मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 27:1-66

27  जब सुबह हो गयी, तो सभी प्रधान याजकों और लोगों के मुखियाओं ने यीशु को मार डालने के लिए आपस में सलाह-मशविरा किया।+  वे उसे बाँधकर राज्यपाल पीलातुस के पास ले गए और उसके हवाले कर दिया।+  उसके साथ विश्‍वासघात करनेवाले यहूदा ने जब देखा कि यीशु को मौत की सज़ा दी गयी है, तो उसका दिल उसे कचोटने लगा। उसने प्रधान याजकों और मुखियाओं को चाँदी के वे 30 सिक्के लौटाते हुए+  कहा, “मैंने एक निर्दोष आदमी के खून का सौदा करके पाप किया है।” उन्होंने कहा, “इससे हमें क्या लेना? तू ही जान!”*  तब उसने चाँदी के टुकड़े मंदिर में फेंक दिए और जाकर फाँसी लगा ली।+  लेकिन प्रधान याजकों ने उन चाँदी के टुकड़ों को लेकर कहा, “इन्हें मंदिर के खज़ाने में डालना सही नहीं होगा क्योंकि यह खून की कीमत है।”  उन्होंने आपस में बात करने के बाद, उन पैसों से अजनबियों को दफनाने के लिए कुम्हार की ज़मीन खरीद ली।  इसलिए वह ज़मीन आज के दिन तक खून की ज़मीन कहलाती है।+  इससे यह बात पूरी हुई जो यिर्मयाह भविष्यवक्‍ता से कहलवायी गयी थी, “उन्होंने चाँदी के 30 टुकड़े लिए,+ जो उस आदमी के लिए ठहरायी गयी कीमत थी। इसराएल के कुछ बेटों ने उस आदमी के लिए एक कीमत ठहरा दी थी। 10  और उन्होंने ये सिक्के कुम्हार की ज़मीन के लिए दिए, जैसा यहोवा ने मुझे आज्ञा दी थी।”+ 11  यीशु अब राज्यपाल के सामने खड़ा था। और राज्यपाल ने उससे यह सवाल किया, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” यीशु ने जवाब दिया, “तू खुद यह कहता है।”+ 12  मगर जब प्रधान याजक और मुखिया उस पर इलज़ाम लगा रहे थे, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया।+ 13  तब पीलातुस ने उससे कहा, “क्या तू सुन नहीं रहा कि ये तुझ पर क्या-क्या इलज़ाम लगा रहे हैं?” 14  फिर भी यीशु ने उसे कोई जवाब नहीं दिया, यहाँ तक कि एक शब्द भी नहीं कहा, इसलिए राज्यपाल को बड़ा ताज्जुब हुआ। 15  राज्यपाल का यह रिवाज़ था कि वह हर साल त्योहार के वक्‍त किसी एक कैदी को, जिसे लोग चाहते थे, रिहा कर दिया करता था।+ 16  उन्हीं दिनों, बरअब्बा नाम का एक कुख्यात कैदी उनकी कैद में था।+ 17  इसलिए जब वे इकट्ठा हुए, तो पीलातुस ने उनसे पूछा, “तुम क्या चाहते हो, मैं तुम्हारे लिए किसे रिहा करूँ, बरअब्बा को या यीशु को जिसे मसीह कहा जाता है?” 18  पीलातुस जानता था कि उन्होंने ईर्ष्या की वजह से यीशु को उसके हवाले किया था। 19  इतना ही नहीं, जब वह न्याय-आसन पर बैठा हुआ था, तो उसकी पत्नी ने उसके पास यह संदेश भेजा, “तू उस नेक इंसान के मामले में दखल मत देना, क्योंकि उसकी वजह से मुझे एक डरावना सपना आया और आज मैं बहुत परेशान हूँ।” 20  मगर प्रधान याजकों और मुखियाओं ने भीड़ को यह कहने के लिए उकसाया कि बरअब्बा को रिहा कर दिया जाए,+ मगर यीशु को मार डाला जाए।+ 21  राज्यपाल ने एक बार फिर उनसे पूछा, “तुम क्या चाहते हो, मैं दोनों में से किसे तुम्हारे लिए रिहा करूँ?” उन्होंने कहा, “बरअब्बा को।” 22  पीलातुस ने उनसे कहा, “तो फिर मैं इस यीशु के साथ, जिसे मसीह कहा जाता है, क्या करूँ?” उन सबने कहा, “इसे काठ पर लटका दे!”*+ 23  राज्यपाल ने कहा, “क्यों, इसने क्या बुरा किया है?” मगर वे और भी ज़ोर से चिल्लाने लगे, “इसे काठ पर लटका दे!”+ 24  जब पीलातुस ने देखा कि उसके कहने का कोई फायदा नहीं हो रहा, बल्कि हुल्लड़ बढ़ता ही जा रहा है, तो उसने पानी लिया और भीड़ के सामने अपने हाथ धोते हुए कहा, “मैं इस आदमी के खून से* निर्दोष हूँ। तुम ही जानो।”* 25  तब सब लोगों ने कहा, “इसका खून हमारे और हमारे बच्चों के सिर आ पड़े।”+ 26  तब उसने बरअब्बा को रिहा कर दिया। मगर यीशु को उसने कोड़े लगवाए+ और काठ पर लटकाकर मार डालने के लिए सौंप दिया।+ 27  इसके बाद, राज्यपाल के सैनिक यीशु को उसके भवन के अंदर ले गए और उन्होंने सैनिकों की पूरी पलटन को वहाँ उसके पास इकट्ठा कर लिया।+ 28  उन्होंने उसके कपड़े उतारकर उसे सुर्ख लाल रंग का एक कपड़ा पहनाया+ 29  और काँटों का एक ताज बनाकर उसके सिर पर रखा और उसके दाएँ हाथ में एक नरकट दिया। फिर वे उसके सामने घुटने टेककर यह कहते हुए उसका मज़ाक उड़ाने लगे, “हे यहूदियों के राजा, सलाम!” 30  उन्होंने उस पर थूका+ और नरकट लेकर उसके सिर पर मारने लगे। 31  जब उन्होंने उसका खूब मज़ाक उड़ा लिया, तो वह कपड़ा उतार दिया और उसी के कपड़े उसे पहना दिए। फिर वे उसे काठ पर ठोंकने के लिए ले गए।+ 32  जब वे जा रहे थे, तो उन्हें कुरेने का रहनेवाला एक आदमी मिला जिसका नाम शमौन था। उन्होंने इस आदमी को जबरन सेवा के लिए पकड़ा कि वह यीशु का यातना का काठ उठाकर ले चले।*+ 33  जब वे गुलगुता नाम की जगह पहुँचे, जो खोपड़ी स्थान कहलाती है,+ 34  तो उन्होंने यीशु को पीने के लिए पित्त मिली दाख-मदिरा दी।+ मगर उसने चखने के बाद, उसे पीने से इनकार कर दिया। 35  सैनिकों ने उसे काठ पर ठोंक दिया और चिट्ठियाँ डालकर उसका ओढ़ना आपस में बाँट लिया।+ 36  फिर वहाँ बैठकर वे उसकी पहरेदारी करने लगे। 37  और उस पर जो इलज़ाम था, उसे लिखकर उन्होंने उसके सिर के ऊपर काठ पर लगा दिया: “यह यहूदियों का राजा यीशु है।”+ 38  उसके साथ दो लुटेरों को काठ पर लटकाया गया था, एक उसके दायीं तरफ और दूसरा बायीं तरफ।+ 39  जो लोग वहाँ से गुज़र रहे थे, वे सिर हिला-हिलाकर उसकी बेइज़्ज़ती करने लगे,+ 40  “अरे मंदिर को ढानेवाले, उसे तीन दिन के अंदर बनानेवाले,+ खुद को बचा ले! अगर तू परमेश्‍वर का बेटा है, तो यातना के काठ से नीचे उतर आ!”+ 41  इसी तरह, प्रधान याजक भी शास्त्रियों और मुखियाओं के साथ मिलकर उसका मज़ाक उड़ाने लगे,+ 42  “इसने दूसरों को तो बचाया, मगर खुद को नहीं बचा सकता! यह इसराएल का राजा है।+ अब यह यातना के काठ से नीचे तो उतरे, तब हम इसका यकीन करेंगे। 43  इसने परमेश्‍वर पर भरोसा रखा है, अगर परमेश्‍वर इसे चाहता है, तो इसे बचाए+ क्योंकि इसने कहा है, ‘मैं परमेश्‍वर का बेटा हूँ।’”+ 44  यहाँ तक कि जो लुटेरे उसके दोनों तरफ काठ पर थे, वे भी उसे बुरा-भला कह रहे थे।+ 45  छठे घंटे से उस पूरे देश में* अंधकार छा गया और नौवें घंटे तक छाया रहा।+ 46  नौवें घंटे के करीब यीशु ने ज़ोर से पुकारा, “एली, एली, लामा शबकतानी?” जिसका मतलब है, “मेरे परमेश्‍वर, मेरे परमेश्‍वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?”+ 47  यह सुनकर वहाँ खड़े कुछ लोग कहने लगे, “यह आदमी एलियाह को पुकार रहा है।”+ 48  उनमें से एक ने फौरन दौड़कर एक स्पंज लिया और उसे खट्टी दाख-मदिरा में डुबोकर नरकट पर रखा और उसे पीने के लिए दिया।+ 49  मगर बाकियों ने कहा, “देखते हैं, एलियाह इसे बचाने आता है या नहीं।” 50  यीशु एक बार फिर ज़ोर से चिल्लाया और उसने दम तोड़ दिया।+ 51  तब देखो! मंदिर का परदा+ ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया+ और धरती काँप उठी और चट्टानें फट गयीं। 52  कब्रें खुल गयीं और मौत की नींद सोए* बहुत-से पवित्र जनों की लाशें कब्रों से बाहर जा गिरीं 53  और कब्रिस्तान में मौजूद बहुत-से लोगों ने ये लाशें देखीं। (कुछ लोग जो कब्रों के पास गए थे, वे यीशु के ज़िंदा किए जाने के बाद पवित्र शहर आए।) 54  मगर जब सेना-अफसर और उसके साथ यीशु की पहरेदारी करनेवालों ने भूकंप और उन सारी घटनाओं को देखा, तो वे बहुत डर गए और कहने लगे, “वाकई यह परमेश्‍वर का बेटा था।”*+ 55  वहाँ बहुत-सी औरतें, जो गलील से यीशु की सेवा करती हुई उसके साथ आयी थीं, दूर खड़ी देख रही थीं।+ 56  उनमें मरियम मगदलीनी, याकूब और योसेस की माँ मरियम और जब्दी के बेटों की माँ भी थी।+ 57  जब दोपहर काफी बीत चुकी, तब यूसुफ नाम का एक अमीर आदमी वहाँ आया, जो अरिमतियाह का रहनेवाला था। वह भी यीशु का एक चेला बन चुका था।+ 58  इस आदमी ने पीलातुस के पास जाकर यीशु की लाश माँगी।+ तब पीलातुस ने हुक्म दिया कि उसे लाश दे दी जाए।+ 59  यूसुफ ने लाश लेकर उसे बढ़िया मलमल की साफ चादर में लपेटा+ 60  और अपनी नयी कब्र में रखा,+ जो उसने चट्टान खोदकर बनवायी थी। कब्र के द्वार पर एक बड़ा पत्थर लुढ़काने के बाद, वह वहाँ से चला गया। 61  लेकिन मरियम मगदलीनी और दूसरी मरियम वहीं कब्र के सामने बैठी रहीं।+ 62  अगले दिन यानी तैयारी के दिन+ के बाद, प्रधान याजक और फरीसी, पीलातुस के सामने जमा हुए 63  और कहने लगे, “हुज़ूर, हमें याद है कि उस फरेबी ने जीते-जी कहा था, ‘तीन दिन बाद मुझे ज़िंदा कर दिया जाएगा।’+ 64  इसलिए हुक्म दे कि तीसरे दिन तक कब्र की चौकसी की जाए ताकि उसके चेले आकर उसे चुरा न लें+ और लोगों से कहें, ‘उसे मरे हुओं में से ज़िंदा कर दिया गया है!’ फिर यह आखिरी ढोंग, पहलेवाले ढोंग से भी बदतर होगा।” 65  पीलातुस ने उनसे कहा, “तुम पहरेदार ले जा सकते हो। और जैसा पहरा बिठाना चाहते हो वैसा बिठा दो।” 66  तब वे गए और उन्होंने एक बड़े पत्थर से कब्र का द्वार अच्छी तरह बंद कर दिया और पहरेदार तैनात कर दिए।

कई फुटनोट

या “यह तेरी सिरदर्दी है!”
या “इसे काठ पर लटकाकर मार डाल!”
या “मैं इस खून से।”
या “तुम ही ज़िम्मेदार हो।”
या “उठाए।”
शा., “पूरी धरती पर।”
या “और मरे हुए।”
या शायद, “परमेश्‍वर का एक बेटा था; किसी ईश्‍वर का एक बेटा था।”

अध्ययन नोट

मुखियाओं: शा., “बुज़ुर्गों।” बाइबल में यूनानी शब्द प्रेसबाइटेरोस खासकर ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो समाज या देश में अधिकार और ज़िम्मेदारी के पद पर थे। हालाँकि यह शब्द कभी-कभी बड़ी उम्र के लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है (जैसे लूक 15:25 में “बड़ा बेटा” और प्रेष 2:17 में “बुज़ुर्ग”), लेकिन इसका हमेशा यही मतलब नहीं है। यहाँ इस शब्द का मतलब है यहूदी राष्ट्र के अगुवे, जिनका ज़िक्र अकसर प्रधान याजकों और शास्त्रियों के साथ किया जाता है। महासभा इन्हीं तीन समूहों के आदमियों से मिलकर बनी होती थी।​—मत 21:23; 26:3, 47, 57; 27:1, 41; 28:12; शब्दावली में “मुखिया; बुज़ुर्ग” देखें।

मुखियाओं: मत 16:21 का अध्ययन नोट देखें।

राज्यपाल पीलातुस: यहूदिया का रोमी राज्यपाल (या प्रशासक), जिसे सम्राट तिबिरियुस ने ईसवी सन्‌ 26 में नियुक्‍त किया था। पीलातुस करीब 10 साल तक हुकूमत करता रहा। बाइबल के लेखकों के अलावा दूसरे लेखकों ने भी उसका ज़िक्र किया। जैसे, रोमी इतिहासकार टैसीटस ने लिखा कि पीलातुस ने तिबिरियुस के शासन के दौरान मसीह को मरवाने का हुक्म दिया। इसराएल के कैसरिया में एक प्राचीन रोमी रंगशाला में एक शिलालेख मिला जिस पर लातीनी भाषा में लिखा है: “यहूदिया का प्रशासक, पुन्तियुस पीलातुस।”​—पीलातुस का किन इलाकों पर शासन था, यह जानने के लिए अति. ख10 देखें।

उसका दिल उसे कचोटने लगा: हालाँकि यहाँ इस्तेमाल हुए यूनानी शब्द मेटामीलोमाय का मतलब सही इरादे से पश्‍चाताप करना हो सकता है, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं कि यहूदा वाकई पछता रहा था। (इस यूनानी शब्द का अनुवाद मत 21:29, 32; 2कुर 7:8 में “पछतावा हुआ” या “अफसोस” किया गया है।) परमेश्‍वर के सामने पश्‍चाताप करना, यह बताने के लिए बाइबल में एक अलग शब्द मेटानोइयो इस्तेमाल हुआ है (जिसका अनुवाद मत 3:2; 4:17; लूक 15:7; प्रेष 3:19 में ‘पश्‍चाताप करना’ किया गया है)। यह शब्द दिखाता है कि पश्‍चाताप करने में सोच, रवैया या लक्ष्यों में ज़बरदस्त बदलाव करना शामिल है। यहूदा का उन लोगों के पास वापस जाना जिनके साथ उसने साज़िश की थी और बाद में खुदकुशी करना दिखाता है कि उसकी सोच बदली नहीं थी बल्कि अब भी भ्रष्ट थी।

निर्दोष: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों में “नेक” लिखा है।​—मत 23:35 से तुलना करें।

मंदिर: यहाँ यूनानी शब्द नेयोस का मतलब सिर्फ मंदिर की मुख्य इमारत नहीं बल्कि पूरा मंदिर परिसर भी हो सकता है, जिसमें इसके आँगन शामिल हैं।

फाँसी लगा ली: प्रेष 1:18 में लूका ने यहूदा की मौत के बारे में बताते समय कहा कि वह गिर गया और उसका पेट फट गया। ऐसा लगता है कि मत्ती ने यह बताया कि उसने कैसे खुदकुशी की, जबकि लूका ने बताया कि खुदकुशी करते वक्‍त क्या हुआ। दोनों ब्यौरों को मिलाने से यह समझ आता है कि यहूदा ने किसी खड़ी चट्टान के पास पेड़ से फाँसी लगायी, मगर रस्सी या डाल टूटने से वह नीचे जा गिरा और चट्टानों से टकराकर उसका पेट फट गया। यरूशलेम के आस-पास के इलाके में कई खड़ी चट्टानें हैं जिससे इस नतीजे पर पहुँचा जा सकता है।

मंदिर के खज़ाने: मंदिर की शायद वह जगह जहाँ ‘दान-पात्र’ रखे जाते थे। (यूह 8:20) मुमकिन है कि यह जगह ‘औरतों के आँगन’ में थी जहाँ 13 दान-पात्र रखे थे। (अति. ख11 देखें।) माना जाता है कि मंदिर में खज़ाने का गोदाम भी था जिसमें इन दान-पात्रों का पैसा लाकर रखा जाता था।

खून की कीमत: या “खून का पैसा,” यानी खून करने की वजह से मिलनेवाला पैसा।

उन पैसों से . . . खरीद ली: सिर्फ मत्ती ने बताया कि प्रधान याजकों ने चाँदी के 30 सिक्कों से ज़मीन का एक टुकड़ा खरीदा। प्रेष 1:18, 19 में बताया गया है कि यहूदा ने ज़मीन खरीदी थी। ऐसा शायद इसलिए लिखा गया है क्योंकि प्रधान याजकों ने यहूदा के लौटाए पैसों से वह ज़मीन खरीदी।

अजनबियों: दूसरे देशों से आए यहूदी या गैर-यहूदी।

कुम्हार की ज़मीन: चौथी सदी से माना जाता है कि यह ज़मीन हिन्‍नोम घाटी की दक्षिणी ढलान पर है, जिसकी थोड़ी ही दूरी पर किदरोन घाटी शुरू होती है। ऐसा लगता है कि इस जगह पर कुम्हार मिट्टी के बरतन बनाते थे। जैसे मत 27:8 और प्रेष 1:19 में लिखा है, यह ज़मीन बाद में “खून की ज़मीन” या हकलदमा के नाम से जानी जाती थी।​—अति. ख12 देखें।

आज के दिन तक: इन शब्दों से पता चलता है कि इन घटनाओं के घटने और इनके बारे में लिखे जाने के बीच काफी समय गुज़र चुका था। मुमकिन है कि खुशखबरी की किताब मत्ती करीब ईसवी सन्‌ 41 में लिखी गयी।

यहोवा का यह वचन पूरा हो, जो उसने अपने भविष्यवक्‍ता से कहलवाया था: ये और इनसे मिलते-जुलते शब्द मत्ती की किताब में कई बार दर्ज़ किए गए हैं। ऐसा शायद इसलिए किया गया ताकि यहूदी समझ सकें कि यीशु ही वादा किया गया मसीहा है।​—मत 2:15, 23; 4:14; 8:17; 12:17; 13:35; 21:4; 26:56; 27:9.

यह बात पूरी हुई जो यिर्मयाह भविष्यवक्‍ता से कहलवायी गयी थी: लगता है कि इन शब्दों के बाद मत्ती ने जक 11:12, 13 की बात लिखी, मगर अपने शब्दों में। परमेश्‍वर की प्रेरणा से उसने यह बात उस घटना पर लागू की जो भविष्यवाणी के मुताबिक घटी थी। मत्ती के दिनों में भविष्यवक्‍ताओं की लिखी किताबों में यिर्मयाह की किताब को पहले रखा गया था और शायद इसलिए उसी के नाम से ये सभी किताबें जानी जाती थीं और इनमें जकरयाह की किताब भी थी।​—मत 1:22 का अध्ययन नोट देखें।

यह बात पूरी हुई जो यिर्मयाह भविष्यवक्‍ता से कहलवायी गयी थी: लगता है कि इन शब्दों के बाद मत्ती ने जक 11:12, 13 की बात लिखी, मगर अपने शब्दों में। परमेश्‍वर की प्रेरणा से उसने यह बात उस घटना पर लागू की जो भविष्यवाणी के मुताबिक घटी थी। मत्ती के दिनों में भविष्यवक्‍ताओं की लिखी किताबों में यिर्मयाह की किताब को पहले रखा गया था और शायद इसलिए उसी के नाम से ये सभी किताबें जानी जाती थीं और इनमें जकरयाह की किताब भी थी।​—मत 1:22 का अध्ययन नोट देखें।

यहोवा: यहाँ इब्रानी शास्त्र की बात लिखी है। (मत 27:9 का अध्ययन नोट देखें।) मूल इब्रानी पाठ में वहाँ परमेश्‍वर के नाम के लिए चार इब्रानी व्यंजन (हिंदी में य-ह-व-ह) इस्तेमाल हुए हैं।​—अति. ग देखें।

तूने खुद कह दिया है: एक मुहावरा है जो यहूदी लोगों में आम था। यहाँ यह मुहावरा सवाल करनेवाले की बात को पुख्ता करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। एक तरह से यीशु कह रहा था, “यह तूने ही कह दिया है और तूने जो कहा वह सच है।” ज़ाहिर है कि यीशु का जवाब दिखाता है कि यहूदा सवाल पूछकर दरअसल खुद स्वीकार कर रहा था कि यीशु से गद्दारी करने के लिए वही ज़िम्मेदार है। इस बातचीत के कुछ ही समय बाद, यहूदा कमरे से बाहर चला गया होगा और फिर यीशु ने प्रभु के संध्या भोज की शुरूआत की, ठीक जैसे यूह 13:21-30 में बताया गया है। मत्ती के इस ब्यौरे में यहूदा का दोबारा ज़िक्र मत 26:47 में मिलता है, जहाँ बताया गया है कि वह एक भीड़ के साथ गतसमनी बाग में आया।

तूने खुद कह दिया है: यीशु कैफा का सवाल टाल नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था कि महायाजक को अधिकार है कि वह उसे शपथ दिलाकर सच बोलने के लिए कहे। (मत 26:63) ज़ाहिर है कि “तूने खुद कह दिया है” एक मुहावरा है जो यहूदियों में आम था। यह मुहावरा कही गयी बात की सच्चाई पुख्ता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यह बात मरकुस के ब्यौरे से पता चलती है जहाँ यीशु का जवाब इस तरह लिखा है: “हाँ मैं हूँ।”​—मर 14:62; मत 26:25; 27:11 के अध्ययन नोट देखें।

क्या तू यहूदियों का राजा है?: रोमी साम्राज्य में सम्राट की इजाज़त के बिना कोई भी राजा नहीं बन सकता था। इसीलिए शायद पीलातुस ने यीशु के राज करने के अधिकार के बारे में पूछताछ की।

तू खुद यह कहता है: ज़ाहिर है कि यीशु ने अपने इस जवाब से पुख्ता किया कि पीलातुस की कही बात सच है। (मत 26:25, 64 के अध्ययन नोट से तुलना करें।) हालाँकि यीशु ने पीलातुस के सामने यह माना कि वह वाकई राजा है, मगर उस मायने में नहीं जिस मायने में पीलातुस सोच रहा था। यीशु का राज “इस दुनिया का नहीं है,” इसलिए वह रोमी साम्राज्य के लिए कोई खतरा नहीं था।​—यूह 18:33-37.

रिवाज़ . . . एक कैदी को . . . रिहा कर दिया करता था: इस घटना के बारे में खुशखबरी की किताबों के चारों लेखकों ने लिखा। (मर 15:6-15; लूक 23:16-25; यूह 18:39, 40) इस रिवाज़ का कोई आधार इब्रानी शास्त्र में नहीं मिलता। लेकिन मालूम होता है कि यीशु के दिनों तक यहूदियों ने खुद यह रिवाज़ शुरू कर दिया था। रोमियों के लिए यह रिवाज़ कोई नया नहीं था क्योंकि सबूत दिखाते हैं कि वे भीड़ को खुश करने के लिए कैदियों को रिहा करते थे।

न्याय-आसन: यह आम तौर पर खुली जगह में बना एक ऊँचा चबूतरा होता था। इस आसन पर बैठकर अधिकारी भीड़ से बात करता और अपना फैसला सुनाता था।

सपना: ज़ाहिर है कि यह सपना परमेश्‍वर की तरफ से था। सिर्फ मत्ती ने परमेश्‍वर की प्रेरणा से यह घटना लिखी।

अपने हाथ धोते हुए: किसी मामले में एक व्यक्‍ति यह दिखाने के लिए ऐसा करता था कि वह निर्दोष है और आगे जो भी होता उसके लिए वह ज़िम्मेदार नहीं है। यह यहूदियों का एक रिवाज़ था, जिसका ज़िक्र व्य 21:6, 7 और भज 26:6 में किया गया है।

इसका खून हमारे और हमारे बच्चों के सिर आ पड़े: दूसरे शब्दों में, “हम और हमारे वंशज इसकी मौत की ज़िम्मेदारी लेते हैं।”

कोड़े लगवाए: रोमी लोग बहुत ही खतरनाक कोड़ा इस्तेमाल करते थे, जिसे लातीनी में फ्लैगेलम कहा जाता है। यहाँ जो यूनानी क्रिया (फ्रागेल्लोयो, मतलब “कोड़े लगवाना”) इस्तेमाल हुई है, वह इसी शब्द से निकली है। इस कोड़े में एक हत्था होता था जिसमें कई रस्सियाँ या गुथी हुई चमड़े की पट्टियाँ लगी होती थीं। कभी-कभी इन पट्टियों में नुकीली हड्डियाँ या धातु के टुकड़े लगाए जाते थे। इन कोड़ों की मार के ज़ख्म बहुत गहरे और दर्दनाक होते थे और शरीर की खाल के चीथड़े उड़ जाते थे, यहाँ तक कि इनकी मार से मौत भी हो सकती थी।

राज्यपाल के . . . भवन: यूनानी शब्द प्रेटोरियन (जो लातीनी शब्द प्रीटोरियुम से निकला है) का मतलब है, रोमी राज्यपालों का सरकारी निवास। मुमकिन है कि यरूशलेम में यह निवास वह महल था जिसे हेरोदेस महान ने बनवाया था। यह निवास यरूशलेम के दक्षिणी हिस्से में यानी ऊपरी शहर के उत्तर-पश्‍चिम में था। (यह भवन कहाँ था, यह जानने के लिए अति. ख12 देखें।) दरअसल पीलातुस का निवास कैसरिया में था मगर कुछ मौकों पर, जैसे त्योहार के समय वह यरूशलेम में ठहरता था क्योंकि ऐसे मौकों पर शहर में खलबली मचने का खतरा रहता था।

सुर्ख लाल रंग का एक कपड़ा: इस तरह का ओढ़ना या चोगा राजा, नगर-अधिकारी या सेना-अफसर पहनते थे। मर 15:17 और यूह 19:2 में कहा गया है कि यह कपड़ा बैंजनी रंग का था। लेकिन प्राचीन समय में ऐसे किसी भी रंग को “बैंजनी” कहा जाता था जिसमें लाल और नीले रंगों का मिश्रण हो। इसके अलावा, देखनेवाले को कौन-सा रंग दिखायी दे रहा था, यह इससे तय होता है कि वह कहाँ से देख रहा था, उस कपड़े पर किधर से रौशनी पड़ रही थी और पीछे क्या था। खुशखबरी की किताबों के लेखकों ने जिस तरह अलग-अलग रंगों का ज़िक्र किया, वह दिखाता है कि उन्होंने एक-दूसरे के ब्यौरे की नकल नहीं की।

घुटने टेककर: प्राचीन मध्य पूर्व में किसी के सामने घुटने टेकना, आदर की निशानी माना जाता था। ऐसा खासकर अधिकारियों से फरियाद करते वक्‍त किया जाता था।

ताज . . . नरकट: सैनिकों ने यीशु के राजा होने की बात का कई तरीकों से मज़ाक उड़ाया, जैसे उसे सुर्ख लाल रंग का कपड़ा पहनाया (मत 27:28), काँटों का ताज उसके सिर पर रखा और राजदंड के तौर पर उसे नरकट दिया।

उसके सामने घुटने टेककर: आम तौर पर किसी अधिकारी का आदर करने के लिए लोग उसके सामने घुटने टेकते थे। लेकिन यहाँ सैनिकों ने यीशु के सामने घुटने टेककर एक और तरीके से उसका मज़ाक उड़ाया।​—मत 17:14 का अध्ययन नोट देखें।

सलाम!: या “तेरी जय हो!” उन्होंने उसी तरह यीशु की जयजयकार की, जैसे वे सम्राट की करते थे। ज़ाहिर है कि वे इस तरह यीशु का मज़ाक उड़ा रहे थे क्योंकि उसने कहा कि वह राजा है।

तुमसे कहे कि मेरा बोझ उठाकर . . . चल: यहाँ जबरन सेवा की बात की गयी है जो रोमी अधिकारी किसी भी नागरिक से करवा सकते थे। जैसे, कोई सरकारी काम जल्दी पूरा करवाने के लिए वे लोगों या जानवरों को ज़बरदस्ती उस काम में लगा सकते थे या लोगों की कोई भी चीज़ ले सकते थे। कुरेने के रहनेवाले शमौन के साथ ऐसा ही हुआ। रोमी सैनिकों ने उसे “जबरन सेवा के लिए पकड़ा” कि वह यीशु का यातना का काठ उठाकर ले चले।​—मत 27:32.

यातना का काठ: या “मौत का काठ।” यूनानी शब्द स्टौरोस यहाँ पहली बार आया है। प्राचीन यूनानी भाषा में इस शब्द का खास तौर से मतलब है, सीधा काठ या खंभा। यह शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है और कभी-कभी उसका मतलब है, यीशु का चेला होने की वजह से यातना, दुख-तकलीफें, शर्मिंदगी, यहाँ तक कि मौत सहना।​—शब्दावली देखें।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।” प्राचीन यूनानी भाषा में यूनानी शब्द स्टौरोस का खास तौर से मतलब है, सीधा काठ या खंभा। यह शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है और कभी-कभी इसका मतलब है, यीशु का चेला होने की वजह से यातना, दुख-तकलीफें, शर्मिंदगी, यहाँ तक कि मौत सहना।​—शब्दावली देखें।

कुरेने: यह शहर क्रेते द्वीप के दक्षिण-पश्‍चिम में उत्तरी अफ्रीका के तट के पास बसा था।​—अति. ख13 देखें।

जबरन सेवा के लिए पकड़ा: मत 5:41 का अध्ययन नोट देखें।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।”​—शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें; साथ ही मत 10:38 और 16:24 के अध्ययन नोट भी देखें, जहाँ ये शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुए हैं।

गुलगुता: यह एक इब्रानी शब्द से निकला है जिसका मतलब है, “खोपड़ी।” (यूह 19:17 देखें; न्या 9:53 से तुलना करें जहाँ इब्रानी शब्द गुलगोलेथ का अनुवाद “खोपड़ी” किया गया है।) यीशु के दिनों में यह जगह यरूशलेम की शहरपनाह के बाहर थी। लेकिन यह ठीक कहाँ थी, इसका पता नहीं। (अति. ख12 देखें।) बाइबल यह नहीं बताती कि गुलगुता पहाड़ी पर था, लेकिन यह ज़रूर बताती है कि कुछ लोगों ने दूर से देखा था कि यीशु को कैसे मार डाला गया।​—मर 15:40; लूक 23:49.

पित्त: यहाँ यूनानी शब्द खोली का मतलब है, पौधों से निकाला कड़वा रस या कोई कड़वा पदार्थ। इस घटना से एक भविष्यवाणी पूरी हुई, यह दिखाने के लिए मत्ती ने भज 69:21 की बात लिखी। सेप्टुआजेंट में इसी आयत में यही यूनानी शब्द, “ज़हर” के इब्रानी शब्द के लिए इस्तेमाल हुआ है। ज़ाहिर है कि यरूशलेम की औरतों ने पित्त मिलाकर दाख-मदिरा तैयार की थी ताकि दर्द कम करने के लिए उन लोगों को पिलायी जा सके जिन्हें काठ पर लटकाया गया था। रोमी अधिकारियों को इस पर कोई एतराज़ नहीं था। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मर 15:23 में लिखा है कि उस दाख-मदिरा में ‘नशीला गंधरस’ मिलाया गया था। इसलिए ज़ाहिर है कि उस दाख-मदिरा में गंधरस और कड़वा पित्त, दोनों मिलाए गए थे।

उसने . . . उसे पीने से इनकार कर दिया: ज़ाहिर है कि यीशु अपने विश्‍वास की परीक्षा के दौरान पूरे होश-हवास में रहना चाहता था।

चिट्ठियाँ डालकर: शब्दावली में “चिट्ठियाँ” देखें।

उसका ओढ़ना आपस में बाँट लिया: यूह 19:23, 24 में इस घटना की कुछ ऐसी बारीकियाँ बतायी गयी हैं जो मत्ती, मरकुस और लूका की किताब में नहीं पायी जातीं। ये हैं: रोमी सैनिकों ने शायद कुरते और ओढ़ने, दोनों पर चिट्ठियाँ डालीं; उन्होंने ओढ़ने के ‘चार टुकड़े करके आपस में बाँट लिए, हरेक को एक टुकड़ा मिला’; वे कुरते को फाड़कर टुकड़े नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उस पर चिट्ठियाँ डालीं और मसीहा के कपड़ों पर इस तरह चिट्ठियाँ डालकर उन्होंने भज 22:18 की भविष्यवाणी पूरी की। सबूत दिखाते हैं कि यह एक दस्तूर था कि अपराधियों को मारनेवाले सैनिक उनके कपड़े रख लेते थे। अपराधियों को मारने से पहले उनके कपड़े उतारे जाते थे और उनकी चीज़ें ले ली जाती थीं। इस तरह उन्हें और भी ज़्यादा अपमानित किया जाता था।

लुटेरों: या “डाकुओं।” यूनानी शब्द लीस्टेस का मतलब हो सकता है, मार-पीट करके लूटनेवाला। कभी-कभी यह शब्द क्रांतिकारियों के लिए भी इस्तेमाल होता था। यही शब्द बरअब्बा के सिलसिले में इस्तेमाल हुआ है (यूह 18:40), जिसके बारे में लूक 23:19 में बताया गया है कि वह “बगावत और कत्ल” के इलज़ाम में जेल में था। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे लूक 23:32, 33, 39 में इन लुटेरों को “अपराधी” कहा गया है जिसके यूनानी शब्द (काकूरगोस) का शाब्दिक मतलब है, “बुराई या दुष्ट काम करनेवाला।”

सिर हिला-हिलाकर: लोग आम तौर पर किसी पर हँसने, उसका मज़ाक उड़ाने या उसे नीचा दिखाने के लिए सिर हिलाते थे और कुछ बोलते भी थे। वहाँ से गुज़रनेवालों ने ऐसा करके अनजाने में भज 22:7 की भविष्यवाणी पूरी की।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।”​—शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें; साथ ही मत 10:38 और 16:24 के अध्ययन नोट भी देखें, जहाँ ये शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुए हैं।

यातना के काठ: या “मौत के काठ।”​—मत 27:32 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।”​—शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें; साथ ही मत 10:38 और 16:24 के अध्ययन नोट भी देखें, जहाँ ये शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुए हैं।

यातना के काठ: या “मौत के काठ।”​—मत 27:32 का अध्ययन नोट और शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें।

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

छठे घंटे: यानी दोपहर करीब 12 बजे।​—मत 20:3 का अध्ययन नोट देखें।

नौवें घंटे: यानी दोपहर करीब 3 बजे।​—मत 20:3 का अध्ययन नोट देखें।

एली, एली, लामा शबकतानी?: कुछ लोगों का मानना है कि ये अरामी शब्द हैं, लेकिन मुमकिन है कि ये उस वक्‍त बोली जानेवाली इब्रानी भाषा के शब्द हैं जिस पर अरामी भाषा का काफी असर था। मत्ती और मरकुस ने इन शब्दों को यूनानी में शब्द-ब-शब्द लिखा, इसलिए यह पता लगाना मुश्‍किल है कि ये ठीक कौन-सी भाषा के शब्द हैं।

मेरे परमेश्‍वर, मेरे परमेश्‍वर: यीशु ने स्वर्ग में रहनेवाले अपने पिता को पुकारते वक्‍त अपना परमेश्‍वर कहकर भज 22:1 की भविष्यवाणी पूरी की। उसने दर्द में तड़पते हुए जिस तरह पुकारा उससे सुननेवालों को शायद भज 22 की भविष्यवाणी में लिखी बहुत-सी बातें भी याद आ गयी होंगी। जैसे, उसका मज़ाक बनाया जाएगा, उसकी खिल्ली उड़ायी जाएगी, उसके हाथ-पैरों को चोट पहुँचायी जाएगी और चिट्ठियाँ डालकर उसके कपड़ों का बँटवारा किया जाएगा।​—भज 22:6-8, 16, 18.

एलियाह: एक इब्रानी नाम जिसका मतलब है, “मेरा परमेश्‍वर यहोवा है।”

खट्टी दाख-मदिरा: या “सिरका।” मुमकिन है कि यह पतली और खट्टी दाख-मदिरा थी जिसे लातीनी भाषा में ऐसीटम (सिरका) या अगर उसमें पानी मिलाया जाता था तो उसे पॉस्का कहा जाता था। यह एक सस्ता पेय पदार्थ था जिसे गरीब लोग, यहाँ तक कि रोमी सैनिक अपनी प्यास बुझाने के लिए पीते थे। सेप्टुआजेंट में भज 69:21 में यूनानी शब्द ओक्सॉस भी इस्तेमाल हुआ है, जहाँ भविष्यवाणी की गयी थी कि मसीहा को पीने के लिए “सिरका” दिया जाएगा।

नरकट: या “छड़ी; लाठी।” यूहन्‍ना के ब्यौरे में इसे “मरुए की डंडी” कहा गया है।​—यूह 19:29; शब्दावली में “मरुआ” देखें।

आता है या नहीं: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों में यह वाक्य जोड़ा गया है: “एक और आदमी ने एक भाला लेकर उसकी पसलियों को भेदा और खून और पानी बह निकला।” दूसरी अहम हस्तलिपियों में यह वाक्य नहीं पाया जाता। इससे मिलता-जुलता वाक्य यूह 19:34 में पाया जाता है, लेकिन यूह 19:33 के मुताबिक जब यीशु को भाले से भोंका गया तब तक वह मर चुका था। ज़्यादातर अधिकारियों का, यहाँ तक कि नेसले और आलान्ड और ‘यूनाइटेड बाइबल सोसाइटी’ के यूनानी पाठ के संपादकों का मानना है कि नकल-नवीसों ने मत्ती के ब्यौरे में यूहन्‍ना के शब्द बाद में जोड़ दिए थे। वेस्कॉट और हॉर्ट ने भी, जिन्होंने यूनानी पाठ में इन शब्दों को दोहरे कोष्ठकों में डाला, कहा कि “इस बात की बड़ी संभावना है कि यह वाक्य शास्त्रियों ने जोड़ा।” यह वाक्य कुछ हस्तलिपियों में मत्ती के ब्यौरे में पाया जाता है और कुछ में नहीं, जबकि यूहन्‍ना के ब्यौरे में दर्ज़ यह वाक्य सभी हस्तलिपियों में पाया जाता है। इससे ज़ाहिर होता है कि यूह 19:33, 34 में बतायी घटना सही क्रम में लिखी गयी है, यानी जब रोमी सैनिक ने यीशु के शरीर में भाला भोंका तो उसकी मौत हो चुकी थी। इसलिए यह वाक्य इस अनुवाद के मत 27:49 से हटाया गया है।

उसने दम तोड़ दिया: या “उसने साँस लेना बंद कर दिया।” यहाँ यूनानी शब्द नफ्मा का शायद मतलब है, “साँस” या “जीवन-शक्‍ति।” हम ऐसा इसलिए कह सकते हैं क्योंकि इसके मिलते-जुलते ब्यौरे मर 15:37 में यूनानी क्रिया एकपनीयो (शा., “साँस छोड़ना”) इस्तेमाल हुई है (जहाँ इस क्रिया का अनुवाद “दम तोड़ दिया” या फुटनोट में “आखिरी साँस ली” किया गया है)। कुछ लोगों का मानना है कि जिस यूनानी शब्द का अनुवाद “उसने दम तोड़ दिया” किया गया है, उसका मतलब है कि यीशु ने ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष करना छोड़ दिया क्योंकि सारी बातें पूरी हो चुकी थीं। (यूह 19:30) उसने अपनी मरज़ी से “जान कुरबान कर दी।”​—यश 53:12; यूह 10:11.

देख!: इसका यूनानी शब्द आइडू है और इसका इस्तेमाल अकसर आगे की बात पर ध्यान खींचने के लिए किया गया है ताकि पढ़नेवाला बतायी जा रही घटना की कल्पना कर सके या उसकी बारीकी पर ध्यान दे सके। यह शब्द किसी बात पर ज़ोर देने के लिए या कोई नयी या हैरानी की बात बताने से पहले भी इस्तेमाल किया गया है। मसीही यूनानी शास्त्र में यह शब्द सबसे ज़्यादा बार मत्ती, लूका और प्रकाशितवाक्य की किताबों में आया है। इसी से मिलता-जुलता शब्द इब्रानी शास्त्र में भी अकसर इस्तेमाल हुआ है।

देखो!: मत 1:23 का अध्ययन नोट देखें।

मंदिर: यहाँ यूनानी शब्द नेयोस का मतलब है, मंदिर की मुख्य इमारत जिसमें पवित्र और परम-पवित्र भाग हैं।

परदा: कढ़ाई किया हुआ यह खूबसूरत परदा मंदिर के पवित्र भाग को परम-पवित्र भाग से अलग करता था। यहूदियों की मान्यता है कि यह परदा करीब 18 मी. (60 फुट) लंबा, 9 मी. (30 फुट) चौड़ा और 7.4 सें.मी. (2.9 इंच) मोटा था। इस भारी परदे को दो हिस्सों में फाड़कर यहोवा ने न सिर्फ यह ज़ाहिर किया कि वह अपने बेटे के कातिलों पर कितना क्रोधित है बल्कि यह भी कि अब स्वर्ग में दाखिल होना मुमकिन है।​—इब्र 10:19, 20; शब्दावली देखें।

कब्रें: या “स्मारक कब्रें।”​—शब्दावली में “स्मारक कब्र” देखें।

लाशें कब्रों से बाहर जा गिरीं: शा., “शरीर जी उठे।” यूनानी क्रिया ऐगीरो का मतलब है, “उठाना।” यह क्रिया मरे हुओं के ज़िंदा होने का मतलब देने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन अकसर यह क्रिया दूसरे संदर्भों में इस्तेमाल हुई है। जैसे, गड्ढे से “बाहर निकालना” या ज़मीन से “उठना।” (मत 12:11; 17:7; लूक 1:69, फु.) मत्ती ने यह नहीं कहा कि “पवित्र जनों” को “जी उठाया गया” बल्कि उसने कहा कि उनके “शरीर” जी उठे। ज़ाहिर है कि भूकंप इतना भयंकर था कि कब्रें खुल गयीं और लाशें बाहर आ गिरीं।

पवित्र शहर यरूशलेम: यरूशलेम को अकसर पवित्र इसलिए कहा गया है क्योंकि यहीं पर यहोवा का मंदिर था।​—नहे 11:1; यश 52:1.

कुछ लोग जो कब्रों के पास गए थे: यूनानी क्रिया से पता चलता है कि यहाँ कर्ता बहुवचन में और पुल्लिंग में है, यानी लोगों की बात की गयी है, न कि लाशों (यूनानी में नपुंसक लिंग) की जिनका ज़िक्र आयत 52 में है। ज़ाहिर है कि यहाँ कब्रों के पास से गुज़रनेवाले लोगों की बात की गयी है, जिन्होंने वे लाशें देखीं जो भूकंप की वजह से कब्रों से बाहर निकल आयी थीं। (आय. 51) उन्होंने शहर जाकर इस बारे में दूसरों को बताया।

यीशु के ज़िंदा किए जाने के बाद: कोष्ठक में बतायी घटना बाद में घटी थी।

पवित्र शहर: यानी यरूशलेम।​—मत 4:5 का अध्ययन नोट देखें।

सेना-अफसर: या रोमी “शतपति” जिसके अधीन करीब 100 सैनिक होते थे। यह बड़ा अधिकारी शायद उस वक्‍त मौजूद रहा हो जब यीशु को पीलातुस के सामने पेश किया गया और उसने यहूदियों को यह कहते सुना होगा कि यीशु का दावा है कि वह परमेश्‍वर का बेटा है।​—मत 27:27; यूह 19:7.

मगदन: आज गलील झील के आस-पास मगदन नाम की कोई जगह नहीं है। लेकिन कुछ विद्वान मानते हैं कि मगदन का दूसरा नाम मगदला था। माना जाता है कि मगदला आज खिरबत मजदाल (मिगदल) कहलाता है। यह तिबिरियास से करीब 6 कि.मी. (3.5 मील) दूर उत्तर-पश्‍चिम में है। इसके मिलते-जुलते ब्यौरे (मर 8:10) में इस जगह को दलमनूता कहा गया है।​—अति. ख10 देखें।

मरियम जो मगदलीनी कहलाती थी: जिस औरत को अकसर मरियम मगदलीनी कहा जाता था, उसका पहली बार ज़िक्र यीशु की प्रचार सेवा के दूसरे साल के इस ब्यौरे में हुआ है। इसकी पहचान बताने के लिए इसका उपनाम मगदलीनी (मतलब “मगदला की रहनेवाली”) शायद मगदला से निकला है, जो गलील झील के पश्‍चिमी तट पर बसा एक नगर था। यह नगर कफरनहूम और तिबिरियास के लगभग बीच में था। माना जाता है कि मरियम, मगदला में पैदा हुई थी या उसका घर वहाँ था। मरियम मगदलीनी का ज़िक्र खासकर तब किया गया है जब यीशु की मौत हुई और उसे दोबारा ज़िंदा किया गया।​—मत 27:55, 56, 61; मर 15:40; लूक 24:10; यूह 19:25.

जब्दी: शायद यीशु का मौसा, क्योंकि उसकी पत्नी सलोमी यीशु की माँ मरियम की बहन रही होगी। अगर ऐसा है तो यूहन्‍ना और याकूब यीशु के मौसेरे भाई थे।

जब्दी की पत्नी: यानी प्रेषित याकूब और यूहन्‍ना की माँ। मरकुस के ब्यौरे के मुताबिक याकूब और यूहन्‍ना ने यीशु से गुज़ारिश की। ज़ाहिर है कि गुज़ारिश उन दोनों की ही थी, लेकिन ऐसा करने के लिए उन्होंने अपनी माँ सलोमी से कहा। सलोमी शायद यीशु की मौसी थी।​—मत 27:55, 56; मर 15:40, 41; यूह 19:25.

मरियम मगदलीनी: इसकी पहचान बताने के लिए इसका उपनाम मगदलीनी (मतलब, “मगदला की रहनेवाली”) शायद मगदला से निकला है, जो गलील झील के पश्‍चिमी तट पर बसा एक नगर था। यह नगर कफरनहूम और तिबिरियास के लगभग बीच में था। माना जाता है कि मरियम, मगदला में पैदा हुई थी या उसका घर वहाँ था।​—मत 15:39; लूक 8:2 के अध्ययन नोट देखें।

याकूब: ‘छोटा याकूब’ भी कहलाता था।​—मर 15:40.

योसेस: कुछ प्राचीन हस्तलिपियों में “योसेस” के बजाय “यूसुफ” लिखा है। ज़्यादातर प्राचीन हस्तलिपियों में मर 15:40 में “योसेस” लिखा है जो इसका मिलता-जुलता ब्यौरा है।

जब्दी के बेटों की माँ: यानी प्रेषित याकूब और यूहन्‍ना की माँ।​—मत 4:21; 20:20 के अध्ययन नोट देखें।

यूसुफ: खुशखबरी की किताबों के चारों लेखकों ने यूसुफ के बारे में अलग-अलग जानकारी दी। इससे पता चलता है कि हर लेखक ने अपने अंदाज़ में किताब लिखी। जैसे, मत्ती कर-वसूलनेवाला था, इसलिए उसने लिखा कि यूसुफ अमीर था। मरकुस ने रोमी लोगों के लिए लिखा था, इसलिए उसने कहा कि वह “धर्म-सभा का एक इज़्ज़तदार सदस्य” था जो परमेश्‍वर के राज के आने का इंतज़ार कर रहा था। लूका हमदर्द वैद्य था, इसलिए उसने लिखा कि वह “एक अच्छा और नेक इंसान था” और उसने धर्म-सभा के लोगों का साथ नहीं दिया जो यीशु के खिलाफ साज़िश कर रहे थे। सिर्फ यूहन्‍ना ने यह लिखा कि वह “यीशु का एक चेला था, मगर यहूदियों के डर से यह बात छिपाए रखता था।”​—मर 15:43-46; लूक 23:50-53; यूह 19:38-42.

अरिमतियाह: इस शहर का नाम एक इब्रानी शब्द से निकला है जिसका मतलब है, “ऊँचाई।” लूक 23:51 में इसे ‘यहूदिया के लोगों का शहर’ कहा गया है।​—अति. ख10 देखें।

कब्र: या “स्मारक कब्र।” यह गुफा में बनी कब्र नहीं थी बल्कि चूने-पत्थर की चट्टान में बनायी गयी थी जिसे काटना आसान होता है। ऐसी कब्रों में अकसर ताक बने होते थे जिन पर लाशें रखी जाती थीं।​—शब्दावली में “स्मारक कब्र” देखें।

एक बड़ा पत्थर: ज़ाहिर है कि यह गोल था क्योंकि आयत कहती है कि उसे लुढ़काकर द्वार पर रखा गया था। मर 16:4 में भी कहा गया है कि जब यीशु को ज़िंदा किया गया तो पत्थर “पहले से ही दूर लुढ़का हुआ था।” इसका वज़न शायद एक टन या उससे ज़्यादा रहा होगा।

अगले दिन: यानी नीसान 15. नीसान 14 के बाद का दिन हमेशा सब्त का दिन होता था यानी विश्राम का पवित्र दिन, फिर चाहे वह हफ्ते के किसी भी दिन पड़े। इसके अलावा, ईसवी सन्‌ 33 में नीसान 15 को साप्ताहिक सब्त भी था। उस साल ये दोनों सब्त एक ही दिन पड़े थे, इसलिए उस दिन को “बड़ा” या दुगना सब्त कहा गया है।​—यूह 19:31; अति. ख12 देखें।

तैयारी के दिन: हर हफ्ते सब्त से पहले का दिन, तैयारी का दिन होता था। इसी दिन यहूदी सब्त की तैयारी करते थे। वे ज़्यादा खाना बनाते थे और ऐसे काम निपटाते थे जो सब्त के अगले दिन तक टाले नहीं जा सकते थे। ईसवी सन्‌ 33 में नीसान 14, तैयारी के दिन पड़ा।​—मर 15:42; शब्दावली में “तैयारी का दिन” देखें।

तीन दिन और तीन रात: बाइबल के दूसरे ब्यौरों से पता चलता है कि इन शब्दों का मतलब पूरे तीन दिन नहीं हैं। ये ब्यौरे यह भी दिखाते हैं कि भले ही एक दिन के कुछ ही घंटे बीते हों तो भी उसे पूरा दिन माना जा सकता था।​—उत 42:17, 18; 1रा 12:5, 12; मत 27:62-66; 28:1-6.

तीन दिन: इन शब्दों का मतलब पूरे तीन दिन नहीं हैं। यह बात इस गुज़ारिश से ज़ाहिर होती है कि “तीसरे दिन तक कब्र की चौकसी की जाए,” न कि चौथे दिन तक।​—मत 27:64; मत 12:40 का अध्ययन नोट देखें।

फिर यह आखिरी ढोंग, पहलेवाले ढोंग से भी बदतर होगा: ज़ाहिर है कि वे यीशु को ज़िंदा किए जाने की बात को “आखिरी ढोंग” कह रहे थे और यीशु के इस दावे को कि वह मसीहा है, ‘पहलेवाला ढोंग’ कह रहे थे। यीशु के दुश्‍मन ऐसा इसलिए कह रहे थे क्योंकि वे जानते थे कि अगर यीशु ज़िंदा हो गया तो मसीहा होने का उसका दावा सच साबित हो जाएगा।

पहरेदार: सबूतों से पता चलता है कि पीलातुस ने पहरा देने के लिए रोमी सैनिकों के दल का इंतज़ाम किया। (मत 28:4, 11) अगर ये पहरेदार यहूदियों के मंदिर के होते तो यहूदियों को पीलातुस से गुज़ारिश करने की ज़रूरत नहीं होती। इसके अलावा, याजकों ने पहरेदारों से वादा किया कि अगर राज्यपाल को यह खबर मिल गयी कि यीशु की लाश गायब है तो वे राज्यपाल को समझा देंगे।​—मत 28:14.

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

शिलालेख पर पुन्तियुस पीलातुस का नाम
शिलालेख पर पुन्तियुस पीलातुस का नाम

सन्‌ 1961 में जब पुरातत्ववेत्ता इसराएल के कैसरिया में एक प्राचीन रोमी रंगशाला में खुदाई कर रहे थे, तब उन्हें एक ऐसा पत्थर मिला, जिस पर लातीनी में पीलातुस का नाम साफ खुदा हुआ था (यहाँ उसकी नकल दिखायी गयी है)। यह पत्थर पहले कहीं और इस्तेमाल हुआ था। पीलातुस का नाम उस ज़माने के ऐतिहासिक दस्तावेज़ों में भी कई बार आता है।

एड़ी की हड्डी में कील
एड़ी की हड्डी में कील

इस तसवीर में दिखाया गया है कि कैसे एक इंसान की एड़ी में 4.5 इंच (11.5 सें.मी.) लंबी एक लोहे की कील ठोंकी गयी है। यह सचमुच की एड़ी की हड्डी नहीं बल्कि उसका नमूना है। असली हड्डी का टुकड़ा तो 1968 में पुरातत्ववेत्ताओं को उत्तरी यरूशलेम में खुदाई के वक्‍त मिला था। यह टुकड़ा रोमी लोगों के ज़माने का था। इससे पता चलता है कि लोगों को कीलों से काठ पर ठोंका जाता था। रोमी सैनिकों ने शायद इसी तरह की कीलों से यीशु मसीह को काठ पर ठोंका था। हड्डी का वह टुकड़ा पत्थर के एक बक्से में मिला था जिसमें लाश के सड़ जाने पर उसकी हड्डियाँ रखी जाती थीं। इससे पता चलता है कि किसी को काठ पर लटकाकर मार डालने के बाद कभी-कभी उसे दफनाया जाता था।

कब्र
कब्र

यहूदी आम तौर पर गुफाओं या चट्टानों को काटकर बनायी गयी कब्रों में लाश दफनाते थे। राजाओं की कब्रों को छोड़ बाकी सभी कब्रें शहरों से बाहर होती थीं। गौर करने लायक बात यह है कि जो यहूदी कब्रें मिली हैं, वे बहुत सादी हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि सबूत दिखाते हैं कि यहूदी न तो मरे हुओं की पूजा करते थे और न ही अमर आत्मा की शिक्षा को बढ़ावा देते थे।