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 पहले पेज का विषय | स्वर्गदूत​—उनके बारे में जानना क्यों ज़रूरी है?

क्या स्वर्गदूतों का हम पर कोई असर होता है?

क्या स्वर्गदूतों का हम पर कोई असर होता है?

केनट और फीलोमेना कुराकाओ देश में रहते हैं। वे एक पति-पत्नी को पवित्र शास्त्र बाइबल पढ़ाते थे। एक रविवार दोपहर के वक्‍त वे उनसे मिलने गए।

केनट बताता है, “जब हम वहाँ पहुँचे, तो घर बंद मिला। उनकी गाड़ी भी नहीं थी। लेकिन पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगा कि उस आदमी की पत्नी को फोन करना चाहिए।”

उस स्त्री ने फोन उठाया और बताया कि उसके पति काम पर गए हैं। लेकिन जब उसे पता चला कि केनट और फीलोमेना दरवाज़े पर ही हैं, तो उसने उन्हें अंदर बुला लिया।

वे उसे देखते ही समझ गए कि वह रो रही थी। जैसे ही केनट ने बाइबल पर चर्चा शुरू करने से पहले प्रार्थना की, वह फिर से रोने लगी। उन्होंने प्यार से उससे पूछा कि आखिर बात क्या है।

उस स्त्री ने बताया कि वह आत्महत्या करने जा रही थी और अपने पति को खत लिख रही थी कि तभी केनट का फोन आ गया। उसने बताया कि उसे गहरी निराशा (डिप्रेशन) है। केनट और फीलोमेना ने बाइबल की आयतें दिखाकर उसे दिलासा दिया। इस तरह हौसला बढ़ानेवाली बातों से उसकी जान बच गयी।

केनट ने कहा, “हमने यहोवा * का धन्यवाद किया कि हम इस स्त्री का हौसला बढ़ा पाए। हम खासकर इस बात के लिए उसके एहसानमंद थे कि उसने हमें उस स्त्री को फोन करने के लिए उभारा, शायद एक स्वर्गदूत या अपनी पवित्र शक्‍ति के ज़रिए।”

केनट और फीलोमेना को यकीन है कि इस मामले में परमेश्वर ने ही एक स्वर्गदूत या पवित्र शक्‍ति के ज़रिए उनकी मदद की। क्या उनका यह मानना सही है? या केनट का सही वक्‍त पर फोन करना महज़ इत्तफाक था?

हम दावे के साथ तो कुछ नहीं कह सकते। लेकिन हमें इतना पता है कि परमेश्वर स्वर्गदूतों के ज़रिए उन लोगों की मदद करता है, जो उसके बारे में जानना चाहते हैं। जैसे, बाइबल में लिखा है कि परमेश्वर ने एक स्वर्गदूत के ज़रिए यीशु के शिष्य फिलिप्पुस से कहा कि वह इथियोपिया के उस अधिकारी की मदद करे, जो शास्त्र की बातें समझना चाहता है।​—प्रेषितों 8:26-31.

कई धर्मों में सिखाया जाता है कि ऐसे बहुत-से अदृश्य प्राणी हैं, जिनमें अलौकिक शक्‍ति होती है। इनमें से कुछ के बारे में कहा जाता है कि वे परमेश्वर की इच्छा पूरी करते हैं या इंसानों की हिफाज़त करते हैं। बहुत-से लोग न सिर्फ स्वर्गदूतों के वजूद पर यकीन करते हैं, बल्कि यह भी मानते हैं कि ये प्राणी किसी-न-किसी तरह उनकी ज़िंदगी पर असर करते हैं। वहीं कुछ लोग स्वर्गदूतों पर बिलकुल विश्वास नहीं करते।

क्या स्वर्गदूत सच में होते हैं? अगर हाँ, तो वे कैसे वजूद में आए? उनके बारे में सच्चाई क्या है? क्या उनका हमारी ज़िंदगी पर कोई असर होता है? आइए देखें।

^ पैरा. 8 बाइबल के मुताबिक यहोवा, परमेश्वर का नाम है।​—भजन 83:18.