भजन 101:1-8
दाविद का सुरीला गीत।
101 मैं अटल प्यार और न्याय के बारे में गीत गाऊँगा।
हे यहोवा, मैं तेरी तारीफ में गीत गाऊँगा।*
2 मैं सूझ-बूझ से काम लूँगा और निर्दोष बना रहूँगा।
तू कब मेरे पास आएगा?
मैं अपने घर के अंदर भी निर्दोष मन से सही चाल चलूँगा।+
3 मैं अपनी आँखों के सामने कोई बेकार की* चीज़ नहीं रखूँगा।
मैं उन लोगों के कामों से नफरत करता हूँ जो सही राह से भटक जाते हैं।+
मैं उनसे कोई नाता नहीं रखूँगा।*
4 मैं टेढ़े मनवाले से दूर रहता हूँ,मैं बुराई स्वीकार नहीं करूँगा।*
5 जो कोई चोरी-छिपे अपने पड़ोसी को बदनाम करता है,+उसे मैं खामोश कर दूँगा।*
घमंड से चढ़ी आँखें और मगरूर दिलमैं बरदाश्त नहीं करूँगा।
6 मेरी आँखें धरती के विश्वासयोग्य लोगों पर लगी रहेंगीताकि वे मेरे साथ निवास करें।
जो निर्दोष चाल चलता है वह मेरी सेवा करेगा।
7 कोई भी धोखेबाज़ मेरे घर में नहीं रहेगा,न कोई झूठा मेरी मौजूदगी में* खड़ा रहेगा।
8 हर सुबह मैं धरती के सभी दुष्टों को खामोश कर दूँगा*ताकि यहोवा के नगर से सभी गुनहगारों को मिटा दूँ।+
कई फुटनोट
^ या “संगीत बजाऊँगा।”
^ या “निकम्मी।”
^ या “उनके काम मुझसे नहीं लगे रहते।”
^ शा., “को नहीं जानूँगा।”
^ या “मिटा दूँगा।”
^ शा., “मेरी आँखों के सामने।”
^ या “मिटा दूँगा।”

