भजन 62:1-12

दाविद का सुरीला गीत। निर्देशक के लिए हिदायत: यदूतून* का। 62  मैं चुपचाप परमेश्‍वर का इंतज़ार करता हूँ। वही मेरा उद्धारकर्ता है।+   वही मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, मेरा ऊँचा गढ़ है,+मैं कभी इस कदर हिलाया नहीं जा सकता कि गिर जाऊँ।+   तुम एक इंसान को मार डालने के लिए कब तक उस पर वार करते रहोगे?+ तुम सब-के-सब खतरनाक हो, उस दीवार की तरह जो झुकी हुई है,पत्थर की उस दीवार की तरह जो बस ढहनेवाली है।*   वे उसे ऊँचे पद* से गिराने के लिए आपस में मशविरा करते हैं,उन्हें झूठ बोलने में मज़ा आता है। मुँह से तो वे आशीर्वाद देते हैं, पर मन-ही-मन शाप देते हैं।+ (सेला )   मैं चुपचाप परमेश्‍वर का इंतज़ार करता हूँ,+क्योंकि उसी से मेरी आशा बँधी है।+   वही मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, मेरा ऊँचा गढ़ है,मुझे कभी हिलाया नहीं जा सकता।+   मेरा उद्धार और मेरा वैभव परमेश्‍वर की ही बदौलत है। परमेश्‍वर मेरी मज़बूत चट्टान है, मेरा गढ़ है।+   लोगो, हमेशा उस पर भरोसा रखो। उसके आगे अपना दिल खोलकर रख दो।+ परमेश्‍वर हमारी पनाह है।+ (सेला )   इंसान बस एक साँस हैं,वे बस धोखा हैं।+ अगर उन सबको एक-साथ तौला जाए, तो भी वे साँस से हलके निकलेंगे।+ 10  इस गलतफहमी में मत रहो कि धोखाधड़ी से तुम कामयाब होगे,या लूट-खसोट से तुम्हें फायदा होगा। अगर तुम्हारी दौलत बढ़ने लगे, तो अपना मन उसी पर मत लगाना।+ 11  मैंने एक बार नहीं, दो बार परमेश्‍वर को यह कहते सुना, “ताकत परमेश्‍वर ही की है।”+ 12  हे यहोवा, अटल प्यार भी तेरा है,+क्योंकि तू हरेक को उसके कामों के मुताबिक फल देता है।+

कई फुटनोट

शब्दावली देखें।
या शायद, “तुम सब, मानो वह एक झुकी हुई दीवार हो, पत्थर की ऐसी दीवार जो बस ढहनेवाली है।”
या “उसकी गरिमा।”

अध्ययन नोट

तसवीर और ऑडियो-वीडियो