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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

लूका के मुताबिक खुशखबरी 5:1-39

सारांश

  • चमत्कार से मछलियाँ पकड़ी गयीं; शुरूआती चेले (1-11)

  • कोढ़ी ठीक किया गया (12-16)

  • यीशु, लकवे के मारे हुए को ठीक करता है (17-26)

  • लेवी को बुलाता है (27-32)

  • उपवास के बारे में सवाल (33-39)

5  एक बार यीशु गन्‍नेसरत झील*+ के किनारे खड़ा एक बड़ी भीड़ को परमेश्‍वर का वचन सिखा रहा था। लोग उस पर गिरे जा रहे थे।  तब उसने झील के किनारे लगी दो नाव देखीं, जिनमें से मछुवारे उतरकर अपने जाल धो रहे थे।+  तब वह उनमें से एक नाव पर चढ़ गया जो शमौन की थी। उसने शमौन से कहा कि नाव को खेकर किनारे से थोड़ी दूर ले जाए। फिर यीशु नाव में बैठकर भीड़ को सिखाने लगा।  जब उसने बोलना खत्म किया, तो शमौन से कहा, “नाव को खेकर गहरे पानी में ले चल, वहाँ अपने जाल डालना।”  मगर शमौन ने कहा, “गुरु, हमने सारी रात मेहनत की, मगर हमारे हाथ कुछ नहीं लगा।+ फिर भी तेरे कहने पर मैं जाल डालूँगा।”  जब उन्होंने ऐसा किया, तो ढेर सारी मछलियाँ उनके जाल में आ फँसीं। यहाँ तक कि उनके जाल फटने लगे।+  तब उन्होंने दूसरी नाव में सवार अपने साथियों को इशारा किया कि उनकी मदद के लिए आएँ। और वे आए और आकर दोनों नाव में मछलियाँ भरने लगे। दोनों नाव मछलियों से इतनी भर गयीं कि डूबने लगीं।  यह देखकर शमौन पतरस यीशु के पैरों पर गिर पड़ा और कहने लगा, “मेरे पास से चला जा प्रभु, क्योंकि मैं एक पापी इंसान हूँ।”  इतनी तादाद में मछलियाँ पकड़ने की वजह से वह और उसके सब साथी हक्के-बक्के रह गए थे। 10  याकूब और यूहन्‍ना का भी यही हाल था, जो जब्दी के बेटे थे+ और शमौन के साझेदार थे। मगर यीशु ने शमौन से कहा, “मत डर। अब से तू जीते-जागते इंसानों को पकड़ा करेगा।”+ 11  तब वे अपनी-अपनी नाव किनारे पर ले आए और सबकुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए।+ 12  एक और मौके पर जब यीशु किसी शहर में था, तो देखो! वहाँ एक आदमी था जिसका पूरा शरीर कोढ़ से भरा था! जैसे ही उसकी नज़र यीशु पर पड़ी, वह उसके सामने मुँह के बल गिरा और गिड़गिड़ाकर कहने लगा, “प्रभु, बस अगर तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।”+ 13  तब यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छुआ और कहा, “हाँ, मैं चाहता हूँ। शुद्ध हो जा।” उसी पल उसका कोढ़ गायब हो गया।+ 14  यीशु ने उस आदमी को आदेश दिया कि किसी को कुछ न बताए और कहा, “जाकर खुद को याजक को दिखा और शुद्ध होने के लिए भेंट चढ़ा, ठीक जैसा मूसा ने कहा था+ ताकि उन्हें गवाही मिले।”+ 15  मगर यीशु की चर्चा दूर-दूर तक फैलती गयी और भीड़-की-भीड़ उसकी सुनने और अपनी बीमारियाँ दूर करवाने उसके पास आती रही।+ 16  लेकिन वह अकसर वीरान इलाकों में चला जाता था ताकि प्रार्थना कर सके। 17  एक दिन वह लोगों को सिखा रहा था। वहाँ गलील, यहूदिया के हर गाँव और यरूशलेम से आए फरीसी और कानून के शिक्षक भी बैठे हुए थे। और लोगों को चंगा करने के लिए यहोवा* की शक्‍ति उस पर थी।+ 18  तभी लोग लकवे के मारे हुए एक आदमी को खाट पर लेकर आए। वे उसे किसी तरह उस कमरे में ले जाना चाहते थे जहाँ यीशु था।+ 19  मगर जब भीड़ की वजह से उसे अंदर ले जाने का रास्ता नहीं मिला, तो वे ऊपर छत पर चढ़ गए। उन्होंने खपरैल हटाकर उसे खाट समेत उन लोगों के बीच उतार दिया जो यीशु के सामने थे। 20  जब यीशु ने उन आदमियों का विश्‍वास देखा तो लकवे के मारे से कहा, “तेरे पाप माफ किए गए।”+ 21  यह सुनकर शास्त्री और फरीसी सोचने लगे, “यह कौन है जो परमेश्‍वर के बारे में निंदा की बातें कर रहा है? परमेश्‍वर को छोड़ और कौन पापों को माफ कर सकता है?”+ 22  मगर यीशु जान गया कि वे क्या सोच रहे हैं और उसने कहा, “तुम अपने मन में क्या सोच रहे हो? 23  क्या कहना ज़्यादा आसान है, ‘तेरे पाप माफ किए गए’ या यह कहना, ‘उठ और चल-फिर’? 24  मगर इसलिए कि तुम जान लो कि इंसान के बेटे को धरती पर पाप माफ करने का अधिकार दिया गया है . . .।” यीशु ने लकवे के मारे हुए आदमी से कहा, “मैं तुझसे कहता हूँ, खड़ा हो! अपनी खाट उठा और घर जा।”+ 25  तब वह आदमी उनके सामने खड़ा हो गया। उसने वह खाट उठायी जिस पर वह लेटा था और परमेश्‍वर की महिमा करता हुआ अपने घर चला गया। 26  यह देखकर सब-के-सब हैरान रह गए और परमेश्‍वर की बड़ाई करने लगे और उन पर डर छा गया। वे कहने लगे, “आज हमने अजब घटनाएँ देखी हैं!” 27  इसके बाद यीशु बाहर गया और उसने कर-वसूली के दफ्तर में लेवी नाम के एक आदमी को बैठे देखा जो कर वसूला करता था। यीशु ने उससे कहा, “आ, मेरा चेला बन जा।”+ 28  तब लेवी उठा और सबकुछ छोड़-छाड़कर उसके पीछे हो लिया। 29  फिर लेवी ने यीशु के लिए अपने घर पर एक बड़ी दावत रखी। वहाँ भारी तादाद में कर-वसूलनेवाले और दूसरे लोग आए थे जो उनके साथ खाना खा रहे थे।*+ 30  यह देखकर फरीसी और उनके शास्त्री कुड़कुड़ाने लगे और यीशु के चेलों से कहने लगे, “तुम कर-वसूलनेवालों और पापियों के साथ क्यों खाते हो?”+ 31  यीशु ने उन्हें जवाब दिया, “जो भले-चंगे हैं उन्हें वैद्य की ज़रूरत नहीं होती, मगर बीमारों को होती है।+ 32  मैं धर्मियों को नहीं, पापियों को बुलाने आया हूँ कि वे पश्‍चाताप करें।”+ 33  उन्होंने कहा, “यूहन्‍ना के चेले अकसर उपवास रखते और मिन्‍नतें करते हैं और फरीसियों के चेले भी ऐसा ही करते हैं, मगर तेरे चेले खाते-पीते हैं।”+ 34  यीशु ने उनसे कहा, “जब तक दूल्हा अपने दोस्तों के साथ है, तब तक तुम उसके दोस्तों से उपवास नहीं करवा सकते, क्या करवा सकते हो? 35  लेकिन वे दिन आएँगे जब दूल्हे+ को उनसे जुदा कर दिया जाएगा, तब वे उपवास करेंगे।”+ 36  इसके बाद यीशु ने उन्हें एक मिसाल भी दी, “कोई भी नए कपड़े का टुकड़ा काटकर पुराने कपड़े के छेद पर नहीं लगाता। अगर वह लगाए तो नए कपड़े का टुकड़ा फट जाएगा और पुराने कपड़े से मेल नहीं खाएगा।+ 37  न ही कोई नयी दाख-मदिरा पुरानी मशकों में भरता है। अगर वह भरे, तो नयी मदिरा मशकों को फाड़ देगी और बह जाएगी और मशकें भी नष्ट हो जाएँगी। 38  नयी दाख-मदिरा नयी मशकों में भरी जानी चाहिए। 39  जिसने पुरानी दाख-मदिरा पी है वह नयी मदिरा नहीं चाहता क्योंकि वह कहता है, ‘पुरानी ही बढ़िया है।’”

कई फुटनोट

यानी गलील झील।
अति. क5 देखें।
या “मेज़ से टेक लगाए बैठे थे।”