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यहोवा के साक्षी

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लैव्यव्यवस्था 6:1-30

सारांश

  • दोष-बलि के बारे में कुछ और नियम (1-7)

  • चढ़ावों के बारे में हिदायतें (8-30)

    • होम-बलि (8-13)

    • अनाज का चढ़ावा (14-23)

    • पाप-बलि (24-30)

6  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा,  “अगर किसी ने अपने पड़ोसी की अमानत या उसकी दी हुई चीज़ के साथ हेरा-फेरी की है+ या उसका कोई सामान लूटा है या उसे ठगा है तो यह पाप है। वह यहोवा का विश्‍वासयोग्य नहीं रहा।+  उसी तरह, अगर वह किसी की खोयी हुई चीज़ मिलने पर उसके बारे में झूठ बोलता है तो यह पाप है। और अगर वह इनमें से कोई भी पाप करता है और झूठी कसम खाकर कहता है कि मैंने ऐसा नहीं किया,+  तो भी वह परमेश्‍वर के सामने पाप का दोषी होगा। उसे अपने पड़ोसी की चीज़ लौटा देनी होगी, फिर चाहे उसने वह चीज़ चुरायी हो या ज़बरदस्ती वसूली हो, छल करके ली हो या वह चीज़ अमानत के तौर पर उसे रखने के लिए दी गयी हो या खो जाने पर उसे मिली हो  या उसने झूठी शपथ खाकर रख ली हो। उसने चाहे किसी भी तरह से पड़ोसी की चीज़ ली हो, उसे पूरी भरपाई करनी होगी।+ साथ ही, उसकी कीमत का पाँचवाँ हिस्सा भी देना होगा। उसे चाहिए कि जिस दिन उसका दोष साबित हो जाता है, उसी दिन वह चीज़ उसके मालिक को लौटा दे।  फिर वह एक दोष-बलि का जानवर याजक के पास लाएगा ताकि उसे यहोवा को अर्पित किया जाए। उसे झुंड में से ऐसा मेढ़ा चुनना होगा जिसमें कोई दोष न हो और जो बतायी हुई कीमत का हो।+  याजक उस आदमी के लिए यहोवा के सामने प्रायश्‍चित करेगा और वह चाहे किसी भी पाप का दोषी हो उसे माफ किया जाएगा।”+  यहोवा ने मूसा से यह भी कहा,  “हारून और उसके बेटों को यह आज्ञा देना: ‘यह होम-बलि का नियम है:+ होम-बलि के जानवर को वेदी की आग पर पूरी रात यानी सुबह तक जलने दिया जाए। वेदी पर आग लगातार जलती रहे। 10  सुबह होने पर याजक मलमल से बनी, याजक की पोशाक+ और मलमल का जाँघिया पहनकर तैयार होगा।+ फिर वह वेदी के पास आकर होम-बलि की राख* उठाएगा+ और उसे वेदी के एक तरफ रखेगा। 11  इसके बाद यह पोशाक उतारकर+ वह दूसरे कपड़े पहनेगा और राख उठाकर छावनी के बाहर एक साफ जगह ले जाएगा।+ 12  वेदी पर आग हमेशा जलाए रखनी चाहिए। यह आग कभी नहीं बुझनी चाहिए। याजक को चाहिए कि वह हर सुबह वेदी पर लकड़ियाँ जलाए+ और उसके ऊपर होम-बलि के जानवर के टुकड़े तरतीब से रखे। वह उसके ऊपर शांति-बलि के जानवरों की चरबी रखकर जलाएगा ताकि उसका धुआँ उठे।+ 13  वेदी पर आग लगातार जलाए रखनी चाहिए। यह आग कभी नहीं बुझनी चाहिए। 14  यह अनाज के चढ़ावे का नियम है:+ हारून के बेटो, तुम्हें यह चढ़ावा यहोवा के सामने वेदी के पास लाना चाहिए। 15  फिर तुममें से एक याजक अनाज के चढ़ावे में से मुट्ठी-भर मैदा, थोड़ा-सा तेल और चढ़ावे के ऊपर रखा सारा लोबान लेगा और उसे वेदी पर यहोवा के लिए प्रतीक* के तौर पर जलाएगा ताकि उसका धुआँ उठे और उसकी सुगंध पाकर वह खुश हो।+ 16  उसका बचा हुआ हिस्सा हारून और उसके बेटे खाएँगे।+ वे इससे बिन-खमीर की रोटियाँ बनाकर पवित्र जगह पर खाएँगे। वे इन्हें भेंट के तंबू के आँगन में खाएँगे।+ 17  रोटियाँ बनाते वक्‍त उनमें ज़रा भी खमीर नहीं मिलाना चाहिए।+ मुझे जो चढ़ावा आग में जलाकर दिया जाता है, उसमें से यह हिस्सा मैं उन्हें देता हूँ।+ उनका यह हिस्सा पाप-बलि और दोष-बलि की तरह बहुत पवित्र है।+ 18  हारून के बेटों में से हर आदमी ये रोटियाँ खाएगा।+ यहोवा के लिए आग में जलाकर चढ़ायी जानेवाली बलि में से यह हारून के परिवार को दिया जानेवाला हिस्सा है। उन्हें यह हिस्सा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सदा दिया जाएगा।+ हर वह चीज़ जो उनसे* छू जाए पवित्र हो जाएगी।’” 19  फिर यहोवा ने मूसा से कहा, 20  “जिस दिन हारून का अभिषेक किया जाएगा,+ उस दिन हारून और उसके बेटे यहोवा के लिए एपा का दसवाँ भाग*+ मैदा चढ़ाएँगे, आधा मैदा सुबह और आधा शाम को। आगे जब भी हारून के किसी बेटे का अभिषेक किया जाएगा तब यही चढ़ावा चढ़ाया जाएगा।+ 21  अनाज का यह चढ़ावा तैयार करने के लिए मैदा तेल से गूँधा जाए और तवे पर सेंककर पकाया जाए।+ फिर उसके टुकड़े-टुकड़े किए जाएँ और उनमें अच्छी तरह तेल मिलाकर यहोवा के सामने लाया जाए ताकि उसकी सुगंध पाकर वह खुश हो। 22  हारून के बाद उसके बेटों में से जो उसकी जगह याजक बनेगा+ और जिसका अभिषेक किया जाएगा उसे यह चढ़ावा चढ़ाना होगा। यह नियम तुम्हें हमेशा के लिए दिया जाता है कि अनाज का यह चढ़ावा पूरा-का-पूरा यहोवा के लिए जलाया जाए ताकि इसका धुआँ उठे। 23  याजक जब भी अनाज का चढ़ावा देगा तो उसे पूरा-का-पूरा चढ़ावा जला देना चाहिए। इस चढ़ावे को खाना मना है।” 24  फिर यहोवा ने मूसा से कहा, 25  “हारून और उसके बेटों से कहना, ‘यह पाप-बलि का नियम है:+ पाप-बलि का जानवर यहोवा के सामने उसी जगह हलाल किया जाए जहाँ होम-बलि का जानवर हलाल किया जाता है।+ यह बलि बहुत पवित्र है। 26  जो याजक पाप के प्रायश्‍चित के लिए यह बलि चढ़ाता है वह इसे खाएगा।+ वह इसे पवित्र जगह पर यानी भेंट के तंबू के आँगन में खाएगा।+ 27  हर वह चीज़ जो बलि के जानवर के गोश्‍त को छू जाए पवित्र हो जाएगी। अगर किसी की पोशाक पर इस जानवर के खून के छींटे पड़ जाते हैं तो उसे पवित्र जगह में ही अपनी पोशाक धोकर साफ करनी चाहिए। 28  अगर इसका गोश्‍त मिट्टी के बरतन में उबाला गया हो, तो वह बरतन बाद में चूर-चूर कर दिया जाए। लेकिन अगर यह ताँबे के बरतन में उबाला जाता है तो उसे रगड़-रगड़कर साफ करना चाहिए और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। 29  इस बलि का गोश्‍त सिर्फ याजक खा सकते हैं।+ यह बहुत पवित्र है।+ 30  लेकिन जिस पाप-बलि के जानवर का थोड़ा-सा खून भेंट के तंबू के अंदर ले जाया जाता है ताकि पवित्र-स्थान में प्रायश्‍चित किया जाए, उसका गोश्‍त हरगिज़ नहीं खाना चाहिए।+ उसे आग में जलाकर भस्म कर देना चाहिए।

कई फुटनोट

यानी बलिदान में जलाए गए जानवरों की पिघली चरबी से भीगी राख।
या “यादगार।”
या “चढ़ावों से।”
एपा का दसवाँ भाग 2.2 ली. के बराबर था। अति. ख14 देखें।