यहोवा के साक्षियों की जीवन कहानियाँ

दुनिया के कई आदमियों और औरतों ने यहोवा की उपासना को सबसे ज़्यादा अहमियत दी है। उनकी कहानियाँ पढ़कर आपका हौसला बढ़ेगा और परमेश्‍वर पर आपका विश्‍वास मज़बूत होगा।

हमारी पत्रिकाओं में आनेवाली जीवन कहानियाँ

“प्रहरीदुर्ग” और “सजग होइए!” में 1955 से यहोवा के साक्षियों की जो सैकड़ों जीवन कहानियाँ प्रकाशित की जा रही हैं, उन्हें पढ़ने के लिए लिंक उपलब्ध हैं।

कमल विर्दी

‘मैं चाहती थी कि किसी के साथ अन्याय ना हो’

बहन कमल और उनकी बहनों का उनके परिवारवालों ने बहुत विरोध किया और उनके साथ बहुत नाइंसाफी हुई। हर तरह की नाइंसाफी को लेकर उनके मन में जो सवाल थे, उन्हें उनके जवाब मिले और उन्होंने अलग-अलग जगह खुशी से यहोवा की सेवा की है।

ग्यॉर्गी पॉरचूल्यान

‘दिल में था यहोवा के लिए प्यार, उसी से की हर मुश्‍किल पार’

न्याय और मन की शांति की खोज में वह यहोवा का एक साक्षी बना। उसे शिविर में कड़ी मज़दूरी करने की सज़ा मिली, फिर उसे अपने घर से दूर भेज दिया गया। आगे चलकर उसे अपनी बीमार पत्नी का खयाल रखना था। यहोवा के लिए उसके दिल में जो प्यार था, उसी से वह हर मुश्‍किल को पार कर पाया।

हमारी पत्रिकाओं में आनेवाली जीवन कहानियाँ

“प्रहरीदुर्ग” और “सजग होइए!” में 1955 से यहोवा के साक्षियों की जो सैकड़ों जीवन कहानियाँ प्रकाशित की जा रही हैं, उन्हें पढ़ने के लिए लिंक उपलब्ध हैं।

ग्यॉर्गी पॉरचूल्यान

‘दिल में था यहोवा के लिए प्यार, उसी से की हर मुश्‍किल पार’

न्याय और मन की शांति की खोज में वह यहोवा का एक साक्षी बना। उसे शिविर में कड़ी मज़दूरी करने की सज़ा मिली, फिर उसे अपने घर से दूर भेज दिया गया। आगे चलकर उसे अपनी बीमार पत्नी का खयाल रखना था। यहोवा के लिए उसके दिल में जो प्यार था, उसी से वह हर मुश्‍किल को पार कर पाया।

कमल विर्दी

‘मैं चाहती थी कि किसी के साथ अन्याय ना हो’

बहन कमल और उनकी बहनों का उनके परिवारवालों ने बहुत विरोध किया और उनके साथ बहुत नाइंसाफी हुई। हर तरह की नाइंसाफी को लेकर उनके मन में जो सवाल थे, उन्हें उनके जवाब मिले और उन्होंने अलग-अलग जगह खुशी से यहोवा की सेवा की है।

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