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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

पहला शमूएल 10:1-27

सारांश

  • शाऊल को राजा ठहराया गया (1-16)

  • उसे लोगों के सामने पेश किया गया (17-27)

10  इसके बाद शमूएल ने तेल की कुप्पी ली और शाऊल के सिर पर तेल उँडेला।+ उसने शाऊल को चूमा और उससे कहा, “यहोवा ने बेशक तेरा अभिषेक करके तुझे अपनी प्रजा+ का अगुवा ठहराया है।+  आज जब तू मेरे पास से चला जाएगा तो तुझे बिन्यामीन के इलाके के सेलसह में राहेल की कब्र+ के पास दो आदमी मिलेंगे। वे तुझसे कहेंगे, ‘तू जिन गधियों को ढूँढ़ने गया था वे मिल गयी हैं। अब तेरे पिता को जानवरों की चिंता तो नहीं,+ बल्कि तेरी चिंता होने लगी है। वह कह रहा है, “मेरा बेटा अब तक नहीं लौटा, मैं क्या करूँ?”’  फिर तू वहाँ से आगे बढ़कर ताबोर में बड़े पेड़ के पास जाना। वहाँ तुझे तीन आदमी मिलेंगे जो सच्चे परमेश्‍वर की उपासना करने बेतेल+ जा रहे होंगे। एक आदमी के हाथ में बकरी के तीन बच्चे होंगे, दूसरे के हाथ में तीन रोटियाँ और तीसरे के हाथ में दाख-मदिरा का एक बड़ा मटका होगा।  वे तेरी खैरियत पूछेंगे और फिर तुझे दो रोटियाँ देंगे और तू उनसे लेना।  इसके बाद तू सच्चे परमेश्‍वर की पहाड़ी पर पहुँचेगा, जहाँ पलिश्‍ती सैनिकों की एक चौकी है। जब तू शहर जाएगा तो तुझे भविष्यवक्‍ताओं की एक टोली मिलेगी जो ऊँची जगह से नीचे आ रही होगी। वे भविष्यवाणी कर रहे होंगे और उनके आगे-आगे एक तारोंवाला बाजा, डफली, बाँसुरी और सुरमंडल बजाया जा रहा होगा।  तब यहोवा की पवित्र शक्‍ति तुझ पर काम करेगी+ और तू भी उन भविष्यवक्‍ताओं के साथ भविष्यवाणी करने लगेगा और बिलकुल एक अलग इंसान नज़र आएगा।+  जब ये सारी निशानियाँ पूरी हो जाएँ तो तुझे जो मुनासिब लगे वह करना क्योंकि सच्चा परमेश्‍वर तेरे साथ है।  फिर तू नीचे गिलगाल+ जाना और तेरे बाद मैं भी वहाँ आऊँगा ताकि होम-बलियाँ और शांति-बलियाँ चढ़ा सकूँ। तू वहाँ सात दिन तक मेरा इंतज़ार करना, फिर मैं आकर तुझे बताऊँगा कि तुझे क्या-क्या करना है।”  जैसे ही शाऊल शमूएल के पास से जाने के लिए मुड़ा, परमेश्‍वर शाऊल के मन का स्वभाव बदलने लगा जिस वजह से वह बिलकुल अलग नज़र आने लगा। वे सारी निशानियाँ उसी दिन पूरी हो गयीं। 10  वे वहाँ से पहाड़ी पर गए और वहाँ भविष्यवक्‍ताओं की एक टोली उससे मिली। उसी पल परमेश्‍वर की पवित्र शक्‍ति शाऊल पर काम करने लगी+ और वह उनके साथ मिलकर भविष्यवाणी करने लगा।+ 11  जो लोग शाऊल को पहले से जानते थे, उन्होंने जब उसे भविष्यवक्‍ताओं के साथ भविष्यवाणी करते देखा तो वे एक-दूसरे से कहने लगे, “कीश के बेटे शाऊल को क्या हो गया है? क्या वह भी भविष्यवक्‍ता बन गया?” 12  तब वहाँ के एक आदमी ने कहा, “मगर इन लोगों का पिता कौन है?” इसी घटना से यह कहावत शुरू हुई, “क्या शाऊल भी भविष्यवक्‍ता बन गया?”+ 13  जब शाऊल ने भविष्यवाणी करना खत्म किया तो वह ऊँची जगह पर गया। 14  बाद में शाऊल के पिता के भाई ने उससे और उसके सेवक से पूछा, “तुम दोनों कहाँ गए थे?” शाऊल ने कहा, “हम गधियों को ढूँढ़ने गए थे,+ मगर वे नहीं मिलीं। इसलिए हम शमूएल के पास गए।” 15  तब शाऊल के पिता के भाई ने उससे पूछा, “क्या मैं जान सकता हूँ कि शमूएल ने तुम्हें क्या बताया?” 16  शाऊल ने कहा, “उसने हमें बताया कि गधियाँ मिल गयी हैं।” मगर शाऊल ने उसे यह नहीं बताया कि शमूएल ने उसे राजा ठहराने की बात भी की थी। 17  इसके बाद, शमूएल ने इसराएलियों को मिसपा में यहोवा के सामने इकट्ठा होने के लिए कहा।+ 18  वहाँ उसने लोगों से कहा, “इसराएल के परमेश्‍वर यहोवा ने कहा है, ‘मैंने ही इसराएल को मिस्र से निकाला था।+ मैंने तुम लोगों को मिस्र के हाथ से और उन सभी राज्यों से छुड़ाया था जो तुम पर ज़ुल्म करते थे। 19  मगर आज तुमने अपने परमेश्‍वर को ठुकरा दिया है,+ जिसने तुम्हें हर आफत और मुसीबत से बचाया था। तुमने मुझसे कहा, “नहीं, तुझे हम पर राज करने के लिए एक राजा ठहराना ही होगा।” इसलिए अब तुम सब अपने-अपने गोत्र और कुल के हिसाब से यहोवा के सामने खड़े हो जाओ।’” 20  फिर शमूएल ने इसराएल के सभी गोत्रों को आगे आने के लिए कहा।+ उन सबमें से बिन्यामीन गोत्र चुना गया।+ 21  फिर उसने बिन्यामीन गोत्र के सभी कुलों को आगे आने के लिए कहा। उनमें से मतरी का कुल चुना गया। आखिर में, उस कुल में से कीश का बेटा शाऊल चुना गया।+ मगर जब वे शाऊल को ढूँढ़ने लगे तो वह कहीं दिखायी नहीं दिया। 22  तब उन्होंने यहोवा से पूछा,+ “क्या वह आदमी यहाँ आया है?” यहोवा ने कहा, “देखो, वह उधर है, सामान के बीच छिपा है।” 23  तब वे दौड़कर सामान के पास गए और वहाँ से उसे ले आए। जब वह लोगों के बीच खड़ा हुआ तो वह सबसे ऊँचा दिखायी दिया, बाकी सब उसके कंधे तक ही आते थे।+ 24  शमूएल ने सब लोगों से कहा, “देखो, यहोवा ने तुम्हारे लिए कितना बढ़िया आदमी चुना है!+ इसके जैसा लोगों में और कोई नहीं है।” तब सब लोग ज़ोर-ज़ोर से कहने लगे, “राजा की जय हो! राजा की जय हो!” 25  शमूएल ने लोगों को बताया कि एक राजा को उनसे क्या-क्या माँग करने का हक है।+ फिर उसने ये सारी बातें एक किताब में लिखकर उसे यहोवा के सामने रख दिया। तब शमूएल ने सब लोगों को विदा किया और वे अपने-अपने घर लौट गए। 26  शाऊल भी अपने घर गिबा लौट गया और उसके साथ वे सभी सूरमा भी गए जिनके दिलों को यहोवा ने उभारा था। 27  मगर कुछ निकम्मे आदमी कहने लगे, “यह हमें क्या बचाएगा?”+ उन्होंने शाऊल को तुच्छ समझा और वे उसके लिए कोई तोहफा नहीं लाए।+ मगर शाऊल खामोश रहा।*

कई फुटनोट

शा., “वह गूँगे जैसा हो गया।”