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बाइबल सच्चाई जानने का भरोसेमंद ज़रिया

बाइबल सच्चाई जानने का भरोसेमंद ज़रिया

अलग-अलग जाति और संस्कृति के लोग सदियों से यह मानते आए हैं कि सच्चाई के लिए बाइबल पर भरोसा किया जा सकता है। आज लाखों लोग इसकी शिक्षाएँ मानते हैं। वहीं दूसरे लोग बाइबल को बेकार या कथा-कहानियों की किताब मानकर दरकिनार कर देते हैं। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या आपको बाइबल से सच्चाई मिल सकती है?

आप बाइबल पर भरोसा क्यों कर सकते हैं?

आप इस बात का यकीन रख सकते हैं कि बाइबल आपकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी। उदाहरण के लिए अगर सालों से आपका दोस्त आपसे सच बोलता आया है, तो आप हमेशा उस पर भरोसा करेंगे और कभी शक नहीं करेंगे। भरोसेमंद दोस्त की तरह बाइबल ने भी हमेशा सच कहा है। आइए कुछ उदाहरणों पर गौर करें।

सच्चे लेखक

बाइबल के लेखक सच्चे थे, इसलिए उन्होंने अपनी कमियाँ नहीं छिपायीं। मिसाल के लिए, भविष्यवक्‍ता योना ने बाइबल में लिखा कि उसने परमेश्‍वर की बात नहीं मानी। (योना 1:1-3) अपनी किताब के आखिर में उसने लिखा कि परमेश्‍वर ने उसकी सोच सुधारी। मगर योना ने यह नहीं लिखा कि उसने अपना रवैया कैसे सुधारा, क्योंकि ऐसा करने से लोगों का ध्यान उस पर जाता। (योना 4:1, 4, 10, 11) बाइबल के लेखकों ने हर बात पूरी ईमानदारी से लिखी, क्योंकि वे चाहते थे कि बाइबल में जो भी लिखा जाए वह सच हो।

फायदेमंद सच्चाई

क्या ज़िंदगी के मामलों में बाइबल की सलाह हमेशा फायदेमंद होती है? जी हाँ। मिसाल के लिए, दूसरों के साथ अच्छा रिश्‍ता बनाए रखने के बारे में बाइबल कहती है, “जो कुछ तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो।” (मत्ती 7:12) “नरमी से जवाब देने पर क्रोध शांत हो जाता है, लेकिन चुभनेवाली बात से गुस्सा भड़क उठता है।” (नीतिवचन 15:1) वाकई, आज भी बाइबल की सच्चाइयाँ उतनी ही फायदेमंद हैं, जितनी पहले थीं।

ऐतिहासिक सच्चाई

पुरातत्वज्ञानियों की खोज से ऐसे लोगों और जगहों की सच्चाई पुख्ता हुई है, जिनके बारे में बाइबल में लिखा गया था। उदाहरण के लिए बाइबल में दी एक छोटी-सी जानकारी पर गौर कीजिए। वहाँ बताया गया है कि नहेमायाह के समय में यरूशलेम में रहनेवाले सोर (यानी फीनीके) के लोग “मछलियाँ और तरह-तरह का माल” शहर में लाते थे।—नहेमायाह 13:16.

क्या ऐसे सबूत हैं जिनसे पता चले कि बाइबल की यह आयत सच है? जी हाँ, पुरातत्वज्ञानियों को खोज के दौरान इसराएल में फीनीके की चीज़ें मिलीं। इससे पता चलता है कि दोनों शहरों के बीच व्यापारिक संबंध थे। इसके अलावा यरूशलेम में भूमध्य सागर की मछली के पाए जाने के सबूत भी मिले हैं। पुरातत्वज्ञानियों का मानना है कि व्यापारी दूर-दराज़ के समुद्री इलाकों से ये मछलियाँ लाते थे। सारे सबूतों की जाँच करने पर एक खोजकर्ता ने कहा, “नहेमायाह 13:16 में कही बात बिलकुल सही है कि सोर के लोग यरूशलेम में मछली बेचते थे।”

वैज्ञानिक सच

बाइबल दरअसल धार्मिक और ऐतिहासिक किताब है। लेकिन यह विज्ञान से जुड़ी बातों के बारे में भी एकदम सही जानकारी देती है। एक उदाहरण पर गौर कीजिए।

करीब 3,500 साल पहले बाइबल में अय्यूब नाम की एक किताब में लिखा गया था कि पृथ्वी “बिना किसी सहारे के” लटकी हुई है। (अय्यूब 26:7) यह बात उन कथा-कहानियों से बिलकुल अलग है, जिनमें बताया जाता है कि पृथ्वी पानी पर तैर रही है या एक विशाल कछुए पर टिकी है। अय्यूब की किताब को लिखे करीब 1,100 साल बीत चुके थे। फिर भी लोगों का यही मानना था कि पृथ्वी ज़रूर किसी-न-किसी चीज़ पर टिकी होगी, यह बिना सहारे के हवा में नहीं लटक सकती। आज से करीब 300 साल पहले यानी 1687 में आइज़क न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में कुछ जानकारी प्रकाशित की। उसमें उसने बताया कि धरती अपनी धुरी पर अदृश्‍य बल के सहारे टिकी है। इस खोज से यह बात पुख्ता हो गयी कि बाइबल में 3,000 साल पहले लिखी बात शत-प्रतिशत सच है।

भविष्यवाणियों की सच्चाई

बाइबल की भविष्यवाणियाँ कितनी सच हैं? एक उदाहरण पर गौर कीजिए: बैबिलोन के विनाश के बारे में यशायाह की भविष्यवाणी।

भविष्यवाणी: बैबिलोन भविष्य में एक शक्‍तिशाली साम्राज्य की राजधानी बननेवाला था। लेकिन उसके बारे में ईसा पूर्व 8वीं सदी में, बाइबल के एक लेखक यशायाह ने भविष्यवाणी की कि वह शहर तबाह कर दिया जाएगा और फिर कभी नहीं बसाया जाएगा। (यशायाह 13:17-20) यशायाह ने यह भी बताया कि यह काम करनेवाला कुसरू नाम का एक आदमी होगा। कुसरू यह काम कैसे करता? यशायाह ने बताया कि वह नदी को “सुखा” देगा और शहर के फाटक खुले पड़े रहेंगे।—यशायाह 44:27–45:1.

पूर्ति: यशायाह की भविष्यवाणी के करीब 200 साल बाद फारस के राजा ने बैबिलोन पर हमला कर दिया। उसका क्या नाम था? कुसरू। बैबिलोन बहुत मज़बूत शहर था जिसे जीतना मुश्‍किल था। इसलिए कुसरू ने सोचा कि फरात नदी का पानी कम करके बैबिलोन शहर में पहुँचा जा सकता है। यह नदी शहर के बीच में से होकर बहती थी। उसके आदमियों ने नदी का पानी कम करने के लिए एक नहर खोदी और पानी का रुख दलदली ज़मीन की तरफ मोड़ दिया। इससे नदी का पानी काफी कम हो गया और कुसरू की सेना जाँघों तक पानी में चलकर शहर तक पहुँच गयी। हैरानी की बात है कि बैबिलोन के लोगों ने नदी की तरफ के फाटक खुले ही छोड़ दिए थे। कुसरू की सेना खुले फाटकों से बैबिलोन के अंदर घुस गयी और उसका नाश कर दिया।

भविष्यवाणी की एक और बात पूरी होनी थी। वह यह कि बैबिलोन फिर कभी नहीं बसाया जाएगा। क्या यह बात सच हुई? कुछ दशकों तक तो लोग वहाँ रहे। लेकिन बाद में वह खंडहर हो गया, जो आज बगदाद के पास ईराक में देखे जा सकते हैं। ये खंडहर इस बात की गवाही देते हैं कि भविष्यवाणी की एक-एक बात पूरी हुई। वाकई, जब बाइबल भविष्य के बारे में कुछ बताती है, तब भी इस पर पूरा भरोसा किया जा सकता है।