इस जानकारी को छोड़ दें

विषय-सूची को छोड़ दें

भाग 25

विश्वास, चालचलन और प्यार के बारे में सलाह

विश्वास, चालचलन और प्यार के बारे में सलाह

याकूब, पतरस, यूहन्ना और यहूदा ने दूसरे मसीहियों का हौसला बढ़ाने के लिए चिट्ठियाँ लिखीं

याकूब और यहूदा, यीशु के भाई थे। पतरस और यूहन्ना, यीशु के 12 प्रेषितों में से थे। उन चारों ने कुल मिलाकर 7 चिट्ठियाँ लिखीं, जो मसीही यूनानी शास्त्र का हिस्सा बनीं। हर चिट्ठी का नाम, उसके लेखक के नाम पर रखा गया है। परमेश्वर की प्रेरणा से लिखी गयी इन चिट्ठियों के ज़रिए, मसीहियों को उकसाया गया है कि वे यहोवा और उसके राज के वफादार बने रहें।

विश्वास ज़ाहिर कीजिए। हमारे लिए सिर्फ यह कहना काफी नहीं कि हमें परमेश्वर पर विश्वास है, बल्कि इसे कामों से भी ज़ाहिर करना चाहिए। याकूब ने लिखा: “कामों के बिना विश्वास मरा हुआ है।” (याकूब 2:26) विश्वास रखते हुए परीक्षाओं का सामना करने से हम अपने अंदर धीरज के गुण को और भी बढ़ा पाएँगे। परीक्षाओं में धीरज धरने के लिए ज़रूरी है कि हम परमेश्वर से बुद्धि माँगें। साथ ही, भरोसा रखें कि यहोवा हमें बुद्धि देगा। धीरज धरने से हम यहोवा को खुश कर पाएँगे। (याकूब 1:2-6, 12) अगर एक इंसान परमेश्वर पर विश्वास दिखाता है और उसका वफादार बना रहता है, तो परमेश्वर भी उसकी तरफ कदम बढ़ाता है। याकूब ने कहा: “परमेश्वर के करीब आओ और वह तुम्हारे करीब आएगा।”—याकूब 4:8.

एक मसीही का विश्वास इतना मज़बूत होना चाहिए कि वह अनैतिक काम या दूसरे बुरे कामों के लिए फुसलाए जाने पर, उसका कड़ा विरोध कर सके। पहली सदी में चारों तरफ इतना खराब माहौल था कि यहूदा ने अपने संगी मसीहियों को उकसाया: “विश्वास की खातिर जी-जान से लड़ो।”—यहूदा 3.

अच्छा चालचलन बनाए रखिए। यहोवा अपने उपासकों से उम्मीद करता है कि वे पवित्र बने रहें, यानी ज़िंदगी के हर दायरे में शुद्धता बनाए रखें। पतरस ने लिखा: “अपने सारे चालचलन में पवित्र बनो क्योंकि यह लिखा है: ‘तुम्हें पवित्र होना है क्योंकि मैं [यहोवा] पवित्र हूँ।’” (1 पतरस 1:15, 16) इस मामले में यीशु, मसीहियों के लिए एक बढ़िया मिसाल है। पतरस ने कहा: “मसीह ने . . . तुम्हारी खातिर दुःख उठाया और तुम्हारे लिए एक आदर्श छोड़ गया ताकि तुम उसके नक्शे-कदम पर नज़दीकी से चलो।” (1 पतरस 2:21) हालाँकि परमेश्वर के स्तरों के मुताबिक जीने की वजह से मसीहियों को दुख झेलने पड़ते हैं, मगर वे ‘अपना ज़मीर साफ रख’ पाते हैं। (1 पतरस 3:16, 17) पतरस ने मसीहियों को उकसाया कि वे न्याय के दिन और परमेश्वर की नयी दुनिया की आस लगाए रखें, ‘जहाँ धार्मिकता का बसेरा होगा।’ (फुटनोट) उसने उन्हें यह भी बताया कि इस दौरान उन्हें पवित्र चालचलन बनाए रखना है और परमेश्वर की भक्‍ति के काम करनेवाले इंसान बनना है।—2 पतरस 3:11-13.

“परमेश्वर के करीब आओ और वह तुम्हारे करीब आएगा।”—याकूब 4:8

प्यार दिखाइए। प्रेषित यूहन्ना ने लिखा: “परमेश्वर प्यार है।” उसने बताया कि परमेश्वर इंसानों से बेइंतिहा प्यार करता है और इसलिए उसने यीशु को धरती पर ‘हमारे पापों के लिए बलिदान के रूप में’ भेजा। बदले में मसीहियों को क्या करना चाहिए? यूहन्ना ने समझाया: “मेरे प्यारो, जब परमेश्वर ने हमसे इस कदर प्यार किया है, तो फिर हमारा यह फर्ज़ बनता है कि हम भी एक-दूसरे से प्यार करें।” (1 यूहन्ना 4:8-11) प्यार जताने का एक तरीका है, अपने संगी मसीहियों को मेहमान-नवाज़ी दिखाना।—3 यूहन्ना 5-8.

मगर मसीही यहोवा के लिए अपना प्यार कैसे दिखा सकते हैं? इस सवाल के जवाब में यूहन्ना ने कहा: “परमेश्वर से प्यार करने का मतलब यही है कि हम उसकी आज्ञाओं पर चलें; और उसकी आज्ञाएँ हम पर बोझ नहीं हैं।” (1 यूहन्ना 5:3; 2 यूहन्ना 6) जो लोग परमेश्वर की आज्ञा मानते हैं, वे इस बात का यकीन रख सकते हैं कि परमेश्वर उनसे प्यार करता रहेगा और उन्हें “हमेशा की ज़िंदगी” देगा।—यहूदा 21.

—यह भाग याकूब; 1 पतरस; 2 पतरस; 1 यूहन्ना; 2 यूहन्ना; 3 यूहन्ना और यहूदा की किताबों पर आधारित है।