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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

यूहन्‍ना के मुताबिक खुशखबरी 21:1-25

सारांश

  • यीशु चेलों के सामने प्रकट होता है (1-14)

  • पतरस बार-बार कहता है कि उसे यीशु से प्यार है (15-19)

    • “मेरी छोटी भेड़ों को खिला” (17)

  • यीशु के प्यारे चेले का भविष्य (20-23)

  • समाप्ति (24, 25)

21  इसके बाद एक बार फिर यीशु, तिबिरियास झील के किनारे चेलों के सामने प्रकट हुआ। वह इस तरह प्रकट हुआ।  ऐसा हुआ कि शमौन पतरस, थोमा (जो जुड़वाँ कहलाता था),+ गलील के काना का नतनएल,+ जब्दी के बेटे+ और यीशु के दो और चेले एक-साथ थे।  शमौन पतरस ने उनसे कहा, “मैं मछली पकड़ने जा रहा हूँ।” उन्होंने कहा, “हम भी तेरे साथ चलते हैं।” वे बाहर निकले और नाव पर सवार हो गए, मगर उस रात उनके हाथ कुछ नहीं लगा।+  जब सुबह होने लगी तब यीशु किनारे पर आकर खड़ा हो गया। मगर चेलों ने नहीं पहचाना कि वह यीशु है।+  तब यीशु ने उनसे पूछा, “बच्चो, क्या तुम्हारे पास खाने के लिए कुछ है?”* उन्होंने कहा, “नहीं!”  उसने उनसे कहा, “नाव के दायीं तरफ जाल डालो और तुम्हें कुछ मछलियाँ मिलेंगी।” तब उन्होंने जाल डाला और उसमें ढेर सारी मछलियाँ आ फँसीं और वे जाल को खींच न पाए।+  तब उस चेले ने, जिसे यीशु प्यार करता था+ पतरस से कहा, “यह तो प्रभु है!” जब शमौन पतरस ने सुना कि यह प्रभु है तो उसने कपड़े पहने* क्योंकि वह नंगे बदन* था और झील में कूद पड़ा।  मगर दूसरे चेले छोटी नाव में मछलियों से भरा जाल खींचते हुए आए क्योंकि वे किनारे से ज़्यादा दूर नहीं थे, करीब 300 फुट* की दूरी पर ही थे।  जब वे किनारे पर आए, तो उन्होंने देखा कि जलते कोयलों पर मछलियाँ रखी हुई हैं और रोटी भी है। 10  यीशु ने उनसे कहा, “तुमने अभी-अभी जो मछलियाँ पकड़ी हैं उनमें से कुछ ले आओ।” 11  तब शमौन पतरस नाव पर चढ़ा और मछलियों से भरा जाल खींच लाया, जिसमें 153 बड़ी मछलियाँ थीं। मगर इतनी ज़्यादा मछलियाँ होने के बावजूद वह जाल फटा नहीं। 12  यीशु ने उनसे कहा, “आओ, नाश्‍ता कर लो।” लेकिन चेलों में से किसी ने भी यह पूछने की हिम्मत नहीं की कि “तू कौन है?” क्योंकि वे जानते थे कि वह प्रभु ही है। 13  यीशु ने रोटी ली और उन्हें दी। फिर उसने मछलियाँ भी उन्हें दीं। 14  इस तरह यीशु मरे हुओं में से ज़िंदा होने के बाद तीसरी बार+ अपने चेलों को दिखायी दिया। 15  जब वे नाश्‍ता कर चुके तो यीशु ने शमौन पतरस से कहा, “शमौन, यूहन्‍ना के बेटे, क्या तू इनसे ज़्यादा मुझसे प्यार करता है?” पतरस ने उससे कहा, “हाँ प्रभु, तू जानता है कि मुझे तुझसे कितना प्यार है।” यीशु ने उससे कहा, “मेरे मेम्नों को खिला।”+ 16  यीशु ने दूसरी बार उससे कहा, “शमौन, यूहन्‍ना के बेटे, क्या तू मुझसे प्यार करता है?” पतरस ने कहा, “हाँ प्रभु, तू जानता है कि मुझे तुझसे कितना प्यार है।” उसने पतरस से कहा, “चरवाहे की तरह मेरी छोटी भेड़ों की देखभाल कर।”+ 17  यीशु ने तीसरी बार उससे कहा, “शमौन, यूहन्‍ना के बेटे, क्या तू मुझसे प्यार करता है?” यह सुनकर पतरस दुखी हुआ कि उसने तीसरी बार उससे पूछा कि ‘क्या तू मुझसे प्यार करता है?’ इसलिए पतरस ने उससे कहा, “प्रभु, तू सबकुछ जानता है। तू यह भी जानता है कि मैं तुझसे कितना प्यार करता हूँ।” यीशु ने कहा, “मेरी छोटी भेड़ों को खिला।+ 18  मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ, जब तू जवान था तो खुद कपड़े पहनता था और जहाँ चाहे वहाँ जाता था। मगर जब तू बूढ़ा होगा, तो तू अपने हाथ आगे बढ़ाएगा और कोई दूसरा आदमी तुझे कपड़े पहनाएगा और जहाँ तू नहीं चाहेगा वहाँ तुझे ले जाएगा।” 19  उसने यह बताने के लिए ऐसा कहा कि वह किस तरह की मौत मरकर परमेश्‍वर की महिमा करेगा। यह कहने के बाद यीशु ने उससे कहा, “मेरे पीछे चलता रह।”+ 20  जब पतरस मुड़ा तो उसने उस चेले को आते देखा जिसे यीशु प्यार करता था।+ यह वही चेला था जिसने शाम के खाने के वक्‍त यीशु के सीने पर झुककर उससे पूछा था, “प्रभु, वह कौन है जो तुझे धोखा देकर पकड़वाएगा?” 21  जब पतरस की नज़र उस चेले पर पड़ी, तो उसने यीशु से पूछा, “प्रभु, इस आदमी का क्या होगा?” 22  यीशु ने उससे कहा, “अगर मेरी मरज़ी है कि यह मेरे आने तक रहे, तो तुझे इससे क्या? तू मेरे पीछे चलता रह।” 23  इसलिए भाइयों में यह बात फैल गयी कि वह चेला नहीं मरेगा। मगर यीशु ने उससे यह नहीं कहा था कि वह नहीं मरेगा बल्कि यह कहा था कि “अगर मेरी मरज़ी है कि यह मेरे आने तक रहे, तो तुझे इससे क्या?” 24  यह वही चेला है+ जो इन बातों की गवाही देता है और जिसने ये बातें लिखी हैं और हम जानते हैं कि उसकी गवाही सच्ची है। 25  दरअसल ऐसे और भी बहुत-से काम हैं जो यीशु ने किए थे। अगर उन सारे कामों के बारे में एक-एक बात लिखी जाती, तो मैं समझता हूँ कि जो खर्रे लिखे जाते वे पूरी दुनिया में भी नहीं समाते।+

कई फुटनोट

या “मछलियाँ हैं।”
या “कस लिए।”
या “कम कपड़ों में।”
करीब 90 मी.; शा., “करीब 200 हाथ।” अति. ख14 देखें।