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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

तीमुथियुस के नाम दूसरी चिट्ठी 1:1-18

सारांश

  • नमस्कार (1, 2)

  • पौलुस, तीमुथियुस के विश्‍वास के लिए परमेश्‍वर का एहसानमंद (3-5)

  • परमेश्‍वर के वरदान को ज्वाला की तरह जलाए रख (6-11)

  • खरी शिक्षाओं को थामे रह (12-14)

  • पौलुस के दुश्‍मन और दोस्त (15-18)

1  मैं पौलुस, जो परमेश्‍वर की मरज़ी से मसीह यीशु का एक प्रेषित हूँ और जिसे मसीह यीशु के ज़रिए मिलनेवाली ज़िंदगी के वादे का प्रचार करने के लिए ठहराया गया है,+  अपने प्यारे बेटे तीमुथियुस+ के नाम यह चिट्ठी लिख रहा हूँ: परमेश्‍वर हमारे पिता और हमारे प्रभु मसीह यीशु की महा-कृपा, दया और शांति तुझ पर हो।  मैं परमेश्‍वर का एहसानमंद हूँ, जिसकी पवित्र सेवा मैं अपने पुरखों की तरह और साफ ज़मीर के साथ करता हूँ कि मैं अपनी मिन्‍नतों में तुझे रात-दिन याद करता हूँ।  मैं तेरे आँसुओं को याद करके तुझे देखने के लिए तरस रहा हूँ ताकि तुझसे मिलकर खुशी से भर जाऊँ।  मैं तेरा विश्‍वास हमेशा याद करता हूँ जिसमें कोई कपट नहीं।+ ऐसा ही विश्‍वास पहले तेरी नानी लोइस और तेरी माँ यूनीके में था और अब मुझे यकीन है कि तुझमें भी है।  इसी वजह से मैं तुझे याद दिलाता हूँ कि परमेश्‍वर का जो वरदान तुझे मेरे हाथ रखने से मिला था, उसे तू एक ज्वाला की तरह जलाए रख।+  इसलिए कि परमेश्‍वर ने हमें कायरता का रुझान नहीं दिया+ बल्कि शक्‍ति,+ प्यार और सही सोच रखने का रुझान दिया है।  इसलिए तू न तो हमारे प्रभु की गवाही देने से शर्मिंदा हो,+ न मेरी वजह से जो उसकी खातिर कैद में है। इसके बजाय परमेश्‍वर की शक्‍ति पर भरोसा रखते हुए+ खुशखबरी के लिए दुख झेलने को तैयार रह।+  उसने हमें बचाया है और पवित्र बुलावा दिया है।+ मगर यह बुलावा हमें अपने कामों की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए मिला है क्योंकि यह परमेश्‍वर का मकसद था और उसने हम पर महा-कृपा की थी।+ उसने हम पर यह महा-कृपा मसीह यीशु की वजह से मुद्दतों पहले की थी। 10  मगर अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रकट होने की वजह से इस महा-कृपा के बारे में हमें साफ समझ दी गयी है।+ उसने मौत को मिटा दिया+ और खुशखबरी के ज़रिए+ इस बात पर रौशनी डाली है कि जीवन+ और अनश्‍वरता+ कैसे मिलेगी। 11  यही खुशखबरी सुनाने के लिए मुझे एक प्रचारक, प्रेषित और शिक्षक ठहराया गया है।+ 12  इसी वजह से मैं ये सारे दुख उठा रहा हूँ,+ मगर मैं शर्मिंदा नहीं हूँ।+ क्योंकि मैंने जिस पर यकीन किया है उसे मैं जानता हूँ। और मुझे पूरा भरोसा है कि मैंने उसे जो अमानत सौंपी है उसकी वह उस दिन तक हिफाज़त करने के काबिल है।+ 13  जो खरी* शिक्षाएँ+ तूने मुझसे सुनी हैं उनके नमूने* को उस विश्‍वास और प्यार से थामे रह, जो मसीह यीशु के साथ एकता में रहने की वजह से पैदा होता है। 14  पवित्र शक्‍ति के ज़रिए, जो हममें निवास करती है, इस अनमोल अमानत की हिफाज़त कर।+ 15  तू जानता है कि एशिया प्रांत के सब लोगों ने+ मुझसे किनारा कर लिया है। फूगिलुस और हिरमुगिनेस भी उनमें से हैं। 16  उनेसिफुरुस के घराने+ पर प्रभु की दया बनी रहे क्योंकि उसने कई बार मेरे जी को तरो-ताज़ा किया है और वह मेरी ज़ंजीरों की वजह से शर्मिंदा नहीं हुआ। 17  इसके बजाय, जब वह रोम में था तो उसने बड़े जतन से मुझे ढूँढ़ा और वह मुझसे मिला। 18  मेरी दुआ है कि प्रभु यहोवा* उस दिन उस पर दया करे। तू अच्छी तरह जानता है कि उसने इफिसुस में मेरी क्या-क्या सेवा की।

कई फुटनोट

या “स्वास्थ्यकर; फायदेमंद।”
या “रूप-रेखा।”
अति. क5 देखें।