लूका के मुताबिक खुशखबरी 12:1-59

12  इस बीच लोग हज़ारों की तादाद में वहाँ इकट्ठा हो चुके थे, यहाँ तक कि वे एक-दूसरे पर चढ़े जा रहे थे। वह अपने चेलों से कहने लगा, “फरीसियों के खमीर से, उनके कपट से चौकन्‍ने रहो।+  लेकिन ऐसी कोई बात नहीं जो बड़ी सावधानी से छिपायी गयी हो और जो सामने न लायी जाए और जिसे राज़ रखा गया हो और जाना न जाए।+  इसलिए जो कुछ तुम अँधेरे में कहते हो वह उजाले में सुना जाएगा और जो तुम अंदर के कमरों में फुसफुसाकर कहते हो* उसका घर की छतों पर चढ़कर ऐलान किया जाएगा।  मेरे दोस्तो,+ मैं तुमसे कहता हूँ, उनसे मत डरो जो तुम्हारे शरीर को नष्ट कर सकते हैं और इससे ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते।+  मगर मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम्हें किससे डरना चाहिए। उससे डरो जिसके पास न सिर्फ तुम्हें मार डालने का, बल्कि इसके बाद तुम्हें गेहन्‍ना में फेंकने का भी अधिकार है।+ हाँ मैं तुमसे कहता हूँ, उसी से डरो।+  क्या दो पैसे में पाँच चिड़ियाँ नहीं बिकतीं? मगर उनमें से एक भी ऐसी नहीं जिसे परमेश्‍वर भूल जाए।*+  मगर तुम्हारे सिर का एक-एक बाल तक गिना हुआ है।+ इसलिए मत डरो, तुम बहुत-सी चिड़ियों से कहीं ज़्यादा अनमोल हो।+  मैं तुमसे कहता हूँ, जो कोई लोगों के सामने मुझे स्वीकार करता है,+ इंसान का बेटा भी परमेश्‍वर के स्वर्गदूतों के सामने उसे स्वीकार करेगा।+  मगर जो कोई लोगों के सामने मेरा इनकार करता है, मैं भी परमेश्‍वर के स्वर्गदूतों के सामने उसका इनकार कर दूँगा।+ 10  जो कोई इंसान के बेटे के खिलाफ कुछ कहता है उसे माफ कर दिया जाएगा, मगर जो पवित्र शक्‍ति के खिलाफ निंदा की बातें बोलता है उसे माफ नहीं किया जाएगा।+ 11  जब वे तुम्हें जनता की सभाओं, सरकारी अफसरों और अधिकारियों के सामने ले जाएँ, तो यह चिंता मत करना कि अपनी सफाई में तुम क्या कहोगे और कैसे कहोगे।+ 12  इसलिए कि पवित्र शक्‍ति उसी घड़ी तुम्हें वे सारी बातें सिखा देगी जो तुम्हें बोलनी चाहिए।”+ 13  तब भीड़ में से किसी ने उससे कहा, “गुरु, मेरे भाई से बोल कि वह हमारी विरासत का बँटवारा कर दे।” 14  यीशु ने उससे कहा, “किसने मुझे तुम लोगों का न्यायी या बँटवारा करनेवाला ठहराया है?” 15  फिर उसने भीड़ से कहा, “तुम अपनी आँखें खुली रखो और हर तरह के लालच से खुद को बचाए रखो,+ क्योंकि चाहे इंसान के पास बहुत कुछ हो, तो भी उसकी दौलत उसे ज़िंदगी नहीं दे सकती।”+ 16  फिर उसने यह मिसाल दी, “किसी दौलतमंद आदमी की ज़मीन से बहुत उपज हुई। 17  वह मन-ही-मन सोचने लगा, ‘मेरे पास अपनी फसल रखने के लिए और जगह नहीं है, इसलिए अब क्या करना ठीक रहेगा?’ 18  फिर उसने कहा, ‘एक काम करता हूँ,+ अपने गोदाम तुड़वाकर और भी बड़े गोदाम बनवाता हूँ। फिर वहीं अपना सारा अनाज और सारी चीज़ें जमा करूँगा। 19  और खुद से कहूँगा, “तेरे पास कई सालों के लिए बहुत सारी अच्छी चीज़ें जमा हैं। अब चैन से जी, खा-पी और मौज कर।”’ 20  मगर परमेश्‍वर ने उससे कहा, ‘अरे मूर्ख, आज रात ही तेरी ज़िंदगी तुझसे छीन ली जाएगी। फिर जो कुछ तूने बटोरा है वह किसका होगा?’+ 21  उस इंसान के साथ भी ऐसा ही होता है, जो धन-दौलत बटोरने में लगा रहता है मगर परमेश्‍वर की नज़र में कंगाल है।”+ 22  फिर उसने अपने चेलों से कहा, “इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, अपने जीवन के लिए चिंता करना छोड़ दो कि तुम क्या खाओगे, न ही अपने शरीर के लिए चिंता करो कि तुम क्या पहनोगे।+ 23  क्योंकि एक इंसान का जीवन भोजन से और उसका शरीर कपड़ों से कहीं ज़्यादा अनमोल है। 24  ध्यान दो कि कौवे न तो बीज बोते हैं, न कटाई करते हैं, न उनके अनाज के भंडार होते हैं, न ही गोदाम, फिर भी परमेश्‍वर उन्हें खिलाता है।+ क्या तुम्हारा मोल पंछियों से बढ़कर नहीं?+ 25  तुममें ऐसा कौन है जो चिंता करके एक पल के लिए भी अपनी ज़िंदगी बढ़ा सके? 26  इसलिए अगर तुम इतना तक नहीं कर सकते, तो बाकी चीज़ों की चिंता क्यों करते हो?+ 27  ध्यान दो कि सोसन के फूल कैसे उगते हैं। वे न तो कड़ी मज़दूरी करते हैं न ही सूत कातते हैं। मगर मैं तुमसे कहता हूँ कि सुलैमान भी जब अपने पूरे वैभव में था, तो इनमें से किसी एक की तरह भी सज-धज न सका।+ 28  इसलिए अगर परमेश्‍वर मैदान में उगनेवाले इन पौधों को, जो आज हैं और कल आग* में झोंक दिए जाएँगे, ऐसे शानदार कपड़े पहनाता है, तो अरे कम विश्‍वास रखनेवालो! वह तुम्हें इससे भी बढ़कर क्यों न पहनाएगा! 29  इसलिए यह चिंता करना छोड़ दो कि तुम क्या खाओगे और क्या पीओगे। तुम इन बातों की हद-से-ज़्यादा चिंता मत करो।+ 30  क्योंकि इन्हीं सब चीज़ों के पीछे दुनिया के लोग दिन-रात भाग रहे हैं। मगर तुम्हारा पिता जानता है कि तुम्हें इन चीज़ों की ज़रूरत है।+ 31  इसके बजाय, उसके राज की खोज में लगे रहो और ये चीज़ें तुम्हें दे दी जाएँगी।+ 32  हे छोटे झुंड,+ मत डर, क्योंकि तुम्हारे पिता ने तुम्हें राज देना मंज़ूर किया है।+ 33  इसलिए अपनी चीज़ें बेचकर गरीबों को दान कर दो।+ अपने लिए पैसे की ऐसी थैलियाँ बनाओ जो कभी पुरानी नहीं होतीं, यानी स्वर्ग में ऐसा खज़ाना जमा करो जो कभी खत्म नहीं होता,+ जहाँ न कोई चोर पास फटकता है, न कोई कीड़ा उसे खाता है। 34  क्योंकि जहाँ तुम्हारा धन होगा, वहीं तुम्हारा मन होगा। 35  तुम कमर कसकर तैयार रहो+ और तुम्हारे दीपक जलते रहें।+ 36  उन आदमियों की तरह बनो जो अपने मालिक का इंतज़ार करते हैं+ कि वह शादी* से कब लौटेगा+ ताकि जब वह आकर दरवाज़ा खटखटाए, तो फौरन उसके लिए खोल सकें। 37  सुखी होंगे वे दास जिनका मालिक आने पर उन्हें जागा हुआ पाएगा! मैं तुमसे सच कहता हूँ, वह खुद उनकी सेवा करने के लिए अपनी कमर कसेगा और कहेगा कि वे खाने के लिए बैठें* और पास खड़े होकर उनकी सेवा करेगा। 38  अगर वह दूसरे पहर में, यहाँ तक कि तीसरे पहर में आकर उन्हें जागा हुआ पाएगा, तो उनके लिए खुशी की बात है! 39  लेकिन यह जान लो कि अगर घर के मालिक को पता होता कि चोर किस वक्‍त आनेवाला है, तो वह जागता रहता और अपने घर में सेंध नहीं लगने देता।+ 40  तुम भी तैयार रहो क्योंकि जिस घड़ी तुमने सोचा भी न होगा, उसी घड़ी इंसान का बेटा आ रहा है।”+ 41  तब पतरस ने कहा, “प्रभु, तू यह मिसाल सिर्फ हमारे लिए बता रहा है या सबके लिए?” 42  प्रभु ने कहा, “असल में वह विश्‍वासयोग्य और बुद्धिमान प्रबंधक कौन है, जिसे उसका मालिक अपने घर के सेवकों के दल पर ठहराएगा कि उन्हें सही वक्‍त पर सही मात्रा में खाना देता रहे?+ 43  सुखी होगा वह दास अगर उसका मालिक आने पर उसे ऐसा ही करता पाए! 44  मैं तुमसे सच कहता हूँ, वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर अधिकार देगा। 45  लेकिन अगर कभी वह दास अपने दिल में यह सोचे, ‘मेरा मालिक आने में देर कर रहा है’+ और दास-दासियों को पीटने लगे और खा-पीकर, नशे में चूर रहे,+ 46  तो उस दास का मालिक ऐसे दिन आएगा जिस दिन की वह उम्मीद भी नहीं कर रहा होगा और उस घड़ी आएगा जिसकी उसे खबर भी न होगी। और वह उसे कड़ी-से-कड़ी सज़ा देगा और उस जगह फेंक देगा जहाँ विश्‍वासघातियों को फेंका जाता है। 47  तब वह दास जिसने समझ तो लिया था कि उसके मालिक की मरज़ी क्या है, मगर तैयार नहीं था या उसका दिया हुआ काम उसने नहीं किया,* उसे कोड़े से बहुत मारा जाएगा।+ 48  मगर जो दास अपने मालिक की मरज़ी नहीं जानता था और इसलिए उसने मार खाने लायक काम किए, उसे कम कोड़े लगेंगे। सच, जिस किसी को बहुत दिया गया है, उससे बहुत का हिसाब लिया जाएगा। और जिसे बहुत सारे काम की निगरानी सौंपी गयी है, उससे और ज़्यादा हिसाब लिया जाएगा।+ 49  मैं धरती पर आग लगाने आया हूँ। यह आग सुलग चुकी है, इससे बढ़कर मैं और कुछ नहीं चाहता। 50  हाँ, एक बपतिस्मा है+ जो मुझे लेना है और जब तक मेरा यह बपतिस्मा पूरा नहीं हो जाता, मैं तकलीफ में रहूँगा!+ 51  तुम्हें क्या लगता है, मैं धरती पर शांति देने आया हूँ? नहीं, शांति नहीं बल्कि मैं तुमसे कहता हूँ, मैं फूट डालने आया हूँ।+ 52  इसलिए कि अब से एक ही घर के पाँच लोग एक-दूसरे के खिलाफ हो जाएँगे, तीन दो के खिलाफ होंगे और दो तीन के। 53  वे एक-दूसरे के खिलाफ होंगे, पिता बेटे के खिलाफ और बेटा पिता के, माँ बेटी के खिलाफ और बेटी माँ के, सास अपनी बहू के खिलाफ और बहू अपनी सास के।”+ 54  इसके बाद उसने भीड़ से कहा, “जब तुम पश्‍चिम से एक बादल उठता देखते हो, तो फौरन कहते हो, ‘बरसाती तूफान आनेवाला है’ और ऐसा ही होता है। 55  और जब तुम दक्षिणी हवा चलती देखते हो, तो कहते हो ‘बहुत गरमी होगी’ और ऐसा ही होता है। 56  अरे कपटियो, तुम धरती और आसमान की सूरत देखकर समझ जाते हो कि मौसम कैसा होगा, मगर तुम यह क्यों नहीं समझ पाते कि इस खास वक्‍त का क्या मतलब है?+ 57  तुम खुद यह फैसला क्यों नहीं कर पा रहे कि तुम्हारे लिए क्या करना सही है? 58  उदाहरण के लिए, जब कोई तुझ पर मुकदमा दायर करने के लिए किसी अधिकारी के पास जा रहा हो, तो तू रास्ते में ही उसके साथ झगड़ा निपटा ले। कहीं ऐसा न हो कि वह तुझे न्यायी के सामने हाज़िर करे और न्यायी तुझे कोतवाल के हवाले करे और कोतवाल तुझे जेल में डलवा दे।+ 59  मैं तुमसे कहता हूँ, जब तक तुम एक-एक पाई न चुका दो, तब तक तुम वहाँ से किसी भी हाल में नहीं छूट सकोगे।”

कई फुटनोट

शा., “कमरों में कान में कहते हो।”
या “अनदेखा करे; जो परमेश्‍वर की नज़र से छिप जाए।”
या “तंदूर।”
या “शादी की दावत।”
या “मेज़ से टेक लगाएँ।”
या “उसकी मरज़ी पूरी नहीं की।”

अध्ययन नोट

हज़ारों की तादाद में: यूनानी शब्द का शाब्दिक मतलब है, 10,000 का समूह। लेकिन यह शब्द अनगिनत संख्याओं के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है।

खमीर: इसे बाइबल में अकसर पाप और भ्रष्टता की निशानी बताया गया है। यहाँ इसका मतलब है गलत शिक्षाएँ और बुरा असर।​—मत 16:6, 11, 12; 1कुर 5:6-8.

उजाले में: यानी सबके सामने या सरेआम।

गेहन्‍ना: यह इब्रानी शब्दों गेह हिन्‍नोम से निकला है जिनका मतलब है, “हिन्‍नोम घाटी।” यह घाटी प्राचीन यरूशलेम के पश्‍चिम और दक्षिण में थी। (अति. ख12, “यरूशलेम और उसके आस-पास का इलाका” नक्शा देखें।) यीशु के दिनों तक यह घाटी कूड़ा-करकट जलाने की जगह बन गयी थी। इसलिए हमेशा का विनाश बताने के लिए “गेहन्‍ना” शब्द एकदम सही था।​—शब्दावली देखें।

गेहन्‍ना: मत 5:22 का अध्ययन नोट देखें।

चिड़ियाँ: यूनानी शब्द स्ट्रूथियोन अल्पार्थक संज्ञा है जिसका मतलब है, कोई भी छोटी चिड़िया। मगर यह शब्द अकसर गौरैया के लिए इस्तेमाल होता था, जो भोजन के लिए सबसे सस्ती चिड़िया होती थी।

दो पैसे: शा., “दो असारियन।” पहले जब यीशु गलील के तीसरे दौरे पर था तो उसने कहा कि दो गौरैयों की कीमत एक असारियन है। (मत 10:29) एक असारियन एक मज़दूर को 45 मिनट मज़दूरी करने पर मिलता था। (अति. ख14 देखें।) अब शायद एक साल बाद यहूदिया में प्रचार करते वक्‍त, यीशु ने यहाँ कहा कि पाँच गौरैयों की कीमत दो असारियन है। इन ब्यौरों की तुलना करने पर पता चलता है कि गौरैया इतनी मामूली चिड़िया मानी जाती थी कि व्यापारी पाँचवीं गौरैया मुफ्त में ही दे देते थे।

चिड़ियाँ: मत 10:29 का अध्ययन नोट देखें।

तुम्हारे सिर का एक-एक बाल तक गिना हुआ है: कहा जाता है कि एक इंसान के सिर पर औसतन 1,00,000 से भी ज़्यादा बाल होते हैं। यहोवा का इतनी बारीक जानकारी रखना हमें भरोसा दिलाता है कि उसे मसीह के हर चेले में गहरी दिलचस्पी है।

तुम्हारे सिर का एक-एक बाल तक गिना हुआ है: मत 10:30 का अध्ययन नोट देखें।

निचली अदालतों: मसीही यूनानी शास्त्र में अकसर शब्द सिनेड्रियोन यरूशलेम में यहूदियों की सबसे बड़ी अदालत यानी महासभा के लिए इस्तेमाल हुआ है। (शब्दावली में “महासभा” और मत 5:22; 26:59 के अध्ययन नोट देखें।) लेकिन यह शब्द एक आम सभा के लिए भी इस्तेमाल होता था। इस आयत में शब्द सिनेड्रियोन का बहुवचन इस्तेमाल हुआ है और इसका अनुवाद “निचली अदालतों” किया गया है। ये अदालतें अकसर सभा-घरों में लगती थीं और इन्हें कोड़े लगवाने और समाज से बहिष्कार करने की सज़ा सुनाने का अधिकार था।​—मत 23:34; मर 13:9; लूक 21:12; यूह 9:22; 12:42; 16:2.

जनता की सभाओं: या शायद, “सभा-घरों।” यहाँ इस्तेमाल हुई यूनानी संज्ञा सिनागॉगी का शाब्दिक मतलब है, “इकट्ठा करना; सभा।” मगर मसीही यूनानी शास्त्र की ज़्यादातर आयतों में इसका मतलब है, वह इमारत या जगह जहाँ यहूदी इकट्ठा होते थे और जहाँ शास्त्र पढ़ा जाता था, हिदायतें दी जाती थीं, प्रचार होता था और प्रार्थना की जाती थी। (शब्दावली में “सभा-घर” देखें।) लूक 12:11 में इस शब्द का मतलब “सभा-घरों” हो सकता है, जहाँ अकसर यहूदियों की निचली अदालतें भी लगती थीं। (मत 10:17 का अध्ययन नोट देखें।) लेकिन मालूम होता है कि यहाँ इमारतों की नहीं बल्कि ऐसी सभाओं की बात की गयी है जिनमें यहूदी और गैर-यहूदी सभी हाज़िर हो सकते थे। इस तरह की सभाएँ एक मसीही पर कानूनी कार्रवाई करने और शायद उसके विश्‍वास की वजह से उसे कोई सज़ा सुनाने के मकसद से रखी जाती थीं।

हमारी विरासत का बँटवारा कर दे: मूसा के कानून में साफ बताया गया था कि विरासत का बँटवारा कैसे किया जाना चाहिए। सबसे बड़े बेटे को दुगना हिस्सा मिलता था, क्योंकि पिता के बाद उसे परिवार के मुखिया की ज़िम्मेदारियाँ सँभालनी होती थीं। (व्य 21:17) बाकी हिस्सा दूसरे वारिसों में बाँटा जाता था। ऐसा मालूम होता है कि यहाँ बताया आदमी लालच की वजह से अपने कानूनी हिस्से से ज़्यादा पाना चाहता था। शायद इसीलिए उसने अपने घरेलू मामले की बात कहकर यीशु को टोका, जो परमेश्‍वर के बारे में सिखा रहा था। उसका ऐसा करना सही नहीं था। इसलिए यीशु ने इस झगड़े में पड़ने से इनकार कर दिया, मगर साथ ही उसने लोगों को खबरदार किया कि वे लालच न करें।

बँटवारा करनेवाला: यीशु ने यहाँ कहा कि उसे इस मामले में पड़ने की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि इसे सुलझाने के बारे में मूसा के कानून में साफ बताया गया है। इसके अलावा, कानून के मुताबिक पैसों से जुड़े मामले सुलझाने का काम मुखियाओं का था। यीशु यह भी जानता था कि उसे धरती पर परमेश्‍वर के राज की खुशखबरी सुनाने के मकसद से भेजा गया है, न कि दुनियावी मामलों में उलझने के मकसद से।

लालच: यूनानी शब्द प्लीयोनेक्साया का शाब्दिक मतलब है, “और ज़्यादा पाना।” इस शब्द से और ज़्यादा पाने की ऐसी भूख का पता चलता है जो कभी नहीं मिटती। यह यूनानी शब्द इफ 4:19; 5:3 में भी इस्तेमाल हुआ है। कुल 3:5 में पौलुस ने “लालच” के बाद यह भी लिखा, “जो कि मूर्तिपूजा के बराबर है।”

तेरी ज़िंदगी: जैसे लूक 12:19 के अध्ययन नोट में बताया गया है, यूनानी शब्द साइखी का मतलब संदर्भ के मुताबिक अलग-अलग होता है। यहाँ इसका मतलब है, एक इंसान का जीवन।​—शब्दावली में “जीवन” देखें।

खुद से: यूनानी शब्द साइखी आयत 19 और 20 में तीन बार आया है। इस शब्द का मतलब संदर्भ के मुताबिक अलग-अलग होता है। (शब्दावली में “जीवन” देखें।) इस संदर्भ में इसका मतलब है, खुद वह आदमी। इसलिए यहाँ इसका अनुवाद “खुद से” किया गया है।​—इसी आयत में तेरे पास पर अध्ययन नोट और लूक 12:20 का अध्ययन नोट देखें।

तेरे पास: यहाँ मूर्ख आदमी खुद से बात कर रहा है। जैसे इसी आयत में खुद से पर अध्ययन नोट में समझाया गया है, यूनानी शब्द साइखी का यहाँ मतलब है, खुद वह आदमी।​—शब्दावली में “जीवन” देखें।

तेरे पास: यहाँ मूर्ख आदमी खुद से बात कर रहा है। जैसे इसी आयत में खुद से पर अध्ययन नोट में समझाया गया है, यूनानी शब्द साइखी का यहाँ मतलब है, खुद वह आदमी।​—शब्दावली में “जीवन” देखें।

खुद से: यूनानी शब्द साइखी आयत 19 और 20 में तीन बार आया है। इस शब्द का मतलब संदर्भ के मुताबिक अलग-अलग होता है। (शब्दावली में “जीवन” देखें।) इस संदर्भ में इसका मतलब है, खुद वह आदमी। इसलिए यहाँ इसका अनुवाद “खुद से” किया गया है।​—इसी आयत में तेरे पास पर अध्ययन नोट और लूक 12:20 का अध्ययन नोट देखें।

अरे मूर्ख: “मूर्ख” का मतलब यह नहीं कि इंसान में ज़रा भी अक्ल नहीं है। इसके बजाय बाइबल में आम तौर पर यह शब्द ऐसे इंसान के लिए इस्तेमाल हुआ है, जो समझ से काम नहीं लेता और गलत राह पर चलता है, जो परमेश्‍वर के स्तरों के खिलाफ होती है।

तेरी ज़िंदगी: जैसे लूक 12:19 के अध्ययन नोट में बताया गया है, यूनानी शब्द साइखी का मतलब संदर्भ के मुताबिक अलग-अलग होता है। यहाँ इसका मतलब है, एक इंसान का जीवन।​—शब्दावली में “जीवन” देखें।

तेरी ज़िंदगी तुझसे छीन ली जाएगी: या “वे तेरी ज़िंदगी की माँग कर रहे हैं।” इस मिसाल में “वे” शब्द का मतलब इंसानों या स्वर्गदूतों का समूह नहीं है। “माँग कर रहे हैं” की यूनानी क्रिया के साथ अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम (“वे”) इस्तेमाल हुआ है, जिससे पता चलता है कि इस आयत में बस यह कहा गया है कि उस आदमी के साथ क्या होगा। यीशु ने यह नहीं बताया कि उस दौलतमंद आदमी की मौत कैसे होगी या कौन उसकी ज़िंदगी छीन लेगा बल्कि इतना कहा कि उस आदमी की उस रात मौत होनेवाली है। इसलिए इन शब्दों का अनुवाद ऐसे भी किया जा सकता है: “तेरी ज़िंदगी तुझसे माँग ली जाएगी।”

परमेश्‍वर की नज़र में कंगाल है: यानी वह उन मामलों में अमीर नहीं था जो परमेश्‍वर की नज़र में मायने रखते हैं।

चिंता करना छोड़ दो: यहाँ यूनानी क्रिया जिस काल में लिखी है उससे पता चलता है कि एक व्यक्‍ति जो कर रहा है उसे रोकने की आज्ञा दी गयी है। “चिंता” के लिए जो यूनानी शब्द है उसका मतलब ऐसी चिंता हो सकता है जिसकी वजह से एक इंसान एक बात पर ध्यान नहीं दे पाता बल्कि कई बातों के बारे में सोचता रहता है और उसकी खुशी छिन जाती है। यही शब्द मत 6:27, 28, 31, 34 में इस्तेमाल हुआ है।

अपने जीवन: यूनानी शब्द साइखी का यहाँ मतलब है, एक इंसान का जीवन।​—शब्दावली में “जीवन” देखें।

चिंता करना छोड़ दो: “चिंता करना” की यूनानी क्रिया मैरिम्नाओ जिस काल में लिखी है, उससे पता चलता है कि एक व्यक्‍ति जो कर रहा है उसे रोकने की आज्ञा दी गयी है। इस यूनानी क्रिया का मतलब ऐसी चिंता हो सकता है, जिसकी वजह से इंसान एक बात पर ध्यान नहीं दे पाता बल्कि कई बातों के बारे में सोचता रहता है और उसकी खुशी छिन जाती है। यह यूनानी क्रिया लूक 12:11, 25, 26 में भी आयी है। यही यूनानी क्रिया पौलुस ने 1कुर 7:32-34 और फिल 4:6 में इस्तेमाल की।​—मत 6:25 का अध्ययन नोट देखें।

एक इंसान का जीवन: पिछली आयत की तरह यहाँ यूनानी शब्द साइखी का मतलब है, एक इंसान का जीवन। यहाँ जब यीशु ने जीवन और शरीर का ज़िक्र किया तो उसका मतलब था, जीता-जागता इंसान।

कौवे: मसीही यूनानी शास्त्र में इस पंछी का ज़िक्र सिर्फ यहीं आया है। यीशु ने गलील में पहाड़ी उपदेश देते वक्‍त जब इससे मिलती-जुलती सलाह दी तो उसने किसी पंछी का नाम नहीं लिया। (मत 6:26) लूका के ब्यौरे की यह घटना उस पहाड़ी उपदेश के करीब 18 महीने बाद हुई, जब यीशु यहूदिया में प्रचार कर रहा था। यीशु ने यहाँ अपनी सलाह पर और भी ज़ोर देने के लिए कौवे का ज़िक्र किया जो कानून के मुताबिक अशुद्ध माना जाता था। (लैव 11:13, 15) ज़ाहिर है कि वह यह सिखा रहा था कि अगर परमेश्‍वर अशुद्ध कौवों को खिला सकता है, तो हम यकीन रख सकते हैं कि वह उन लोगों को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा जो उस पर भरोसा रखते हैं।

एक पल के लिए भी: शा., “एक हाथ भी।” यीशु ने यहाँ जो शब्द इस्तेमाल किया वह कम दूरी का माप बताने के लिए इस्तेमाल होता था, यानी करीब 44.5 सें.मी. (17.5 इंच)।​—शब्दावली में “हाथ” और अति. ख14 देखें।

एक पल के लिए भी अपनी ज़िंदगी बढ़ा सके: शा., “एक हाथ भी अपनी उम्र बढ़ा सके।” इन शब्दों से पता चलता है कि यीशु शायद यह कह रहा था कि ज़िंदगी एक सफर की तरह है। इसलिए चिंता करके एक इंसान अपने इस सफर की दूरी एक हाथ (अति. ख14 देखें) भी बढ़ा नहीं सकता।

एक पल: मत 6:27 का अध्ययन नोट देखें।

एक पल के लिए भी अपनी ज़िंदगी बढ़ा सके: मत 6:27 का अध्ययन नोट देखें।

इतना तक: या “छोटा काम भी।” शा., “सबसे छोटा काम।” ज़ाहिर है कि यहाँ उस काम की बात की गयी है जो पिछली आयत में बताया गया है, यानी एक पल के लिए भी अपनी ज़िंदगी बढ़ाना। अगर इंसान अपनी उम्र ज़रा भी नहीं बढ़ा सकते, तो उन्हें दूसरी चीज़ों की भी चिंता नहीं करनी चाहिए, जैसे धन-दौलत, खाने-पीने की चीज़ें और कपड़े बटोरने की चिंता या घरों और ज़मीन-जायदाद हासिल करने की चिंता।

सोसन के फूल: या “लिली।” कुछ लोगों का मानना है कि ये ऐनीमोन फूल हैं, मगर इनमें ट्‌यूलिप, हायसिंथ, आइरिस, ग्लैडियोलस जैसे तरह-तरह के लिली भी हो सकते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यीशु उस इलाके में उगनेवाले अलग-अलग जंगली फूलों की बात कर रहा था। इसलिए कई अनुवादों में इसके यूनानी शब्द के लिए “फूल” या “जंगली फूल” कहा गया है। यह बात सच हो सकती है क्योंकि दूसरी आयतों में इसके लिए ‘मैदान में उगनेवाले पौधे’ लिखा गया है।​—लूक 12:28; मत 6:28-30.

हद-से-ज़्यादा चिंता मत करो: यूनानी शब्द मीटीयोराइ-ज़ोमाइ मसीही यूनानी शास्त्र में सिर्फ यहीं आया है। प्राचीन यूनानी भाषा में इस शब्द का मतलब था, “ऊँचा उठाना; लटकाना।” यहाँ तक कि यह शब्द समुद्र में जहाज़ के यहाँ-वहाँ उछाले जाने के सिलसिले में भी इस्तेमाल हुआ है। लेकिन इस संदर्भ में इस शब्द का लाक्षणिक मतलब है, चिंता करना या मन बेचैन होना। यह ऐसा है मानो शक और चिंता से मन डाँवाँडोल हो रहा हो।

दान: शा., “दया के दान।” यूनानी शब्द एलीमॉसाइने “दया” और “दया दिखाने” के लिए इस्तेमाल होनेवाले यूनानी शब्दों से जुड़ा है। एलीमॉसाइने का मतलब है, गरीबों को उदारता से दिया गया पैसा या खाने की चीज़ें।

दान: मत 6:2 का अध्ययन नोट देखें।

कमर कसकर तैयार रहो: शा., “कमर को लपेटना।” एक यूनानी मुहावरा जो आम तौर पर ऐसे हालात में इस्तेमाल होता है जब लोग कोई मेहनत का काम करने, दौड़ने या कुछ और करने के लिए अपने लंबे कपड़े के छोर को उठाकर कमरबंध से कस लेते थे। इसका मतलब है, काम के लिए हमेशा तैयार रहना। इसी से मिलते-जुलते शब्द इब्रानी शास्त्र में कई बार आए हैं। (उदाहरण के लिए: निर्ग 12:11, फु.; 1रा 18:46; 2रा 3:21, फु.; 4:29; नीत 31:17; यिर्म 1:17, फु.) इस संदर्भ में क्रिया का जो रूप इस्तेमाल हुआ है, उससे पता चलता है कि परमेश्‍वर के सेवकों को उपासना से जुड़े कामों के लिए हमेशा तैयार रहना है। लूक 12:37 में इसी यूनानी क्रिया का अनुवाद “सेवा करने के लिए अपनी कमर कसेगा” किया गया है। पहला पत 1:13 में “कड़ी मेहनत करने के लिए अपने दिमाग की सारी शक्‍ति बटोर लो” शब्दों का शाब्दिक मतलब है, “अपने दिमाग की कमर कस लो।”

कमर कसकर तैयार रहो: शा., “कमर को लपेटना।” एक यूनानी मुहावरा जो आम तौर पर ऐसे हालात में इस्तेमाल होता है जब लोग कोई मेहनत का काम करने, दौड़ने या कुछ और करने के लिए अपने लंबे कपड़े के छोर को उठाकर कमरबंध से कस लेते थे। इसका मतलब है, काम के लिए हमेशा तैयार रहना। इसी से मिलते-जुलते शब्द इब्रानी शास्त्र में कई बार आए हैं। (उदाहरण के लिए: निर्ग 12:11, फु.; 1रा 18:46; 2रा 3:21, फु.; 4:29; नीत 31:17; यिर्म 1:17, फु.) इस संदर्भ में क्रिया का जो रूप इस्तेमाल हुआ है, उससे पता चलता है कि परमेश्‍वर के सेवकों को उपासना से जुड़े कामों के लिए हमेशा तैयार रहना है। लूक 12:37 में इसी यूनानी क्रिया का अनुवाद “सेवा करने के लिए अपनी कमर कसेगा” किया गया है। पहला पत 1:13 में “कड़ी मेहनत करने के लिए अपने दिमाग की सारी शक्‍ति बटोर लो” शब्दों का शाब्दिक मतलब है, “अपने दिमाग की कमर कस लो।”

कमर में अंगोछा बाँधकर: इनके यूनानी शब्द पैरिज़ोन-नाइमाइ का शाब्दिक मतलब है, “कस लो” यानी अंगोछा बाँधकर या कमरबंद से कपड़े कसकर सेवा करने के लिए तैयार होना। इस संदर्भ में इस यूनानी शब्द का अनुवाद ऐसे भी किया जा सकता है: “कपड़े पहनकर सेवा के लिए तैयार हो जा।” यही यूनानी शब्द लूक 12:35, 37 और इफ 6:14 में भी आया है।​—लूक 12:35, 37 के अध्ययन नोट देखें।

वह खुद उनकी सेवा करने के लिए अपनी कमर कसेगा: लूक 12:35; 17:8 के अध्ययन नोट देखें।

चौथे पहर: यानी सुबह करीब 3 बजे से 6 बजे तक जब सूरज उगता है। यूनानियों और रोमियों के मुताबिक, रात को चार पहरों में बाँटा जाता था। पहले इब्री लोग रात को तीन पहरों में बाँटते थे और हर पहर करीब चार घंटे का होता था। (निर्ग 14:24; न्या 7:19) लेकिन यीशु के दिनों तक इस मामले में उन्होंने रोमी तरीका अपना लिया था।

आधी रात को: यूनानियों और रोमियों के मुताबिक, यह रात का दूसरा पहर था यानी करीब 9 बजे से आधी रात तक।​—इसी आयत में दिन ढलने पर अध्ययन नोट देखें।

मुर्गे के बाँग देने के वक्‍त: यूनानियों और रोमियों के मुताबिक, यह रात का तीसरा पहर था यानी आधी रात से करीब 3 बजे तक। (इसी आयत में पहले के अध्ययन नोट देखें।) मुमकिन है कि इसी दौरान ‘मुर्गा बाँग देता था।’ (मर 14:72) पुराने ज़माने में और आज भी भूमध्य सागर के पूर्वी देशों में मुर्गे के बाँग देने से समय का पता लगाया जाता है।—मत 26:34; मर 14:30, 72 के अध्ययन नोट देखें।

दूसरे पहर: यानी रात करीब 9 बजे से आधी रात तक। यूनानियों और रोमियों के मुताबिक, रात को चार पहरों में बाँटा जाता था। पहले इब्री लोग रात को तीन पहरों में बाँटते थे और हर पहर करीब चार घंटे का होता था। (निर्ग 14:24; न्या 7:19) लेकिन पहली सदी तक इस मामले में उन्होंने रोमी तरीका अपना लिया था।​—मत 14:25; मर 13:35 के अध्ययन नोट देखें।

तीसरे पहर: यानी आधी रात से सुबह करीब 3 बजे तक।​—मर 13:35 का अध्ययन नोट देखें।

बुद्धिमान: या “सूझ-बूझ से काम लेनेवाला।” यहाँ इस्तेमाल हुए यूनानी विशेषण फ्रोनिमोस में यह सब शामिल है: अंदरूनी समझ, पहले से सोचना, समझदारी, होशियारी और समझ-बूझ से काम लेना। इसी यूनानी शब्द का एक रूप लूक 16:8 में इस्तेमाल हुआ है जहाँ इसका अनुवाद ‘व्यवहार करने में ज़्यादा होशियार हैं’ किया गया है। यही यूनानी शब्द मत 7:24; 25:2, 4, 8, 9 में आया है। सेप्टुआजेंट में यह शब्द उत 41:33, 39 में यूसुफ के सिलसिले में इस्तेमाल हुआ है।

प्रबंधक: या “घर के कामों की देखरेख करनेवाला।” यूनानी शब्द ओइकोनॉमोस एक ऐसे सेवक के लिए इस्तेमाल होता था, जिसे दूसरे सेवकों की निगरानी करने की ज़िम्मेदारी दी जाती थी। प्राचीन समय में अकसर एक विश्‍वासयोग्य दास को मालिक के घर के कामों की देखरेख का ज़िम्मा दिया जाता था। इससे पता चलता है कि यह ओहदा बहुत भरोसेमंद व्यक्‍ति को ही दिया जाता था। उदाहरण के लिए, अब्राहम ने अपने एक सेवक को प्रबंधक ठहराया था, “जो उसके घराने के सब कामों की देखरेख करता था।” (उत 24:2) यूसुफ भी एक प्रबंधक था, जैसे उत 39:4 में बताया गया है। हालाँकि यीशु ने अपनी मिसाल में एक “प्रबंधक” की बात की, लेकिन ज़रूरी नहीं कि यह सिर्फ एक व्यक्‍ति को दर्शाता है। बाइबल में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ बात तो एक व्यक्‍ति के बारे में की गयी है, लेकिन असल में वह एक समूह को दर्शाता है। जैसे यहोवा ने इसराएल राष्ट्र से कहा, “तुम मेरे साक्षी [बहुवचन] हो, हाँ, मेरा वह सेवक [एकवचन], जिसे मैंने चुना है।” (यश 43:10) उसी तरह यीशु की मिसाल में बताया प्रबंधक एक समूह को दर्शाता है। मत 24:45 में दर्ज़ इसी मिसाल में प्रबंधक को “विश्‍वासयोग्य और बुद्धिमान दास” कहा गया है।

अपने घर के सेवकों के दल: या “अपने घर के दासों।” इनका यूनानी शब्द थेरापिआया है। इस शब्द का और मत 24:45 में इस्तेमाल हुए शब्द “घर के कर्मचारियों” (यूनानी में ओइकेटिआया) का आम तौर पर एक ही मतलब है और वह है, मालिक के घर में काम करनेवाले सभी लोग। लूका ने जो शब्द इस्तेमाल किया, वह प्राचीन यूनानी भाषा में इस्तेमाल होनेवाला आम शब्द था। इससे शायद पता चले कि लूका काफी पढ़ा-लिखा और जानकार व्यक्‍ति था।

प्रबंधक: या “घर के कामों की देखरेख करनेवाला।” यूनानी शब्द ओइकोनॉमोस एक ऐसे सेवक के लिए इस्तेमाल होता था, जिसे दूसरे सेवकों की निगरानी करने की ज़िम्मेदारी दी जाती थी। प्राचीन समय में अकसर एक विश्‍वासयोग्य दास को मालिक के घर के कामों की देखरेख का ज़िम्मा दिया जाता था। इससे पता चलता है कि यह ओहदा बहुत भरोसेमंद व्यक्‍ति को ही दिया जाता था। उदाहरण के लिए, अब्राहम ने अपने एक सेवक को प्रबंधक ठहराया था, “जो उसके घराने के सब कामों की देखरेख करता था।” (उत 24:2) यूसुफ भी एक प्रबंधक था, जैसे उत 39:4 में बताया गया है। हालाँकि यीशु ने अपनी मिसाल में एक “प्रबंधक” की बात की, लेकिन ज़रूरी नहीं कि यह सिर्फ एक व्यक्‍ति को दर्शाता है। बाइबल में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ बात तो एक व्यक्‍ति के बारे में की गयी है, लेकिन असल में वह एक समूह को दर्शाता है। जैसे यहोवा ने इसराएल राष्ट्र से कहा, “तुम मेरे साक्षी [बहुवचन] हो, हाँ, मेरा वह सेवक [एकवचन], जिसे मैंने चुना है।” (यश 43:10) उसी तरह यीशु की मिसाल में बताया प्रबंधक एक समूह को दर्शाता है। मत 24:45 में दर्ज़ इसी मिसाल में प्रबंधक को “विश्‍वासयोग्य और बुद्धिमान दास” कहा गया है।

वह दास: यानी लूक 12:42 में बताया प्रबंधक। अगर “वह दास” वफादार रहेगा तो उसे इनाम दिया जाएगा। (लूक 12:43, 44) लेकिन अगर वह वफादार नहीं रहेगा, तो “उसे कड़ी-से-कड़ी सज़ा” दी जाएगी। (लूक 12:46) यीशु यहाँ असल में विश्‍वासयोग्य प्रबंधक को खबरदार कर रहा था। उसी तरह मत 24:45-51 में दी इससे मिलती-जुलती मिसाल में यीशु ने एक चेतावनी दी। जब उसने कहा, “अगर कभी वह दुष्ट दास अपने दिल में कहने लगे,” तो वह यह भविष्यवाणी नहीं कर रहा था कि एक “दुष्ट दास” होगा और न ही वह “दुष्ट दास” को ठहरा रहा था। इसके बजाय, वह विश्‍वासयोग्य दास को खबरदार कर रहा था कि अगर वह दुष्ट दास बन गया तो उसके साथ क्या होगा।

वह दास: आयत 42 में जो प्रबंधक है उसे यहाँ “दास” कहा गया है। (लूक 12:42 का अध्ययन नोट देखें।) अगर “वह दास” विश्‍वासयोग्य रहेगा तो उसे इनाम दिया जाएगा। (लूक 12:44) मत 24:45-47 में दी इससे मिलती-जुलती मिसाल में इस प्रबंधक को “विश्‍वासयोग्य और बुद्धिमान दास” कहा गया है।​—लूक 12:45 का अध्ययन नोट देखें।

वह दास: यानी लूक 12:42 में बताया प्रबंधक। अगर “वह दास” वफादार रहेगा तो उसे इनाम दिया जाएगा। (लूक 12:43, 44) लेकिन अगर वह वफादार नहीं रहेगा, तो “उसे कड़ी-से-कड़ी सज़ा” दी जाएगी। (लूक 12:46) यीशु यहाँ असल में विश्‍वासयोग्य प्रबंधक को खबरदार कर रहा था। उसी तरह मत 24:45-51 में दी इससे मिलती-जुलती मिसाल में यीशु ने एक चेतावनी दी। जब उसने कहा, “अगर कभी वह दुष्ट दास अपने दिल में कहने लगे,” तो वह यह भविष्यवाणी नहीं कर रहा था कि एक “दुष्ट दास” होगा और न ही वह “दुष्ट दास” को ठहरा रहा था। इसके बजाय, वह विश्‍वासयोग्य दास को खबरदार कर रहा था कि अगर वह दुष्ट दास बन गया तो उसके साथ क्या होगा।

उसे कड़ी-से-कड़ी सज़ा देगा: शा., “उसके दो टुकड़े कर देगा।” इन शब्दों का यह मतलब नहीं कि वाकई उसके दो टुकड़े कर दिए जाएँगे बल्कि इसका मतलब है, उसे सख्त सज़ा दी जाएगी।

उसे कड़ी-से-कड़ी सज़ा देगा: मत 24:51 का अध्ययन नोट देखें।

आग लगाने: जब यीशु आया, तब एक मायने में यहूदियों के समाज में आग लग गयी। यीशु ने उन मसलों पर बात की, जिनसे लोगों में गरमा-गरम बहस छिड़ गयी। इसका नतीजा यह हुआ कि बहुत-सी झूठी शिक्षाएँ और परंपराएँ भस्म हो गयीं। उदाहरण के लिए, यहूदियों को उम्मीद थी कि जब मसीहा धरती पर आएगा, तो वह इसराएल राष्ट्र को रोमी हुकूमत से आज़ाद कराएगा। लेकिन ऐसा करने के बजाय यीशु एक शर्मनाक मौत मरा। यीशु ने जोश से परमेश्‍वर के राज के बारे में प्रचार करके उस पर ज़ोर दिया। इससे पूरे राष्ट्र में तहलका मच गया, मानो आग लग गयी।​—1कुर 1:23.

एक-एक पाई: शा., “आखिरी लेप्टौन।” यूनानी शब्द लेप्टौन का मतलब है, एक छोटी और पतली चीज़। लेप्टौन एक ऐसा सिक्का था जो एक दीनार का 1/128वाँ हिस्सा होता था। ज़ाहिर है कि इसराएल में यह ताँबे या काँसे का सबसे छोटा सिक्का होता था।​—शब्दावली में “लेप्टौन” और अति. ख14 देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

आज हिन्‍नोम घाटी
आज हिन्‍नोम घाटी

हिन्‍नोम घाटी (1) को मसीही यूनानी शास्त्र में गेहन्‍ना कहा गया है। यहाँ वह पहाड़ भी दिखाया गया है (2) जहाँ पहली सदी में यहूदियों का मंदिर था। मगर आज वहाँ एक जानी-मानी इमारत है, मुसलमानों का मकबरा जिसे ‘डोम ऑफ द रॉक’ कहा जाता है।​—अतिरिक्‍त लेख ख-12 में नक्शा देखें।

कौवा
कौवा

बाइबल में जिस पक्षी का ज़िक्र सबसे पहले आया है, वह है कौवा। (उत 8:7) यह काफी देर तक उड़ान भर सकता है और माना जाता है कि बाकी पक्षियों की तुलना में होशियार है और मुश्‍किल-से-मुश्‍किल हालात में भी ज़िंदा रह सकता है। यहोवा जब अय्यूब को सृष्टि में पायी जानेवाली बुद्धि के बारे में सिखा रहा था, तो उसने कहा कि वह ‘कौवे को खिलाता है।’ (अय 38:41) भजन के लेखक ने कहा कि कौवा जब अपने भूखे बच्चों को खिलाता है, तो दरअसल यहोवा उनके खाने का इंतज़ाम करता है। (भज 147:9) यीशु ने भी कौवों के बारे में इससे मिलती-जुलती बात कही और अपने चेलों को भरोसा दिलाया कि जब यहोवा ऐसे पक्षियों का पेट भर सकता है तो अपने सेवकों की ज़रूरतें भी पूरी कर सकता है। कानून के करार के मुताबिक कौवा अशुद्ध पक्षी था और इसे खाना मना था। (लैव 11:13, 15) तो अगर परमेश्‍वर अशुद्ध कौवों को खिला सकता है, तो हम यकीन रख सकते हैं कि वह ऐसे लोगों को कभी नहीं छोड़ेगा जो उस पर भरोसा रखते हैं।

मैदान में उगनेवाले सोसन के फूल
मैदान में उगनेवाले सोसन के फूल

यीशु ने अपने चेलों को बढ़ावा दिया कि वे ‘ध्यान दें कि सोसन के फूल कैसे उगते हैं’ और उनसे ‘सबक सीखें।’ बाइबल के अनुवादों में जिस मूल शब्द को अकसर “सोसन के फूल” (लिली) कहा गया है, उसका मतलब कई तरह के फूल हो सकता है। जैसे ट्यूलिप, ऐनीमोन, हायसिंथ, आइरिस और ग्लैडियोलस। कुछ विद्वानों का मानना है कि यीशु ऐनीमोन फूलों की बात कर रहा था। लेकिन हो सकता है कि यीशु सोसन (लिली) के जैसे दिखनेवाले फूलों की बात कर रहा हो। यहाँ तसवीर में लाल ऐनीमोन फूल (ऐनीमोन कौरोनारिया ) दिखाए गए हैं। ये फूल इसराएल में बहुत आम हैं और नीले, गुलाबी, बैंजनी और सफेद रंगों में भी पाए जाते हैं।