इस जानकारी को छोड़ दें

विषय-सूची को छोड़ दें

 पहले पेज का विषय

जब मौत किसी अपने को हमसे जुदा कर दे

जब मौत किसी अपने को हमसे जुदा कर दे

“मत रो, गुड़िया! . . .  ऊपरवाला जो करता है, वह अच्छे के लिए ही करता है।”

बीना * नाम की एक लड़की से किसी ने ये बात उस वक्‍त कही, जब उसके पिता की मौत हो गयी थी। उसके पिताजी एक कार दुर्घटना में गुज़र गए थे।

यह बात उसके किसी जान-पहचानवाले ने दिलासा देने के लिए ही कही थी, लेकिन बीना को ऐसा लगा कि मानो उसे कोई तीर चुभो गया हो। बीना अपने पिता के बहुत करीब थी। वह अपने-आप से बार-बार यह कहती रही, “उनकी मौत से कुछ भी अच्छा नहीं हुआ।” इस घटना के सालों बाद बीना ने एक किताब में जिस तरह यह बात लिखी, उससे पता चलता है कि उसे अब भी इस बात का कितना दुख है।

इससे हम समझ पाते हैं कि जब किसी की मौत हो जाती है, तो इस दुख से उबरने में बहुत वक्‍त लग सकता है, खासकर जब हम उस व्यक्ति के बहुत करीब होते हैं। पवित्र किताब बाइबल में एकदम सही कहा गया है कि मौत हमारी “दुश्मन” है। (1 कुरिंथियों 15:26) यह हमारी ज़िंदगी में अचानक से हमला बोल देती है, हम इसके लिए बिलकुल भी तैयार नहीं होते हैं और यह आती है और हमारे किसी अपने को हमसे ज़बरदस्ती जुदा कर देती है। हममें से कोई भी इसके कहर से नहीं बच सकता। ऐसे वक्‍त पर हमें समझ में नहीं आता कि हम खुद को कैसे सँभालें।

कभी-न-कभी शायद आपने भी यह सोचा हो कि कैसे कोई इस दुख से उबर सकता है? इस सदमे से बाहर आने में कितना वक्‍त लगता है? जो दुखी हैं, उन्हें मैं कैसे दिलासा दे सकता हूँ? क्या हम कभी उनसे दोबारा मिल सकते हैं, जो अब नहीं रहे? (w16-E No. 3)

^ पैरा. 4 कुछ नाम बदल दिए गए हैं।