मरकुस के मुताबिक खुशखबरी 14:1-72

14  दो दिन बाद फसह+ और बिन-खमीर की रोटी का त्योहार था।+ और प्रधान याजक और शास्त्री मौका ढूँढ़ रहे थे कि कैसे यीशु को छल* से पकड़ें* और मार डालें।+  पर वे कह रहे थे, “त्योहार के वक्‍त नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोग हंगामा मचा दें।”  जब वह बैतनियाह में शमौन के घर खाना खाने बैठा हुआ था* जो पहले कोढ़ी था, तब एक औरत खुशबूदार तेल की बोतल लेकर आयी। उसमें असली जटामाँसी का खुशबूदार तेल था, जो बहुत कीमती था। उस औरत ने बोतल तोड़कर खोली और वह यीशु के सिर पर तेल उँडेलने लगी।+  यह देखकर कुछ लोग भड़क उठे और आपस में कहने लगे, “यह खुशबूदार तेल क्यों बरबाद कर दिया गया?  इसे 300 दीनार+ से भी ज़्यादा दाम में बेचकर पैसा गरीबों को दिया जा सकता था!” वे उस औरत पर बहुत नाराज़ हुए।*  मगर यीशु ने कहा, “तुम क्यों इसे परेशान कर रहे हो? छोड़ दो इसे। इसने मेरी खातिर एक बढ़िया काम किया है।+  गरीब तो हमेशा तुम्हारे साथ होंगे+ और तुम जब चाहो उनके साथ भलाई कर सकते हो, मगर मैं हमेशा तुम्हारे साथ नहीं रहूँगा।+  वह जो कर सकती थी उसने किया। उसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर मेरे दफनाए जाने की तैयारी की है।+  मैं तुमसे सच कहता हूँ, सारी दुनिया में जहाँ कहीं खुशखबरी का प्रचार किया जाएगा,+ वहाँ इस औरत की याद में इसके काम की चर्चा की जाएगी।”+ 10  यहूदा इस्करियोती जो बारहों में से एक था, निकलकर प्रधान याजकों के पास गया ताकि यीशु को उनके हाथों पकड़वा दे।+ 11  जब उन्होंने उसकी बात सुनी तो वे बहुत खुश हुए और उसे चाँदी के सिक्के देने का वादा किया।+ तब से यहूदा यीशु को पकड़वाने का मौका ढूँढ़ने लगा। 12  बिन-खमीर की रोटी के त्योहार के पहले दिन,+ जब यहूदी अपने दस्तूर के मुताबिक फसह का जानवर बलि करते थे,+ उसके चेलों ने उससे पूछा, “तू कहाँ चाहता है कि हम जाकर तेरे लिए फसह का खाना खाने की तैयारी करें?”+ 13  तब उसने अपने दो चेलों को यह कहकर भेजा, “शहर में जाओ और तुम्हें एक आदमी पानी का घड़ा उठाए हुए मिलेगा। उसके पीछे-पीछे जाना।+ 14  वह जिस घर में जाए उस घर के मालिक से कहना, ‘गुरु ने पूछा है, “मेहमानों का वह कमरा कहाँ है जहाँ मैं अपने चेलों के साथ फसह का खाना खाऊँ?”’ 15  फिर वह तुम्हें ऊपर का एक बड़ा कमरा दिखाएगा जो सजा हुआ होगा। वहाँ हमारे लिए तैयारी करना।” 16  तब वे चेले निकले और शहर के अंदर गए और जैसा उसने बताया था ठीक वैसा ही पाया। और उन्होंने फसह की तैयारी की। 17  शाम होने पर वह बारहों के साथ आया।+ 18  और जब वे खाना खा रहे थे, तब यीशु ने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ, तुममें से एक जो मेरे साथ खा रहा है, मेरे साथ विश्‍वासघात करके मुझे पकड़वा देगा।”+ 19  वे दुखी होने लगे और एक-एक करके उससे कहने लगे, “वह मैं तो नहीं हूँ न?” 20  उसने कहा, “वह तुम बारहों में से एक है जो मेरे साथ कटोरे में निवाला डुबोकर खा रहा है।+ 21  इंसान का बेटा तो जा ही रहा है, ठीक जैसा उसके बारे में लिखा है, मगर उस आदमी का बहुत बुरा होगा जो इंसान के बेटे के साथ विश्‍वासघात करके उसे पकड़वा देगा!+ उस आदमी के लिए अच्छा तो यह होता कि वह पैदा ही न हुआ होता।”+ 22  जब वे खाना खा रहे थे, तो यीशु ने एक रोटी ली और प्रार्थना में धन्यवाद देकर उसे तोड़ा और उन्हें देकर कहा, “यह लो, यह मेरे शरीर की निशानी है।”+ 23  फिर उसने एक प्याला लिया और प्रार्थना में धन्यवाद देकर उन्हें दिया और उन सबने उसमें से पीया।+ 24  फिर यीशु ने उनसे कहा, “यह मेरे खून की निशानी है,+ जो करार को पक्का करता है+ और जो बहुतों की खातिर बहाया जाएगा।+ 25  मैं तुमसे सच कहता हूँ, मैं दाख-मदिरा* उस दिन तक हरगिज़ नहीं पीऊँगा, जिस दिन मैं परमेश्‍वर के राज में नयी दाख-मदिरा न पीऊँ।”+ 26  आखिर में उन्होंने परमेश्‍वर की तारीफ में गीत गाए और फिर जैतून पहाड़ की तरफ निकल गए।+ 27  यीशु ने उनसे कहा, “तुम सबका विश्‍वास डगमगा जाएगा* क्योंकि लिखा है, ‘मैं चरवाहे को मारूँगा+ और भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी।’+ 28  लेकिन जब मुझे ज़िंदा कर दिया जाएगा, तो मैं तुमसे पहले गलील जाऊँगा।”+ 29  मगर पतरस ने उससे कहा, “चाहे इन सबका विश्‍वास क्यों न डगमगा जाए, मगर मेरा विश्‍वास नहीं डगमगाएगा।”+ 30  तब यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे सच कहता हूँ, आज ही, हाँ, इसी रात मुर्गे के दो बार बाँग देने से पहले तू तीन बार मुझे जानने से इनकार कर देगा।”+ 31  मगर पतरस बार-बार कहने लगा, “अगर मुझे तेरे साथ मरना पड़े, तब भी मैं तुझे जानने से हरगिज़ इनकार नहीं करूँगा।” बाकी चेले भी यही कहने लगे।+ 32  फिर वे गतसमनी नाम की जगह आए और उसने अपने चेलों से कहा, “मैं वहाँ प्रार्थना करने जा रहा हूँ, तुम यहीं बैठे रहना।”+ 33  फिर उसने पतरस, याकूब और यूहन्‍ना को अपने साथ लिया।+ वह मन-ही-मन बेचैन हो उठा* और दुख से बेहाल होने लगा। 34  उसने उनसे कहा, “मेरा मन बहुत दुखी है,+ यहाँ तक कि मेरी मरने जैसी हालत हो रही है। यहीं ठहरो और जागते रहो।”+ 35  फिर वह थोड़ा आगे गया और ज़मीन पर गिरकर प्रार्थना करने लगा कि अगर हो सके तो यह वक्‍त टल जाए। 36  उसने कहा, “हे अब्बा, हे पिता,+ तेरे लिए सबकुछ मुमकिन है। यह प्याला मेरे सामने से हटा दे। मगर फिर भी जो मैं चाहता हूँ वह नहीं, बल्कि वही हो जो तू चाहता है।”+ 37  जब वह चेलों के पास वापस आया, तो उसने देखा कि वे सो रहे हैं। उसने पतरस से कहा, “शमौन, तू सो रहा है? क्या तुझमें इतनी भी ताकत नहीं कि थोड़ी देर मेरे साथ जाग सके?+ 38  जागते रहो और प्रार्थना करते रहो ताकि तुम परीक्षा में न पड़ो।+ दिल तो बेशक तैयार* है, मगर शरीर कमज़ोर है।”+ 39  वह दोबारा गया और उसने फिर से वही प्रार्थना की।+ 40  वह फिर चेलों के पास आया और उसने उन्हें सोता हुआ पाया क्योंकि उनकी आँखें नींद से भरी थीं। वे नहीं जानते थे कि उसे क्या जवाब दें। 41  फिर वह तीसरी बार उनके पास आया और उसने कहा, “तुम ऐसे वक्‍त में सो रहे हो और आराम कर रहे हो! बहुत हुआ! देखो, वह घड़ी आ गयी है!+ अब इंसान के बेटे के साथ विश्‍वासघात करके उसे पापियों के हाथ सौंप दिया जाएगा। 42  उठो, आओ चलें। देखो, मुझसे गद्दारी करनेवाला पास आ गया है।”+ 43  वह बोल ही रहा था कि तभी यहूदा आ गया, जो उन बारहों में से एक था। उसके साथ तलवारें और लाठियाँ लिए हुए लोगों की भीड़ थी जिसे प्रधान याजकों, शास्त्रियों और मुखियाओं ने भेजा था।+ 44  उसके साथ विश्‍वासघात करनेवाले ने यह कहकर उन्हें पहले से एक निशानी दी थी, “जिसे मैं चूमूँगा, वही है। उसे गिरफ्तार कर लेना और सावधानी से ले जाना।”* 45  वह सीधे यीशु की तरफ आया और पास आकर उसने कहा, “रब्बी!” और उसे प्यार से चूमा। 46  तब उन्होंने उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। 47  मगर वहाँ जो खड़े थे उनमें से एक ने अपनी तलवार खींचकर महायाजक के दास पर वार किया और उसका कान उड़ा दिया।+ 48  यीशु ने भीड़ से कहा, “क्या तुम तलवारें और लाठियाँ लेकर मुझे गिरफ्तार करने आए हो, मानो मैं कोई लुटेरा हूँ?+ 49  मैं हर दिन तुम्हारे बीच मंदिर में सिखाया करता था,+ फिर भी तुमने मुझे हिरासत में नहीं लिया। मगर यह सब इसलिए हुआ है ताकि शास्त्र के वचन पूरे हों।”+ 50  तब सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।+ 51  मगर एक नौजवान जो सिर्फ एक बढ़िया मलमल का कपड़ा ओढ़े था, उसके पीछे-पीछे आने लगा। लेकिन जब भीड़ ने उसे पकड़ने की कोशिश की, 52  तो वह अपना मलमल का कपड़ा छोड़कर नंगा भाग गया। 53  अब वे यीशु को महायाजक के पास ले गए+ और सारे प्रधान याजक, मुखिया और शास्त्री वहाँ इकट्ठा हुए।+ 54  मगर पतरस कुछ दूरी पर रहकर उसके पीछे-पीछे महायाजक के आँगन तक आया। वह घर के सेवकों के साथ बैठ गया और आग तापने लगा।+ 55  प्रधान याजक और पूरी महासभा यीशु को मार डालने के लिए उसके खिलाफ झूठी गवाही ढूँढ़ रही थी, मगर उन्हें ऐसी एक भी गवाही नहीं मिली।+ 56  बेशक, बहुत-से लोग उसके खिलाफ झूठी गवाही दे रहे थे,+ मगर उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे। 57  कुछ लोगों ने खड़े होकर उसके खिलाफ यह झूठी गवाही दी, 58  “हमने इसे यह कहते सुना है कि मैं हाथ के बनाए इस मंदिर को ढा दूँगा और तीन दिन के अंदर दूसरा मंदिर खड़ा कर दूँगा जो हाथों से नहीं बना होगा।”+ 59  मगर इस बारे में भी उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे। 60  तब महायाजक उनके बीच खड़ा हुआ और उसने यीशु से पूछा, “क्या तू जवाब में कुछ नहीं कहेगा? क्या तू सुन नहीं रहा कि ये तुझ पर क्या-क्या इलज़ाम लगा रहे हैं?”+ 61  मगर तब भी यीशु चुप रहा और उसने कोई जवाब नहीं दिया।+ एक बार फिर महायाजक उससे सवाल करने लगा और उससे कहा, “क्या तू परम-प्रधान परमेश्‍वर का बेटा, मसीह है?” 62  यीशु ने कहा, “हाँ मैं हूँ। और तुम लोग इंसान के बेटे+ को शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ बैठा+ और आकाश के बादलों के साथ आता देखोगे।”+ 63  यह सुनते ही महायाजक ने अपना कपड़ा फाड़ा और कहा, “अब हमें और गवाहों की क्या ज़रूरत है?+ 64  तुम लोगों ने ये निंदा की बातें सुनी हैं। अब तुम्हारा क्या फैसला है?”* उन सबने कहा कि यह मौत की सज़ा के लायक है।+ 65  कुछ उस पर थूकने लगे+ और उसका मुँह ढाँपकर उसे घूँसे मारने लगे और उससे कहने लगे, “भविष्यवाणी कर, तुझे किसने मारा!” और पहरेदारों ने उसके मुँह पर थप्पड़ मारे और उसे ले गए।+ 66  जब पतरस नीचे आँगन में था, तो महायाजक की एक दासी आयी।+ 67  पतरस को आग तापते देख, वह उस पर नज़रें गड़ाकर बोली, “तू भी उस नासरी यीशु के साथ था।” 68  मगर उसने यह कहकर इनकार कर दिया, “न तो मैं उसे जानता हूँ न मुझे यह समझ आ रहा है* कि तू क्या कह रही है।” तब वह बाहर फाटक के पास चला गया। 69  वहाँ उस दासी ने उसे देखा और वहाँ खड़े लोगों से एक बार फिर कहा, “यह भी उनमें से एक है।”+ 70  पतरस फिर से इनकार करने लगा। थोड़ी देर बाद आस-पास खड़े लोग फिर से पतरस से कहने लगे, “बेशक तू भी उनमें से एक है क्योंकि तू एक गलीली है।” 71  मगर वह खुद को कोसने लगा और कसम खाकर कहने लगा, “मैं उस आदमी को नहीं जानता जिसकी तुम बात कर रहे हो!” 72  उसी घड़ी एक मुर्गे ने दूसरी बार बाँग दी+ और पतरस को यीशु की यह बात याद आयी, “मुर्गे के दो बार बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझे जानने से इनकार कर देगा।”+ तब उससे और बरदाश्‍त नहीं हुआ और वह फूट-फूटकर रोने लगा।

कई फुटनोट

या “धोखे; चालाकी।”
या “गिरफ्तार करें।”
या “मेज़ से टेक लगाए बैठा था।”
या “उस पर भड़क उठे; उसे डाँटा।”
शा., “अंगूर की बेल की उपज से बनी यह चीज़।”
शा., “तुम ठोकर खाओगे।”
या “उसकी सदमे की सी हालत हो गयी।”
या “उत्सुक।”
या ”ले जाते समय उस पर कड़ी नज़र रखना।”
या “तुम क्या सोचते हो?”; “तुम्हें क्या लगता है?”
या “मैं न तो जानता न ही समझता हूँ।”

अध्ययन नोट

फसह: जिस दिन इसराएली मिस्र से निकले थे उससे पहले की शाम इस त्योहार की शुरूआत की गयी थी। (यूनानी में पासखा जो इब्रानी शब्द पेसाक से निकला है। इसकी इब्रानी क्रिया पासाक का मतलब है, “छोड़कर आगे बढ़ना; पार करना।”) यह त्योहार इसलिए मनाया जाना था ताकि इसराएली याद कर सकें कि कैसे यहोवा ने उन्हें मिस्र की गुलामी से आज़ाद किया और उनके पहलौठों को ‘छोड़ दिया,’ जबकि उसने मिस्र के पहलौठों को मार डाला।​—निर्ग 12:14, 24-47; शब्दावली देखें।

वह बैतनियाह में: ज़ाहिर है कि मर 14:3-9 में बतायी घटना सूरज ढलने के बाद हुई जब नीसान 9 शुरू हुआ। इसका सुराग हमें यूहन्‍ना से मिलता है, जिसने कहा कि यीशु “फसह के त्योहार से छ: दिन पहले” बैतनियाह पहुँचा। (यूह 12:1) वह ज़रूर नीसान 8 शुरू होने (यानी सूरज ढलने) से पहले पहुँच गया होगा क्योंकि वह दिन सब्त का दिन था और फिर उसके अगले दिन वह शमौन के घर खाना खाने गया।​—यूह 12:2-11; अति. क7 और ख12 देखें।

निकलकर . . . गया: आयत 10 और 11 में बतायी घटना नीसान 12 को हुई यानी उसी दिन जिस दिन मर 14:1, 2 में बतायी घटना घटी।​—अति. क7, ख12 और मर 14:1, 3 के अध्ययन नोट देखें।

दो दिन बाद: मर 14:1, 2 में बतायी घटना नीसान 12 को हुई, क्योंकि आयत में लिखा है कि दो दिन बाद फसह (नीसान 14 को; मत 26:2 का अध्ययन नोट देखें) और बिन-खमीर की रोटी का त्योहार था (नीसान 15-21 को; शब्दावली देखें)।​—अति. क7, ख12, ख15 और मर 14:3, 10 के अध्ययन नोट देखें।

एक कोढ़ी: एक गंभीर चर्मरोग से पीड़ित व्यक्‍ति। बाइबल में जिस कोढ़ का ज़िक्र मिलता है वह आज के कोढ़ जैसा नहीं था। जब किसी को कोढ़ हो जाता था तो उसे समाज से निकाल दिया जाता था। ठीक होने के बाद ही वह वापस आ सकता था।​—लैव 13:2, फु., 45, 46; शब्दावली में “कोढ़; कोढ़ी” देखें।

एक औरत: यूह 12:3 के मुताबिक, यह औरत मारथा और लाज़र की बहन मरियम है।

उसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर: उस औरत (मत 26:7 का अध्ययन नोट देखें) ने इसलिए दरियादिली दिखायी क्योंकि उसके दिल में यीशु के लिए प्यार और कदर थी। यीशु ने समझाया कि उसने अनजाने में उसके दफनाए जाने की तैयारी की क्योंकि अकसर लाश को दफनाने से पहले ऐसे खुशबूदार तेल और मसाले लगाए जाते थे।​—2इत 16:14.

वह बैतनियाह में: ज़ाहिर है कि मर 14:3-9 में बतायी घटना सूरज ढलने के बाद हुई जब नीसान 9 शुरू हुआ। इसका सुराग हमें यूहन्‍ना से मिलता है, जिसने कहा कि यीशु “फसह के त्योहार से छ: दिन पहले” बैतनियाह पहुँचा। (यूह 12:1) वह ज़रूर नीसान 8 शुरू होने (यानी सूरज ढलने) से पहले पहुँच गया होगा क्योंकि वह दिन सब्त का दिन था और फिर उसके अगले दिन वह शमौन के घर खाना खाने गया।​—यूह 12:2-11; अति. क7 और ख12 देखें।

शमौन . . . जो पहले कोढ़ी था: इस शमौन का ज़िक्र सिर्फ यहाँ और इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मत 26:6 में किया गया है। शायद उसका कोढ़ यीशु ने ठीक किया था।​—मत 8:2 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “कोढ़; कोढ़ी” देखें।

एक औरत: मत 26:7 का अध्ययन नोट देखें।

खुशबूदार तेल: यूहन्‍ना ने बताया कि यह तेल करीब 327 ग्राम था। मरकुस और यूहन्‍ना के ब्यौरे में बताया गया है कि इसकी कीमत “300 दीनार से भी ज़्यादा” थी। (मर 14:5; यूह 12:3-5) यह कीमत एक आम मज़दूर की साल-भर की मज़दूरी होती थी। माना जाता है कि यह तेल खुशबूदार पौधे (नार्डोस्टैकिस जटामाँसी) से निकाला जाता था, जो हिमालय पर्वतमाला में पाया जाता है। इसमें अकसर सस्ता तेल मिलाया जाता था या नकली जटामाँसी तेल को असली बताकर बेचा जाता था। लेकिन मरकुस और यूहन्‍ना ने लिखा कि इस ब्यौरे में बताया तेल असली जटामाँसी का था।​—शब्दावली में “जटामाँसी” देखें।

बोतल: शब्दावली में “सिलखड़ी” देखें।

यीशु के सिर पर तेल उँडेलने लगी: मत्ती और मरकुस के मुताबिक, उस औरत ने यीशु के सिर पर तेल उँडेला। (मत 26:7) सालों बाद जब यूहन्‍ना ने यह ब्यौरा लिखा तो उसने एक और बात कही, उस औरत ने यीशु के पैरों पर भी तेल उँडेला। (यूह 12:3) यीशु ने समझाया कि उस औरत ने प्यार की वजह से ऐसा किया और यह उसे दफनाए जाने की तैयारी को दर्शाता था।​—मर 14:8 का अध्ययन नोट देखें।

खुशबूदार तेल: यूहन्‍ना ने बताया कि यह तेल करीब 327 ग्राम था। मरकुस और यूहन्‍ना के ब्यौरे में बताया गया है कि इसकी कीमत “300 दीनार से भी ज़्यादा” थी। (मर 14:5; यूह 12:3-5) यह कीमत एक आम मज़दूर की साल-भर की मज़दूरी होती थी। माना जाता है कि यह तेल खुशबूदार पौधे (नार्डोस्टैकिस जटामाँसी) से निकाला जाता था, जो हिमालय पर्वतमाला में पाया जाता है। इसमें अकसर सस्ता तेल मिलाया जाता था या नकली जटामाँसी तेल को असली बताकर बेचा जाता था। लेकिन मरकुस और यूहन्‍ना ने लिखा कि इस ब्यौरे में बताया तेल असली जटामाँसी का था।​—शब्दावली में “जटामाँसी” देखें।

300 दीनार: मत्ती के ब्यौरे में सिर्फ यह लिखा है: “ऊँचे दामों में” (मत 26:9), मगर मरकुस और यूहन्‍ना के ब्यौरे में तेल की सही-सही कीमत बतायी गयी है।​—मर 14:3 का अध्ययन नोट; शब्दावली में “दीनार” और अति. ख14 देखें।

एक औरत: यूह 12:3 के मुताबिक, यह औरत मारथा और लाज़र की बहन मरियम है।

उसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर: उस औरत (मत 26:7 का अध्ययन नोट देखें) ने इसलिए दरियादिली दिखायी क्योंकि उसके दिल में यीशु के लिए प्यार और कदर थी। यीशु ने समझाया कि उसने अनजाने में उसके दफनाए जाने की तैयारी की क्योंकि अकसर लाश को दफनाने से पहले ऐसे खुशबूदार तेल और मसाले लगाए जाते थे।​—2इत 16:14.

सब राष्ट्रों: इन शब्दों से पता चलता है कि प्रचार काम कितने बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इससे चेले समझ गए कि उन्हें सिर्फ यहूदियों को नहीं बल्कि दूसरे लोगों को भी प्रचार करना है। “राष्ट्र” के लिए यूनानी शब्द (ईथनोस) का आम तौर पर मतलब होता है, ऐसे लोगों का समूह जिनका एक-दूसरे से खून का रिश्‍ता है और जो एक भाषा बोलते हैं। ऐसे लोग अकसर एक ही देश में रहते हैं।

सारी दुनिया में . . . प्रचार किया जाएगा: यीशु ने जैसे मर 13:10 में भविष्यवाणी की, वैसे ही उसने यहाँ भी कहा कि खुशखबरी का प्रचार सारी दुनिया में किया जाएगा। उसने यह भी कहा कि इस औरत ने जिस तरह भक्‍ति दिखायी यह बात भी इस खुशखबरी में शामिल की जाएगी। इस औरत ने जो किया उसके बारे में लिखने के लिए परमेश्‍वर ने खुशखबरी की किताबों के तीन लेखकों को प्रेरित किया।​—मत 26:12, 13; यूह 12:7; मर 13:10 का अध्ययन नोट देखें।

दो दिन बाद: मर 14:1, 2 में बतायी घटना नीसान 12 को हुई, क्योंकि आयत में लिखा है कि दो दिन बाद फसह (नीसान 14 को; मत 26:2 का अध्ययन नोट देखें) और बिन-खमीर की रोटी का त्योहार था (नीसान 15-21 को; शब्दावली देखें)।​—अति. क7, ख12, ख15 और मर 14:3, 10 के अध्ययन नोट देखें।

वह बैतनियाह में: ज़ाहिर है कि मर 14:3-9 में बतायी घटना सूरज ढलने के बाद हुई जब नीसान 9 शुरू हुआ। इसका सुराग हमें यूहन्‍ना से मिलता है, जिसने कहा कि यीशु “फसह के त्योहार से छ: दिन पहले” बैतनियाह पहुँचा। (यूह 12:1) वह ज़रूर नीसान 8 शुरू होने (यानी सूरज ढलने) से पहले पहुँच गया होगा क्योंकि वह दिन सब्त का दिन था और फिर उसके अगले दिन वह शमौन के घर खाना खाने गया।​—यूह 12:2-11; अति. क7 और ख12 देखें।

इस्करियोती: शायद इसका मतलब है, “करियोत का रहनेवाला।” यहूदा का पिता शमौन भी “इस्करियोती” कहलाता था। (यूह 6:71) आम तौर पर विद्वानों का मानना है कि इस शब्द से पता चलता है कि शमौन और यहूदा, यहूदिया प्रदेश के करियोत-हेसरोन नगर से थे। (यह 15:25) अगर यह सच है तो 12 प्रेषितों में से सिर्फ यहूदा ही यहूदिया से था, बाकी प्रेषित गलील से थे।

निकलकर . . . गया: आयत 10 और 11 में बतायी घटना नीसान 12 को हुई यानी उसी दिन जिस दिन मर 14:1, 2 में बतायी घटना घटी।​—अति. क7, ख12 और मर 14:1, 3 के अध्ययन नोट देखें।

इस्करियोती: मत 10:4 का अध्ययन नोट देखें।

शाम होने पर: यानी जब नीसान 14 शुरू हुआ।​—अति. क7 और ख12 देखें।

मेरे साथ . . . निवाला डुबोकर खा रहा है: आम तौर पर लोग हाथ से खाना खाते थे या रोटी के एक टुकड़े को चम्मच की तरह इस्तेमाल करते थे। यहाँ लिखी बात एक मुहावरा भी हो सकती है जिसका मतलब है, “साथ मिलकर खाना खाना।” किसी के साथ खाना खाना दिखाता था कि उनके बीच गहरी दोस्ती है। ऐसे करीबी दोस्त के खिलाफ हो जाना, विश्‍वासघात का सबसे घिनौना रूप माना जाता था।​—भज 41:9; यूह 13:18.

कटोरे: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों के मुताबिक इस शब्द का अनुवाद “इस कटोरे में, जो सबके लिए है” भी किया जा सकता है। लेकिन जो यहाँ लिखा है, उसका ठोस आधार हस्तलिपियों में पाया जाता है।

एक रोटी ली . . . उसे तोड़ा: प्राचीन मध्य पूर्व में रोटियाँ पतली होती थीं और अगर वे बिना खमीर की हों तो कुरकुरी होती थीं। यीशु के रोटी तोड़ने का कोई लाक्षणिक मतलब नहीं था बल्कि इस तरह की रोटी आम तौर पर तोड़कर ही खायी जाती थी।​—मत 14:19 का अध्ययन नोट देखें।

निशानी: यूनानी शब्द एस्टीन (शाब्दिक मतलब “है”) का यहाँ मतलब है, “सूचित करना; दर्शाना; चिन्ह; मतलब।” प्रेषित अच्छी तरह समझते थे कि एस्टीन का यही मतलब है क्योंकि इस मौके पर यीशु ज़िंदा था और इस मायने में उसका परिपूर्ण शरीर उनके सामने था। साथ ही, बिन-खमीर की जिस रोटी को वे खानेवाले थे वह भी उनके सामने थी। इसलिए वह रोटी उसका सचमुच का शरीर नहीं हो सकती थी। गौर करने लायक बात है कि यही यूनानी शब्द मत 12:7 में इस्तेमाल हुआ है और कई अनुवादों में इसके लिए शब्द “मतलब” लिखा है।

एक रोटी ली . . . उसे तोड़ा: मत 26:26 का अध्ययन नोट देखें।

प्रार्थना में धन्यवाद देकर: या “आशीष माँगकर।” ज़ाहिर है कि इस तरह की प्रार्थना में परमेश्‍वर की महिमा करना और उसे धन्यवाद देना शामिल है।

निशानी: मत 26:26 का अध्ययन नोट देखें।

खून . . . जो करार को पक्का करता है: यहोवा और अभिषिक्‍त मसीहियों के बीच नया करार यीशु के बलिदान से लागू हुआ। (इब्र 8:10) यीशु ने यहाँ वही शब्द इस्तेमाल किए जो मूसा ने सीनै पहाड़ पर इस्तेमाल किए थे, जब उसने बिचवई बनकर यहोवा और इसराएलियों के बीच कानून का करार लागू करवाया था। (निर्ग 24:8; इब्र 9:19-21) जिस तरह बैलों और बकरों के खून से यहोवा और इसराएल राष्ट्र के बीच कानून का करार पक्का हुआ, उसी तरह यीशु के खून से यहोवा और ‘परमेश्‍वर के इसराएल’ के बीच नया करार पक्का हुआ। यह करार ईसवी सन्‌ 33 के पिन्तेकुस्त के दिन से लागू हुआ।​—इब्र 9:14, 15.

खून . . . जो करार को पक्का करता है: मत 26:28 का अध्ययन नोट देखें।

नयी दाख-मदिरा न पीऊँ: बाइबल में दाख-मदिरा कभी-कभी खुशी को दर्शाती है।​—भज 104:15; सभ 10:19.

नयी दाख-मदिरा न पीऊँ: मत 26:29 का अध्ययन नोट देखें।

परमेश्‍वर की तारीफ में गीत: या “भजन।” एक प्राचीन यहूदी लेख के मुताबिक, हालेल के पहले कुछ भजन (113, 114) फसह के खाने के दौरान और आखिरी चार भजन (115-118) खाने के बाद गाए जाते थे या ज़बानी तौर पर दोहराए जाते थे। आखिरी भजनों में मसीहा के बारे में कुछ भविष्यवाणियाँ दर्ज़ थीं। भज 118 के शुरू में और आखिर में ये शब्द आते हैं: “यहोवा का शुक्रिया अदा करो क्योंकि वह भला है, उसका अटल प्यार सदा बना रहता है।” (भज 118:1, 29) यीशु ने अपनी मौत से पहले की रात अपने वफादार प्रेषितों के साथ परमेश्‍वर की तारीफ में जो गीत गाए, उनके आखिरी शब्द शायद भजन के यही शब्द रहे होंगे।

परमेश्‍वर की तारीफ में गीत: मत 26:30 का अध्ययन नोट देखें।

मुर्गे के बाँग देने के वक्‍त: यूनानियों और रोमियों के मुताबिक, यह रात का तीसरा पहर था यानी आधी रात से करीब 3 बजे तक। (इसी आयत में पहले के अध्ययन नोट देखें।) मुमकिन है कि इसी दौरान ‘मुर्गा बाँग देता था।’ (मर 14:72) पुराने ज़माने में और आज भी भूमध्य सागर के पूर्वी देशों में मुर्गे के बाँग देने से समय का पता लगाया जाता है।—मत 26:34; मर 14:30, 72 के अध्ययन नोट देखें।

मुर्गे के . . . बाँग देने से पहले: खुशखबरी की चारों किताबों में यह बात लिखी है, मगर मरकुस की किताब में एक और बात लिखी है और वह है कि मुर्गा दो बार बाँग देगा। (मत 26:34, 74, 75; मर 14:72; लूक 22:34, 60, 61; यूह 13:38; 18:27) मिशना में बताया गया है कि यीशु के दिनों में यरूशलेम में मुर्गे पाले जाते थे। यह बात दिखाती है कि बाइबल का ब्यौरा सही है। मुमकिन है कि मुर्गा सुबह तड़के ही बाँग देता होगा।​—मर 13:35 का अध्ययन नोट देखें।

गतसमनी: ज़ाहिर है कि यह बाग यरूशलेम के पूरब में किदरोन घाटी के पार जैतून पहाड़ पर था। मुमकिन है कि इस बाग में जैतून का तेल निकालने का हौद था क्योंकि इसका नाम इब्रानी या अरामी शब्दों (गत शेमानेह) से निकला है जिनका मतलब है, “तेल निकालने का हौद।” हालाँकि यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि यह बाग कहाँ था, मगर यहूदियों की मान्यता है कि जो बाग जैतून पहाड़ की पश्‍चिमी ढलान के नीचे दोराहे के पास है शायद वही गतसमनी था।​—अति. ख12 देखें।

गतसमनी: मत 26:36 का अध्ययन नोट देखें।

जागते रहो: यूनानी शब्द का बुनियादी मतलब है, “जागते रहना।” मगर कई जगहों पर इसका मतलब है, “सावधान रहना; चौकन्‍ना रहना।” मत्ती ने यह शब्द मत 24:43; 25:13; 26:38, 40, 41 में इस्तेमाल किया। मत 24:44 में लिखी बात से पता चलता है कि इसका नाता ‘तैयार रहने’ से भी है।​—मत 26:38 का अध्ययन नोट देखें।

जागते रहो: दस कुँवारियों की मिसाल का खास संदेश यही है कि हम लाक्षणिक तौर पर जागते रहें।​—मत्ती 24:42; 26:38 के अध्ययन नोट देखें।

जागते रहो: यूनानी शब्द का बुनियादी मतलब है, “जागते रहना।” मगर कई जगहों पर इसका मतलब है, “सावधान रहना; चौकन्‍ना रहना।” इस आयत के अलावा मरकुस ने यह शब्द मर 13:34, 37; 14:34, 37, 38 में इस्तेमाल किया।—मत 24:42; 26:38; मर 14:34 के अध्ययन नोट देखें।

जागते रहो: यीशु ने ज़ोर देकर कहा कि उसके चेलों को लाक्षणिक तौर पर जागते रहना है क्योंकि वे नहीं जानते कि वह किस दिन या किस घड़ी आएगा। (मत 24:42; 25:13; मर 13:35 के अध्ययन नोट देखें।) उसने यह बात यहाँ और मर 14:38 में दोहरायी जहाँ उसने बताया कि जागते रहने के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए। जागते रहने का बढ़ावा मसीही यूनानी शास्त्र में कई बार दिया गया है, जो दिखाता है कि सच्चे मसीहियों के लिए ऐसा करना बहुत ज़रूरी है।​—1कुर 16:13; कुल 4:2; 1थि 5:6; 1पत 5:8; प्रक 16:15.

वह प्याला पी सकते हो: बाइबल में अकसर “प्याला” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब है, एक व्यक्‍ति के लिए परमेश्‍वर की मरज़ी या उसका “तय हिस्सा।” यहाँ ‘प्याला पीने’ का मतलब है, परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करना। और उसकी मरज़ी सिर्फ यह नहीं थी कि यीशु को तड़पाया जाए और परमेश्‍वर की निंदा करने के झूठे इलज़ाम में मार डाला जाए बल्कि उसे ज़िंदा करके स्वर्ग में अमर जीवन दिया जाना भी शामिल था।

अब्बा: एक इब्रानी या अरामी शब्द (यूनानी में हू-ब-हू अनुवाद किया गया है), जो मसीही यूनानी शास्त्र में तीन बार आया है। (रोम 8:15; गल 4:6) इसका शाब्दिक मतलब है, “पिता” या “हे पिता।” इसमें “पापा” शब्द से झलकनेवाला गहरा लगाव और “पिता” शब्द से झलकनेवाला गहरा आदर दोनों शामिल हैं। यह बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल होनेवाला शब्द था, लेकिन इसमें इज़्ज़त भी झलकती थी। यह उन शब्दों में से एक था, जिन्हें बच्चा सबसे पहले बोलना सीखता था। लेकिन प्राचीन इब्रानी और अरामी लेखों से पता चलता है कि जब एक बेटा बड़ा हो जाता था तब भी वह अपने पिता को इसी शब्द से बुलाता था। यह दिखाता है कि यह एक उपाधि नहीं थी बल्कि अपने पिता को प्यार से बुलाने का तरीका था। यीशु ने भी यह शब्द इस्तेमाल किया, जिससे ज़ाहिर होता है कि उसका अपने पिता के साथ कितना करीबी रिश्‍ता है और उसे पिता पर कितना भरोसा है।

पिता: यूनानी पाठ की तीनों आयतों में अब्बा के बाद इसका अनुवाद हो पेटर दिया गया है जिसका शाब्दिक मतलब है, “पिता” या “हे पिता।”

यह प्याला मेरे सामने से हटा दे: बाइबल में अकसर “प्याला” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब है, एक व्यक्‍ति के लिए परमेश्‍वर की मरज़ी या उसका “तय हिस्सा।” (मत 20:22 का अध्ययन नोट देखें।) यीशु को बेशक इस बात की चिंता रही होगी कि परमेश्‍वर की निंदा करने और देशद्रोह के इलज़ाम में उसे जो मौत दी जानेवाली है उससे परमेश्‍वर की बदनामी हो सकती है। इसलिए उसने प्रार्थना की कि यह “प्याला” उसके सामने से हटा लिया जाए।

दिल: यह आयत दिखाती है कि एक इंसान का लाक्षणिक दिल उसे फलाँ तरीके से कोई बात कहने या कोई काम करने के लिए उभारता है।

शरीर: बाइबल में यह शब्द अकसर इंसान की पापी और अपरिपूर्ण हालत को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होता है।

दिल: मत 26:41 का अध्ययन नोट देखें।

शरीर: मत 26:41 का अध्ययन नोट देखें।

उनकी आँखें नींद से भरी थीं: शा., “उनकी आँखें भारी थीं।” यह एक यूनानी मुहावरा है जिसका मतलब है, “बहुत नींद आना।” इसका अनुवाद ऐसे भी किया जा सकता है: “वे अपनी आँखें खुली नहीं रख पाए।”

देख!: इसका यूनानी शब्द आइडू है और इसका इस्तेमाल अकसर आगे की बात पर ध्यान खींचने के लिए किया गया है ताकि पढ़नेवाला बतायी जा रही घटना की कल्पना कर सके या उसकी बारीकी पर ध्यान दे सके। यह शब्द किसी बात पर ज़ोर देने के लिए या कोई नयी या हैरानी की बात बताने से पहले भी इस्तेमाल किया गया है। मसीही यूनानी शास्त्र में यह शब्द सबसे ज़्यादा बार मत्ती, लूका और प्रकाशितवाक्य की किताबों में आया है। इसी से मिलता-जुलता शब्द इब्रानी शास्त्र में भी अकसर इस्तेमाल हुआ है।

देखो: मर 1:2 का अध्ययन नोट देखें।

उसे प्यार से चूमा: जिस यूनानी क्रिया का अनुवाद “प्यार से चूमा” किया गया है, वह मर 14:44 में ‘चूमने’ के लिए इस्तेमाल हुई क्रिया का और भी ज़बरदस्त रूप है। यहूदा ने जिस तरह यीशु को प्यार से चूमकर नमस्कार किया, उसके साथ दोस्त की तरह पेश आया, उससे पता चलता है कि वह कितना बड़ा धोखेबाज़ और मक्कार था।

वहाँ जो खड़े थे उनमें से एक: इसके मिलते-जुलते ब्यौरे यूह 18:10 से पता चलता है कि जिसने अपनी तलवार खींची थी वह शमौन पतरस था और महायाजक के दास का नाम मलखुस था। लूका (22:50) और यूहन्‍ना (18:10) के ब्यौरे में यह भी बताया गया है कि मलखुस का “दायाँ कान” काट दिया गया था।

मरकुस: यह लातीनी नाम मार्कस से निकला है। मरकुस “यूहन्‍ना” का रोमी उपनाम था जिसका ज़िक्र प्रेष 12:12 में किया गया है। उसकी माँ का नाम मरियम था, जो यरूशलेम में रहती थी और शुरू के चेलों में से एक थी। यूहन्‍ना मरकुस “बरनबास का भाई लगता” था। (कुल 4:10) वह प्रचार के लिए बरनबास के साथ सफर पर जाता था। वह पौलुस और दूसरे मिशनरियों के साथ भी सफर पर जाता था। (प्रेष 12:25; 13:5, 13; 2ती 4:11) हालाँकि इस खुशखबरी की किताब में कहीं नहीं बताया गया है कि इसे किसने लिखा, फिर भी दूसरी और तीसरी सदी के लेखकों का कहना है कि यह किताब मरकुस ने लिखी थी।

एक नौजवान: सिर्फ मरकुस ने वह घटना लिखी, जो आयत 51 और 52 में पायी जाती है। यह नौजवान शायद खुद मरकुस था। अगर ऐसी बात है तो यीशु के साथ उसका थोड़ा-बहुत मेल-जोल रहा होगा।​—मर के शीर्षक पर अध्ययन नोट देखें।

मैं नंगा था: या “मेरे पास तन ढकने को कपड़े नहीं थे।” यूनानी शब्द जिमनोस का मतलब हो सकता है, “कम कपड़े या सिर्फ अंदर के कपड़े पहने हुए।”​—याकू 2:15.

नंगा: मत 25:36 का अध्ययन नोट देखें।

महायाजक: जब इसराएल एक स्वतंत्र राष्ट्र था तो जो महायाजक होता था वह अपनी मौत तक उस पद पर बना रहता था। (गि 35:25) लेकिन जब इसराएल पर रोम का कब्ज़ा हुआ तब रोमी शासकों के पास यह अधिकार था कि वे किसी को भी महायाजक ठहरा सकते हैं या इस पद से हटा सकते हैं। जिस महायाजक की निगरानी में यीशु की सुनवाई हुई थी वह कैफा था। (मत 26:3, 57) कैफा को रोमी अधिकारियों ने करीब ईसवी सन्‌ 18 में महायाजक ठहराया था और वह ईसवी सन्‌ 36 तक इस पद पर रहा। राजनेताओं के साथ उसके अच्छे संबंध थे, इसलिए वह पिछले महायाजकों के मुकाबले ज़्यादा समय तक महायाजक रहा।​—शब्दावली देखें; कैफा का घर किस जगह रहा होगा, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।

महासभा: यरूशलेम में यहूदियों की सबसे बड़ी अदालत। “महासभा” के यूनानी शब्द सिनेड्रियोन का शाब्दिक मतलब है, “के साथ बैठना।” हालाँकि यह शब्द एक आम सभा के लिए भी इस्तेमाल होता था, लेकिन इसराएल में इसका मतलब फैसला सुनानेवाला धार्मिक समूह या अदालत भी हो सकता था।​—मत 5:22 का अध्ययन नोट और शब्दावली देखें; साथ ही महासभा का भवन कहाँ रहा होगा, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।

महासभा: मत 26:59 का अध्ययन नोट देखें।

उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे: सिर्फ मरकुस ने लिखा कि यीशु की सुनवाई के दौरान झूठे गवाहों के बयान मेल नहीं खा रहे थे।

शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ: किसी शासक के दाएँ हाथ होने का मतलब है, दूसरा सबसे बड़ा अधिकारी होना। (भज 110:1; प्रेष 7:55, 56) यूनानी पाठ में “शक्‍तिशाली परमेश्‍वर” के बजाय सिर्फ “शक्‍ति” लिखा है। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे लूक 22:69 में ये शब्द इस तरह दर्ज़ हैं: “परमेश्‍वर के शक्‍तिशाली दाएँ हाथ।” “शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ,” इन शब्दों का यह भी मतलब हो सकता है कि यीशु को शक्‍ति या अधिकार दिया जाएगा क्योंकि वह शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ बैठा है।

शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ: मत 26:64 का अध्ययन नोट देखें।

अपना कपड़ा फाड़ा: यहाँ कपड़ा फाड़ने का मतलब है, हैरानी और गुस्सा ज़ाहिर करना। मुमकिन है कि कैफा ने अपना कपड़ा गले से फाड़ा होगा। उसने यह दिखावा करने के लिए ऐसा किया कि वह बहुत धर्मी है और यीशु की बात सुनकर एकदम हैरान है और उसे बहुत गुस्सा आ रहा है।

भविष्यवाणी कर, . . . किसने तुझे मारा?: यहाँ ‘भविष्यवाणी करने’ का मतलब भविष्य बताना नहीं बल्कि परमेश्‍वर की मदद से यह बताना है कि उसे किसने मारा। इसके मिलते-जुलते ब्यौरों, मर 14:65 और लूक 22:64 में बताया गया है कि यीशु पर ज़ुल्म करनेवालों ने उसका सिर ढाँप दिया था। शायद इसी वजह से उन्होंने ताना कसते हुए उससे पूछा कि उसे किसने मारा।

भविष्यवाणी कर!: यहाँ ‘भविष्यवाणी करने’ का मतलब भविष्य बताना नहीं बल्कि परमेश्‍वर की मदद से यह बताना है कि उसे किसने मारा। इस आयत से पता चलता है कि यीशु पर ज़ुल्म करनेवालों ने उसका मुँह ढक दिया था। इस तरह वे यीशु को चुनौती दे रहे थे कि वह बताए कि उसे किसने मारा।​—मत 26:68 का अध्ययन नोट देखें।

भविष्यवाणी कर, तुझे किसने मारा!: यहाँ ‘भविष्यवाणी करने’ का मतलब भविष्य बताना नहीं बल्कि परमेश्‍वर की मदद से यह बताना है कि उसे किसने मारा। संदर्भ से पता चलता है कि यीशु पर ज़ुल्म करनेवालों ने उसका सिर ढाँप दिया था। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मत 26:68 में लिखा है कि उन्होंने उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा: “अरे मसीह, भविष्यवाणी कर, हममें से किसने तुझे मारा?” इस तरह वे यीशु को चुनौती दे रहे थे कि वह बिना देखे बताए कि उसे किसने मारा है।​—मत 26:68; लूक 22:64 के अध्ययन नोट देखें।

आँगन के द्वार: मरकुस ने अपने ब्यौरे में ऐसा शब्द इस्तेमाल किया जिसका मतलब “फाटक” या ‘ओसारा’ हो सकता है। (मर 14:68, फु.) इससे पता चलता है कि यह सिर्फ द्वार नहीं था। ज़ाहिर है कि यह आँगन और बाहरी दरवाज़े के बीच बनी एक इमारत थी। यह इमारत शायद एक गलियारा या बरामदा थी।

फाटक: या “ओसारे।”​—मत 26:71 का अध्ययन नोट देखें।

खुद को कोसने लगा: एक तरह से पतरस कह रहा था, ‘अगर मैं झूठ बोल रहा हूँ कि मैं उस आदमी को नहीं जानता, तो मुझ पर शाप पड़े।’

कसम खाकर कहने लगा: पतरस डर गया था, इसलिए वह आस-पास खड़े लोगों को यकीन दिलाने की कोशिश करने लगा कि वह सच बोल रहा है। वह कसम खाकर कहने लगा कि अगर उसकी बात सच नहीं है तो उस पर मुसीबत आ पड़े।

खुद को कोसने लगा: मत 26:74 का अध्ययन नोट देखें।

कसम खाकर कहने लगा: मत 26:74 का अध्ययन नोट देखें।

मुर्गे के बाँग देने के वक्‍त: यूनानियों और रोमियों के मुताबिक, यह रात का तीसरा पहर था यानी आधी रात से करीब 3 बजे तक। (इसी आयत में पहले के अध्ययन नोट देखें।) मुमकिन है कि इसी दौरान ‘मुर्गा बाँग देता था।’ (मर 14:72) पुराने ज़माने में और आज भी भूमध्य सागर के पूर्वी देशों में मुर्गे के बाँग देने से समय का पता लगाया जाता है।—मत 26:34; मर 14:30, 72 के अध्ययन नोट देखें।

एक मुर्गे ने . . . बाँग दी: खुशखबरी की चारों किताबों में यह बात लिखी है, मगर मरकुस की किताब में एक और बात लिखी है और वह है कि मुर्गे ने दूसरी बार बाँग दी। (मत 26:34, 74, 75; मर 14:30; लूक 22:34, 60, 61; यूह 13:38; 18:27) मिशना में बताया गया है कि यीशु के दिनों में यरूशलेम में मुर्गे पाले जाते थे। यह बात दिखाती है कि बाइबल का ब्यौरा सही है। मुमकिन है कि मुर्गे ने सूरज निकलने से पहले ही बाँग दी होगी।​—मर 13:35 का अध्ययन नोट देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

सिलखड़ी की बोतल
सिलखड़ी की बोतल

शुरू में इत्र की ये छोटी-छोटी बोतलें एक ऐसे पत्थर से बनायी जाती थीं, जो मिस्र में अलबास्त्रोन नाम की जगह के पास पाया जाता था। यह पत्थर कैल्शियम कार्बोनेट का एक रूप है। बाद में यह अलबास्त्रोन के नाम से जाना गया। यहाँ दिखायी गयी बोतल मिस्र में पायी गयी थी और यह ईसा पूर्व 150 और ईसवी सन्‌ 100 के बीच की है। इससे मिलती-जुलती बोतलें जिप्सम जैसे कम कीमतवाले पत्थरों से भी बनायी जाती थीं। इन्हें भी सिलखड़ी (अँग्रेज़ी में अलबास्तर) कहा जाता था, क्योंकि इनमें भी इत्र भरा जाता था। लेकिन कीमती तेल और इत्र के लिए ऐसी बोतलें इस्तेमाल की जाती थीं जो असली सिलखड़ी पत्थर से बनी थीं। जैसे, वह तेल जिससे दो बार यीशु का अभिषेक किया गया था, एक बार जब वह गलील में एक फरीसी के घर में था और दूसरी बार तब, जब वह बैतनियाह में शमौन के घर में था, जो पहले कोढ़ी था।

फसह का खाना
फसह का खाना

फसह के खाने में ये चीज़ें ज़रूर होती थीं: (1) भुना हुआ मेम्ना (इसकी कोई हड्डी नहीं तोड़ी जानी थी), (2) बिन-खमीर की रोटी और (3) कड़वा साग। (निर्ग 12:5, 8; गि 9:11) मिशना के मुताबिक, कड़वा साग लेट्यूस (सलाद पत्ता), कासनी, चंद्रशूर या सिंहपर्णी हो सकता है। ज़ाहिर है कि इस साग से इसराएलियों को मिस्र में गुलामी के अपने कड़वे अनुभव की याद आती होगी। यीशु ने बिन-खमीर की रोटी अपने परिपूर्ण शरीर की निशानी के तौर पर इस्तेमाल की। (मत 26:26) प्रेषित पौलुस ने यीशु को “हमारे फसह का मेम्ना” कहा। (1कुर 5:7) पहली सदी के आते-आते फसह के खाने में दाख-मदिरा (4) भी शामिल की जाने लगी। यीशु ने दाख-मदिरा को अपने खून की निशानी के तौर पर इस्तेमाल किया, जो बलिदान के तौर पर बहाया जाता।​—मत 26:27, 28.

ऊपर का कमरा
ऊपर का कमरा

इसराएल के कुछ घर दो मंज़िले होते थे। ऊपर जाने के लिए या तो अंदर सीढ़ी लगी होती थी या लकड़ी का जीना बना होता था, या फिर बाहर सीढ़ी लगी होती थी या पत्थरों का जीना बना होता था। जैसे यहाँ चित्र में दिखाया गया है, शायद इसी तरह के एक बड़े ऊपरी कमरे में यीशु ने अपने चेलों के साथ आखिरी फसह मनाया और प्रभु के संध्या भोज की शुरूआत की। (लूक 22:12, 19, 20) ईसवी सन्‌ 33 में पिन्तेकुस्त के दिन, जब यरूशलेम में करीब 120 चेलों पर पवित्र शक्‍ति उँडेली गयी तब ज़ाहिर है कि वे एक घर के ऊपरी कमरे में इकट्ठा थे।​—प्रेष 1:15; 2:1-4.