मरकुस के मुताबिक खुशखबरी 16:1-8

16  जब सब्त का दिन+ बीत गया, तो मरियम मगदलीनी, याकूब की माँ मरियम+ और सलोमी ने खुशबूदार मसाले खरीदे ताकि आकर यीशु के शरीर पर लगाएँ।+  वे हफ्ते के पहले दिन सुबह-सुबह, जब सूरज निकला ही था, कब्र पर आयीं।+  वे आपस में कह रही थीं, “कौन हमारे लिए कब्र के मुँह से पत्थर हटाएगा?”+  मगर जब उन्होंने नज़र उठाकर देखा, तो पत्थर पहले से ही दूर लुढ़का हुआ था, इसके बावजूद कि वह बहुत बड़ा था।+  जब वे कब्र के अंदर गयीं, तो उन्होंने देखा कि एक नौजवान सफेद चोगा पहने दायीं तरफ बैठा है और वे हैरान रह गयीं।  उसने उनसे कहा, “हैरान मत हो।+ तुम यीशु नासरी को ढूँढ़ रही हो न, जिसे काठ पर लटकाकर मार डाला गया था? उसे ज़िंदा कर दिया गया है+ और वह यहाँ नहीं है। यह जगह देखो जहाँ उसे रखा गया था।+  जाओ और जाकर पतरस और बाकी चेलों से कहो, ‘वह तुमसे पहले गलील जाएगा।+ वहाँ तुम उसे देखोगे, ठीक जैसा उसने तुमसे कहा था।’”+  इसलिए जब वे बाहर निकलीं तो वे कब्र से भागीं। वे थर-थर काँप रही थीं और इस कदर हैरान थीं कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया क्योंकि वे बहुत डरी हुई थीं।+

कई फुटनोट

अध्ययन नोट

मरियम मगदलीनी: इसकी पहचान बताने के लिए इसका उपनाम मगदलीनी (मतलब, “मगदला की रहनेवाली”) शायद मगदला से निकला है, जो गलील झील के पश्‍चिमी तट पर बसा एक नगर था। यह नगर कफरनहूम और तिबिरियास के लगभग बीच में था। माना जाता है कि मरियम, मगदला में पैदा हुई थी या उसका घर वहाँ था।​—मत 15:39; लूक 8:2 के अध्ययन नोट देखें।

छोटे याकूब: यीशु का एक प्रेषित और हलफई का बेटा। (मत 10:2, 3; मर 3:18; लूक 6:15; प्रेष 1:13) इस याकूब को ‘छोटा’ शायद इसलिए कहा गया क्योंकि वह जब्दी के बेटे प्रेषित याकूब से या तो उम्र में छोटा था या कद में।

सलोमी: मुमकिन है कि यह नाम एक इब्रानी शब्द से लिया गया है जिसका मतलब है, “शांति।” सलोमी, यीशु के चेलों में से एक थी। मत 27:56 की तुलना मर 3:17 और 15:40 से करने पर पता चलता है कि सलोमी शायद प्रेषित याकूब और यूहन्‍ना की माँ थी। मत्ती ने “जब्दी के बेटों की माँ” का ज़िक्र किया और मरकुस ने उसे “सलोमी” कहा। यही नहीं, मत्ती और मरकुस के ब्यौरे की तुलना यूह 19:25 से करने से पता चलता है कि सलोमी, यीशु की माँ मरियम की सगी बहन रही होगी। अगर ऐसा है तो याकूब और यूहन्‍ना यीशु के मौसेरे भाई थे। इसके अलावा मत 27:55, 56, मर 15:41 और लूक 8:3 से पता चलता है कि सलोमी उन औरतों में से एक थी, जो यीशु के साथ जाती थीं और अपनी धन-संपत्ति से उसकी सेवा करती थीं।

सब्त का दिन: सब्त का दिन (नीसान 15) सूरज ढलने पर खत्म हो गया। यीशु के ज़िंदा होने के बारे में जानकारी खुशखबरी की चारों किताबों में पायी जाती है।​—मत 28:1-10; मर 16:1-8; लूक 24:1-12; यूह 20:1-29.

मरियम मगदलीनी: मत 27:56 का अध्ययन नोट देखें।

याकूब: यानी छोटा याकूब।​—मर 15:40 का अध्ययन नोट देखें।

सलोमी: मर 15:40 का अध्ययन नोट देखें।

खुशबूदार मसाले खरीदे ताकि . . . यीशु के शरीर पर लगाएँ: “यहूदियों के दफनाने की रीत के मुताबिक” यीशु की लाश को दफनाने से पहले उस पर मसाले लगाए गए थे। (यूह 19:39, 40) लेकिन ज़ाहिर है कि यह काम जल्दी में किया गया था, क्योंकि यीशु की मौत सब्त शुरू होने से करीब तीन घंटे पहले हुई थी और सब्त के दिन ऐसा काम करने की मनाही थी। सब्त के बाद हफ्ते के पहले दिन यानी यीशु की मौत के तीसरे दिन, ये औरतें शायद यीशु की लाश पर और भी मसाले और तेल लगाने आयी थीं ताकि उसकी लाश लंबे समय तक रह सके। (लूक 23:50–24:1) मुमकिन है कि जिन कपड़ों में लाश लपेटी गयी थी, उनके ऊपर ही वे मसाले और तेल लगातीं।

हफ्ते के पहले दिन: यानी नीसान 16. यहूदियों के लिए सब्त के बाद का दिन, हफ्ते का पहला दिन होता था।

हफ्ते के पहले दिन: मत 28:1 का अध्ययन नोट देखें।

पत्थर: ज़ाहिर है कि यह गोल था क्योंकि आयत कहती है कि यह “पहले से ही दूर लुढ़का हुआ था।” इसका वज़न शायद एक टन या उससे ज़्यादा रहा होगा। मत्ती के ब्यौरे में इसे “एक बड़ा पत्थर” बताया गया है।​—मत 27:60.

क्योंकि वे बहुत डरी हुई थीं: आज मौजूद मरकुस की सबसे प्राचीन हस्तलिपियों के मुताबिक, खुशखबरी की यह किताब आयत 8 में दिए शब्दों से खत्म होती है। कुछ लोगों का दावा है कि किताब की समाप्ति इस तरह अचानक नहीं हो सकती। लेकिन यह दावा सही नहीं लगता क्योंकि मरकुस के लिखने की शैली ऐसी थी कि वह कम शब्दों में बात कहता था। इसके अलावा, चौथी सदी के विद्वान जेरोम और युसेबियस ने भी बताया कि मरकुस की असली किताब आगे बताए शब्दों से खत्म होती है: “क्योंकि वे बहुत डरी हुई थीं।”

ऐसी कई यूनानी हस्तलिपियाँ और दूसरी भाषाओं के अनुवाद हैं जिनमें आयत 8 के बाद लंबी या छोटी समाप्ति दी गयी है। लंबी समाप्ति (जिसमें 12 और आयतें हैं) पाँचवीं सदी की हस्तलिपियों में पायी जाती है जैसे, कोडेक्स एलेक्ज़ैंड्रिनस, कोडेक्स एफ्रीमी सीरि रिसक्रिपटस और कोडेक्स बेज़ी कैंटाब्रिजिएनसिस। यह समाप्ति लातीनी वल्गेट, क्युरेटोनियन सीरियाई और सीरियाई पेशीटा में भी पायी जाती है। लेकिन यह समाप्ति दूसरी कुछ हस्तलिपियों में नहीं पायी जाती। जैसे, चौथी सदी की दो यूनानी हस्तलिपियाँ कोडेक्स साइनाइटिकस और कोडेक्स वैटिकनस, चौथी या पाँचवीं सदी की हस्तलिपि कोडेक्स साइनाइटिकस सिरियकस और पाँचवीं सदी की मरकुस की वह हस्तलिपि जो प्राचीन साहिदिक कॉप्टिक भाषा में लिखी गयी थी। उसी तरह, आर्मीनियाई और जॉर्जियाई भाषा में मरकुस की सबसे पुरानी हस्तलिपियाँ भी आयत 8 के शब्दों से खत्म होती हैं।

बाद की कुछ यूनानी हस्तलिपियों और दूसरी भाषाओं के अनुवादों में छोटी समाप्ति (जिसमें सिर्फ एक-दो वाक्य और लिखे हैं) दी गयी है। आठवीं सदी की हस्तलिपि कोडेक्स रीजियस में दोनों समाप्तियाँ दी गयी हैं, पहले छोटी समाप्ति और बाद में बड़ी समाप्ति। हर समाप्ति से पहले एक नोट दिया गया है जिसमें लिखा है कि यह जानकारी 8वीं सदी के कुछ विशेषज्ञों ने स्वीकार की। फिर भी सबूतों से पता चलता है कि कोडेक्स रीजियस में इन दोनों समाप्तियों को प्रमाणित नहीं माना गया है।

छोटी समाप्ति

मर 16:8 के बाद दी गयी छोटी समाप्ति परमेश्‍वर की प्रेरणा से लिखे गए शास्त्र का हिस्सा नहीं है। इसमें लिखा है:

मगर जितनी बातों की उन्हें आज्ञा दी गयी थी, वे सब उन्होंने चंद शब्दों में उन्हें बता दीं जो पतरस के आस-पास थे। इसके अलावा, इन सब बातों के बाद, यीशु ने खुद उनके ज़रिए पूरब से पश्‍चिम तक, हमेशा के उद्धार के पवित्र और अविनाशी संदेश का ऐलान करवाया।

लंबी समाप्ति

मर 16:8 के बाद दी गयी लंबी समाप्ति परमेश्‍वर की प्रेरणा से लिखे गए शास्त्र का हिस्सा नहीं है। इसमें लिखा है:

9 हफ्ते के पहले दिन सुबह होते ही, जी उठने के बाद यीशु पहले मरियम मगदलीनी को दिखायी दिया, जिसमें से उसने सात दुष्ट स्वर्गदूतों को निकाला था। 10 वह गयी और जो यीशु के साथ रहा करते थे उन्हें जाकर इसकी खबर दी, क्योंकि वे मातम मना रहे थे और रो रहे थे। 11 मगर जब उन्होंने सुना कि वह जी उठा है और उसे दिखायी दिया है, तो यकीन न किया। 12 इसके अलावा, यह सब होने के बाद जब उनमें से दो देहात की तरफ जा रहे थे, तब यीशु उन्हें दूसरे रूप में दिखायी दिया और उनके साथ-साथ चल रहा था। 13 वे वापस आए और बाकियों को खबर दी। मगर उन्होंने इनका भी यकीन नहीं किया। 14 मगर बाद में जब वे खाने की मेज़ के सामने टेक लगाए थे, तो वह ग्यारहों को दिखायी दिया और उसने उनके विश्‍वास की कमी और दिलों की कठोरता के लिए उन्हें उलाहना दी। क्योंकि उन्होंने उनका यकीन नहीं किया था जिन्होंने उसे मरे हुओं में से जी उठने के बाद देखा था। 15 और उसने उनसे कहा: “सारी दुनिया में जाओ और सब लोगों को खुशखबरी सुनाओ। 16 जो यकीन करता है और बपतिस्मा लेता है वह उद्धार पाएगा, मगर जो यकीन नहीं करता वह दोषी ठहराया जाएगा। 17 इसके अलावा, यकीन करनेवालों में ये अलग-अलग चमत्कार दिखायी देंगे: वे मेरे नाम से दुष्ट स्वर्गदूतों को निकालेंगे, अलग-अलग भाषाएँ बोलेंगे, 18 और वे अपने हाथों से साँपों को उठा लेंगे और अगर वे कोई ज़हरीली चीज़ पी जाएँ, तौभी वह उन्हें कोई नुकसान न पहुँचाएगी। वे बीमार लोगों पर अपने हाथ रखेंगे और वे चंगे हो जाएँगे।”

19 इस तरह प्रभु यीशु उनसे बातें करने के बाद स्वर्ग में उठा लिया गया और परमेश्‍वर के दायीं तरफ बैठ गया। 20 इसी के मुताबिक, चेले निकले और उन्होंने हर जगह प्रचार किया। इस दौरान प्रभु ने उनके साथ काम किया और उनके ज़रिए अलग-अलग चमत्कारों से उनके संदेश की गवाही दी।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

कोडेक्स साइनाइटिकस—मरकुस की खुशखबरी की किताब की समाप्ति
कोडेक्स साइनाइटिकस—मरकुस की खुशखबरी की किताब की समाप्ति

कोडेक्स साइनाइटिकस, चौथी सदी की एक यूनानी हस्तलिपि है जो चर्मपत्र से बनी है। इसमें पूरा मसीही यूनानी शास्त्र है और इब्रानी शास्त्र के यूनानी अनुवाद यानी सेप्टुआजेंट का कुछ भाग है। विद्वानों का मानना है कि कोडेक्स साइनाइटिकस, बाइबल के यूनानी पाठ का एक जाना-माना स्रोत है। सन्‌ 1850 के आस-पास तक यह हस्तलिपि सीनै पहाड़ के नीचे बने संत कैथरीन मठ में रखी रही। अब इस हस्तलिपि के ज़्यादातर भाग इंग्लैंड के लंदन में ब्रिटिश लाइब्रेरी में रखे हुए हैं। इनमें इस तसवीर में दिखाया भाग भी शामिल है। यह तसवीर दिखाती है कि (1) मरकुस की खुशखबरी की किताब कहाँ समाप्त होती है और (2) कहाँ से लूका की किताब शुरू होती है। इसी तरह चौथी सदी की एक और अहम हस्तलिपि है जिसे कोडेक्स वैटिकनस के नाम से जाना जाता है। इन दोनों में मरकुस की किताब उन शब्दों से खत्म होती है, जो आज बाइबल के अनुवादों में मरकुस 16:8 में पाए जाते हैं।—मर 16:8 का अध्ययन नोट देखें।

कोडेक्स वैटिकनस—मरकुस की खुशखबरी की किताब की समाप्ति
कोडेक्स वैटिकनस—मरकुस की खुशखबरी की किताब की समाप्ति

वैटिकन हस्तलिपि नं. 1209, जिसे कोडेक्स वैटिकनस के नाम से भी जाना जाता है, चौथी सदी की है। विद्वानों का मानना है कि कोडेक्स वैटिकनस, बाइबल के यूनानी पाठ का एक जाना-माना स्रोत है। यह तसवीर दिखाती है कि मरकुस की खुशखबरी की किताब कहाँ समाप्त होती है। इसमें और चौथी सदी की एक और अहम हस्तलिपि, कोडेक्स साइनाइटिकस में मरकुस की किताब उन शब्दों से खत्म होती है, जो आज बाइबल के अनुवादों में मरकुस 16:8 में पाए जाते हैं। (मर 16:8 का अध्ययन नोट देखें।) मुमकिन है कि कोडेक्स वैटिकनस मिस्र के सिकंदरिया शहर में तैयार की गयी थी। इसमें जो धुँधली लिखावट है, उससे मालूम होता है कि नकल-नवीस ने ऐसा चर्मपत्र इस्तेमाल किया, जो पहले इस्तेमाल हो चुका था। इस कोडेक्स में शुरू में यूनानी भाषा में पूरी बाइबल थी और शायद इसमें करीब 820 पन्‍ने थे, जिनमें से अब 759 बचे हैं। इस कोडेक्स में बाइबल के जो हिस्से नहीं पाए जाते वे हैं: उत्पत्ति का ज़्यादातर भाग, भजनों की किताब का एक भाग, इब्रानियों 9:14 से 13:25, 1 और 2 तीमुथियुस, तीतुस, फिलेमोन और प्रकाशितवाक्य की पूरी किताबें। कोडेक्स वैटिकनस इटली के रोम में वैटिकन लाइब्रेरी में रखी हुई है। माना जाता है कि यह 15वीं सदी से वहाँ रखी हुई है।