भजन 105:1-45

105  यहोवा का शुक्रिया अदा करो,+ उसका नाम पुकारो,उसके कामों के बारे में देश-देश के लोगों को बताओ!+   उसके लिए गीत गाओ, उसकी तारीफ में गीत गाओ,*उसके सभी आश्‍चर्य के कामों पर गहराई से सोचो।*+   गर्व से उसके पवित्र नाम का बखान करो।+ यहोवा की खोज करनेवालों का दिल मगन हो।+   यहोवा और उससे मिलनेवाली ताकत की खोज करो।+ उसकी मंज़ूरी पाने की कोशिश करो।   उसने जो आश्‍चर्य के काम और चमत्कार किए,जो फैसले सुनाए उन्हें याद करो,+   तुम जो उसके सेवक अब्राहम का वंश हो,+याकूब के बेटे और उसके चुने हुए लोग हो,+ उन्हें याद करो।   वह हमारा परमेश्‍वर यहोवा है।+ उसके किए फैसले सारी धरती पर लागू हैं।+   वह अपना करार सदा तक याद रखता है,+वह वादा जो उसने हज़ारों पीढ़ियों के लिए किया है,*+   वह करार जो उसने अब्राहम से किया था,+वह शपथ जो उसने इसहाक से खायी थी+ 10  और जिसे याकूब के लिए एक आदेशऔर इसराएल के लिए सदा का करार बना दिया था 11  और कहा था, “मैं तुम्हें कनान देश दूँगा+ताकि यह तुम्हारी तय विरासत हो।”+ 12  यह उसने तब कहा था जब वे गिनती में कम थे,+हाँ, वे बहुत कम थे और उस देश में परदेसी थे।+ 13  वे एक देश से दूसरे देश में,एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते थे।+ 14  उसने किसी इंसान को उन्हें सताने नहीं दिया,+इसके बजाय, उनकी खातिर राजाओं को फटकारा,+ 15  उनसे कहा, “मेरे अभिषिक्‍त जनों को हाथ मत लगाना,मेरे भविष्यवक्‍ताओं के साथ कुछ बुरा न करना।”+ 16  उसने देश में अकाल भेजा,+वहाँ रोटी का मिलना बंद करा दिया।* 17  उसने उनसे पहले एक आदमी भेजा,यूसुफ को भेजा जिसे गुलाम होने के लिए बेचा गया था।+ 18  उन्होंने तब तक उसके पैरों में बेड़ियाँ डालीं,*+उसकी गरदन में लोहे की ज़ंजीरें डालीं, 19  जब तक कि परमेश्‍वर की बात सच साबित न हुई,+यहोवा की कही बात ने ही उसे शुद्ध किया। 20  राजा ने उसे रिहा करने का आदेश भेजा,+देश-देश के लोगों के शासक ने उसे आज़ाद कर दिया। 21  राजा ने उसे अपने घराने का मालिक बनाया,अपनी सारी जायदाद का अधिकारी ठहराया+ 22  ताकि वह अपनी इच्छा के मुताबिक उसके हाकिमों पर पूरा अधिकार रखे*और उसके बुज़ुर्गों को बुद्धि की बातें सिखाए।+ 23  फिर इसराएल मिस्र आया,+याकूब हाम के देश में परदेसी बनकर रहा। 24  परमेश्‍वर ने अपने लोगों की गिनती खूब बढ़ायी,+उसने उन्हें दुश्‍मनों से ज़्यादा ताकतवर बनाया।+ 25  उसने दुश्‍मनों के दिलों को बदलने दियाताकि वे उसके लोगों से नफरत करें,उसके सेवकों के खिलाफ साज़िश रचें।+ 26  उसने अपने सेवक मूसा को भेजा,+अपने चुने हुए जन हारून को भी भेजा।+ 27  उन्होंने उनके बीच उसके चिन्ह दिखाए,हाम के देश में उसके चमत्कार दिखाए।+ 28  उसने अंधकार भेजा और देश पर अँधेरा छा गया,+उन्होंने उसकी आज्ञा के खिलाफ बगावत नहीं की। 29  उसने उनका पानी खून में बदल दियाऔर उनकी मछलियाँ मार डालीं।+ 30  उनका देश मेंढकों से भर गया,+शाही कोठरियों में भी मेंढक-ही-मेंढक थे। 31  उसने खून चूसनेवाली मक्खियों को उन पर हमला करने की आज्ञा दी,मच्छरों को उनके इलाके पर धावा बोलने का हुक्म दिया।+ 32  उसने उन पर पानी के बदले ओले बरसाएऔर उनके देश पर बिजली गिरायी।*+ 33  उनके अंगूरों के बाग और अंजीर के पेड़ नाश कर दिए,उनके इलाके के पेड़ तहस-नहस कर दिए। 34  उसने कहा कि टिड्डियाँ उन पर हमला करें,टिड्डियों के अनगिनत बच्चे हमला करें।+ 35  वे उनके देश के सारे पेड़-पौधे चट कर गयीं,ज़मीन की सारी उपज चट कर गयीं। 36  फिर उसने उनके देश के हर पहलौठे को मार डाला,+उनकी शक्‍ति* की पहली निशानी मिटा दी। 37  वह अपने लोगों को सोने-चाँदी के साथ निकाल लाया,+उसके गोत्रों में से कोई भी लड़खड़ाकर नहीं गिरा। 38  जब उन्होंने देश छोड़ा तो मिस्र खुश हुआ,क्योंकि इसराएल का* खौफ उस पर छा गया था।+ 39  उसने एक बादल की आड़ से उन्हें छिपा लिया+ और रात के वक्‍त आग से उन्हें रौशनी दी।+ 40  उनके माँगने पर वह बटेर ले आया,+स्वर्ग से रोटी भेजकर उन्हें संतुष्ट करता रहा।+ 41  उसने एक चट्टान चीरी और पानी की धारा फूट निकली,+पानी वीराने में ऐसे बहने लगा जैसे कोई नदी हो।+ 42  उसने वह पवित्र वादा याद रखा जो उसने अपने सेवक अब्राहम से किया था।+ 43  इसलिए वह अपने लोगों को बाहर ले आया, वे जश्‍न मनाते हुए निकले,+अपने चुने हुओं को बाहर ले आया, वे खुशी से जयजयकार करते हुए निकले। 44  उसने उन्हें दूसरी जातियों के इलाके दे दिए,+उन्होंने विरासत में वह पाया जो दूसरे देशों की मेहनत का फल था+ 45  ताकि वे उसके आदेशों का पालन करें+और उसके कानून मानें। याह की तारीफ करो!*

कई फुटनोट

या “संगीत बजाओ।”
या शायद, “के बारे में बताओ।”
शा., “उस वचन को, जो उसने हज़ारों पीढ़ियों के लिए ठहराया है।”
शा., “रोटी का हर छड़ तोड़ दिया।” शायद यहाँ रोटी लटकानेवाले छड़ों की बात की गयी है।
शा., “डालकर उसे दुख दिया।”
शा., “को बाँध दे।”
या “आग की लपटें गिरायीं।”
या “संतान पैदा करने की शक्‍ति।”
शा., “उनका।”
या “हल्लिलूयाह!” “याह” यहोवा नाम का छोटा रूप है।

अध्ययन नोट

तसवीर और ऑडियो-वीडियो