भजन 142:1-7
मश्कील।* दाविद का यह गीत उस समय का है जब वह एक गुफा में था।+ एक प्रार्थना।
142 मैं मदद के लिए यहोवा को पुकारता हूँ+मैं दया के लिए यहोवा से गिड़गिड़ाता हूँ।
2 उसे अपनी सारी चिंताएँ खुलकर बताता हूँ,अपने मन की पीड़ा बताता हूँ।+
3 जब मेरी ताकत जवाब दे जाती है,तब तू मेरी राह पर नज़र रखता है।+
मैं जिस रास्ते पर चलता हूँ,वहाँ मेरे दुश्मन मेरे लिए फंदा छिपाते हैं।
4 मेरे दायीं तरफ देख,कोई मेरी परवाह नहीं करता।*+
ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ मैं भाग सकूँ,+मेरी फिक्र करनेवाला कोई नहीं।
5 हे यहोवा, मैं मदद के लिए तुझे पुकारता हूँ।
मैं कहता हूँ, “तू मेरी पनाह है,+मेरे जीते जी* तू ही मेरा सबकुछ* है।”
6 मेरी मदद की पुकार पर ध्यान दे,क्योंकि मैं बड़ी मुसीबत में हूँ।
मुझ पर ज़ुल्म करनेवालों से मुझे छुड़ा ले,+क्योंकि वे मुझसे ज़्यादा ताकतवर हैं।
7 मुझे इस काल-कोठरी से बाहर निकाल
ताकि मैं तेरे नाम की तारीफ करूँ।
नेक लोग मेरे चारों तरफ इकट्ठा हों
क्योंकि तू मेरे साथ कृपा से पेश आता है।

