भजन 94:1-23
94 हे बदला लेनेवाले परमेश्वर यहोवा,+हे बदला लेनेवाले परमेश्वर, अपनी रौशनी चमका!
2 हे पृथ्वी के न्यायी, उठ।+
मगरूरों को सज़ा दे, जिसके वे लायक हैं।+
3 हे यहोवा, दुष्ट कब तक आनंद मनाते रहेंगे,कब तक?+
4 वे बड़बड़ाते रहते हैं, हेकड़ी से भरी बातें करते हैं,सारे गुनहगार अपने बारे में शेखी बघारते हैं।
5 हे यहोवा, वे तेरे लोगों को कुचल देते हैं,+तेरी विरासत पर ज़ुल्म ढाते हैं।
6 वे विधवा और परदेसी का खून कर देते हैं,अनाथों* को मार डालते हैं।
7 उनका कहना है, “याह नहीं देखता,+याकूब का परमेश्वर इस पर ध्यान नहीं देता।”+
8 निर्बुद्धि लोगो, इस बात को समझो,मूर्खो, तुम कब अंदरूनी समझ से काम लोगे?+
9 जिस परमेश्वर ने कान बनाया है, क्या वह सुन नहीं सकता?
जिस परमेश्वर ने आँख रची, क्या वह देख नहीं सकता?+
10 जो परमेश्वर राष्ट्रों को सुधारता है, क्या वह तुम्हें फटकार नहीं सकता?+
वही परमेश्वर लोगों को ज्ञान देता है!+
11 यहोवा इंसानों के विचार जानता हैकि वे बस एक साँस हैं।+
12 हे याह, सुखी है वह इंसान जिसे तू सुधारता है,+जिसे तू अपने कानून से सिखाता है+
13 ताकि तू उसे संकट के दिनों में चैन देता रहे,जब तक कि दुष्टों के लिए गड्ढा नहीं खोदा जाता।+
14 यहोवा अपने लोगों को नहीं त्यागेगा,+अपनी विरासत को नहीं छोड़ेगा।+
15 क्योंकि एक बार फिर नेकी से फैसला सुनाया जाएगाऔर सीधे-सच्चे मनवाले उस फैसले को मानेंगे।
16 कौन मेरी खातिर दुष्टों के खिलाफ उठेगा?
कौन मेरी खातिर गुनहगारों के खिलाफ खड़ा होगा?
17 अगर यहोवा मेरा मददगार न होता,तो मैं पल-भर में मिट गया होता।*+
18 जब मैंने कहा, “मेरा पैर फिसल रहा है,”
तब हे यहोवा, तेरा अटल प्यार मुझे सँभाले रहा।+
19 जब चिंताएँ* मुझ पर हावी हो गयीं,*तब तूने मुझे दिलासा दिया, सुकून दिया।+
20 क्या भ्रष्टाचार की राजगद्दी* तेरे साथ साझेदारी कर सकती हैजो कानून की आड़ में* मुसीबत खड़ी करती है?+
21 वे नेक जन पर वहशियाना हमले करते हैं+और बेगुनाह को मौत की सज़ा सुनाते हैं।+
22 मगर यहोवा मेरे लिए एक ऊँचा गढ़ बन जाएगा,मेरा परमेश्वर मुझे पनाह देनेवाली चट्टान है।+
23 वह उन्हीं के दुष्ट कामों में उन्हें फँसा देगा+उन्हीं के बुरे कामों के ज़रिए उनका सफाया कर देगा।
हमारा परमेश्वर यहोवा उनका सफाया कर देगा।+
कई फुटनोट
^ या “जिनके पिता की मौत हो गयी है।”
^ शा., “में खामोशी में निवास करता।”
^ या “परेशान करनेवाले विचार।”
^ या “मेरे अंदर बढ़ गयीं।”
^ या “शासक; न्यायी।”
^ या “फरमान जारी करके।”

