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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

लैव्यव्यवस्था 7:1-38

सारांश

  • चढ़ावों के बारे में हिदायतें (1-21)

    • दोष-बलि (1-10)

    • शांति-बलि (11-21)

  • चरबी या खून खाने की मनाही (22-27)

  • याजकों का हिस्सा (28-36)

  • चढ़ावों के बारे में आखिरी शब्द (37, 38)

7  तुम दोष-बलि के बारे में इस नियम का पालन करना:+ यह बलि बहुत पवित्र है।  वे दोष-बलि का जानवर उसी जगह हलाल करेंगे जहाँ होम-बलि के जानवर हलाल करते हैं। इस बलि के जानवर का खून+ वेदी के चारों तरफ छिड़का जाए।+  वह जानवर की सारी चरबी अर्पित करेगा,+ उसकी चरबीवाली मोटी पूँछ, वह चरबी जो अंतड़ियों को ढके रहती है,  दोनों गुरदे और उनकी चरबी यानी कमर के पास की चरबी। वह गुरदों के साथ-साथ कलेजे के आस-पास की चरबी भी निकालकर अलग रखेगा।+  फिर याजक इन सारी चीज़ों को वेदी पर रखकर जलाएगा ताकि इनका धुआँ उठे। यह आग में जलाकर यहोवा को दिया जानेवाला चढ़ावा है।+ यह दोष-बलि है।  इस बलि में से सिर्फ याजक खा सकते हैं।+ इसे पवित्र जगह में खाना चाहिए। यह बहुत पवित्र है।+  दोष-बलि पर भी वही नियम लागू होगा जो पाप-बलि के लिए दिया गया है। बलि के गोश्‍त पर उस याजक का हक है जो प्रायश्‍चित के लिए यह बलि चढ़ाता है।+  जब एक याजक किसी के लिए होम-बलि का जानवर अर्पित करता है तो उस जानवर की खाल+ उस याजक की होगी।  अनाज का जो भी चढ़ावा तंदूर या कड़ाही में या तवे पर पकाकर चढ़ाया जाता है,+ उसे खाने का हक उसी याजक को है जो यह चढ़ावा चढ़ाता है। यह उसी का होगा।+ 10  मगर अनाज का ऐसा हर चढ़ावा जो पकाया न गया हो, हारून के सभी बेटों का होगा, फिर चाहे उसमें तेल मिला हो+ या वह सूखा हो।+ उन सबको इसका बराबर हिस्सा मिलेगा। 11  यहोवा को दी जानेवाली शांति-बलि के बारे में तुम इस नियम का पालन करना:+ 12  अगर कोई परमेश्‍वर को धन्यवाद देने के लिए शांति-बलि चढ़ाता है,+ तो उसे धन्यवाद-बलि के जानवर के साथ ये चीज़ें भी लाकर देनी होंगी: छल्ले जैसी बिन-खमीर की रोटियाँ जो तेल से गूँधकर बनायी गयी हों, तेल चुपड़ी बिन-खमीर की पापड़ियाँ और तेल से सने मैदे की बनी छल्ले जैसी रोटियाँ जो तेल से तर हों। 13  इसके अलावा, धन्यवाद देने के लिए दी जानेवाली शांति-बलि के साथ वह छल्ले जैसी खमीरी रोटियाँ भी देगा। 14  वह इनमें से हर तरह की एक-एक रोटी अलग निकालकर यहोवा को अर्पित करेगा। यह इस चढ़ावे का पवित्र हिस्सा है। इस पर उस याजक का हक होगा जो शांति-बलि के जानवरों का खून वेदी पर छिड़कता है।+ 15  धन्यवाद के लिए दी जानेवाली शांति-बलि का गोश्‍त उसी दिन खाया जाए जिस दिन यह बलि दी जाती है। अगली सुबह तक यह गोश्‍त बचाकर न रखा जाए।+ 16  अगर किसी की शांति-बलि उसकी मन्‍नत-बलि+ या स्वेच्छा-बलि है,+ तो बलि के जानवर का गोश्‍त उस दिन खाया जाए जिस दिन बलि चढ़ायी जाती है। इस बलि का जो गोश्‍त बच जाता है वह अगले दिन भी खाया जा सकता है। 17  लेकिन अगर तीसरे दिन तक भी कुछ बच जाता है तो उसे आग में जला देना चाहिए।+ 18  अगर शांति-बलि का गोश्‍त तीसरे दिन खाया जाता है, तो जिसने यह बलि दी है वह परमेश्‍वर की मंज़ूरी नहीं पाएगा। उसकी बलि बेमाने हो जाएगी और घिनौनी चीज़ साबित होगी। जो तीसरे दिन वह गोश्‍त खाता है उसे अपने गुनाह का लेखा देना होगा।+ 19  अगर बलि का गोश्‍त किसी अशुद्ध चीज़ से छू जाए तो उस गोश्‍त को खाना मना है। उसे आग में जला देना चाहिए। हर कोई जो शुद्ध है वह शुद्ध गोश्‍त खा सकता है। 20  अगर कोई अशुद्ध हालत में होते हुए भी यहोवा के लिए दी गयी शांति-बलि का गोश्‍त खाता है, तो उसे मौत की सज़ा दी जाए।+ 21  अगर कोई किसी अशुद्ध इंसान+ या अशुद्ध जानवर+ या किसी अशुद्ध घिनौनी चीज़+ को छूता है और ऐसी अशुद्ध हालत में वह यहोवा के लिए चढ़ायी गयी शांति-बलि के गोश्‍त में से खाता है तो उसे मौत की सज़ा दी जाए।’” 22  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा, 23  “इसराएलियों से कहना, ‘तुम बैल या मेम्ने या बकरी की चरबी हरगिज़ मत खाना।+ 24  तुम ऐसे जानवर की चरबी भी मत खाना, जो मरा हुआ पाया जाता है या जिसे किसी दूसरे जानवर ने मार डाला है। उसकी चरबी किसी और काम के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।+ 25  जो कोई ऐसे जानवर की चरबी खाता है, जिसे वह आग में जलाकर यहोवा को देने के लिए लाता है, उसे मौत की सज़ा दी जाए। 26  तुम जहाँ भी रहते हो, तुम किसी भी जीव का खून मत खाना,+ फिर चाहे वह चिड़ियों का खून हो या जानवरों का। 27  अगर कोई किसी भी जीव का खून खाता है, तो उसे मौत की सज़ा दी जाए।’”+ 28  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा, 29  “इसराएलियों से कहना, ‘जो कोई यहोवा के लिए शांति-बलि चढ़ाता है, उसे बलि का कुछ हिस्सा यहोवा को अर्पित करने के लिए लाना चाहिए।+ 30  यह हिस्सा बलि के जानवर का सीना और चरबी है, जिन्हें वह अपने हाथों पर रखकर लाएगा+ ताकि उसे आग में जलाकर यहोवा को अर्पित किया जाए। वह उसे यहोवा के सामने आगे-पीछे हिलाएगा। यह हिलाया जानेवाला चढ़ावा है।+ 31  याजक यह चरबी वेदी पर रखकर जलाएगा ताकि इसका धुआँ उठे,+ मगर सीना, हारून और उसके बेटों को दिया जाएगा।+ 32  तुम अपनी शांति-बलियों के जानवर का दायाँ पैर, जो पवित्र हिस्सा है, याजक को देना।+ 33  यह हिस्सा यानी दायाँ पैर हारून के उस बेटे का होगा जो शांति-बलि के जानवर का खून और चरबी अर्पित करेगा।+ 34  इसराएली अपनी शांति-बलियों में से जो चढ़ावा हिलाकर देते हैं उसमें से सीना और पवित्र हिस्सा यानी पैर अलग निकालकर मैं हारून याजक और उसके बेटों को देता हूँ। इसराएलियों को यह नियम हमेशा के लिए दिया जाता है।+ 35  यहोवा के लिए आग में जलाकर जो चढ़ावा दिया जाता है, उसमें से यह हिस्सा याजकों के लिए यानी हारून और उसके बेटों के लिए अलग रखा जाए। यह आज्ञा उसी दिन दी गयी थी जिस दिन उन्हें याजकों के नाते यहोवा की सेवा करने के लिए हाज़िर किया गया था।+ 36  जिस दिन यहोवा ने उनका अभिषेक किया था,+ उसी दिन उसने यह आज्ञा दी थी कि इसराएलियों की दी हुई बलि में से यह हिस्सा उन्हें दिया जाए। यह नियम पीढ़ी-दर-पीढ़ी सदा के लिए उन पर लागू रहेगा।’” 37  ये सारे नियम होम-बलि,+ अनाज के चढ़ावे,+ पाप-बलि,+ दोष-बलि,+ याजकपद सौंपने के मौके पर दी जानेवाली बलि+ और शांति-बलि+ के बारे में दिए गए। 38  यहोवा ने ये सारे नियम सीनै पहाड़ पर मूसा को दिए थे।+ उसने मूसा को ये नियम उस दिन दिए जिस दिन उसने इसराएलियों को आज्ञा दी थी कि वे सीनै वीराने में यहोवा के लिए बलियाँ अर्पित करें।+

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