भजन 91:1-16
91 जो कोई परम-प्रधान की गुप्त जगह में निवास करता है,+वह सर्वशक्तिमान के साए में बसेरा करेगा।+
2 मैं यहोवा से कहूँगा, “तू मेरी पनाह और मेरा मज़बूत गढ़ है,+मेरा परमेश्वर जिस पर मैं भरोसा करता हूँ।”+
3 वह तुझे बहेलिए के फंदे से,जानलेवा महामारी से बचाएगा।
4 वह अपने डैनों से तुझे ढाँप लेगा*और उसके पंखों तले तू पनाह लेगा।+
उसकी वफादारी+ एक बड़ी ढाल+ और सुरक्षा-दीवार ठहरेगी।
5 तुझे रात का खौफ नहीं सताएगा,+न ही तू दिन में चलनेवाले तीरों से घबराएगा,+
6 न तो तुझे अँधेरे में पीछा करनेवाली महामारी का डर होगा,न ही दिन-दोपहरी होनेवाली तबाही का डर होगा।
7 तेरे एक तरफ हज़ार लोग ढेर हो जाएँगेऔर दायीं तरफ दस हज़ार गिर पड़ेंगेमगर कोई खतरा तेरे पास तक नहीं फटकेगा।+
8 तू सिर्फ अपनी आँखों से यह सब देखेगा,दुष्टों को सज़ा पाते देखेगा।
9 तूने कहा है, “यहोवा मेरी पनाह है,”
तूने परम-प्रधान को अपना निवास* बनाया है,+
10 इसलिए तुझ पर कोई संकट नहीं आएगा,+कोई कहर तेरे तंबू के पास तक नहीं फटकेगा।
11 क्योंकि परमेश्वर तेरे बारे में अपने स्वर्गदूतों+ को हुक्म देगाकि तेरी सब राहों में वे तेरी हिफाज़त करें।+
12 वे तुझे हाथों-हाथ उठा लेंगे+ताकि तेरा पैर किसी पत्थर से चोट न खाए।+
13 तू शेर और नाग को कुचल देगा,जवान शेर और बड़े साँप को पैरों से रौंद डालेगा।+
14 परमेश्वर ने कहा है, “वह मुझसे गहरा लगाव रखता है,* इसलिए मैं उसे बचाऊँगा।+
मैं उसकी रक्षा करूँगा क्योंकि वह मेरा नाम जानता है।*+
15 वह मुझे पुकारेगा और मैं उसे जवाब दूँगा।+
मैं संकट के समय उसके साथ रहूँगा।+
मैं उसे बचाऊँगा और सम्मान दिलाऊँगा।
16 मैं उसे लंबी उम्र देकर संतुष्ट करूँगा,+उसे उद्धार करने की अपनी शक्ति दिखाऊँगा।”+
कई फुटनोट
^ या “तेरे पास आने का रास्ता रोक देगा।”
^ या शायद, “किला; पनाह।”
^ शा., “जुड़ गया है।”
^ या “नाम कबूल करता है।”

