मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 21:1-46

21  जब वे यरूशलेम के करीब आ गए और जैतून पहाड़+ पर बैतफगे गाँव पहुँचे, तब यीशु ने दो चेलों को यह कहकर भेजा,+  “जो गाँव तुम्हें नज़र आ रहा है उसमें जाओ। वहाँ जाते ही तुम्हें एक गधी और उसका बच्चा बँधा हुआ मिलेगा। उन्हें खोलकर मेरे पास ले आओ।  और अगर कोई तुमसे कुछ कहे तो कहना, ‘प्रभु को इनकी ज़रूरत है।’ तब वह उन्हें फौरन भेज देगा।”  यह इसलिए हुआ ताकि यह वचन पूरा हो जो भविष्यवक्‍ता से कहलवाया गया था:  “सिय्योन की बेटी से कहो, ‘देख! तेरा राजा तेरे पास आ रहा है,+ वह कोमल स्वभाव का है+ और एक गधे पर, हाँ, बोझ ढोनेवाली गधी के बच्चे पर सवार है।’”+  तब वे चेले निकल पड़े और जैसा यीशु ने उनसे कहा था, उन्होंने वैसा ही किया।+  वे उस गधी और उसके बच्चे को ले आए और उन्होंने इन पर अपने ओढ़ने डाले और वह उन पर बैठ गया।+  तब भीड़ में से ज़्यादातर लोगों ने अपने कपड़े रास्ते में बिछाए+ जबकि दूसरे लोग पेड़ों से डालियाँ काटकर रास्ते में बिछाने लगे।  भीड़ के जो लोग उसके आगे-आगे चल रहे थे और जो उसके पीछे-पीछे आ रहे थे, वे पुकार रहे थे, “हम बिनती करते हैं, दाविद के वंशज को बचा ले!+ धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है!+ स्वर्ग* में रहनेवाले, हम बिनती करते हैं, इसे बचा ले!”+ 10  जब वह यरूशलेम पहुँचा, तो पूरे शहर में तहलका मच गया और सब कहने लगे, “यह कौन है?” 11  भीड़ के लोग कहते रहे, “यह भविष्यवक्‍ता यीशु है,+ गलील के नासरत का रहनेवाला!” 12  फिर यीशु मंदिर में गया और जो लोग मंदिर के अंदर बिक्री और खरीदारी कर रहे थे, उन सबको उसने खदेड़ दिया और पैसा बदलनेवाले सौदागरों की मेज़ें और कबूतर बेचनेवालों की चौकियाँ उलट दीं।+ 13  और उसने उनसे कहा, “लिखा है, ‘मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा,’+ मगर तुम इसे लुटेरों का अड्डा बना रहे हो।”+ 14  फिर मंदिर में उसके पास अंधे और लँगड़े आए और उसने उन्हें ठीक किया। 15  जब प्रधान याजकों और शास्त्रियों ने उसे आश्‍चर्य के काम करते देखा और मंदिर में लड़कों को यह पुकारते सुना, “हम बिनती करते हैं, दाविद के वंशज को बचा ले!”+ तो उन्हें बहुत गुस्सा आया।+ 16  उन्होंने उससे कहा, “क्या तू सुन रहा है, ये क्या कह रहे हैं?” यीशु ने उनसे कहा, “हाँ, क्या तुमने कभी नहीं पढ़ा, ‘नन्हे-मुन्‍नों और दूध-पीते बच्चों के मुँह से तूने तारीफ करवायी है’?”+ 17  और वह उन्हें छोड़कर यरूशलेम से बाहर बैतनियाह चला गया और उसने वहीं रात बितायी।+ 18  तड़के सुबह जब वह यरूशलेम की तरफ लौट रहा था तो उसे भूख लगी।+ 19  और रास्ते के किनारे जब एक अंजीर के पेड़ पर उसकी नज़र पड़ी तो वह उसके पास गया, मगर पत्तियों को छोड़ उसमें कुछ नहीं पाया।+ तब उसने पेड़ से कहा, “अब से फिर कभी तुझमें फल न लगें।”+ और अंजीर का वह पेड़ उसी घड़ी सूख गया। 20  जब चेलों ने इसे देखा, तो वे ताज्जुब करते हुए कहने लगे, “यह अंजीर का पेड़ फौरन कैसे सूख गया?”+ 21  यीशु ने कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ, अगर तुममें विश्‍वास हो और तुम शक न करो, तो तुम न सिर्फ वह करोगे जो मैंने इस अंजीर के पेड़ के साथ किया, बल्कि अगर तुम इस पहाड़ से कहोगे, ‘यहाँ से उखड़कर समुंदर में जा गिर,’ तो ऐसा हो जाएगा।+ 22  और तुम विश्‍वास के साथ प्रार्थना में जो कुछ माँगोगे, वह तुम्हें मिल जाएगा।”+ 23  जब वह मंदिर में जाकर सिखा रहा था, तब प्रधान याजक और लोगों के मुखिया उसके पास आए और उन्होंने कहा, “तू ये सब किस अधिकार से करता है? और किसने तुझे यह अधिकार दिया है?”+ 24  यीशु ने उनसे कहा, “मैं भी तुमसे एक बात पूछता हूँ। अगर तुम उसका जवाब दोगे, तो मैं भी तुम्हें बताऊँगा कि मैं ये सब किस अधिकार से करता हूँ: 25  जो बपतिस्मा यूहन्‍ना ने दिया, वह किसकी तरफ से था? स्वर्ग की तरफ से या इंसानों की तरफ से?”* वे एक-दूसरे से कहने लगे, “अगर हम कहें, ‘स्वर्ग की तरफ से,’ तो वह हमसे कहेगा, ‘फिर क्यों तुमने उसका यकीन नहीं किया?’+ 26  लेकिन अगर हम कहें, ‘इंसानों की तरफ से,’ तो पता नहीं यह भीड़ हमारे साथ क्या करेगी, क्योंकि ये सब यूहन्‍ना को एक भविष्यवक्‍ता मानते हैं।”+ 27  इसलिए उन्होंने यीशु को जवाब दिया, “हम नहीं जानते।” तब उसने कहा, “तो मैं भी तुम्हें नहीं बताऊँगा कि मैं किस अधिकार से यह सब करता हूँ। 28  तुम क्या सोचते हो? एक आदमी के दो बेटे थे। उसने पहले के पास जाकर कहा, ‘बेटा जा, आज अंगूरों के बाग में काम कर।’ 29  तब उस लड़के ने कहा, ‘मैं नहीं जाऊँगा,’ मगर बाद में उसे पछतावा हुआ और वह गया। 30  फिर दूसरे बेटे के पास जाकर पिता ने वही बात कही। बेटे ने पिता से कहा, ‘ठीक है, मैं जाऊँगा।’ मगर वह नहीं गया। 31  इन दोनों में से किसने अपने पिता की मरज़ी पूरी की?” उन्होंने कहा, “पहले ने।” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुमसे सच कहता हूँ कि कर-वसूलनेवाले और वेश्‍याएँ तुमसे पहले परमेश्‍वर के राज में जा रहे हैं।+ 32  क्योंकि यूहन्‍ना नेकी की राह दिखाता हुआ तुम्हारे पास आया, फिर भी तुमने उस पर यकीन नहीं किया। लेकिन कर-वसूलनेवालों और वेश्‍याओं ने उस पर यकीन किया।+ और यह सब देखने के बाद भी तुम्हें पछतावा नहीं हुआ और तुमने उस पर यकीन नहीं किया। 33  एक और मिसाल सुनो: एक ज़मींदार ने अंगूरों का एक बाग लगाया+ और उसके चारों तरफ बाड़ा बाँधा। उसने बाग में अंगूर रौंदने का हौद खोदा और एक मीनार खड़ी की।+ फिर उसे बागबानों को ठेके पर देकर वह परदेस चला गया।+ 34  कटाई का मौसम आने पर उसने अपने दासों को बागबानों के पास भेजा कि वे फसल में से उसका हिस्सा ले आएँ। 35  मगर बागबानों ने उसके दासों को पकड़ लिया और एक को उन्होंने पीटा, दूसरे का खून कर दिया और तीसरे को पत्थरों से मार डाला।+ 36  मालिक ने कुछ और दासों को भेजा, जो गिनती में पहले से ज़्यादा थे। लेकिन बागबानों ने इनके साथ भी वैसा ही सलूक किया।+ 37  आखिर में उसने अपने बेटे को यह सोचकर उनके पास भेजा, ‘वे मेरे बेटे की ज़रूर इज़्ज़त करेंगे।’ 38  उसके बेटे को देखकर बागबानों ने आपस में कहा, ‘यह तो वारिस है।+ चलो इसे मार डालें और इसकी विरासत ले लें!’ 39  तब उन्होंने उसे पकड़ लिया और बाग के बाहर ले जाकर मार डाला।+ 40  इसलिए जब बाग का मालिक आएगा, तो वह उन बागबानों के साथ क्या करेगा?” 41  उन्होंने कहा, “वे दुष्ट हैं, इसलिए वह उनका भयानक तरीके से नाश करेगा और अपने बाग का ठेका दूसरे बागबानों को दे देगा, जो कटाई के बाद उसका हिस्सा उसे दिया करेंगे।” 42  यीशु ने उनसे कहा, “क्या तुमने शास्त्र में कभी नहीं पढ़ा, ‘जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने ठुकरा दिया, वही कोने का मुख्य पत्थर बन गया है।’+ क्या तुमने यह भी नहीं पढ़ा, ‘यह यहोवा की तरफ से हुआ है और हमारी नज़र में लाजवाब है’?+ 43  इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, परमेश्‍वर का राज तुमसे ले लिया जाएगा और एक ऐसे राष्ट्र को दे दिया जाएगा, जो राज के योग्य फल पैदा करता है। 44  जो कोई इस पत्थर पर गिरेगा वह टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।+ और जिस किसी पर यह पत्थर गिरेगा, उसे यह चूर-चूर कर देगा।”+ 45  जब प्रधान याजकों और फरीसियों ने उसकी मिसालें सुनीं, तो वे समझ गए कि वह उन्हीं के बारे में बोल रहा है।+ 46  हालाँकि वे उसे पकड़ना* चाहते थे मगर भीड़ से डरते थे, क्योंकि लोग यीशु को एक भविष्यवक्‍ता मानते थे।+

कई फुटनोट

या “सबसे ऊँची जगह।”
या “उसकी शुरूआत इंसानों से हुई?”
या “गिरफ्तार करना।”

अध्ययन नोट

बैतफगे गाँव: जैतून पहाड़ पर बसे इस गाँव का नाम एक इब्रानी शब्द से निकला है जिसका शायद मतलब है, “अंजीर की पहली फसल का घर।” यहूदियों की मान्यता है कि यह गाँव यरूशलेम और बैतनियाह के बीच, जैतून पहाड़ की चोटी के पास दक्षिण-पूर्वी ढलान पर था। इसके और यरूशलेम के बीच की दूरी करीब 1 कि.मी. (1 मील से कम) थी।​—मर 11:1; लूक 19:29; अति. क7, नक्शा 6 देखें।

एक गधे पर, हाँ, . . . गधी के बच्चे पर: हालाँकि मत 21:2, 7 में दो जानवरों की बात की गयी है, लेकिन जक 9:9 की भविष्यवाणी बताती है कि राजा सिर्फ एक जानवर पर सवार होगा।​—मत 21:2 का अध्ययन नोट देखें।

एक गधी और उसका बच्चा बँधा हुआ: सिर्फ मत्ती ने गधी और उसके बच्चे का ज़िक्र किया। (मर 11:2-7; लूक 19:30-35; यूह 12:14, 15) यीशु गधी के बच्चे पर बैठा था, इसलिए ज़ाहिर-सी बात है कि मरकुस, लूका और यूहन्‍ना ने सिर्फ एक जानवर की बात की।​—मत 21:5 का अध्ययन नोट देखें।

यहोवा का यह वचन पूरा हो, जो उसने अपने भविष्यवक्‍ता से कहलवाया था: ये और इनसे मिलते-जुलते शब्द मत्ती की किताब में कई बार दर्ज़ किए गए हैं। ऐसा शायद इसलिए किया गया ताकि यहूदी समझ सकें कि यीशु ही वादा किया गया मसीहा है।​—मत 2:15, 23; 4:14; 8:17; 12:17; 13:35; 21:4; 26:56; 27:9.

ताकि यह वचन पूरा हो जो भविष्यवक्‍ता से कहलवाया गया था: ज़ाहिर है कि मत 21:5 का पहला भाग यश 62:11 से और दूसरा भाग जक 9:9 से लिया गया है।​—मत 1:22 का अध्ययन नोट देखें।

कोमल स्वभाव: ऐसा स्वभाव उन लोगों का होता है जो परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करने और उसके मार्गदर्शन पर चलने के लिए तैयार रहते हैं और दूसरों पर धौंस जमाने की कोशिश नहीं करते। इसका मतलब यह नहीं कि वे बुज़दिल या कमज़ोर हैं। सेप्टुआजेंट में ये शब्द उस इब्रानी शब्द के लिए इस्तेमाल हुए हैं जिसका अनुवाद “दीन” या “नम्र” किया गया है। यह शब्द मूसा (गि 12:3) और मसीहा के लिए (जक 9:9; मत 21:5), साथ ही उन लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो सीखने के लिए तैयार रहते हैं (भज 25:9) और जो धरती के वारिस होंगे (भज 37:11)। यीशु ने खुद के बारे में कहा कि वह कोमल स्वभाव का या दीन है।​—मत 11:29.

एक गधी और उसका बच्चा बँधा हुआ: सिर्फ मत्ती ने गधी और उसके बच्चे का ज़िक्र किया। (मर 11:2-7; लूक 19:30-35; यूह 12:14, 15) यीशु गधी के बच्चे पर बैठा था, इसलिए ज़ाहिर-सी बात है कि मरकुस, लूका और यूहन्‍ना ने सिर्फ एक जानवर की बात की।​—मत 21:5 का अध्ययन नोट देखें।

सिय्योन की बेटी: या “बेटी सिय्योन,” जैसे बाइबल के कुछ अनुवादों में लिखा है। बाइबल में शहरों को अकसर एक औरत के रूप में बताया गया है या उनके लिए स्त्रीलिंग शब्द इस्तेमाल हुए हैं। यहाँ शब्द “बेटी” का मतलब या तो शहर हो सकता है या उसके लोग। “सिय्योन” अकसर यरूशलेम शहर के लिए इस्तेमाल हुआ है।

कोमल स्वभाव का: या “नम्र।”​—मत 5:5 का अध्ययन नोट देखें।

एक गधे पर, हाँ, . . . गधी के बच्चे पर: हालाँकि मत 21:2, 7 में दो जानवरों की बात की गयी है, लेकिन जक 9:9 की भविष्यवाणी बताती है कि राजा सिर्फ एक जानवर पर सवार होगा।​—मत 21:2 का अध्ययन नोट देखें।

एक गधी और उसका बच्चा बँधा हुआ: सिर्फ मत्ती ने गधी और उसके बच्चे का ज़िक्र किया। (मर 11:2-7; लूक 19:30-35; यूह 12:14, 15) यीशु गधी के बच्चे पर बैठा था, इसलिए ज़ाहिर-सी बात है कि मरकुस, लूका और यूहन्‍ना ने सिर्फ एक जानवर की बात की।​—मत 21:5 का अध्ययन नोट देखें।

एक गधे पर, हाँ, . . . गधी के बच्चे पर: हालाँकि मत 21:2, 7 में दो जानवरों की बात की गयी है, लेकिन जक 9:9 की भविष्यवाणी बताती है कि राजा सिर्फ एक जानवर पर सवार होगा।​—मत 21:2 का अध्ययन नोट देखें।

गधी और उसके बच्चे: मत 21:2, 5 के अध्ययन नोट देखें।

उन पर बैठ गया: यानी ओढ़नों पर।

दाविद के वंश से: ये शब्द दिखाते हैं कि यीशु दाविद के खानदान से है और उस राज का वारिस है जिसके बारे में दाविद से करार किया गया था।

राजा दाविद: इस वंशावली में कई राजाओं के नाम दिए हैं, लेकिन “राजा” सिर्फ दाविद को कहा गया है। इसराएल के शाही खानदान को ‘दाविद का घराना’ कहा जाता था। (1रा 12:19, 20) मत्ती ने आयत 1 में कहा कि यीशु “दाविद के वंश से था।” इस तरह उसने राज के विषय पर ज़ोर दिया और समझाया कि यीशु ही उस राज का वारिस है जिसके बारे में दाविद से करार किया गया था।​—2शम 7:11-16.

उसे झुककर प्रणाम करके: या “उसे दंडवत करके; उसका सम्मान करके।” जब इस गैर-यहूदी औरत ने यीशु को ‘दाविद का वंशज’ कहा (मत 15:22), तो ज़ाहिर है कि वह मान रही थी कि यीशु वादा किया हुआ मसीहा है। इसलिए उसने यीशु को परमेश्‍वर का प्रतिनिधि समझकर प्रणाम किया, न कि कोई ईश्‍वर या देवता मानकर।​—मत 2:2; 8:2; 14:33; 18:26 के अध्ययन नोट देखें।

दाविद के वंशज: दो अंधे आदमियों ने यीशु को ‘दाविद का वंशज’ कहकर सबके सामने कबूल किया कि वही मसीहा है।​—मत 1:1, 6; 15:25 के अध्ययन नोट देखें।

हम बिनती करते हैं . . . बचा ले: शा., “होसन्‍ना।” यह यूनानी शब्द एक इब्रानी शब्द से निकला है जिसका मतलब है, “हम बिनती करते हैं, बचा ले” या “दया करके बचा ले।” यहाँ इस शब्द का मतलब है, उद्धार या जीत के लिए परमेश्‍वर से बिनती करना। इसका अनुवाद “दया करके उद्धार दिला” भी किया जा सकता है। बाद में यह शब्द प्रार्थना और महिमा करने में इस्तेमाल होने लगा। इसके इब्रानी शब्द भज 118:25 में आते हैं। यह आयत ‘हालेल के भजनों’ का भाग है जो हर साल फसह के त्योहार के दौरान गाए जाते थे। इसलिए ये शब्द इस मौके पर आसानी से लोगों को याद आ गए होंगे। परमेश्‍वर ने दाविद के वंशज को बचाने की बिनती का जवाब कई तरीकों से दिया, उनमें से एक था कि उसने इस वंशज को दोबारा ज़िंदा किया। मत 21:42 में यीशु ने भज 118:22, 23 की बातें बताकर ज़ाहिर किया कि ये मसीहा के बारे में हैं।

दाविद के वंशज: इन शब्दों से पता चलता है कि यीशु किसके वंश से आया और वही वादा किया हुआ मसीहा है।​—मत 1:1, 6; 15:25; 20:30 के अध्ययन नोट देखें।

यहोवा: यहाँ भज 118:25, 26 की बातें लिखी हैं। मूल इब्रानी पाठ में इन आयतों में परमेश्‍वर के नाम के लिए चार इब्रानी व्यंजन (हिंदी में य-ह-व-ह) इस्तेमाल हुए हैं।​—अति. ग देखें।

पूरे शहर में तहलका मच गया: या “पूरा शहर हिल (या दहल) गया।” शहर के लोगों में मची खलबली बताने के लिए एक ऐसी यूनानी क्रिया इस्तेमाल हुई है जो असल में भूकंप या तूफान के अंजाम बताने के लिए इस्तेमाल होती है। (मत 27:51; प्रक 6:13) इसी से जुड़ी यूनानी संज्ञा सेसमॉस का अनुवाद “आँधी” या “भूकंप” किया गया है।​—मत 8:24; 24:7; 27:54; 28:2.

मंदिर: मुमकिन है कि यहाँ मंदिर के उस हिस्से की बात की गयी है जिसे गैर-यहूदियों का आँगन कहा जाता था।​—अति. ख11 देखें।

पैसा बदलनेवाले सौदागरों: उस ज़माने में कई तरह के सिक्के होते थे, मगर ज़ाहिर है कि मंदिर का सालाना कर चुकाने या बलिदान के जानवर खरीदने के लिए एक खास सिक्का इस्तेमाल किया जाता था। इसलिए दूसरी जगहों से यरूशलेम आए यहूदियों को अपने पैसे बदलने होते थे। ज़ाहिर है कि यीशु ने देखा कि पैसा बदलनेवाले सौदागर इसके लिए बहुत ज़्यादा कीमत ले रहे थे और ऐसा करके वे असल में लोगों को लूट रहे थे।

लुटेरों का अड्डा: शा., “लुटेरों की गुफा।” यीशु यहाँ यिर्म 7:11 में लिखी बात कह रहा था। उसने व्यापारियों और पैसा बदलनेवाले सौदागरों को शायद इसलिए ‘लुटेरे’ कहा क्योंकि वे बलिदान के जानवर ऊँचे दामों में बेचकर और पैसा बदलने के लिए बड़ी कीमत लेकर बहुत मुनाफा कमा रहे थे। यीशु उन पर इसलिए भी भड़क उठा क्योंकि उन्होंने प्रार्थना के घर, यानी यहोवा की उपासना की जगह को बाज़ार बनाकर रख दिया था।

मंदिर: मुमकिन है कि यहाँ गैर-यहूदियों के आँगन की बात की गयी है क्योंकि अंधे और लँगड़े लोगों को मंदिर के कुछ भीतरी भागों में जाने की मनाही थी। मत्ती का ब्यौरा शायद यह दिखाता है कि इस मौके पर यीशु ने न सिर्फ मंदिर साफ करने में बल्कि उसके पास आए अंधों और लँगड़ों को ठीक करने में भी जोश से काम लिया।

दाविद के वंशज: इन शब्दों से पता चलता है कि यीशु किसके वंश से आया और वही वादा किया हुआ मसीहा है।​—मत 1:1, 6; 15:25; 20:30 के अध्ययन नोट देखें।

हम बिनती करते हैं . . . बचा ले: शा., “होसन्‍ना।” यह यूनानी शब्द एक इब्रानी शब्द से निकला है जिसका मतलब है, “हम बिनती करते हैं, बचा ले” या “दया करके बचा ले।” यहाँ इस शब्द का मतलब है, उद्धार या जीत के लिए परमेश्‍वर से बिनती करना। इसका अनुवाद “दया करके उद्धार दिला” भी किया जा सकता है। बाद में यह शब्द प्रार्थना और महिमा करने में इस्तेमाल होने लगा। इसके इब्रानी शब्द भज 118:25 में आते हैं। यह आयत ‘हालेल के भजनों’ का भाग है जो हर साल फसह के त्योहार के दौरान गाए जाते थे। इसलिए ये शब्द इस मौके पर आसानी से लोगों को याद आ गए होंगे। परमेश्‍वर ने दाविद के वंशज को बचाने की बिनती का जवाब कई तरीकों से दिया, उनमें से एक था कि उसने इस वंशज को दोबारा ज़िंदा किया। मत 21:42 में यीशु ने भज 118:22, 23 की बातें बताकर ज़ाहिर किया कि ये मसीहा के बारे में हैं।

हम बिनती करते हैं, दाविद के वंशज को बचा ले: मत 21:9 का अध्ययन नोट देखें।

बैतनियाह: यह गाँव जैतून पहाड़ की दक्षिण-पूर्वी ढलान पर बसा हुआ था, जो यरूशलेम से करीब 3 कि.मी. (2 मील) की दूरी पर था। (यूह 11:18, फु.) मारथा, मरियम और लाज़र का घर इसी गाँव में था और लगता है कि यीशु जब यहूदिया में प्रचार करता था तो वह इनके घर पर ही रुकता था। (यूह 11:1) आज इस जगह एक छोटा-सा गाँव है जिसके अरबी नाम का मतलब है, “लाज़र की जगह।”

पत्तियों को छोड़ उसमें कुछ नहीं पाया: साल के इस समय में अंजीर के पेड़ पर फल नहीं लगते थे। मगर अजीब बात यह थी कि इस पेड़ पर पत्तियाँ थीं। आम तौर पर पत्तियों के साथ पहली फसल के फल भी लगते हैं। मगर क्योंकि इस पेड़ पर सिर्फ पत्तियाँ थीं इसलिए यीशु समझ गया कि इस पर अब कोई फल नहीं लगनेवाला, इसका रूप एक धोखा है। इसलिए यीशु ने पेड़ को शाप दिया कि इस पर फिर कभी फल न लगें। इसके बाद यह पेड़ सूख गया।

सच: यूनानी शब्द आमीन, इब्रानी शब्द आमेन से लिया गया है जिसका मतलब है, “ऐसा ही हो” या “ज़रूर।” यीशु अकसर कोई बात, वादा या भविष्यवाणी करने से पहले इस शब्द का इस्तेमाल करता था ताकि वह जो कह रहा है उस पर लोगों को भरोसा हो। यीशु ने जिस तरह “सच” यानी आमीन शब्द का इस्तेमाल किया, वैसा दूसरी धार्मिक किताबों में नहीं हुआ है। जहाँ यह शब्द साथ-साथ आया है (आमीन-आमीन), वहाँ उस शब्द का अनुवाद “सच-सच” किया गया है, जैसे हम यूहन्‍ना की खुशखबरी की किताब में कई बार देख सकते हैं।​—यूह 1:51.

मुखियाओं: शा., “बुज़ुर्गों।” बाइबल में यूनानी शब्द प्रेसबाइटेरोस खासकर ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है जो समाज या देश में अधिकार और ज़िम्मेदारी के पद पर थे। हालाँकि यह शब्द कभी-कभी बड़ी उम्र के लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ है (जैसे लूक 15:25 में “बड़ा बेटा” और प्रेष 2:17 में “बुज़ुर्ग”), लेकिन इसका हमेशा यही मतलब नहीं है। यहाँ इस शब्द का मतलब है यहूदी राष्ट्र के अगुवे, जिनका ज़िक्र अकसर प्रधान याजकों और शास्त्रियों के साथ किया जाता है। महासभा इन्हीं तीन समूहों के आदमियों से मिलकर बनी होती थी।​—मत 21:23; 26:3, 47, 57; 27:1, 41; 28:12; शब्दावली में “मुखिया; बुज़ुर्ग” देखें।

मुखिया: मत 16:21 का अध्ययन नोट देखें।

उस लड़के ने कहा, ‘मैं नहीं जाऊँगा’: इस मिसाल (मत 21:28-31) के बारे में बताते वक्‍त कुछ यूनानी हस्तलिपियों में उस बेटे का ज़िक्र पहले किया गया है जिसने “हाँ” कहा, मगर काम पर नहीं गया। (नयी दुनिया अनुवाद​—मसीही यूनानी शास्त्र देखें।) चाहे किसी भी बेटे का ज़िक्र पहले किया गया हो, सबक में कोई फर्क नहीं है। लेकिन जैसे इस बाइबल में मना करनेवाले बेटे का ज़िक्र पहले किया गया है, उसका और भी ठोस आधार हस्तलिपियों में पाया जाता है।

कर-वसूलनेवाले: कई यहूदी, रोमी अधिकारियों के लिए कर वसूलते थे। इन यहूदियों से नफरत की जाती थी क्योंकि वे ऐसी विदेशी सरकार का साथ दे रहे थे जिसे लोग पसंद नहीं करते थे। इसके अलावा, ये यहूदी कर के लिए तय की गयी रकम से ज़्यादा वसूल करते थे। यहूदी लोग कर-वसूलनेवालों को पापी और वेश्‍याओं के जैसा तुच्छ मानते थे और उनसे दूर ही रहते थे।​—मत 11:19; 21:32.

कर-वसूलनेवाले: मत 5:46 का अध्ययन नोट देखें।

मिसालें: या “नीति-कथाएँ।” यूनानी शब्द पैराबोले का शाब्दिक मतलब है, “के पास (या साथ-साथ) रखना।” इस शब्द का मतलब एक नीति-कथा, नीतिवचन या मिसाल भी हो सकता है। यीशु अकसर किसी बात को समझाने के लिए एक चीज़ को उससे मिलती-जुलती दूसरी चीज़ ‘के पास रखता’ यानी उससे तुलना करता था। (मर 4:30) उसकी मिसालें छोटी होती थीं और अकसर काल्पनिक कहानियाँ होती थीं, जिनसे कोई नैतिक शिक्षा या परमेश्‍वर के बारे में सच्चाई सीखने को मिलती थी।

मिसाल: या “नीति-कथा।”​—मत 13:3 का अध्ययन नोट देखें।

मीनार: मीनार पर से बाग पर नज़र रखना आसान होता था ताकि इसे चोरों और जानवरों के हमलों से बचाया जा सके।​—यश 5:2.

ठेके पर देकर: पहली सदी में इसराएल में ऐसा करना आम था। बाग का मालिक होने के नाते उसका मुनाफे की उम्मीद करना सही होता। मगर इस मिसाल में मालिक ने बाग में शुरूआत के काफी सारे काम भी कर दिए थे, इसलिए वापसी पर मुनाफे की उम्मीद करना और भी सही था।

भयानक तरीके से नाश: या “बुरी तरह से नाश।” यूनानी पाठ में यहाँ एक ही मूल शब्द दो अलग-अलग रूप में लिखा गया है ताकि न्याय का संदेश और भी दमदार हो: “वह बुरे लोगों को बुरी तरह से नाश करेगा।”

शास्त्र: अकसर यह शब्द परमेश्‍वर की प्रेरणा से लिखे गए पूरे इब्रानी शास्त्र के लिए इस्तेमाल किया गया है।

कोने का मुख्य पत्थर: या “सबसे ज़रूरी पत्थर।” यहाँ इस्तेमाल हुए यूनानी शब्दों और भज 118:22 में इस्तेमाल हुए इब्रानी शब्दों का शाब्दिक मतलब है, “कोने का सिरा।” इन शब्दों को अलग-अलग तरीकों से समझा गया है। लेकिन ज़ाहिर है कि इनका मतलब है, इमारत की दो दीवारें जहाँ मिलती थीं उसके ऊपर लगाया जानेवाला पत्थर। इस पत्थर से दीवारें मज़बूती से जुड़ी रहती थीं। यीशु ने भजन की भविष्यवाणी बतायी और ज़ाहिर किया कि वही “कोने का मुख्य पत्थर” है। जिस तरह एक इमारत के एकदम ऊपर लगा पत्थर सबको दिखायी देता है, उसी तरह यीशु मसीह अभिषिक्‍त मसीहियों से बनी मंडली, यानी लाक्षणिक मंदिर के सिरे का पत्थर है।

यहोवा: यहाँ भज 118:22, 23 की बातें लिखी हैं। मूल इब्रानी पाठ में इन आयतों में परमेश्‍वर के नाम के लिए चार इब्रानी व्यंजन (हिंदी में य-ह-व-ह) इस्तेमाल हुए हैं।​—अति. ग देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

बैतफगे, जैतून पहाड़ और यरूशलेम
बैतफगे, जैतून पहाड़ और यरूशलेम

इस छोटे-से वीडियो में पूरब से यरूशलेम तक का रास्ता दिखाया गया है। यह रास्ता एट-टूर गाँव से होकर जैतून पहाड़ की एक ऊँची जगह तक जाता है। मालूम होता है कि एट-टूर, बाइबल में बताया गया बैतफगे गाँव है। इसके पूरब में यानी जैतून पहाड़ की पूर्वी ढलान पर बैतनियाह गाँव बसा था। जब यीशु यरूशलेम आता था तो वह और उसके चेले अकसर बैतनियाह में रात काटते थे जो आज एल-अज़ारीया (या एल आइज़ारीया) के नाम से जाना जाता है। यह एक अरबी नाम है जिसका मतलब है “लाज़र की जगह।” यीशु यहीं मारथा, मरियम और लाज़र के घर रुकता था। (मत 21:17; मर 11:11; लूक 21:37; यूह 11:1) जब यीशु उनके घर से यरूशलेम जाता था, तो शायद वह उसी रास्ते से जाता था जो इस वीडियो में दिखाया गया है। ईसवी सन्‌ 33 के नीसान 9 को जब यीशु एक गधी के बच्चे पर सवार होकर जैतून पहाड़ से यरूशलेम में दाखिल हुआ, तो वह बैतफगे के रास्ते से होकर आया होगा।

1. बैतनियाह से बैतफगे का रास्ता

2. बैतफगे

3. जैतून पहाड़

4. किदरोन घाटी

5. पहाड़ जिस पर पहले मंदिर था

गधी का बच्चा
गधी का बच्चा

गधे के खुर बहुत मज़बूत होते हैं। वह घोड़े के परिवार का ही जानवर है, मगर घोड़े से बहुत अलग होता है। जैसे, वह छोटा होता है, उसकी गरदन के बाल छोटे-छोटे होते हैं, उसके कान बड़े होते हैं और उसकी पूँछ छोटी और सिर्फ आखिर में ब्रश जैसे बाल होते हैं। हालाँकि गधे की मूर्खता और उसके अड़ियलपन पर कई कहावतें बनी हैं, लेकिन असल में यह घोड़े से ज़्यादा समझदार होता है। यह आम तौर पर सब्र रखनेवाला जानवर है। इसराएल में आदमी, औरत, यहाँ तक कि जाने-माने लोग भी गधों पर सवारी करते थे। (यह 15:18; न्या 5:10; 10:3, 4; 12:14; 1शम 25:42) दाविद के बेटे सुलैमान का जब अभिषेक किया जाना था, तब वह अपने पिता की मादा खच्चर पर सवार हुआ था। (खच्चर, गधे और घोड़ी की संकर संतान होती है।) (1रा 1:33-40) इसलिए यह एकदम सही था कि महान सुलैमान, यीशु जक 9:9 की भविष्यवाणी पूरी करे यानी वह एक घोड़े पर नहीं बल्कि गधी के बच्चे पर सवार हो।

अंगूर रौंदने का हौद
अंगूर रौंदने का हौद

इसराएल में अगस्त और सितंबर में अंगूर की फसल काटी जाती थी। लेकिन कटाई कब की जाती थी यह इस बात पर निर्भर करता था कि किस किस्म के अंगूर हैं और इलाके का मौसम कैसा है। अंगूरों को आम तौर पर चूने-पत्थर से बने कुंड या चट्टानी ज़मीन में बनाए हौद में रखा जाता था। आम तौर पर आदमी नंगे पैरों से अंगूर रौंदते थे और ऐसा करते वक्‍त वे गीत भी गाते थे।​—यश 16:10; यिर्म 25:30; 48:33.

1. ताज़े अंगूर

2. अंगूर रौंदने का हौद

3. नाली

4. रस जमा करने की हौदी

5. दाख-मदिरा रखनेवाले मिट्टी के घड़े