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यीशु मसीह कौन है?

यीशु मसीह कौन है?

परमेश्‍वर के वचन से सीखिए

यीशु मसीह कौन है?

इस लेख में कुछ ऐसे सवाल पूछे गए हैं, जो शायद आपके मन में कभी उठे होंगे और बताया गया है कि आप इनका जवाब अपनी बाइबल में कहाँ पा सकते हैं। यहोवा के साक्षियों को आपके साथ इन सवालों पर चर्चा करने में बड़ी खुशी होगी।

1. यीशु मसीह कौन है?

यीशु आम इंसानों से अलग था। धरती पर पैदा होने से पहले यीशु, स्वर्ग में एक आत्मिक व्यक्‍ति के तौर पर जीया। (यूहन्‍ना 8:23) यीशु परमेश्‍वर की पहली सृष्टि था और सिर्फ उसे परमेश्‍वर ने खुद बनाया, इसलिए यीशु को परमेश्‍वर का ‘इकलौता बेटा’ कहा गया है। बाकी सारी सृष्टि करने में यीशु ने परमेश्‍वर की मदद की। यीशु, परमेश्‍वर की तरफ से बात करता था, इसलिए उसे “वचन” भी कहा गया है।—यूहन्‍ना 1:1-3, 14; नीतिवचन 8:22, 23, 30; कुलुस्सियों 1:15, 16 पढ़िए।

2. यीशु धरती पर क्यों आया?

परमेश्‍वर ने अपने बेटे को धरती पर भेजा। उसने स्वर्ग से उसका जीवन एक कुँवारी यहूदी स्त्री मरियम के गर्भ में डाला। इसलिए यीशु का कोई इंसानी पिता नहीं था। (लूका 1:30-35) यीशु धरती पर आया ताकि वह (1) परमेश्‍वर के बारे में सच्चाई सिखाए, (2) परमेश्‍वर की मरज़ी पूरी करने में एक मिसाल कायम करे और (3) अपने सिद्ध जीवन को “फिरौती” के रूप में दे दे।मत्ती 20:28; यूहन्‍ना 18:37 पढ़िए।

3. हमें फिरौती की ज़रूरत क्यों है?

किसी इंसान को गुलामी से छुड़ाने के लिए जो कीमत चुकायी जाती है उसे फिरौती कहते हैं। जब परमेश्‍वर ने इंसान की सृष्टि की तो उसका मकसद यह नहीं था कि वह बूढ़ा होकर आखिरकार मर जाए। हम यह कैसे जानते हैं? परमेश्‍वर ने पहले इंसान, आदम को कहा कि अगर वह पाप करेगा तो मर जाएगा। अगर आदम पाप नहीं करता, तो वह कभी नहीं मरता। हालाँकि सालों बाद उसकी मौत हुई, मगर जिस दिन उसने परमेश्‍वर की आज्ञा तोड़ी उसी दिन से वह धीरे-धीरे मौत की तरफ बढ़ने लगा। (उत्पत्ति 2:16, 17; 5:5) आदम ने अपने सभी बच्चों को पाप और उससे मिलनेवाली सज़ा, मौत विरासत में दे दी। इस तरह आदम के ज़रिए मौत मानवजाति में “आयी” इसीलिए हमें फिरौती की ज़रूरत पड़ी।रोमियों 5:12; 6:23 पढ़िए।

4. यीशु ने अपनी जान क्यों दी?

हमें मौत से छुड़ाने के लिए कौन अपनी जान फिरौती के रूप में दे सकता था? जब हम मरते हैं, तब हम सिर्फ अपने पापों का जुर्माना भरते हैं। कोई भी असिद्ध इंसान दूसरों के पापों की कीमत नहीं चुका सकता।भजन 49:7-9 पढ़िए।

यीशु किसी इंसानी पिता से पैदा नहीं हुआ था, इसलिए वह आम इंसानों की तरह असिद्ध नहीं था। जब उसकी मौत हुई तो उसके अपने पापों की वजह से नहीं, बल्कि दूसरों के पापों की वजह से हुई। अपने बेटे को हमारी खातिर मरने के लिए भेजकर परमेश्‍वर ने मानवजाति को असीम प्यार दिखाया। यीशु ने भी अपने पिता की आज्ञा मानकर और हमारे पापों के लिए अपनी जान देकर अपना प्यार ज़ाहिर किया।यूहन्‍ना 3:16; रोमियों 5:18, 19 पढ़िए।

5. यीशु अभी क्या कर रहा है?

बीमारों को चंगा करके, मरे हुओं को दोबारा जिंदा करके, और दुखी लोगों की मदद करके, यीशु ने दिखाया कि वह सारी आज्ञाकारी मानवजाति के लिए भविष्य में क्या करेगा। (लूका 18:35-42; यूहन्‍ना 5:28, 29) यीशु के मरने के बाद, परमेश्‍वर ने उसे एक आत्मिक व्यक्‍ति के तौर पर दोबारा जीवन दिया। (1 पतरस 3:18) फिर यीशु, परमेश्‍वर के दाहिने हाथ पर जा बैठा और उसने उस वक्‍त का इंतज़ार किया जब यहोवा उसे पूरी धरती पर राजा के तौर पर राज करने की ताकत देता। (इब्रानियों 10:12, 13) अब यीशु स्वर्ग में राजा के तौर पर राज कर रहा है, और धरती पर उसके चेले दुनिया-भर में खुशखबरी का ऐलान कर रहे हैं।दानिय्येल 7:13, 14; मत्ती 24:14 पढ़िए।

बहुत जल्द यीशु एक राजा की हैसियत से अपनी ताकत का इस्तेमाल करके हर तरह की दुख-तकलीफों को और जो उसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें खत्म कर देगा। लाखों लोग जो उसमें विश्‍वास करते हैं और उसकी आज्ञा मानते हैं, वे इस धरती पर फिरदौस में जीवन का आनंद उठाएँगे।भजन 37:9-11 पढ़िए। (w11-E 03/01)

ज़्यादा जानकारी के लिए, बाइबल असल में क्या सिखाती है? इस किताब का अध्याय 4 देखिए। इसे यहोवा के साक्षियों ने प्रकाशित किया है।

[पेज 29 पर तसवीर]

लाखों लोग जो यीशु में विश्‍वास करते और उसकी आज्ञा मानते हैं, वे इस धरती पर फिरदौस में जीवन का आनंद उठाएँगे