मरकुस के मुताबिक खुशखबरी 14:1-72

14  दो दिन बाद फसह+ और बिन-खमीर की रोटी का त्योहार था।+ और प्रधान याजक और शास्त्री मौका ढूँढ़ रहे थे कि कैसे यीशु को छल* से पकड़ें* और मार डालें।+  पर वे कह रहे थे, “त्योहार के वक्‍त नहीं, कहीं ऐसा न हो कि लोग हंगामा मचा दें।”  जब वह बैतनियाह में शमौन के घर खाना खाने बैठा हुआ था* जो पहले कोढ़ी था, तब एक औरत खुशबूदार तेल की बोतल लेकर आयी। उसमें असली जटामाँसी का खुशबूदार तेल था, जो बहुत कीमती था। उस औरत ने बोतल तोड़कर खोली और वह यीशु के सिर पर तेल उँडेलने लगी।+  यह देखकर कुछ लोग भड़क उठे और आपस में कहने लगे, “यह खुशबूदार तेल क्यों बरबाद कर दिया गया?   इसे 300 दीनार+ से भी ज़्यादा दाम में बेचकर पैसा गरीबों को दिया जा सकता था!” वे उस औरत पर बहुत नाराज़ हुए।*  मगर यीशु ने कहा, “तुम क्यों इसे परेशान कर रहे हो? छोड़ दो इसे। इसने मेरी खातिर एक बढ़िया काम किया है।+  गरीब तो हमेशा तुम्हारे साथ होंगे+ और तुम जब चाहो उनके साथ भलाई कर सकते हो, मगर मैं हमेशा तुम्हारे साथ नहीं रहूँगा।+  वह जो कर सकती थी उसने किया। उसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर मेरे दफनाए जाने की तैयारी की है।+  मैं तुमसे सच कहता हूँ, सारी दुनिया में जहाँ कहीं खुशखबरी का प्रचार किया जाएगा,+ वहाँ इस औरत की याद में इसके काम की चर्चा की जाएगी।”+ 10  यहूदा इस्करियोती जो बारहों में से एक था, निकलकर प्रधान याजकों के पास गया ताकि यीशु को उनके हाथों पकड़वा दे।+ 11  जब उन्होंने उसकी बात सुनी तो वे बहुत खुश हुए और उसे चाँदी के सिक्के देने का वादा किया।+ तब से यहूदा यीशु को पकड़वाने का मौका ढूँढ़ने लगा। 12  बिन-खमीर की रोटी के त्योहार के पहले दिन,+ जब यहूदी अपने दस्तूर के मुताबिक फसह का जानवर बलि करते थे,+ उसके चेलों ने उससे पूछा, “तू कहाँ चाहता है कि हम जाकर तेरे लिए फसह का खाना खाने की तैयारी करें?”+ 13  तब उसने अपने दो चेलों को यह कहकर भेजा, “शहर में जाओ और तुम्हें एक आदमी पानी का घड़ा उठाए हुए मिलेगा। उसके पीछे-पीछे जाना।+ 14  वह जिस घर में जाए उस घर के मालिक से कहना, ‘गुरु ने पूछा है, “मेहमानों का वह कमरा कहाँ है जहाँ मैं अपने चेलों के साथ फसह का खाना खाऊँ?”’  15  फिर वह तुम्हें ऊपर का एक बड़ा कमरा दिखाएगा जो सजा हुआ होगा। वहाँ हमारे लिए तैयारी करना।”  16  तब वे चेले निकले और शहर के अंदर गए और जैसा उसने बताया था ठीक वैसा ही पाया। और उन्होंने फसह की तैयारी की। 17  शाम होने पर वह बारहों के साथ आया।+ 18  और जब वे खाना खा रहे थे, तब यीशु ने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ, तुममें से एक जो मेरे साथ खा रहा है, मेरे साथ विश्‍वासघात करके मुझे पकड़वा देगा।”+ 19  वे दुखी होने लगे और एक-एक करके उससे कहने लगे, “वह मैं तो नहीं हूँ न?”  20  उसने कहा, “वह तुम बारहों में से एक है जो मेरे साथ कटोरे में निवाला डुबोकर खा रहा है।+ 21  इंसान का बेटा तो जा ही रहा है, ठीक जैसा उसके बारे में लिखा है, मगर उस आदमी का बहुत बुरा होगा जो इंसान के बेटे के साथ विश्‍वासघात करके उसे पकड़वा देगा!+ उस आदमी के लिए अच्छा तो यह होता कि वह पैदा ही न हुआ होता।”+ 22  जब वे खाना खा रहे थे, तो यीशु ने एक रोटी ली और प्रार्थना में धन्यवाद देकर उसे तोड़ा और उन्हें देकर कहा, “यह लो, यह मेरे शरीर की निशानी है।”+ 23  फिर उसने एक प्याला लिया और प्रार्थना में धन्यवाद देकर उन्हें दिया और उन सबने उसमें से पीया।+ 24  फिर यीशु ने उनसे कहा, “यह मेरे खून की निशानी है,+ जो करार+ को पक्का करता है और जो बहुतों की खातिर बहाया जाएगा।+ 25  मैं तुमसे सच कहता हूँ, मैं दाख-मदिरा* उस दिन तक हरगिज़ नहीं पीऊँगा, जिस दिन मैं परमेश्‍वर के राज में नयी दाख-मदिरा न पीऊँ।”+ 26  आखिर में उन्होंने परमेश्‍वर की तारीफ में गीत गाए और फिर जैतून पहाड़ की तरफ निकल गए।+ 27  यीशु ने उनसे कहा, “तुम सबका विश्‍वास डगमगा जाएगा* क्योंकि लिखा है, ‘मैं चरवाहे को मारूँगा+ और भेड़ें तितर-बितर हो जाएँगी।’+ 28  लेकिन जब मुझे ज़िंदा कर दिया जाएगा, तो मैं तुमसे पहले गलील जाऊँगा।”+ 29  मगर पतरस ने उससे कहा, “चाहे इन सबका विश्‍वास क्यों न डगमगा जाए, मगर मेरा विश्‍वास नहीं डगमगाएगा।”+ 30  तब यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे सच कहता हूँ, आज ही, हाँ, इसी रात मुर्गे के दो बार बाँग देने से पहले तू तीन बार मुझे जानने से इनकार कर देगा।”+ 31  मगर पतरस बार-बार कहने लगा, “अगर मुझे तेरे साथ मरना पड़े, तब भी मैं तुझे जानने से हरगिज़ इनकार नहीं करूँगा।” बाकी चेले भी यही कहने लगे।+ 32  फिर वे गतसमनी नाम की जगह आए और उसने अपने चेलों से कहा, “मैं वहाँ प्रार्थना करने जा रहा हूँ, तुम यहीं बैठे रहना।”+ 33  फिर उसने पतरस, याकूब और यूहन्‍ना को अपने साथ लिया।+ वह मन-ही-मन बेचैन हो उठा* और दुख से बेहाल होने लगा।  34  उसने उनसे कहा, “मेरा मन बहुत दुखी है,+ यहाँ तक कि मेरी मरने जैसी हालत हो रही है। यहीं ठहरो और जागते रहो।”+ 35  फिर वह थोड़ा आगे गया और ज़मीन पर गिरकर प्रार्थना करने लगा कि अगर हो सके तो यह वक्‍त टल जाए।  36  उसने कहा, “हे अब्बा, हे पिता,+ तेरे लिए सबकुछ मुमकिन है। यह प्याला मेरे सामने से हटा दे। मगर फिर भी जो मैं चाहता हूँ वह नहीं, बल्कि वही हो जो तू चाहता है।”+ 37  जब वह चेलों के पास वापस आया, तो उसने देखा कि वे सो रहे हैं। उसने पतरस से कहा, “शमौन, तू सो रहा है? क्या तुझमें इतनी भी ताकत नहीं कि थोड़ी देर मेरे साथ जाग सके?+ 38  जागते रहो और प्रार्थना करते रहो ताकि तुम परीक्षा में न पड़ो।+ दिल तो बेशक तैयार* है, मगर शरीर कमज़ोर है।”+ 39  वह दोबारा गया और उसने फिर से वही प्रार्थना की।+ 40  वह फिर चेलों के पास आया और उसने उन्हें सोता हुआ पाया क्योंकि उनकी आँखें नींद से भरी थीं। वे नहीं जानते थे कि उसे क्या जवाब दें।  41  फिर वह तीसरी बार उनके पास आया और उसने कहा, “तुम ऐसे वक्‍त में सो रहे हो और आराम कर रहे हो! बहुत हुआ! देखो, वह घड़ी आ गयी है!+ अब इंसान के बेटे के साथ विश्‍वासघात करके उसे पापियों के हाथ सौंप दिया जाएगा।  42  उठो, आओ चलें। देखो, मुझसे गद्दारी करनेवाला पास आ गया है।”+ 43  वह बोल ही रहा था कि तभी यहूदा आ गया, जो उन बारहों में से एक था। उसके साथ तलवारें और लाठियाँ लिए हुए लोगों की भीड़ थी जिसे प्रधान याजकों, शास्त्रियों और मुखियाओं ने भेजा था।+ 44  उसके साथ विश्‍वासघात करनेवाले ने यह कहकर उन्हें पहले से एक निशानी दी थी, “जिसे मैं चूमूँगा, वही है। उसे गिरफ्तार कर लेना और सावधानी से ले जाना।”* 45  वह सीधे यीशु की तरफ आया और पास आकर उसने कहा, “रब्बी!” और उसे प्यार से चूमा।  46  तब उन्होंने उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया।  47  मगर वहाँ जो खड़े थे उनमें से एक ने अपनी तलवार खींचकर महायाजक के दास पर वार किया और उसका कान उड़ा दिया।+ 48  यीशु ने भीड़ से कहा, “क्या तुम तलवारें और लाठियाँ लेकर मुझे गिरफ्तार करने आए हो, मानो मैं कोई लुटेरा हूँ?+ 49  मैं हर दिन तुम्हारे बीच मंदिर में सिखाया करता था,+ फिर भी तुमने मुझे हिरासत में नहीं लिया। मगर यह सब इसलिए हुआ है ताकि शास्त्र के वचन पूरे हों।”+ 50  तब सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।+ 51  मगर एक नौजवान जो सिर्फ एक बढ़िया मलमल का कपड़ा ओढ़े था, उसके पीछे-पीछे आने लगा। लेकिन जब भीड़ ने उसे पकड़ने की कोशिश की,  52  तो वह अपना मलमल का कपड़ा छोड़कर नंगा भाग गया। 53  अब वे यीशु को महायाजक के पास ले गए+ और सारे प्रधान याजक, मुखिया और शास्त्री वहाँ इकट्ठा हुए।+ 54  मगर पतरस कुछ दूरी पर रहकर उसके पीछे-पीछे महायाजक के आँगन तक आया। वह घर के सेवकों के साथ बैठ गया और आग तापने लगा।+ 55  प्रधान याजक और पूरी महासभा यीशु को मार डालने के लिए उसके खिलाफ झूठी गवाही ढूँढ़ रही थी, मगर उन्हें ऐसी एक भी गवाही नहीं मिली।+ 56  बेशक, बहुत-से लोग उसके खिलाफ झूठी गवाही दे रहे थे,+ मगर उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे।  57  कुछ लोगों ने खड़े होकर उसके खिलाफ यह झूठी गवाही दी,  58  “हमने इसे यह कहते सुना है कि मैं हाथ के बनाए इस मंदिर को ढा दूँगा और तीन दिन के अंदर दूसरा मंदिर खड़ा कर दूँगा जो हाथों से नहीं बना होगा।”+ 59  मगर इस बारे में भी उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे। 60  तब महायाजक उनके बीच खड़ा हुआ और उसने यीशु से पूछा, “क्या तू जवाब में कुछ नहीं कहेगा? क्या तू सुन नहीं रहा कि ये तुझ पर क्या-क्या इलज़ाम लगा रहे हैं?”+ 61  मगर तब भी यीशु चुप रहा और उसने कोई जवाब नहीं दिया।+ एक बार फिर महायाजक उससे सवाल करने लगा और उससे कहा, “क्या तू परम-प्रधान परमेश्‍वर का बेटा, मसीह है?”  62  यीशु ने कहा, “हाँ मैं हूँ। और तुम लोग इंसान के बेटे+ को शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ बैठा+ और आकाश के बादलों के साथ आता देखोगे।”+ 63  यह सुनते ही महायाजक ने अपना कपड़ा फाड़ा और कहा, “अब हमें और गवाहों की क्या ज़रूरत है?+ 64  तुम लोगों ने ये निंदा की बातें सुनी हैं। अब तुम्हारा क्या फैसला है?”* उन सबने कहा कि यह मौत की सज़ा के लायक है।+ 65  कुछ उस पर थूकने लगे+ और उसका मुँह ढाँपकर उसे घूँसे मारने लगे और उससे कहने लगे, “भविष्यवाणी कर, तुझे किसने मारा!” और पहरेदारों ने उसके मुँह पर थप्पड़ मारे और उसे ले गए।+ 66  जब पतरस नीचे आँगन में था, तो महायाजक की एक दासी आयी।+ 67  पतरस को आग तापते देख, वह उस पर नज़रें गड़ाकर बोली, “तू भी उस नासरी यीशु के साथ था।”  68  मगर उसने यह कहकर इनकार कर दिया, “न तो मैं उसे जानता हूँ न मुझे यह समझ आ रहा है* कि तू क्या कह रही है।” तब वह बाहर फाटक के पास चला गया।  69  वहाँ उस दासी ने उसे देखा और वहाँ खड़े लोगों से एक बार फिर कहा, “यह भी उनमें से एक है।”+ 70  पतरस फिर से इनकार करने लगा। थोड़ी देर बाद आस-पास खड़े लोग फिर से पतरस से कहने लगे, “बेशक तू भी उनमें से एक है क्योंकि तू एक गलीली है।”  71  मगर वह खुद को कोसने लगा और कसम खाकर कहने लगा, “मैं उस आदमी को नहीं जानता जिसकी तुम बात कर रहे हो!”  72  उसी घड़ी एक मुर्गे ने दूसरी बार बाँग दी+ और पतरस को यीशु की यह बात याद आयी, “मुर्गे के दो बार बाँग देने से पहले, तू तीन बार मुझे जानने से इनकार कर देगा।”+ तब उससे और बरदाश्‍त नहीं हुआ और वह फूट-फूटकर रोने लगा।

कई फुटनोट

या “धोखे; चालाकी।”
या “गिरफ्तार करें।”
या “मेज़ से टेक लगाए बैठा था।”
या “उस पर भड़क उठे; उसे डाँटा।”
शा., “अंगूर की बेल की उपज से बनी यह चीज़।”
शा., “तुम ठोकर खाओगे।”
या “उसकी सदमे की सी हालत हो गयी।”
या “उत्सुक।”
या “ले जाते समय उस पर कड़ी नज़र रखना।”
या “तुम क्या सोचते हो?”; “तुम्हें क्या लगता है?”
या “मैं न तो जानता न ही समझता हूँ।”

अध्ययन नोट

दो दिन बाद: मर 14:1, 2 में बतायी घटना नीसान 12 को हुई, क्योंकि आयत में लिखा है कि दो दिन बाद फसह (नीसान 14 को; मत 26:2 का अध्ययन नोट देखें) और बिन-खमीर की रोटी का त्योहार था (नीसान 15-21 को; शब्दावली देखें)।​—अति. क7, ख12, ख15 और मर 14:3, 10 के अध्ययन नोट देखें।

वह बैतनियाह में: ज़ाहिर है कि मर 14:3-9 में बतायी घटना सूरज ढलने के बाद हुई जब नीसान 9 शुरू हुआ। इसका सुराग हमें यूहन्‍ना से मिलता है, जिसने कहा कि यीशु “फसह के त्योहार से छ: दिन पहले” बैतनियाह पहुँचा। (यूह 12:1) वह ज़रूर नीसान 8 शुरू होने (यानी सूरज ढलने) के समय के आस-पास पहुँच गया होगा क्योंकि वह दिन सब्त का दिन था और फिर उसके अगले दिन वह शमौन के घर खाना खाने गया।​—यूह 12:2-11; कृपया अति. क7 और ख12 देखें।

शमौन . . . जो पहले कोढ़ी था: इस शमौन का ज़िक्र सिर्फ यहाँ और इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मत 26:6 में किया गया है। शायद उसका कोढ़ यीशु ने ठीक किया था।​—मत 8:2 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “कोढ़; कोढ़ी” देखें।

एक औरत: मत 26:7 का अध्ययन नोट देखें।

खुशबूदार तेल: यूहन्‍ना ने बताया कि यह तेल करीब 327 ग्राम था। मरकुस और यूहन्‍ना के ब्यौरे में बताया गया है कि इसकी कीमत “300 दीनार से भी ज़्यादा” थी। (मर 14:5; यूह 12:3-5) यह कीमत एक आम मज़दूर की साल-भर की मज़दूरी होती थी। माना जाता है कि यह तेल खुशबूदार पौधे (नार्डोस्टैकिस जटामाँसी) से निकाला जाता था, जो हिमालय पर्वतमाला में पाया जाता है। इसमें अकसर सस्ता तेल मिलाया जाता था या नकली जटामाँसी तेल को असली बताकर बेचा जाता था। लेकिन मरकुस और यूहन्‍ना ने लिखा कि इस ब्यौरे में बताया तेल असली जटामाँसी का था।​—शब्दावली में “जटामाँसी” देखें।

बोतल: शब्दावली में “सिलखड़ी” देखें।

यीशु के सिर पर तेल उँडेलने लगी: मत्ती और मरकुस के मुताबिक, उस औरत ने यीशु के सिर पर तेल उँडेला। (मत 26:7) सालों बाद जब यूहन्‍ना ने यह ब्यौरा लिखा तो उसने एक और बात कही, उस औरत ने यीशु के पैरों पर भी तेल उँडेला। (यूह 12:3) यीशु ने समझाया कि उस औरत ने प्यार की वजह से ऐसा किया और यह उसे दफनाए जाने की तैयारी को दर्शाता था।​—मर 14:8 का अध्ययन नोट देखें।

300 दीनार: मत्ती के ब्यौरे में सिर्फ यह लिखा है: “ऊँचे दामों में” (मत 26:9), मगर मरकुस और यूहन्‍ना के ब्यौरे में तेल की सही-सही कीमत बतायी गयी है।​—मर 14:3 का अध्ययन नोट; शब्दावली में “दीनार” और अति. ख14 देखें।

उसने मेरे शरीर पर खुशबूदार तेल मलकर: उस औरत (मत 26:7 का अध्ययन नोट देखें) ने इसलिए दरियादिली दिखायी क्योंकि उसके दिल में यीशु के लिए प्यार और कदर थी। यीशु ने समझाया कि उसने अनजाने में उसके दफनाए जाने की तैयारी की क्योंकि अकसर लाश को दफनाने से पहले ऐसे खुशबूदार तेल और मसाले लगाए जाते थे।​—2इत 16:14.

सच: मत 5:18 का अध्ययन नोट देखें।

सारी दुनिया में . . . प्रचार किया जाएगा: यीशु ने जैसे मर 13:10 में भविष्यवाणी की, वैसे ही उसने यहाँ भी कहा कि खुशखबरी का प्रचार सारी दुनिया में किया जाएगा। उसने यह भी कहा कि इस औरत ने जिस तरह भक्‍ति दिखायी यह बात भी इस खुशखबरी में शामिल की जाएगी। इस औरत ने जो किया उसके बारे में लिखने के लिए परमेश्‍वर ने खुशखबरी की किताबों के तीन लेखकों को प्रेरित किया।​—मत 26:12, 13; यूह 12:7; कृपया मर 13:10 का अध्ययन नोट देखें।

निकलकर . . . गया: आयत 10 और 11 में बतायी घटना नीसान 12 को हुई यानी उसी दिन जिस दिन मर 14:1, 2 में बतायी घटना घटी।​—अति. क7, ख12 और मर 14:1, 3 के अध्ययन नोट देखें।

इस्करियोती: मत 10:4 का अध्ययन नोट देखें।

चाँदी के सिक्के: शा., “चाँदी” जिसे पैसे की तरह इस्तेमाल किया जाता था। मत 26:15 में बताया गया है कि उन्होंने ‘चाँदी के 30 सिक्कों’ की रकम तय की। खुशखबरी की किताबों के लेखकों में से सिर्फ मत्ती ने बताया कि यीशु से गद्दारी करने के लिए क्या कीमत दी गयी। मुमकिन है कि ये 30 सिक्के चाँदी के शेकेल के थे जो सोर में ढाले गए थे। इससे पता चलता है कि प्रधान याजक यीशु को कितना तुच्छ समझते थे क्योंकि कानून के मुताबिक यह एक दास की कीमत होती थी। (निर्ग 21:32) उसी तरह जब जकरयाह ने विश्‍वासघाती इसराएलियों से परमेश्‍वर के लोगों के बीच भविष्यवाणी करने की मज़दूरी माँगी थी, तो उन्होंने उसे “चाँदी के 30 टुकड़े” तौलकर दिए जो दिखाता है कि वे उसे एक दास से ज़्यादा कुछ नहीं समझते थे।​—जक 11:12, 13.

बिन-खमीर की रोटी के त्योहार के पहले दिन: बिन-खमीर की रोटी का त्योहार नीसान 15 को शुरू होता था यानी फसह (नीसान 14) के अगले दिन और यह त्योहार सात दिन तक मनाया जाता था। (अति. ख15 देखें।) लेकिन यीशु के दिनों तक फसह इस त्योहार से इस कदर जुड़ गया था कि पूरे आठ दिनों को कभी-कभी “बिन-खमीर की रोटी का त्योहार” कहा जाता था। (लूक 22:1) इस आयत में बताया दिन नीसान 14 है, क्योंकि यह वही दिन है जब यहूदी अपने दस्तूर के मुताबिक फसह का जानवर बलि करते थे। (निर्ग 12:6, 15, 17, 18; लैव 23:5; व्य 16:1-8) आयत 12-16 में दर्ज़ घटनाएँ शायद नीसान 13 के दोपहर में घटी होंगी जब फसह की तैयारियाँ चल रही थीं। “शाम होने पर” नीसान 14 शुरू हुआ।​—मर 14:17, 18; कृपया अति. ख12 और मत 26:17 का अध्ययन नोट देखें।

शाम होने पर: यानी जब नीसान 14 शुरू हुआ।​—अति. क7 और ख12 देखें।

मेरे साथ . . . निवाला डुबोकर खा रहा है: आम तौर पर लोग हाथ से खाना खाते थे या रोटी के एक टुकड़े को चम्मच की तरह इस्तेमाल करते थे। यहाँ लिखी बात एक मुहावरा भी हो सकती है जिसका मतलब है, “साथ मिलकर खाना खाना।” किसी के साथ खाना खाना दिखाता था कि उनके बीच गहरी दोस्ती है। ऐसे करीबी दोस्त के खिलाफ हो जाना, विश्‍वासघात का सबसे घिनौना रूप माना जाता था।​—भज 41:9; यूह 13:18.

कटोरे: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों के मुताबिक इस शब्द का अनुवाद “इस कटोरे में, जो सबके लिए है” भी किया जा सकता है। लेकिन जो यहाँ लिखा है, उसका ठोस आधार हस्तलिपियों में पाया जाता है।

एक रोटी ली . . . उसे तोड़ा: मत 26:26 का अध्ययन नोट देखें।

प्रार्थना में धन्यवाद देकर: या “आशीष माँगकर।” ज़ाहिर है कि इस तरह की प्रार्थना में परमेश्‍वर की महिमा करना और उसे धन्यवाद देना शामिल है।

निशानी: मत 26:26 का अध्ययन नोट देखें।

खून . . . जो करार को पक्का करता है: मत 26:28 का अध्ययन नोट देखें।

नयी दाख-मदिरा न पीऊँ: मत 26:29 का अध्ययन नोट देखें।

परमेश्‍वर की तारीफ में गीत: मत 26:30 का अध्ययन नोट देखें।

मुर्गे के . . . बाँग देने से पहले: खुशखबरी की चारों किताबों में यह बात लिखी है, मगर मरकुस की किताब में एक और बात लिखी है और वह है कि मुर्गा दो बार बाँग देगा। (मत 26:34, 74, 75; मर 14:72; लूक 22:34, 60, 61; यूह 13:38; 18:27) मिशना से पता चलता है कि यीशु के दिनों में यरूशलेम में मुर्गे पाले जाते थे। यह बात दिखाती है कि बाइबल का यह ब्यौरा सही है। मुमकिन है कि मुर्गे ने सुबह-सुबह ही बाँग दी होगी।​—मर 13:35 का अध्ययन नोट देखें।

गतसमनी: मत 26:36 का अध्ययन नोट देखें।

जागते रहो: यीशु ने ज़ोर देकर कहा कि उसके चेलों को लाक्षणिक तौर पर जागते रहना है क्योंकि वे नहीं जानते कि वह किस दिन या किस घड़ी आएगा। (मत 24:42; 25:13; मर 13:35 के अध्ययन नोट देखें।) उसने यह बात यहाँ और मर 14:38 में दोहरायी जहाँ उसने बताया कि जागते रहने के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए। जागते रहने का बढ़ावा मसीही यूनानी शास्त्र में कई बार दिया गया है, जो दिखाता है कि सच्चे मसीहियों के लिए ऐसा करना बहुत ज़रूरी है।​—1कुर 16:13; कुल 4:2; 1थि 5:6; 1पत 5:8; प्रक 16:15.

ज़मीन पर गिरकर: इसी से मिलते-जुलते ब्यौरे मत 26:39 में लिखा है कि यीशु “मुँह के बल गिरकर” प्रार्थना करने लगा। बाइबल में अलग-अलग तरीकों से प्रार्थना करने के बारे में बताया गया है, जैसे खड़े होकर और घुटने टेककर। लेकिन जब एक इंसान गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करता था, तो वह शायद मुँह के बल ज़मीन पर पूरी तरह लेट जाता था।

अब्बा: एक इब्रानी या अरामी शब्द (यूनानी में हू-ब-हू अनुवाद किया गया है), जो मसीही यूनानी शास्त्र में तीन बार आया है। (रोम 8:15; गल 4:6) इसका शाब्दिक मतलब है, “पिता” या “हे पिता।” इसमें “पापा” शब्द से झलकनेवाला गहरा लगाव और “पिता” शब्द से झलकनेवाला गहरा आदर दोनों शामिल हैं। यह बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल होनेवाला शब्द था, लेकिन इसमें इज़्ज़त भी झलकती थी। यह उन शब्दों में से एक था, जिन्हें बच्चा सबसे पहले बोलना सीखता था। लेकिन प्राचीन इब्रानी और अरामी लेखों से पता चलता है कि जब एक बेटा बड़ा हो जाता था तब भी वह अपने पिता को इसी शब्द से बुलाता था। यह दिखाता है कि यह एक उपाधि नहीं थी बल्कि अपने पिता को प्यार से बुलाने का तरीका था। यीशु ने भी यह शब्द इस्तेमाल किया, जिससे ज़ाहिर होता है कि उसका अपने पिता के साथ कितना करीबी रिश्‍ता है और उसे पिता पर कितना भरोसा है।

पिता: यूनानी पाठ की तीनों आयतों में अब्बा के बाद इसका अनुवाद हो पेटर दिया गया है जिसका शाब्दिक मतलब है, “पिता” या “हे पिता।”

यह प्याला मेरे सामने से हटा दे: बाइबल में अकसर “प्याला” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब है, एक व्यक्‍ति के लिए परमेश्‍वर की मरज़ी या उसका “तय हिस्सा।” (मत 20:22 का अध्ययन नोट देखें।) यीशु को बेशक इस बात की चिंता रही होगी कि परमेश्‍वर की निंदा करने और देशद्रोह के इलज़ाम में उसे जो मौत दी जानेवाली है उससे परमेश्‍वर की बदनामी हो सकती है। इसलिए उसने प्रार्थना की कि यह “प्याला” उसके सामने से हटा लिया जाए।

दिल: मत 26:41 का अध्ययन नोट देखें।

शरीर: मत 26:41 का अध्ययन नोट देखें।

उनकी आँखें नींद से भरी थीं: शा., “उनकी आँखें भारी थीं।” यह एक यूनानी मुहावरा है जिसका मतलब है, “बहुत नींद आना।” इसका अनुवाद ऐसे भी किया जा सकता है: “वे अपनी आँखें खुली नहीं रख पाए।”

देखो: मर 1:2 का अध्ययन नोट देखें।

उसे प्यार से चूमा: जिस यूनानी क्रिया का अनुवाद “प्यार से चूमा” किया गया है, वह मर 14:44 में ‘चूमने’ के लिए इस्तेमाल हुई क्रिया का और भी ज़बरदस्त रूप है। यहूदा ने जिस तरह यीशु को प्यार से चूमकर नमस्कार किया, उसके साथ दोस्त की तरह पेश आया, उससे पता चलता है कि वह कितना बड़ा धोखेबाज़ और मक्कार था।

वहाँ जो खड़े थे उनमें से एक: इसके मिलते-जुलते ब्यौरे यूह 18:10 से पता चलता है कि जिसने अपनी तलवार खींची थी वह शमौन पतरस था और महायाजक के दास का नाम मलखुस था। लूका (22:50) और यूहन्‍ना (18:10) के ब्यौरे में यह भी बताया गया है कि मलखुस का “दायाँ कान” काट दिया गया था।

महायाजक के दास पर वार किया: यूह 18:10 का अध्ययन नोट देखें।

मरकुस: यह लातीनी नाम मार्कस से निकला है। मरकुस “यूहन्‍ना” का रोमी उपनाम था जिसका ज़िक्र प्रेष 12:12 में किया गया है। उसकी माँ का नाम मरियम था, जो यरूशलेम में रहती थी और शुरू के चेलों में से एक थी। यूहन्‍ना मरकुस “बरनबास का भाई लगता” था। (कुल 4:10) वह प्रचार के लिए बरनबास के साथ सफर पर जाता था। वह पौलुस और दूसरे मिशनरियों के साथ भी सफर पर जाता था। (प्रेष 12:25; 13:5, 13; 2ती 4:11) हालाँकि इस खुशखबरी की किताब में कहीं नहीं बताया गया है कि इसे किसने लिखा, फिर भी दूसरी और तीसरी सदी के लेखकों का कहना है कि यह किताब मरकुस ने लिखी थी।

एक नौजवान: सिर्फ मरकुस ने वह घटना लिखी, जो आयत 51 और 52 में पायी जाती है। यह नौजवान शायद खुद मरकुस था। अगर ऐसी बात है तो यीशु के साथ उसका थोड़ा-बहुत मेल-जोल रहा होगा।​—मर के शीर्षक पर अध्ययन नोट देखें।

नंगा: मत 25:36 का अध्ययन नोट देखें।

महायाजक: जब इसराएल एक स्वतंत्र राष्ट्र था तो जो महायाजक होता था वह अपनी मौत तक उस पद पर बना रहता था। (गि 35:25) लेकिन जब इसराएल पर रोम का कब्ज़ा हुआ तब रोमी शासकों के पास यह अधिकार था कि वे किसी को भी महायाजक ठहरा सकते हैं या इस पद से हटा सकते हैं। जिस महायाजक की निगरानी में यीशु की सुनवाई हुई थी वह कैफा था। (मत 26:3, 57) कैफा को रोमी अधिकारियों ने करीब ईसवी सन्‌ 18 में महायाजक ठहराया था और वह ईसवी सन्‌ 36 तक इस पद पर रहा। राजनेताओं के साथ उसके अच्छे संबंध थे, इसलिए वह पिछले महायाजकों के मुकाबले ज़्यादा समय तक महायाजक रहा।​—शब्दावली देखें; कैफा का घर किस जगह रहा होगा, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।

महासभा: मत 26:59 का अध्ययन नोट देखें।

उनके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे: सिर्फ मरकुस ने लिखा कि यीशु की सुनवाई के दौरान झूठे गवाहों के बयान मेल नहीं खा रहे थे।

मसीह: मत 11:2 का अध्ययन नोट देखें।

शक्‍तिशाली परमेश्‍वर के दाएँ हाथ: मत 26:64 का अध्ययन नोट देखें।

अपना कपड़ा फाड़ा: यहाँ कपड़ा फाड़ने का मतलब है, हैरानी और गुस्सा ज़ाहिर करना। मुमकिन है कि कैफा ने अपना कपड़ा गले से फाड़ा होगा। उसने यह दिखावा करने के लिए ऐसा किया कि वह बहुत धर्मी है और यीशु की बात सुनकर एकदम हैरान है और उसे बहुत गुस्सा आ रहा है।

भविष्यवाणी कर, तुझे किसने मारा!: यहाँ ‘भविष्यवाणी करने’ का मतलब भविष्य बताना नहीं बल्कि परमेश्‍वर की मदद से यह बताना है कि उसे किसने मारा। संदर्भ से पता चलता है कि यीशु पर ज़ुल्म करनेवालों ने उसका सिर ढाँप दिया था। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मत 26:68 में लिखा है कि उन्होंने उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा: “अरे मसीह, भविष्यवाणी कर, हममें से किसने तुझे मारा?” इस तरह वे यीशु को चुनौती दे रहे थे कि वह बिना देखे बताए कि उसे किसने मारा है।​—मत 26:68; लूक 22:64 के अध्ययन नोट देखें।

फाटक: या “ओसारे।”​—मत 26:71 का अध्ययन नोट देखें।

खुद को कोसने लगा: मत 26:74 का अध्ययन नोट देखें।

कसम खाकर कहने लगा: मत 26:74 का अध्ययन नोट देखें।

एक मुर्गे ने . . . बाँग दी: खुशखबरी की चारों किताबों में यह बात लिखी है, मगर मरकुस की किताब में एक और बात लिखी है और वह है कि मुर्गे ने दूसरी बार बाँग दी। (मत 26:34, 74, 75; मर 14:30; लूक 22:34, 60, 61; यूह 13:38; 18:27) मिशना से पता चलता है कि यीशु के दिनों में यरूशलेम में मुर्गे पाले जाते थे। यह बात दिखाती है कि बाइबल का यह ब्यौरा सही है। मुमकिन है कि मुर्गे ने सूरज निकलने से पहले ही बाँग दी होगी।​—मर 13:35 का अध्ययन नोट देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

सिलखड़ी की बोतल
सिलखड़ी की बोतल

शुरू में इत्र की ये छोटी-छोटी बोतलें एक ऐसे पत्थर से बनायी जाती थीं, जो मिस्र में अलबास्त्रोन नाम की जगह के पास पाया जाता था। यह पत्थर कैल्शियम कार्बोनेट का एक रूप है। बाद में यह अलबास्त्रोन के नाम से जाना गया। यहाँ दिखायी गयी बोतल मिस्र में पायी गयी थी और यह ईसा पूर्व 150 और ईसवी सन्‌ 100 के बीच की है। इससे मिलती-जुलती बोतलें जिप्सम जैसे कम कीमतवाले पत्थरों से भी बनायी जाती थीं। इन्हें भी सिलखड़ी (अँग्रेज़ी में अलबास्तर) कहा जाता था, क्योंकि इनमें भी इत्र भरा जाता था। लेकिन कीमती तेल और इत्र के लिए ऐसी बोतलें इस्तेमाल की जाती थीं जो असली सिलखड़ी पत्थर से बनी थीं। जैसे, वह तेल जिससे दो बार यीशु का अभिषेक किया गया था, एक बार जब वह गलील में एक फरीसी के घर में था और दूसरी बार तब, जब वह बैतनियाह में शमौन के घर में था, जो पहले कोढ़ी था।

फसह का खाना
फसह का खाना

फसह के खाने में ये चीज़ें ज़रूर होती थीं: (1) भुना हुआ मेम्ना (इसकी कोई हड्डी नहीं तोड़ी जानी थी), (2) बिन-खमीर की रोटी और (3) कड़वा साग। (निर्ग 12:5, 8; गि 9:11) मिशना के मुताबिक, कड़वा साग लेट्यूस (सलाद पत्ता), कासनी, चंद्रशूर या सिंहपर्णी हो सकता है। ज़ाहिर है कि इस साग से इसराएलियों को मिस्र में गुलामी के अपने कड़वे अनुभव की याद आती होगी। यीशु ने बिन-खमीर की रोटी अपने परिपूर्ण शरीर की निशानी के तौर पर इस्तेमाल की। (मत 26:26) प्रेषित पौलुस ने यीशु को “हमारे फसह का मेम्ना” कहा। (1कुर 5:7) पहली सदी के आते-आते फसह के खाने में दाख-मदिरा (4) भी शामिल की जाने लगी। यीशु ने दाख-मदिरा को अपने खून की निशानी के तौर पर इस्तेमाल किया, जो बलिदान के तौर पर बहाया जाता।​—मत 26:27, 28.

ऊपर का कमरा
ऊपर का कमरा

इसराएल के कुछ घर दो मंज़िले होते थे। ऊपर जाने के लिए या तो अंदर सीढ़ी लगी होती थी या लकड़ी का जीना बना होता था, या फिर बाहर सीढ़ी लगी होती थी या पत्थरों का जीना बना होता था। जैसे यहाँ चित्र में दिखाया गया है, शायद इसी तरह के एक बड़े ऊपरी कमरे में यीशु ने अपने चेलों के साथ आखिरी फसह मनाया और प्रभु के संध्या भोज की शुरूआत की। (लूक 22:12, 19, 20) ईसवी सन्‌ 33 में पिन्तेकुस्त के दिन, जब यरूशलेम में करीब 120 चेलों पर पवित्र शक्‍ति उँडेली गयी तब ज़ाहिर है कि वे एक घर के ऊपरी कमरे में इकट्ठा थे।​—प्रेष 1:15; 2:1-4.