मत्ती के मुताबिक खुशखबरी 20:1-34

20  इसलिए कि स्वर्ग का राज उस मालिक जैसा है, जिसका अंगूरों का बाग था। वह तड़के सुबह बाहर निकला कि अपने बाग में दिहाड़ी पर काम करनेवाले मज़दूर लगाए।+  वह मज़दूरों को दिन-भर की मज़दूरी के लिए एक दीनार देने को राज़ी हुआ और उसने उन्हें अपने बाग में भेज दिया।  फिर वह तीसरे घंटे के करीब बाहर निकला और उसने देखा कि बाज़ार के चौक में कुछ मज़दूर खड़े हैं जिन्हें कोई काम नहीं मिला।  बाग के मालिक ने उनसे कहा, ‘तुम भी मेरे बाग में जाओ और जो ठीक होगा, वह मैं तुम्हें दूँगा।’  तब वे बाग में गए। वह फिर छठे और नौवें घंटे के करीब बाहर निकला और उसने ऐसा ही किया।  आखिर में, वह 11वें घंटे के करीब बाहर निकला और कई और मज़दूरों को खड़े देखा। तब बाग के मालिक ने उनसे पूछा, ‘तुम दिन-भर यहाँ बेकार क्यों खड़े रहे?’  उन्होंने कहा, ‘हमें किसी ने काम नहीं दिया।’ तब उसने कहा, ‘तुम भी मेरे बाग में जाओ।’  जब शाम हुई, तो बाग के मालिक ने काम की देखरेख करनेवाले आदमी से कहा, ‘मज़दूरों को बुला और उनकी मज़दूरी दे।+ जो आखिर में आए थे उनसे शुरू करते हुए, सबसे पहले आए मज़दूरों तक सबको दे।’  जब 11वें घंटे में काम पर लगनेवाले आदमी आए, तो उनमें से हरेक को एक दीनार मिला। 10  जब सबसे पहले आनेवालों की बारी आयी, तो उन्होंने सोचा कि उन्हें ज़्यादा मज़दूरी मिलेगी। मगर उन्हें भी एक दीनार दिया गया। 11  एक दीनार मिलने पर वे उस मालिक पर कुड़कुड़ाने लगे, 12  ‘ये जो आखिर में आए थे, इन्होंने बस एक ही घंटा काम किया, फिर भी तूने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जबकि हमने सारा दिन मेहनत की और तपती धूप सही!’ 13  मगर मालिक ने उनमें से एक को जवाब दिया, ‘देख भई, मैं तेरे साथ कोई नाइंसाफी नहीं कर रहा। क्या तू मेरे यहाँ एक दीनार पर काम करने के लिए राज़ी नहीं हुआ था?+ 14  इसलिए जो तेरा है वह ले और चला जा। जितना मैंने तुझे दिया है, उतना ही मैं आखिर में आनेवाले इस आदमी को देना चाहता हूँ। 15  क्या मुझे अधिकार नहीं कि अपने पैसे के साथ जो चाहे वह करूँ? या मैंने जो भलाई की है उसे देखकर तुझे जलन हो रही है?’+ 16  इस तरह, जो आखिरी हैं वे पहले होंगे और जो पहले हैं वे आखिरी।”+ 17  जब वे सब यरूशलेम जा रहे थे, तो रास्ते में यीशु ने अपने 12 चेलों को अलग ले जाकर उनसे कहा,+ 18  “देखो! हम यरूशलेम जा रहे हैं और इंसान का बेटा प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हवाले किया जाएगा। वे उसे मौत की सज़ा सुनाएँगे+ 19  और गैर-यहूदियों के हवाले कर देंगे कि वे उसका मज़ाक उड़ाएँ, उसे कोड़े लगाएँ और काठ पर लटकाकर मार डालें।+ फिर तीसरे दिन उसे ज़िंदा कर दिया जाएगा।”+ 20  इसके बाद, जब्दी की पत्नी अपने दो बेटों+ के साथ यीशु के पास आयी और उसे झुककर प्रणाम किया। वह उससे कुछ माँगना चाहती थी।+ 21  यीशु ने उससे कहा, “तू क्या चाहती है?” वह बोली, “मुझसे वादा कर कि तेरे राज में, मेरे ये दोनों बेटे, एक तेरे दाएँ और दूसरा तेरे बाएँ बैठे।”+ 22  यीशु ने कहा, “तुम नहीं जानते कि तुम क्या माँग रहे हो। क्या तुम वह प्याला पी सकते हो, जो मैं पीनेवाला हूँ?”+ उन्होंने कहा, “हम पी सकते हैं।” 23  यीशु ने उनसे कहा, “तुम मेरा प्याला ज़रूर पीओगे,+ मगर मेरे दायीं या बायीं तरफ बैठने की इजाज़त देने का अधिकार मेरे पास नहीं। ये जगह उनके लिए हैं, जिनके लिए मेरे पिता ने इन्हें तैयार किया है।”+ 24  जब बाकी दस ने इस बारे में सुना, तो उन्हें दोनों भाइयों पर बहुत गुस्सा आया।+ 25  मगर यीशु ने चेलों को अपने पास बुलाकर कहा, “तुम जानते हो कि दुनिया के अधिकारी लोगों पर हुक्म चलाते हैं और उनके बड़े-बड़े लोग उन पर अधिकार जताते हैं।+ 26  मगर तुम्हारे बीच ऐसा नहीं होना चाहिए,+ बल्कि तुममें जो बड़ा बनना चाहता है, उसे तुम्हारा सेवक होना चाहिए+ 27  और जो कोई तुममें पहला होना चाहता है, उसे तुम्हारा दास होना चाहिए।+ 28  जैसे इंसान का बेटा भी सेवा करवाने नहीं, बल्कि सेवा करने आया है+ और इसलिए आया है कि बहुतों की फिरौती के लिए अपनी जान बदले में दे।”+ 29  जब वे यरीहो से बाहर जा रहे थे, तब एक बड़ी भीड़ यीशु के पीछे आने लगी। 30  और देखो! दो अंधे सड़क के किनारे बैठे थे। जब उन्होंने सुना कि यीशु वहाँ से गुज़र रहा है तो वे ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगे, “हे प्रभु, दाविद के वंशज, हम पर दया कर!”+ 31  मगर भीड़ ने उन्हें डाँटा कि वे चुप हो जाएँ। लेकिन वे और ज़ोर से चिल्लाने लगे, “हे प्रभु, दाविद के वंशज, हम पर दया कर!” 32  तब यीशु रुक गया और उसने उन्हें बुलाकर कहा, “तुम क्या चाहते हो, मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ?” 33  उन्होंने कहा, “प्रभु, हमारी आँखें ठीक हो जाएँ।” 34  यह देखकर यीशु तड़प उठा+ और उसने उनकी आँखों को छुआ।+ उसी वक्‍त उनकी आँखों की रौशनी लौट आयी और वे उसके पीछे हो लिए।

कई फुटनोट

अध्ययन नोट

दिहाड़ी पर काम करनेवाले मज़दूर लगाए: कुछ मज़दूरों को फसल की पूरी कटाई के दौरान काम पर लगाया जाता था, जबकि दूसरों को ज़रूरत के हिसाब से एक दिन के लिए काम पर लगाया जाता था।

दीनार: चाँदी का रोमी सिक्का जिसका वज़न करीब 3.85 ग्रा. था। इसके एक तरफ कैसर की सूरत बनी होती थी। जैसे यह आयत दिखाती है, यीशु के ज़माने में खेतों में काम करनेवाले मज़दूरों को आम तौर पर एक दिन 12 घंटे काम करने के लिए एक दीनार दिया जाता था।​—शब्दावली और अति. ख14 देखें।

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

छठे . . . घंटे के करीब: यानी दोपहर करीब 12 बजे।​—मत 20:3 का अध्ययन नोट देखें।

नौवें घंटे के करीब: यानी दोपहर करीब 3 बजे।​—मत 20:3 का अध्ययन नोट देखें।

तीसरे घंटे के करीब: यानी सुबह करीब 9 बजे। पहली सदी के यहूदी मानते थे कि दिन के 12 घंटे होते हैं जो सूरज निकलने यानी सुबह करीब 6 बजे से शुरू होता है। (यूह 11:9) इस हिसाब से तीसरा घंटा सुबह करीब 9 बजे होता था, छठा घंटा दोपहर करीब 12 बजे और नौवाँ घंटा करीब 3 बजे होता था। उन दिनों घड़ियाँ नहीं होती थीं, इसलिए अंदाज़े से ही समय बताया जाता था।​—यूह 1:39; 4:6; 19:14; प्रेष 10:3, 9.

11वें घंटे के करीब: यानी शाम करीब 5 बजे।​—मत 20:3 का अध्ययन नोट देखें।

ईर्ष्या: शा., “बुरी; दुष्ट।” सचमुच की आँखों में अगर कोई खराबी हो या वे स्वस्थ न हों तो साफ दिखायी नहीं देगा। उसी तरह अगर एक इंसान की आँखों में ईर्ष्या भरी हो तो वह ज़रूरी बातों पर ध्यान नहीं दे पाएगा। (मत 6:33) ऐसी आँखें संतुष्ट नहीं होतीं बल्कि उनमें लालच भरा होता है। वे भटक जाती हैं और बेईमान होती हैं। उनकी वजह से एक इंसान मामले की जाँच ठीक से नहीं कर पाता और हर बात में अपना स्वार्थ ढूँढ़ने लगता है।​—मत 6:22 का अध्ययन नोट देखें।

भलाई: या “दरियादिली।” यह आयत दिखाती है कि दरियादिल होने की वजह से ही एक इंसान भलाई करता है।

तुझे जलन हो रही है: शा., “तेरी आँख दुष्ट है।” जिस यूनानी शब्द का अनुवाद “जलन” किया गया है उसका शाब्दिक मतलब है, “बुरा; दुष्ट।” (मत 6:23 का अध्ययन नोट देखें।) शब्द “आँख” यहाँ लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब है, एक व्यक्‍ति के इरादे, स्वभाव या भावनाएँ।​—मर 7:22 में दिए शब्द, “ईर्ष्या से भरी आँखें” से तुलना करें।

यरदन के पार यहूदिया की सरहदों: ज़ाहिर है कि यहाँ यरदन नदी के पूरब में पेरिया की बात की गयी है, खासकर पेरिया के वे हिस्से जो यहूदिया की सरहद के पास थे। इस आयत के मुताबिक यीशु गलील से चला गया और दोबारा ज़िंदा होने के बाद ही यहाँ वापस आया।​—अति. क7, नक्शा 5 देखें।

जब वे . . . जा रहे थे: कुछ हस्तलिपियों के मुताबिक, यीशु यरूशलेम जानेवाला था, मगर यहाँ जो लिखा है, उसका और भी ठोस आधार हस्तलिपियों में पाया जाता है।

यरूशलेम जा रहे थे: यरूशलेम समुद्र-तल से करीब 2,500 फुट (750 मी.) की ऊँचाई पर था, इसलिए इन शब्दों का अनुवाद “ऊपर यरूशलेम जा रहे थे” भी किया जा सकता है। यीशु और उसके चेले यरदन घाटी से ऊपर चढ़ रहे थे (मत 19:1 का अध्ययन नोट देखें), जिसका सबसे निचला हिस्सा समुद्र-तल से करीब 1,300 फुट (400 मी.) नीचे है। इसलिए उन्हें यरूशलेम जाने के लिए करीब 3,330 फुट (1,000 मी.) ऊपर चढ़कर जाना था।

इंसान के बेटे: ये शब्द खुशखबरी की किताबों में करीब 80 बार आते हैं। यीशु ने ये शब्द खुद के लिए इस्तेमाल किए। ज़ाहिर है उसने ऐसा इसलिए किया ताकि साबित हो सके कि वह वाकई एक इंसान है और औरत से जन्मा है और आदम के बराबर है। इसलिए उसके पास इंसानों को पाप और मौत से छुड़ाने का अधिकार है। (रोम 5:12, 14, 15) इन शब्दों से यह भी पता चलता है कि यीशु ही मसीहा या मसीह है।​—दान 7:13, 14; शब्दावली में “इंसान का बेटा” देखें।

इंसान का बेटा: मत 8:20 का अध्ययन नोट देखें।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।” यूनानी शब्द स्टौरोस यहाँ पहली बार आया है। प्राचीन यूनानी भाषा में इस शब्द का खास तौर से मतलब है, सीधा काठ या खंभा। यह शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है और कभी-कभी उसका मतलब है, यीशु का चेला होने की वजह से यातना, दुख-तकलीफें, शर्मिंदगी, यहाँ तक कि मौत सहना।​—शब्दावली देखें।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।” प्राचीन यूनानी भाषा में यूनानी शब्द स्टौरोस का खास तौर से मतलब है, सीधा काठ या खंभा। यह शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है और कभी-कभी इसका मतलब है, यीशु का चेला होने की वजह से यातना, दुख-तकलीफें, शर्मिंदगी, यहाँ तक कि मौत सहना।​—शब्दावली देखें।

यातना का काठ: या “मौत का काठ।”​—शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें; साथ ही मत 10:38 और 16:24 के अध्ययन नोट भी देखें, जहाँ ये शब्द लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुए हैं।

काठ पर लटकाकर मार डालें: या “खंभे पर लटका दें।” यूनानी क्रिया स्टौरोऊ मसीही यूनानी शास्त्र में 40 बार आयी है और इस आयत में पहली बार इस्तेमाल हुई है। इस क्रिया की यूनानी संज्ञा स्टौरोस है जिसका अनुवाद “यातना का काठ” किया गया है। (मत 10:38; 16:24; 27:32 के अध्ययन नोट और शब्दावली में “काठ”; “यातना का काठ” देखें।) सेप्टुआजेंट में यही क्रिया एस 7:9 में इस्तेमाल हुई है, जहाँ हामान को करीब 65 फुट (20 मी.) ऊँचे काठ पर लटकाने का आदेश दिया गया है। प्राचीन यूनानी भाषा में इस क्रिया का मतलब है, “बल्लियाँ गाड़कर या तो बाड़ा बाँधना या सुरक्षा के लिए आड़ बनाना।”

झुककर उसे प्रणाम किया: या “उसे दंडवत किया; उसका आदर किया।” इब्रानी शास्त्र में बताए लोग भी जब भविष्यवक्‍ता, राजा या परमेश्‍वर के दूसरे प्रतिनिधियों से मिलते थे तो वे झुककर उन्हें प्रणाम करते थे। (1शम 25:23, 24; 2शम 14:4-7; 1रा 1:16; 2रा 4:36, 37) ज़ाहिर है कि यह कोढ़ी आदमी समझ गया कि वह परमेश्‍वर के प्रतिनिधि से बात कर रहा है, जिसमें लोगों को ठीक करने की ताकत है। इसलिए जब उसने यहोवा के ठहराए राजा का आदर करने के लिए झुककर प्रणाम किया तो उसने सही किया।​—मत 9:18; यहाँ इस्तेमाल हुए यूनानी शब्द के बारे में ज़्यादा जानने के लिए मत 2:2 का अध्ययन नोट देखें।

उसके सामने गिरकर: या “उसे दंडवत करके; उसका सम्मान करके।” जब यूनानी क्रिया प्रोस्किनीयो किसी देवता या ईश्‍वर की पूजा के संबंध में इस्तेमाल हुई है तो उसका अनुवाद “उपासना” किया गया है। लेकिन यहाँ यह क्रिया दिखाती है कि एक दास अपने अधिकारी का आदर कर रहा है और उसके अधीन है।​—मत 2:2; 8:2 के अध्ययन नोट देखें।

जब्दी की पत्नी: यानी प्रेषित याकूब और यूहन्‍ना की माँ। मरकुस के ब्यौरे के मुताबिक याकूब और यूहन्‍ना ने यीशु से गुज़ारिश की। ज़ाहिर है कि गुज़ारिश उन दोनों की ही थी, लेकिन ऐसा करने के लिए उन्होंने अपनी माँ सलोमी से कहा। सलोमी शायद यीशु की मौसी थी।​—मत 27:55, 56; मर 15:40, 41; यूह 19:25.

झुककर प्रणाम किया: या “दंडवत किया; घुटने टेककर आदर किया।”​—मत 8:2; 18:26 के अध्ययन नोट देखें।

एक को अपने दाएँ और दूसरे को अपने बाएँ: यहाँ दोनों पद सम्मान और अधिकार को दर्शाते हैं, मगर दायीं तरफ होना सबसे ज़्यादा सम्मान की बात समझी जाती थी।​—भज 110:1; प्रेष 7:55, 56; रोम 8:34; मत 25:33 का अध्ययन नोट देखें।

एक तेरे दाएँ और दूसरा तेरे बाएँ: मर 10:37 का अध्ययन नोट देखें।

तुम नहीं जानते कि तुम क्या माँग रहे हो: यहाँ यूनानी क्रियाएँ बहुवचन में इस्तेमाल हुई हैं। इस बात से और संदर्भ से पता चलता है कि यीशु अब दोनों बेटों से बात कर रहा था, न कि उनकी माँ से।​—मर 10:35-38.

वह प्याला पी सकते हो: बाइबल में अकसर “प्याला” लाक्षणिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है जिसका मतलब है, एक व्यक्‍ति के लिए परमेश्‍वर की मरज़ी या उसका “तय हिस्सा।” यहाँ ‘प्याला पीने’ का मतलब है, परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करना। और उसकी मरज़ी सिर्फ यह नहीं थी कि यीशु को तड़पाया जाए और परमेश्‍वर की निंदा करने के झूठे इलज़ाम में मार डाला जाए बल्कि उसे ज़िंदा करके स्वर्ग में अमर जीवन दिया जाना भी शामिल था।

सेवक: बाइबल में अकसर यूनानी शब्द दीआकोनोस का मतलब होता है, ऐसा व्यक्‍ति जो नम्र होकर दूसरों की सेवा करने में लगा रहता है। यह शब्द मसीह (रोम 15:8), मसीह के सेवकों (1कुर 3:5-7; कुल 1:23), सहायक सेवकों (फिल 1:1; 1ती 3:8), घर के सेवकों (यूह 2:5, 9) और सरकारी अधिकारियों (रोम 13:4) के लिए इस्तेमाल हुआ है।

सेवक: बाइबल में अकसर यूनानी शब्द दीआकोनोस का मतलब होता है, ऐसा व्यक्‍ति जो नम्र होकर दूसरों की सेवा करने में लगा रहता है। यह शब्द मसीह (रोम 15:8), मसीह के सेवकों (1कुर 3:5-7; कुल 1:23), सहायक सेवकों (फिल 1:1; 1ती 3:8), घर के सेवकों (यूह 2:5, 9) और सरकारी अधिकारियों (रोम 13:4) के लिए इस्तेमाल हुआ है।

सेवा करवाने नहीं, बल्कि सेवा करने: मत 20:26 का अध्ययन नोट देखें।

फिरौती: यूनानी शब्द लीट्रॉन (यूनानी क्रिया लीयो से निकला जिसका मतलब है, “छोड़ना; रिहा करना”) का इस्तेमाल यूनानी लेखकों ने उस रकम को बताने के लिए किया जो कैदियों, गुलामों या युद्ध के बंदियों को छुड़ाने के लिए दी जाती थी। (इब्र 11:35) यह शब्द मसीही यूनानी शास्त्र में दो जगह आता है, एक यहाँ और दूसरा मर 10:45 में। इससे जुड़ा एक शब्द है, ऐंटीलीट्रॉन जो 1ती 2:6 में आता है और जिसका अनुवाद है, “फिरौती का बराबर दाम।” इससे जुड़े दूसरे शब्द हैं: लीट्रॉऊमाइ जिसका मतलब है, “छुड़ाना; छुटकारा दिलाना; फिरौती देना” (तीत 2:14; फु.; 1पत 1:18; फु.) और अपोलीट्रॉसिस जिसका अनुवाद अकसर ‘फिरौती देकर छुड़ाना या छुटकारा दिलाना’ किया गया है (इफ 1:7; कुल 1:14; इब्र 9:15; रोम 3:24; 8:23)।​—शब्दावली देखें।

जान: यूनानी शब्द साइखी।​—शब्दावली में “जीवन” देखें।

यरीहो: यरीहो पहला कनानी शहर था जिस पर इसराएलियों ने कब्ज़ा किया था। यह शहर यरदन नदी के पश्‍चिम में था। (गि 22:1; यह 6:1, 24, 25) यीशु के दिनों में इस पुराने शहर से करीब 2 कि.मी. (करीब 1 मील) दूर दक्षिण में एक और यरीहो शहर था जिसे रोमी लोगों ने बनाया था। शायद यही वजह है कि इस घटना के बारे में लूक 18:35 में लिखा है, यीशु “यरीहो पहुँचनेवाला था,” जबकि मत्ती ने लिखा कि यीशु यरीहो से बाहर जा रहा था। इसलिए जब वह पुराने यरीहो से नए यरीहो जा रहा था या फिर नए यरीहो से पुराने यरीहो शहर आ रहा था तब शायद उसने चमत्कार करके अंधों को ठीक किया था।​—अति. ख4 और ख10 देखें।

दाविद के वंश से: ये शब्द दिखाते हैं कि यीशु दाविद के खानदान से है और उस राज का वारिस है जिसके बारे में दाविद से करार किया गया था।

राजा दाविद: इस वंशावली में कई राजाओं के नाम दिए हैं, लेकिन “राजा” सिर्फ दाविद को कहा गया है। इसराएल के शाही खानदान को ‘दाविद का घराना’ कहा जाता था। (1रा 12:19, 20) मत्ती ने आयत 1 में कहा कि यीशु “दाविद के वंश से था।” इस तरह उसने राज के विषय पर ज़ोर दिया और समझाया कि यीशु ही उस राज का वारिस है जिसके बारे में दाविद से करार किया गया था।​—2शम 7:11-16.

उसे झुककर प्रणाम करके: या “उसे दंडवत करके; उसका सम्मान करके।” जब इस गैर-यहूदी औरत ने यीशु को ‘दाविद का वंशज’ कहा (मत 15:22), तो ज़ाहिर है कि वह मान रही थी कि यीशु वादा किया हुआ मसीहा है। इसलिए उसने यीशु को परमेश्‍वर का प्रतिनिधि समझकर प्रणाम किया, न कि कोई ईश्‍वर या देवता मानकर।​—मत 2:2; 8:2; 14:33; 18:26 के अध्ययन नोट देखें।

दो अंधे: मरकुस और लूका ने एक अंधे आदमी की बात की। ज़ाहिर है कि उनका ध्यान सिर्फ बरतिमाई पर था, जिसका नाम मरकुस के ब्यौरे में बताया गया है। (मर 10:46; लूक 18:35) लेकिन मत्ती ने इस बात पर ज़्यादा ध्यान दिया कि कितने अंधे आदमी थे।

दाविद के वंशज: दो अंधे आदमियों ने यीशु को ‘दाविद का वंशज’ कहकर सबके सामने कबूल किया कि वही मसीहा है।​—मत 1:1, 6; 15:25 के अध्ययन नोट देखें।

तड़प उठा: इन शब्दों के लिए यूनानी क्रिया स्प्लैगख्नी-ज़ोमाइ इस्तेमाल हुई है, जो यूनानी शब्द स्प्लैगख्ना (मतलब “अंतड़ियों”) से संबंधित है। इसका मतलब एक ऐसी भावना है जो दिल की गहराइयों से उठती है। यूनानी में यह शब्द गहरी और कोमल करुणा के लिए इस्तेमाल होता है।

वह तड़प उठा: या “उसने करुणा महसूस की।”​—मत 9:36 का अध्ययन नोट देखें।

तसवीर और ऑडियो-वीडियो

बाज़ार
बाज़ार

कुछ बाज़ार सड़क पर लगते थे, जैसे यहाँ चित्र में दिखाया गया है। दुकानदार इतना सामान लगा देते थे कि रास्ता जाम हो जाता था। आस-पास के लोग बाज़ार से घरेलू सामान, मिट्टी के बरतन, काँच की महँगी चीज़ें और ताज़ी साग-सब्ज़ियाँ भी खरीदते थे। उस ज़माने में फ्रिज नहीं होते थे, इसलिए लोगों को खाने-पीने की चीज़ें खरीदने हर दिन बाज़ार जाना होता था। बाज़ार में लोगों को व्यापारियों या दूसरी जगहों से आए लोगों से खबरें भी मिल जाती थीं, यहाँ बच्चे खेलते थे और बेरोज़गार लोग इंतज़ार करते थे कि कोई उन्हें काम दे। बाज़ार में यीशु ने बीमारों को ठीक किया और पौलुस ने लोगों को प्रचार किया। (प्रेष 17:17) लेकिन घमंडी शास्त्रियों और फरीसियों को ऐसी सार्वजनिक जगहों पर लोगों की नज़रों में छाना और उनसे नमस्कार सुनना अच्छा लगता था।

कोड़ा
कोड़ा

सबसे खतरनाक कोड़े को फ्लैगेलम कहा जाता था। इसमें एक हत्था होता था जिसमें कई रस्सियाँ या गुथी हुई चमड़े की पट्टियाँ लगी होती थीं। इन पट्टियों में नुकीली हड्डियाँ या धातु के टुकड़े लगाए जाते थे ताकि इनकी मार और भी दर्दनाक हो।