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गलतियों के बारे में सही नज़रिया रखिए

गलतियों के बारे में सही नज़रिया रखिए

फिलिप और मारगरेट * की बेटी और उसका परिवार कुछ दिनों के लिए उनके घर आए हुए थे। जिस दिन वे जानेवाले थे, उस दिन मारगरेट ने अपने दोनों नातियों का मनपसंद खाना बनाया, चीज़वाली मैकरोनी। वह होटल में बावर्ची थी, लेकिन अब रिटायर हो चुकी थी।

जब सब खाने के लिए बैठे, तब मारगरेट ने उनका मनपसंद खाना लाकर मेज़ पर रखा। जैसे ही उसने बरतन का ढक्कन उठाया, वह यह देखकर निराश हो गयी कि उसमें सिर्फ चीज़ सॉस थी! मारगरेट वह डालना ही भूल गयी, जो उस खाने में सबसे ज़रूरी था यानी मैकरोनी। *

हमारी उम्र चाहे जो भी हो या हमें जितना भी तजुरबा क्यों न हो, हम सबसे गलतियाँ हो जाती हैं। हो सकता है, हम कोई बात बिना सोचे-समझे बोल दें या ऐसा कोई काम कर दें, जो उस वक्‍त नहीं करना चाहिए था या शायद कुछ बातें नज़रअंदाज़ कर दें या फिर कुछ भूल जाएँ। आखिर गलतियाँ क्यों होती हैं? गलती होने पर हम क्या कर सकते हैं? क्या हम ऐसा कुछ कर सकते हैं कि हमसे गलतियाँ कम हों? इन सवालों का जवाब जानने से पहले आइए देखें कि गलतियों के बारे में हमारा नज़रिया कैसा होना चाहिए।

हमारा और परमेश्‍वर का नज़रिया

जब हम कुछ अच्छा करते हैं, तो हम अपनी तारीफ सुनकर खुश होते हैं और हमें लगता है कि हम इसके हकदार भी हैं। तो क्या गलती करने पर भी हमें उसे मान नहीं लेना चाहिए, फिर चाहे वह हमसे अनजाने में हुई हो या उस पर किसी का ध्यान न गया हो? इसके लिए नम्र होना ज़रूरी है।

अगर हम खुद के बारे में कुछ ज़्यादा ही सोचते हैं, तो शायद हम यूँ जताएँ कि हमारी गलती इतनी बड़ी नहीं है या हम दूसरों पर दोष मढ़ने लगें या फिर हम उसे मानने से ही इनकार कर दें। लेकिन अकसर ऐसा करने से नुकसान ही होता है। हो सकता है कि समस्या ज्यों-की-त्यों बनी रहे या कुछ लोग बेवजह ही दोषी ठहराए जाएँ। अगर हम आज अपनी गलती के अंजामों से बच भी जाएँ, तो भी हमें याद रखना है कि आखिरकार हममें से “हर कोई परमेश्‍वर को अपना हिसाब देगा।”—रोमियों 14:12.

हमारी गलतियों के बारे में परमेश्‍वर का नज़रिया हम इंसानों से काफी अलग है। शास्त्र में बताया गया है कि परमेश्‍वर “दयालु” है और “करुणा से भरा है।” वह ‘हमेशा खामियाँ नहीं ढूँढ़ता रहता, न ही सदा नाराज़गी पाले रहता है।’ वह हम इंसानों के बारे में जानता है कि हम जन्म से पापी हैं और वह हमारी कमज़ोरियों को समझता है। “वह याद रखता है कि हम मिट्टी ही हैं।”—भजन 103:8, 9, 14.

इसके अलावा एक दयालु पिता की तरह परमेश्‍वर चाहता है कि उसके बच्चे यानी हम गलतियों को उसी नज़र से देखें, जैसे वह देखता है। (भजन 130:3) हमसे या किसी और से गलती होने पर हमें क्या करना चाहिए, इस बारे में परमेश्‍वर ने शास्त्र में काफी अच्छी सलाह और हिदायतें दी हैं।

गलती होने पर क्या करें

जब एक इंसान से कोई गलती हो जाती है, तो वह अकसर अपना काफी वक्‍त दूसरों पर दोष मढ़ने या सफाई देने में लगा देता है। ऐसा करने के बजाय, क्या यह सही नहीं होगा कि जब हमारी बातों से किसी को ठेस पहुँचती है, तो हम उससे माफी माँग लें और गलती सुधारें? इससे उसके साथ हमारी दोस्ती नहीं टूटेगी। क्या आपसे कोई ऐसी गलती हुई, जिससे आपको या किसी और को परेशानी उठानी पड़ी या काफी नुकसान हुआ? ऐसे में खुद पर गुस्सा होने या दूसरों पर इलज़ाम लगाने के बजाय, क्यों न मामले को सुलझाने के लिए आपसे जो हो सके, वह करें? अगर हम गलती होने पर इस बात पर अड़े रहें कि इसमें दोष किसी और का है, तो बिना मतलब तनाव बढ़ सकता है और मामला और भी उलझ सकता है। अच्छा रहेगा कि हम सबक सीखें, गलती सुधारें और उस बारे में ज़्यादा न सोचें।

जब कोई और गलती करता है, तब हम बड़ी आसानी से यह जताते हैं कि हमें अच्छा नहीं लगा। लेकिन ऐसे में यीशु मसीह की सलाह पर चलना कितना अच्छा रहेगा, “जो कुछ तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो।” (मत्ती 7:12) जब हमसे छोटी-सी भी गलती हो जाती है, तब हम उम्मीद करते हैं कि लोग हमारे साथ प्यार या कृपा से पेश आएँ या हो सके तो वह गलती पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दें। उसी तरह क्या हमें भी दूसरों से प्यार और कृपा से पेश नहीं आना चाहिए?—इफिसियों 4:32.

कुछ सिद्धांतों पर चलकर गलतियाँ कम की जा सकती हैं

एक शब्दकोश के मुताबिक गलती तब होती है, जब हम “किसी बात का सही अंदाज़ा नहीं लगा पाते, हमें उसके बारे में पूरी जानकारी नहीं होती या हम उस पर ध्यान नहीं देते।” हमें यह मानना पड़ेगा कि कभी-न-कभी हममें से हर किसी के साथ ऐसा ही कुछ हो जाता है। फिर भी अगर हम पवित्र शास्त्र में दिए सिद्धांतों पर चलें, तो गलतियाँ कम होंगी।

जैसे एक सिद्धांत है, “जो सुनने से पहले ही जवाब देता है, वह मूर्खता का काम करता है और अपनी बेइज़्ज़ती कराता है।” (नीतिवचन 18:13) अच्छा रहेगा, अगर हम पहले पूरी बात सुन लें और कुछ कहने से पहले थोड़ा सोचें। तब हम जल्दबाज़ी में ऐसा कुछ नहीं कहेंगे या करेंगे कि बाद में हमें पछताना पड़े। जब हम किसी बात पर ध्यान देते हैं और पूरी जानकारी लेते हैं, तो मुमकिन है कि उस बात के बारे में हमारा अंदाज़ा गलत नहीं होगा और हम गलती नहीं करेंगे।

एक और सिद्धांत है, “जहाँ तक हो सके, सबके साथ शांति बनाए रखने की पूरी कोशिश करो।” (रोमियों 12:18) हमें पूरी कोशिश करनी चाहिए कि हम सबके साथ शांति से और मिलजुल कर रहें। दूसरों के साथ काम करते वक्‍त हमें उनका लिहाज़ करना चाहिए, उनकी इज़्ज़त करनी चाहिए। जब भी मौका मिले, हमें उनकी तारीफ करने और उनका हौसला बढ़ाने से नहीं चूकना चाहिए। ऐसे माहौल में अगर किसी ने बिना सोचे-समझे कुछ कह दिया या कर दिया है, तो उसे नज़रअंदाज़ करना या माफ करना आसान होता है। अगर किसी से कोई बड़ी गलती हुई है, तो भी मामला प्यार से सुलझाया जा सकता है।

कोई गलती हो जाने पर उससे कुछ सीखिए। अपनी गलती की सफाई देने के बजाय कुछ अच्छे गुण पैदा करने की कोशिश कीजिए। सोचिए कि क्या आपको और सब्र से काम लेना है, कृपा और संयम का गुण बढ़ाना है। क्या आपको और भी कोमलता, शांति या प्यार से पेश आना है? (गलातियों 5:22, 23) ज़्यादा कुछ नहीं तो, आप यह तो सीख ही सकते हैं कि अगली बार क्या नहीं करना चाहिए। हमें यह भी नहीं सोचना चाहिए कि सबकुछ चलता है, लेकिन हर बात दिल पर भी नहीं लेनी चाहिए। कई बार थोड़ा बहुत हँसी-मज़ाक करने से माहौल अच्छा हो जाता है।

सही नज़रिया रखने के फायदे

अगर हम गलतियों के बारे में सही नज़रिया रखें, फिर चाहे गलती किसी से भी हुई हो, तो हम न अपने मन का चैन खोएँगे और न ही दूसरों से नाराज़ रहेंगे। हम न तो बहुत ज़्यादा मायूस हो जाएँगे और न ही खुद के बारे में बुरा महसूस करेंगे। अगर हम अपनी गलतियों से सबक सीखें, तो हम समझदार बनेंगे और लोग हमें पसंद करेंगे। हमें याद रखना है कि दूसरे भी अपनी गलतियों से जूझ रहे हैं और सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं, तब उनके साथ हमारे रिश्‍ते अच्छे रहेंगे। सबसे बढ़कर, अगर हम परमेश्‍वर की तरह प्यार करना और दिल से माफ करना सीखें, तो हमें बहुत फायदा होगा।—कुलुस्सियों 3:13.

लेख की शुरूआत में हमने मारगरेट के बारे में पढ़ा था। क्या उसकी गलती की वजह से सबका मज़ा किरकिरा हो गया? बिलकुल नहीं। सबने बात हँसी में टाल दी, खासकर मारगरेट ने। सबने खुशी-खुशी खाना खाया, वह भी बिना मैकरोनी के! कई सालों बाद उन दोनों नातियों ने अपने बच्चों को यह किस्सा सुनाया और अपने नाना-नानी के साथ बिताए खुशी के पल याद किए। आखिर वह छोटी-सी गलती ही तो थी!

^ पैरा. 2 नाम बदल दिए गए हैं।

^ पैरा. 3 चीज़वाली मैकरोनी एक ऐसा व्यंजन है, जिसमें एक किस्म के नूडल्स को पकाकर उस पर चीज़ सॉस डाली जाती है।