसेमंद साबित हुआ है, मैं तुझे दस शहरों का अधिकारी बनाता हूँ।’+ 18  अब दूसरा आकर कहने लगा, ‘मालिक, तूने मुझे एक मीना चाँदी के सिक्के दिए थे, उनसे मैंने पाँच मीना चाँदी के सिक्के कमाए हैं।’+ 19  मालिक ने उससे कहा, ‘मैं तुझे भी पाँच शहरों का अधिकारी बनाता हूँ।’ 20  मगर एक और आया और कहने लगा, ‘मालिक, यह रही तेरी चाँदी। मैंने इसे कपड़े में बाँधकर छिपा दिया था। 21  मैं तुझसे डरता था क्योंकि तू एक कठोर आदमी है। तू वे पैसे निकालता है जो तूने जमा नहीं किए और वह फसल काटता है जो तूने नहीं बोयी।’+ 22  मालिक ने उससे कहा, ‘अरे दुष्ट दास, तूने जो कहा है उसी से मैं तुझे फैसला सुनाता हूँ। तू जानता था न कि मैं एक कठोर आदमी हूँ? मैं वे पैसे निकालता हूँ जो मैंने जमा नहीं किए और वह फसल काटता हूँ, जो मैंने नहीं बोयी।+ 23  तो फिर, तूने मेरे पैसे साहूकारों के पास जमा क्यों नहीं कर दिए? तब लौटने पर मुझे अपने पैसों के साथ-साथ ब्याज भी मिलता।’ 24  तब जो आस-पास खड़े थे उनसे मालिक ने कहा, ‘यह चाँदी इससे ले लो और उसे दे दो जिसके पास दस मीना चाँदी है।’+ 25  मगर उन्होंने कहा, ‘मालिक, उसके पास तो पहले से दस मीना चाँदी है!’. . . 26  ‘मैं तुमसे कहता हूँ, जिसके पास है, उसे और दिया जाएगा। मगर जिसके पास नहीं है, उससे वह भी ले लिया जाएगा जो उसके पास है।+ 27  मेरे जो दुश्‍मन नहीं चाहते थे कि मैं उनका राजा बनूँ, उन्हें यहाँ लाओ और मेरे सामने मार डालो।’” 28  ये बातें कहने के बाद यीशु ने अपना सफर जारी रखा और यरूशलेम की तरफ गया। 29  जब वह जैतून नाम पहाड़+ पर बैतफगे और बैतनियाह के पास पहुँचा, तो उसने दो चेलों को यह कहकर भेजा,+ 30  “जो गाँव तुम्हें नज़र आ रहा है उसमें जाओ। वहाँ जाने पर तुम्हें एक गधी का बच्चा बँधा हुआ मिलेगा, जिस पर आज तक कोई आदमी नहीं बैठा। उसे खोलकर ले आओ। 31  लेकिन अगर कोई तुमसे पूछे, ‘तुम इसे क्यों खोल रहे हो?’ तो कहना, ‘प्रभु को इसकी ज़रूरत है।’” 32  तब जिन्हें भेजा गया था, वे चले गए और जैसा उसने कहा था ठीक वैसा ही पाया।+ 33  लेकिन जब वे गधी के बच्चे को खोल रहे थे, तब उसके मालिकों ने उनसे कहा, “तुम गधी के बच्चे को क्यों खोल रहे हो?” 34  उन्होंने कहा, “प्रभु को इसकी ज़रूरत है।” 35  और वे उसे यीशु के पास ले गए और उन्होंने उस गधी के बच्चे के ऊपर अपने ओढ़ने बिछाए और यीशु को उस पर बिठाया।+ 36  जैसे-जैसे वह आगे जा रहा था, लोग सड़क पर उसके आगे-आगे अपने कपड़े बिछाने लगे।+ 37  जैसे ही वह उस सड़क के पास पहुँचा जो जैतून पहाड़ से नीचे जाती है, उसके चेलों की सारी भीड़ खुशियाँ मनाने लगी और ऊँची आवाज़ में परमेश्‍वर की बड़ाई करने लगी क्योंकि उन्होंने बहुत-से शक्‍तिशाली काम देखे थे। 38  वे कहने लगे, “धन्य है वह जो राजा बनकर यहोवा के नाम से आ रहा है! स्वर्ग में शांति हो और ऊँचे आसमानों* में परमेश्‍वर की महिमा हो!”+ 39  लेकिन भीड़ में से कुछ फरीसी उससे कहने लगे, “गुरु, अपने चेलों को डाँट।”+ 40  मगर उसने कहा, “मैं तुमसे कहता हूँ, अगर ये खामोश रहे तो पत्थर बोल उठेंगे।” 41  जब वह शहर के करीब पहुँचा, तो वह शहर को देखकर रोने लगा+ 42  और कहने लगा, “काश आज के दिन तूने, हाँ तूने, उन बातों को समझा होता जिनसे शांति मिलती है+—लेकिन अब ये तेरी आँखों से छिपा दी गयी हैं।+ 43  क्योंकि वे दिन आएँगे जब तेरे दुश्‍मन तेरे चारों तरफ नुकीले लट्ठों से घेराबंदी कर लेंगे और तुझे हर तरफ से घेर लेंगे।*+ 44  वे तुझे और तेरे बच्चों को ज़मीन पर पटक-पटककर मार डालेंगे।+ वे तेरे यहाँ एक पत्थर पर दूसरा पत्थर भी नहीं छोड़ेंगे+ क्योंकि तूने उस वक्‍त को नहीं पहचाना जब तुझे जाँचा जा रहा था।” 45  फिर यीशु मंदिर में गया और जो लोग वहाँ बिक्री कर रहे थे उन्हें बाहर खदेड़ने लगा।+ 46  उसने उनसे कहा, “लिखा है, ‘मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा,’+ मगर तुम लोगों ने इसे लुटेरों का अड्डा* बना दिया है।”+ 47  वह हर दिन मंदिर में सिखाता रहा। मगर प्रधान याजक, शास्त्री और जनता के खास-खास लोग उसे मार डालने की ताक में थे।+ 48  मगर उन्हें ऐसा करने का सही मौका नहीं मिल रहा था, क्योंकि सब लोग उसकी बातें सुनने के लिए हमेशा उसे घेरे रहते थे।+

कई फुटनोट

या “सबसे ऊँची जगहों।”
या “दुख देंगे।”
शा., “की गुफा।”

अध्ययन नोट

जक्कई: यह एक इब्रानी नाम से निकला है, जो शायद एक ऐसे मूल शब्द से आया है जिसका मतलब है, “साफ; शुद्ध।” ऐसा मालूम होता है कि जक्कई यरीहो और उसके आस-पास के इलाकों के कर-वसूलनेवालों का एक प्रधान था। यह शहर जिस ज़िले में था, उसकी ज़मीन काफी उपजाऊ थी और वहाँ अच्छी पैदावार होती थी। इसलिए उस ज़िले से काफी कर मिलता था। जक्कई बहुत अमीर था और खुद उसके शब्दों (लूक 19:8) से ज़ाहिर होता है कि उसने कम-से-कम अपनी आधी संपत्ति गलत तरीके से हासिल की थी।

किसी पर झूठा इलज़ाम मत लगाओ: ‘झूठा इलज़ाम लगाने’ की यूनानी क्रिया है, साइकोफैंटीयो। इसका अनुवाद लूक 19:8 में “लूटा” और “झूठ बोलकर लूटा” किया गया है। (लूक 19:8 का अध्ययन नोट देखें।) इस क्रिया का शाब्दिक मतलब इस तरह समझाया गया है: “अंजीर का फल दिखाकर लेना।” इस क्रिया की शुरूआत कैसे हुई, इस बारे में अलग-अलग धारणाएँ हैं। एक है कि प्राचीन एथेन्स में अंजीर के फलों का निर्यात करना मना था। इसलिए अगर कोई दूसरों को बदनाम करने के लिए उन पर यह इलज़ाम लगाता कि उन्होंने अंजीर का निर्यात करने की कोशिश की है, तो उसे “अंजीर दिखानेवाला” कहा जाता था। बाद में यह नाम ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल होने लगा, जो अपने फायदे के लिए दूसरों पर झूठा इलज़ाम लगाते थे या लोगों को धमकाकर अपना काम निकलवाते थे।

लूटा: या “झूठ बोलकर लूटा।”​—लूक 3:14 का अध्ययन नोट देखें।

चार गुना: मुमकिन है कि जक्कई ने कर का जो हिसाब-किताब रखा, उससे वह जान सकता था कि उसने किस यहूदी से कितना लिया है। उसने शपथ खायी कि वह हरेक को चार गुना वापस कर देगा। परमेश्‍वर के कानून में जितनी भरपाई करने की माँग की गयी थी, उससे यह कहीं ज़्यादा था। कानून के मुताबिक धोखाधड़ी के मामलों में जब कोई पश्‍चाताप करता था और अपना दोष मान लेता था, तो उसे न सिर्फ पूरी भरपाई करनी होती थी बल्कि चीज़ की “कीमत का पाँचवाँ हिस्सा [यानी 20 प्रतिशत] भी देना” होता था। लेकिन जक्कई ने कहा कि वह चार गुना वापस देगा। ऐसा करके उसने न सिर्फ गरीबों के लिए प्यार जताया बल्कि सताए हुए लोगों के साथ इंसाफ भी किया। इस तरह उसने अपने पश्‍चाताप का सबूत दिया।​—लैव 6:2-5; गि 5:7.

राज: यूनानी शब्द बसिलीया पहली बार इसी आयत में आता है। इसका मतलब सिर्फ एक राज नहीं बल्कि राजा का शासन-क्षेत्र और उसकी प्रजा भी है। शब्द बसिलीया मसीही यूनानी शास्त्र में 162 बार आया है। इनमें से 55 बार मत्ती की किताब में आया है और ज़्यादातर यह परमेश्‍वर के राज के लिए इस्तेमाल हुआ है, जो स्वर्ग में है। मत्ती ने “राज” शब्द इतनी बार इस्तेमाल किया कि उसकी किताब को राज की खुशखबरी की किताब कहा जा सकता है।​—शब्दावली में “परमेश्‍वर का राज” देखें।

राज: बाइबल में शब्द “राज” के कई मतलब हैं, जैसे “इलाका या देश जिस पर एक राजा का शासन है,” “राजा का अधिकार,” “रियासत” और “राजा की हुकूमत।” मगर ज़ाहिर है कि यहाँ “राज” का मतलब है, परमेश्‍वर के राज के दौरान मिलनेवाले फायदे या आशीषें और खुशहाल ज़िंदगी।

राज-अधिकार पाकर: या “एक राज हासिल करके।” हालाँकि यूनानी शब्द बसिलीया का अनुवाद ज़्यादातर “राज” किया गया है, लेकिन इस शब्द के कई मतलब हैं। अकसर इसका मतलब सिर्फ राज नहीं बल्कि राजा का शासन-क्षेत्र और उसकी प्रजा भी होता है। (मत 3:2; 25:34 के अध्ययन नोट देखें।) इस शब्द का मतलब राज-अधिकार, या राजा के ओहदे के साथ-साथ उसकी शान, ताकत और अधिकार भी हो सकता है। रोमी साम्राज्य में यह आम था कि शाही खानदान का आदमी राज-अधिकार पाने के लिए लंबा सफर तय करके रोम जाता था। यीशु की यह मिसाल सुनकर लोगों को हेरोदेस महान के बेटे अरखिलाउस की याद आयी होगी। हेरोदेस महान ने अपनी मौत से पहले यहूदिया और दूसरे इलाकों पर राज करने के लिए अरखिलाउस को अपना वारिस ठहराया। लेकिन अरखिलाउस ऐसे ही राज शुरू नहीं कर सकता था। उसे राज-अधिकार पाने के लिए रोम जाकर पहले सम्राट औगुस्तुस की मंज़ूरी लेनी थी।

मीना: यूनानी शास्त्र में मीना एक सिक्का नहीं बल्कि भार मापने की एक इकाई था और इसका वज़न करीब 340 ग्रा. था। प्राचीन यूनानी लेखकों के मुताबिक, मीना मुद्रा की भी इकाई था और यह 100 द्राख्मा के बराबर था। द्राख्मा करीब-करीब एक दीनार के जितना था, इसलिए एक मीना काफी बड़ी रकम होती थी। (शब्दावली में “दीनार” देखें।) यूनानी शास्त्र में बताया मीना, इब्रानी शास्त्र में बताए मीना से अलग था।​—शब्दावली और अति. ख14 देखें।

राज-अधिकार पाकर: या “एक राज हासिल करके।” हालाँकि यूनानी शब्द बसिलीया का अनुवाद ज़्यादातर “राज” किया गया है, लेकिन इस शब्द के कई मतलब हैं। अकसर इसका मतलब सिर्फ राज नहीं बल्कि राजा का शासन-क्षेत्र और उसकी प्रजा भी होता है। (मत 3:2; 25:34 के अध्ययन नोट देखें।) इस शब्द का मतलब राज-अधिकार, या राजा के ओहदे के साथ-साथ उसकी शान, ताकत और अधिकार भी हो सकता है। रोमी साम्राज्य में यह आम था कि शाही खानदान का आदमी राज-अधिकार पाने के लिए लंबा सफर तय करके रोम जाता था। यीशु की यह मिसाल सुनकर लोगों को हेरोदेस महान के बेटे अरखिलाउस की याद आयी होगी। हेरोदेस महान ने अपनी मौत से पहले यहूदिया और दूसरे इलाकों पर राज करने के लिए अरखिलाउस को अपना वारिस ठहराया। लेकिन अरखिलाउस ऐसे ही राज शुरू नहीं कर सकता था। उसे राज-अधिकार पाने के लिए रोम जाकर पहले सम्राट औगुस्तुस की मंज़ूरी लेनी थी।

पैसे: शा., “चाँदी” जिसे पैसे की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

राज-अधिकार: या “राज।”​—लूक 19:12 का अध्ययन नोट देखें।

पैसे: मत 25:18 का अध्ययन नोट देखें।

पैसे: शा., “चाँदी” जिसे पैसे की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

पैसे: मत 25:18 का अध्ययन नोट देखें।

साहूकारों: लूका की किताब में दर्ज़ मीना की मिसाल में और मत्ती की किताब में दर्ज़ तोड़े की मिसाल में यीशु ने साहूकारों के बारे में बताया, जो उनके पास जमा करवाए पैसों पर ब्याज देते थे। (मत 25:14-30; लूक 19:12-27) जिस यूनानी शब्द ट्रापेज़ा का अनुवाद यहाँ “साहूकारों” किया गया है, उसका शाब्दिक मतलब है “मेज़।” (मत 15:27) अगर लेन-देन की बात की जाए, जैसे पैसा बदलनेवाले सौदागरों के काम के बारे में, तो इस शब्द का मतलब है ऐसी मेज़ जिस पर सिक्के सजाकर रखे जाते थे। (मत 21:12; मर 11:15; यूह 2:15) पहली सदी के दौरान, इसराएल और आस-पास के देशों में लेनदार और साहूकार काफी मशहूर थे।

ब्याज: मूसा के कानून में इसराएलियों को हिदायत दी गयी थी कि वे ज़रूरतमंद यहूदियों को बिना ब्याज के कर्ज़ दें। (निर्ग 22:25) मगर परदेसियों से वे ब्याज ले सकते थे जो शायद व्यापार के लिए कर्ज़ लेते थे। (व्य 23:20) ऐसा मालूम होता है कि यीशु के दिनों में जब लोग अपना पैसा लेनदारों के पास जमा करते थे तो उस पर ब्याज मिलना आम था।

. . .: इन बिंदुओं से पता चलता है कि आयत 26 में दास नहीं बल्कि उनका मालिक बात कर रहा है। इस संदर्भ में यह जानकारी खुलकर नहीं दी गयी है।

यहोवा: यहाँ भज 118:26 की बात लिखी है। मूल इब्रानी पाठ में इस आयत में परमेश्‍वर के नाम के लिए चार इब्रानी व्यंजन (हिंदी में य-ह-व-ह) इस्तेमाल हुए हैं।​—अति. ग देखें।

पत्थर बोल उठेंगे: संदर्भ से पता चलता है कि यीशु यहाँ एक खास ऐलान की बात कर रहा था, जो उसके चेलों ने किया था और जिस पर फरीसियों ने एतराज़ किया था। (लूक 19:37-39) चेलों ने भज 118:26 में लिखी बात का ऐलान किया। इस भजन में की गयी भविष्यवाणी का इस मौके पर पूरा होना तय था, क्योंकि यहोवा का वचन “बिना पूरा हुए” उसके पास नहीं लौटता। (यश 55:11) इसलिए अगर चेलों को चुप करा दिया जाता, तो वाकई पत्थर बोल उठते।

रोने लगा: इसके यूनानी शब्द का अकसर मतलब होता है, ज़ोर से रोना।

नुकीले लट्ठों से घेराबंदी कर लेंगे: या “बाड़ा बाँधेंगे।” यूनानी शब्द खारक्स मसीही यूनानी शास्त्र में सिर्फ यहीं आया है। इस शब्द की परिभाषा यूँ दी गयी है: ‘ऐसे नुकीले छड़ या खंभे जिनसे बाड़ा बाँधा जाता है; काठ।’ इस शब्द का मतलब “काठ गाड़कर घेराबंदी करना; बाड़ा” भी हो सकता है। यीशु की यह भविष्यवाणी ईसवी सन्‌ 70 में पूरी हुई, जब टाइटस के अधीन रोमी सैनिकों ने यरूशलेम की घेराबंदी करने के लिए चारों तरफ दीवार खड़ी की या बाड़ा बाँधा। टाइटस के ऐसा करने के तीन मकसद थे: यहूदी लोग शहर से भाग न पाएँ, वे डर के मारे हथियार डाल दें और भूखे रहने की वजह से उसके अधीन होने के लिए मजबूर हो जाएँ। यरूशलेम की घेराबंदी करने के लिए सैनिकों ने चारों तरफ के पेड़ काट डाले।

जो लोग वहाँ बिक्री कर रहे थे उन्हें बाहर खदेड़ने लगा: ईसवी सन्‌ 33 में नीसान 10 को यीशु ने दूसरी बार मंदिर को शुद्ध किया था। इसका ब्यौरा खुशखबरी की तीनों किताबों यानी मत्ती (21:12-17), मरकुस (11:15-18) और लूका में पाया जाता है। यीशु ने पहली बार मंदिर को ईसवी सन्‌ 30 में फसह के दिन शुद्ध किया था और इसका ब्यौरा यूह 2:13-17 में दर्ज़ है।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

गूलर का पेड़
गूलर का पेड़

इस पेड़ (फिकस साइकोमोरस ) का ज़िक्र मसीही यूनानी शास्त्र में सिर्फ एक बार मिलता है। यह ज़िक्र उस ब्यौरे में आया है जब यीशु ईसवी सन्‌ 33 के वसंत में यरीहो से गुज़र रहा था। (लूक 19:1-10) यह पेड़ अंजीर और शहतूत की जाति का है, मगर यह उत्तर अमरीका के गूलर के पेड़ से अलग है। इसके फल अंजीर के फल की तरह दिखते हैं। यह पेड़ 33 से 50 फुट (10 से 15 मी.) की ऊँचाई तक बढ़ता है। यह एक मज़बूत पेड़ है जो सैकड़ों सालों तक खड़ा रहता है। गूलर का पेड़ यरदन घाटी में उगता था और इब्रानी शास्त्र के मुताबिक यहूदा के पहाड़ी इलाकों और मैदानों के बीच शफेलाह में बड़ी तादाद में पाया जाता था। (1रा 10:27; 2इत 1:15; 9:27) यह एक सदाबहार पेड़ है जिसकी हरी-भरी डालियों से घनी छाया मिलती है। इसलिए इसे अकसर सड़कों के किनारे लगाया जाता था। इस पेड़ का तना मोटा और छोटा होता है जिसकी निचली डालियाँ ज़मीन को छूती हैं। इस वजह से जक्कई जैसा ठिंगना आदमी इस पेड़ पर आसानी से चढ़ सकता था।

बैतफगे, जैतून पहाड़ और यरूशलेम
बैतफगे, जैतून पहाड़ और यरूशलेम

इस छोटे-से वीडियो में पूरब से यरूशलेम तक का रास्ता दिखाया गया है। यह रास्ता एट-टूर गाँव से होकर जैतून पहाड़ की एक ऊँची जगह तक जाता है। मालूम होता है कि एट-टूर, बाइबल में बताया गया बैतफगे गाँव है। इसके पूरब में यानी जैतून पहाड़ की पूर्वी ढलान पर बैतनियाह गाँव बसा था। जब यीशु यरूशलेम आता था तो वह और उसके चेले अकसर बैतनियाह में रात काटते थे जो आज एल-अज़ारीया (या एल आइज़ारीया) के नाम से जाना जाता है। यह एक अरबी नाम है जिसका मतलब है “लाज़र की जगह।” यीशु यहीं मारथा, मरियम और लाज़र के घर रुकता था। (मत 21:17; मर 11:11; लूक 21:37; यूह 11:1) जब यीशु उनके घर से यरूशलेम जाता था, तो शायद वह उसी रास्ते से जाता था जो इस वीडियो में दिखाया गया है। ईसवी सन्‌ 33 के नीसान 9 को जब यीशु एक गधी के बच्चे पर सवार होकर जैतून पहाड़ से यरूशलेम में दाखिल हुआ, तो वह बैतफगे के रास्ते से होकर आया होगा।

1. बैतनियाह से बैतफगे का रास्ता

2. बैतफगे

3. जैतून पहाड़

4. किदरोन घाटी

5. पहाड़ जिस पर पहले मंदिर था

गधी का बच्चा
गधी का बच्चा

गधे के खुर बहुत मज़बूत होते हैं। वह घोड़े के परिवार का ही जानवर है, मगर घोड़े से बहुत अलग होता है। जैसे, वह छोटा होता है, उसकी गरदन के बाल छोटे-छोटे होते हैं, उसके कान बड़े होते हैं और उसकी पूँछ छोटी और सिर्फ आखिर में ब्रश जैसे बाल होते हैं। हालाँकि गधे की मूर्खता और उसके अड़ियलपन पर कई कहावतें बनी हैं, लेकिन असल में यह घोड़े से ज़्यादा समझदार होता है। यह आम तौर पर सब्र रखनेवाला जानवर है। इसराएल में आदमी, औरत, यहाँ तक कि जाने-माने लोग भी गधों पर सवारी करते थे। (यह 15:18; न्या 5:10; 10:3, 4; 12:14; 1शम 25:42) दाविद के बेटे सुलैमान का जब अभिषेक किया जाना था, तब वह अपने पिता की मादा खच्चर पर सवार हुआ था। (खच्चर, गधे और घोड़ी की संकर संतान होती है।) (1रा 1:33-40) इसलिए यह एकदम सही था कि महान सुलैमान, यीशु जक 9:9 की भविष्यवाणी पूरी करे यानी वह एक घोड़े पर नहीं बल्कि गधी के बच्चे पर सवार हो।

जिस पहाड़ पर मंदिर था वहाँ के पत्थर
जिस पहाड़ पर मंदिर था वहाँ के पत्थर

ये पत्थर यरूशलेम की पश्‍चिमी दीवार के दक्षिणी हिस्से के पास पड़े हुए हैं। माना जाता है कि ये पत्थर पहली सदी के मंदिर के हैं। इन्हें यूँ ही छोड़ दिया गया है ताकि ये लोगों को याद दिलाते रहें कि रोमी लोगों ने यरूशलेम और उसके मंदिर का नाश किया था।