हमारे बारे में फैलाए गए झूठ

झूठ: यहोवा के साक्षी इसलिए ईस्टर नहीं मनाते क्योंकि वे मसीही नहीं हैं।

सच: हम विश्वास करते हैं कि यीशु मसीह के ज़रिए ही हमें जीवन मिलेगा और हमारी पूरी कोशिश रहती है कि हम उसके “नक्शे-कदम पर नज़दीकी” से चलें।1 पतरस 2:21; लूका 2:11.

झूठ: आप विश्वास नहीं करते कि यीशु को दोबारा ज़िंदा किया गया था।

सच: हम यीशु के दोबारा जी उठने पर पूरा विश्वास करते हैं और यह हमारे विश्वास की एक ठोस बुनियाद है, जिसके बारे में हम प्रचार काम में दूसरों को भी बताते हैं।—1 कुरिंथियों 15:3, 4, 12-15.

झूठ: आपको इस बात की परवाह नहीं कि आपके बच्चे ईस्टर की खुशियाँ नहीं मना पाते?

सच: हमें अपने बच्चों से बहुत प्यार है और हम उन्हें अच्छी बातें सिखाने और उन्हें खुश रखने की पूरी कोशिश करते हैं।—तीतुस 2:4.

तो फिर यहोवा के साक्षियों को ईस्टर मनाने में क्या दिक्कत है?

  • ईस्टर के बारे में बाइबल कुछ नहीं बताती।

  • यीशु ने अपनी मौत का दिन मनाने की आज्ञा दी थी, ना कि उसके दोबारा जी उठने का दिन मनाने की। इसलिए हम हर साल बाइबल कैलेंडर के मुताबिक, उसकी मौत के दिन की यादगार मनाते हैं।—लूका 22:19, 20.

  • ईस्टर में पाए जानेवाले बहुत-से रीति-रिवाज़ों की शुरूआत प्रजनन शक्ति से जुड़े रीति-रिवाज़ों से हुई है, जिनका ताल्लुक लैंगिक अनैतिकता से है। इसलिए यहोवा इसे कभी अपनी मंज़ूरी नहीं दे सकता। परमेश्वर चाहता है हम सिर्फ-और-सिर्फ उसकी भक्ति करें, जिसमें किसी भी तरह की मिलावट करना परमेश्वर की तौहीन करना है।—निर्गमन 20:5; 1 राजा 18:21.

हम विश्वास करते हैं कि हमारा ईस्टर ना मनाने का फैसला पूरी तरह बाइबल के मुताबिक है। यह हमें बढ़ावा देती है कि हम परंपराओं के पीछे भागने के बजाय अपनी “बुद्धि” का इस्तेमाल करके सही फैसले लें। (नीतिवचन 3:21; मत्ती 15:3) फिर भी जब कोई ईस्टर मनाता है, तो हम उसमें कोई दखलअंदाज़ी नहीं करते। पर अगर कोई जानना चाहे तो हम उन्हें ज़रूर बताना चाहेंगे कि हम यहोवा के साक्षी ईस्टर के बारे में क्या सोचते हैं।—1 पतरस 3:15.