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 खुशी की राह

अच्छी सेहत और बुलंद हौसला

अच्छी सेहत और बुलंद हौसला

लंबी बीमारी या अपंगता जीवन पर गहरा असर कर सकती है। जैक नाम के आदमी के साथ यही हुआ। एक वक्‍त पर वह अपने जीवन से बहुत खुश था और उसकी सेहत भी अच्छी थी। लेकिन फिर एक बीमारी की वजह से उसके हाथ-पैर बेजान हो गए। वह कहता है, ‘मैं हताश हो गया और पूरी तरह टूट गया। ज़िंदगी बस नाम भर की रह गयी थी।’

जैक के साथ जो हुआ, उससे पता चलता है कि हमारी सेहत पूरी तरह हमारे हाथ में नहीं होती। लेकिन अगर हम सावधानी बरतें, तो हम बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं। फिर भी अगर हम किसी बड़ी बीमारी के शिकार हो जाएँ, तो क्या इसका यह मतलब है कि हम खुश नहीं रह सकते? ऐसी बात नहीं है। हम इस बारे में आगे देखेंगे। मगर आइए पहले देखें कि सेहतमंद रहने के लिए हम क्या कर सकते हैं।

‘हर बात में संयम बरतिए।’ (1 तीमुथियुस 3:2, 11) हद-से-ज़्यादा खाने या शराब पीने की आदत होने से सेहत खराब ही होती है और जेब भी खाली हो जाती है! शास्त्र में लिखा है, “उनके जैसा मत बन जो बहुत दाख-मदिरा पीते हैं और ठूँस-ठूँसकर गोश्‍त खाते हैं। क्योंकि पेटू और पियक्कड़ कंगाल हो जाएँगे।”​—नीतिवचन 23:20, 21.

अपने शरीर को दूषित मत कीजिए। “तन और मन की हर गंदगी को दूर करके खुद को शुद्ध करें।” (2 कुरिंथियों 7:1) तंबाकू चबाने, धूम्रपान करने, ज़्यादा शराब पीने और ड्रग्स लेने से शरीर दूषित हो जाता है। अमरीकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र कहता है, ‘सिगरेट पीने से बड़ी-बड़ी बीमारियाँ लगती हैं और लगभग हर अंग को नुकसान होता है।’

अपने शरीर और जीवन को अनमोल समझिए। परमेश्‍वर से ही “हमारी ज़िंदगी है और हम चलते-फिरते हैं और वजूद में हैं।” (प्रेषितों 17:28) जीवन की कदर करने से हम बेवजह खतरा नहीं मोल लेंगे, फिर चाहे हम गाड़ी चला रहे हों, मनोरंजन कर रहे हों या कुछ और कर रहे हों। कुछ पल के मज़े के लिए ज़िंदगी-भर के लिए अपाहिज होना कहाँ की अक्लमंदी होगी!

अपनी भावनाओं को काबू कीजिए। बहुत ज़्यादा चिंता और गुस्सा, जलन और इस तरह की भावनाओं का सेहत पर  बुरा असर होता है। शास्त्र में हमें सलाह दी गयी है, “गुस्सा करना छोड़ दे, क्रोध त्याग दे।” (भजन 37:8) “अगले दिन की चिंता कभी न करना क्योंकि अगले दिन की अपनी ही चिंताएँ होंगी।”​—मत्ती 6:34.

अच्छी बातों पर मन लगाइए। शास्त्र में लिखा है, “शांत मन से शरीर भला-चंगा रहता है।” (नीतिवचन 14:30) यह भी लिखा है, “दिल का खुश रहना बढ़िया दवा है।” (नीतिवचन 17:22) डॉक्टरों का भी यही कहना है। स्कॉटलैंड का एक डॉक्टर कहता है, “जो लोग हमेशा खुश रहते हैं, उन्हें ऐसे लोगों के मुकाबले कम बीमारियाँ होती हैं, जो दुखी रहते हैं।”

हौसला बुलंद रखिए। जैक की तरह शायद हम पर भी ऐसी तकलीफ आ पड़ी हो, जिसका कोई हल नहीं है। पर इसका सामना हम कैसे करेंगे, यह हम पर निर्भर करता है। कुछ लोग हिम्मत हार बैठते हैं, जिससे उनकी मुश्‍किल और बढ़ जाती है। शास्त्र में लिखा है, “मुश्‍किल घड़ी में अगर तू निराश हो जाए, तो तुझमें बहुत कम ताकत रह जाएगी।”​—नीतिवचन 24:10.

मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो शुरू में तो बहुत निराश हो जाते हैं, लेकिन बाद में खुद को सँभाल लेते हैं। वे हालात के हिसाब से ढलना सीख जाते हैं। वे अपनी समस्याओं का अच्छी तरह सामना करने का कोई-न-कोई उपाय ढूँढ़ लेते हैं। जैक ने भी यही किया। वह बताता है कि उसने बहुत प्रार्थना की और बाइबल की बातों पर मनन किया। उसके सामने जो बाधाएँ थीं, उनके बारे में सोचते रहने के बजाय वह इस बात पर ध्यान देने लगा कि इस हालात में भी वह क्या कुछ कर सकता है। जो जैक की तरह ज़िंदगी में बड़ी-बड़ी मुसीबतों से गुज़रते हैं, उनमें हमदर्दी और करुणा बढ़ जाती है। जैक भी दूसरों का दर्द अच्छी तरह समझने लगा, इसलिए वह बाइबल से अच्छी बातें बताकर लोगों को दिलासा देने लगा।

स्टीव भी जीवन में कई तकलीफों से गुज़रा। पंद्रह साल की उम्र में उसके साथ एक दुर्घटना हुई और उसकी गरदन से नीचे के पूरे हिस्से को लकवा मार गया। जब तक वह 18 साल का हुआ, तब तक उसके हाथ थोड़े ठीक हो गए। फिर वह कॉलेज गया जहाँ वह ड्रग्स लेने लगा, खूब शराब पीने लगा और अनैतिक ज़िंदगी जीने लगा। लेकिन उसे अपनी ज़िंदगी खाली-खाली सी लगती थी। फिर उसने बाइबल को गहराई से पढ़ना शुरू किया। तब उसने जाना कि ज़िंदगी कैसे जीनी चाहिए और उसने बुरी आदतें छोड़ दीं। वह कहता है, ‘बचपन से मेरी ज़िंदगी में जो खालीपन था, वह अब नहीं रहा। आज मैं बहुत खुश हूँ।’

स्टीव और जैक की बातों से हमें यकीन होता है कि शास्त्र की यह बात कितनी सच है, ‘यहोवा * का कानून खरा है, जान में जान डाल देता है। उसके आदेश नेक हैं, मन को आनंद से भर देते हैं, यहोवा की आज्ञा शुद्ध है, आँखों में चमक लाती है।’​—भजन 19:7, 8.

^ पैरा. 13 बाइबल के मुताबिक परमेश्‍वर का नाम यहोवा है।