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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

यूहन्‍ना के मुताबिक खुशखबरी 12:1-50

सारांश

  • मरियम, यीशु के पैरों पर तेल उँडेलती है (1-11)

  • यीशु राजा की हैसियत से दाखिल होता है (12-19)

  • यीशु अपनी मौत की भविष्यवाणी करता है (20-37)

  • यहूदियों ने विश्‍वास नहीं किया जिससे भविष्यवाणी पूरी हुई (38-43)

  • यीशु दुनिया को बचाने आया (44-50)

12  फसह के त्योहार से छ: दिन पहले यीशु बैतनियाह पहुँचा। लाज़र,+ जिसे यीशु ने मरे हुओं में से ज़िंदा किया था वहीं का रहनेवाला था।  यीशु के लिए वहाँ शाम की दावत रखी गयी और मारथा सेवा में लगी हुई थी।+ जो लोग यीशु के साथ खाने बैठे,* उनमें लाज़र भी एक था।  तब मरियम ने करीब 327 ग्राम* असली जटामाँसी का खुशबूदार तेल लिया जो बहुत कीमती था। उसने यीशु के पैरों पर यह तेल उँडेला और अपने बालों से उन्हें पोंछा। सारा घर इस तेल की खुशबू से महक उठा।+  मगर यहूदा इस्करियोती+ ने, जो यीशु के चेलों में से एक था और उसे पकड़वानेवाला था कहा,  “इस खुशबूदार तेल को 300 दीनार* में बेचकर इसका पैसा गरीबों को क्यों नहीं दिया गया?”  मगर यह उसने इसलिए नहीं कहा कि उसे गरीबों की चिंता थी, बल्कि इसलिए कहा क्योंकि वह चोर था और उसके पास पैसों का बक्सा रहता था जिसमें से वह पैसे चुरा लेता था।  तब यीशु ने मरियम के लिए कहा, “इसे छोड़ दो ताकि यह मेरे दफनाए जाने की तैयारी के लिए यह दस्तूर पूरा करे।+  क्योंकि गरीब तो हमेशा तुम्हारे साथ होंगे,+ मगर मैं हमेशा तुम्हारे साथ नहीं रहूँगा।”+  इस बीच यहूदियों की एक बड़ी भीड़ को पता चला कि यीशु वहाँ है। तब वे न सिर्फ यीशु को बल्कि लाज़र को भी देखने वहाँ आए, जिसे उसने मरे हुओं में से ज़िंदा किया था।+ 10  अब प्रधान याजकों ने लाज़र को भी मार डालने की साज़िश रची 11  क्योंकि उसी की वजह से बहुत-से यहूदी वहाँ जा रहे थे और यीशु पर विश्‍वास कर रहे थे।+ 12  अगले दिन, त्योहार के लिए आए लोगों की बड़ी भीड़ ने सुना कि यीशु यरूशलेम आ रहा है। 13  तब वे खजूर की डालियाँ लिए उससे मिलने निकले। वे ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगे, “हम तुझसे बिनती करते हैं, इसे बचा ले! धन्य है वह जो यहोवा* के नाम से आता है,+ इसराएल का राजा धन्य है!”+ 14  जब यीशु को गधे का एक बच्चा मिला, तो वह उस पर बैठ गया,+ ठीक जैसा लिखा है, 15  “सिय्योन की बेटी, मत डर। देख! तेरा राजा गधे के बच्चे पर बैठकर आ रहा है।”+ 16  शुरू में उसके चेले इन बातों का मतलब नहीं समझ पाए। मगर जब यीशु ने महिमा पायी+ तब उन्हें याद आया कि उन्होंने उसके लिए ठीक वही किया, जो उसके बारे में लिखा था।+ 17  जिन लोगों ने देखा था कि कैसे यीशु ने लाज़र को कब्र* से बाहर बुलाया+ और उसे मरे हुओं में से ज़िंदा किया, वे इस बारे में दूसरों को गवाही देते रहे।+ 18  उस भीड़ के लोग यीशु से मिलने इसलिए आए थे क्योंकि उन्होंने इस चमत्कार के बारे में सुना था। 19  तब फरीसी आपस में कहने लगे, “देखो, हम कुछ नहीं कर पा रहे। सारी दुनिया उसके पीछे जा रही है।”+ 20  त्योहार के वक्‍त उपासना के लिए आनेवालों में कुछ यूनानी भी थे। 21  इसलिए वे फिलिप्पुस+ के पास आए जो गलील के बैतसैदा का रहनेवाला था और उससे गुज़ारिश करने लगे, “साहब, हम यीशु से मिलना चाहते हैं।” 22  फिलिप्पुस ने जाकर अन्द्रियास को बताया। अन्द्रियास और फिलिप्पुस ने जाकर यीशु को बताया। 23  मगर यीशु ने उन्हें जवाब दिया, “वह घड़ी आ चुकी है जब इंसान का बेटा महिमा पाए।+ 24  मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जब तक गेहूँ का एक दाना मिट्टी में गिरकर मर नहीं जाता, तब तक वह एक दाना ही रहता है। लेकिन जब वह मर जाता है+ तो बहुत फल पैदा करता है। 25  जो अपनी जान से लगाव रखता है, वह इसे नाश करता है। मगर जो इस दुनिया में अपनी जान से नफरत करता है+ वह इसे बचाएगा ताकि हमेशा की ज़िंदगी पाए।+ 26  जो मेरी सेवा करना चाहता है, वह मेरे पीछे हो ले और जहाँ मैं हूँ वहाँ मेरा सेवक भी होगा।+ जो मेरी सेवा करेगा, पिता उसका आदर करेगा। 27  अब मैं और क्या कहूँ? मेरा जी बेचैन है।+ हे पिता, मुझे इस घड़ी से बचा ले!+ मगर मैं इसीलिए तो इस घड़ी तक पहुँचा हूँ। 28  पिता अपने नाम की महिमा कर।” तब आकाश से आवाज़+ आयी: “मैंने इसकी महिमा की है और फिर से करूँगा।”+ 29  जब आस-पास खड़ी भीड़ ने यह आवाज़ सुनी, तो लोग कहने लगे कि बादल गरजा है। दूसरों ने कहा, “किसी स्वर्गदूत ने उससे बात की है।” 30  यीशु ने कहा, “यह आवाज़ मेरी खातिर नहीं बल्कि तुम्हारी खातिर सुनायी दी है। 31  अब इस दुनिया का न्याय किया जा रहा है और इस दुनिया का राजा+ बाहर कर दिया जाएगा।+ 32  मगर जहाँ तक मेरी बात है, जब मुझे धरती से ऊपर उठाया जाएगा,+ तो मैं सब किस्म के लोगों को अपनी ओर खींचूँगा।” 33  यह बात उसने दरअसल यह दिखाने के लिए कही कि वह कैसी मौत मरनेवाला था।+ 34  तब भीड़ ने उससे कहा, “हमने तो कानून में सुना है कि मसीह हमेशा तक रहेगा,+ फिर तू कैसे कह सकता है कि इंसान के बेटे को ऊपर उठाया जाना है?+ यह इंसान का बेटा कौन है?” 35  तब यीशु ने उनसे कहा, “रौशनी बस थोड़ी देर और तुम्हारे बीच रहेगी। जब तक यह तुम्हारे साथ है, तब तक रौशनी में चलते रहो ताकि अँधेरा तुम पर हावी न हो। जो अँधेरे में चलता है वह नहीं जानता कि वह कहाँ जा रहा है।+ 36  जब तक रौशनी तुम्हारे साथ है, तब तक उस पर विश्‍वास करो और तुम रौशनी के बेटे+ कहलाओगे।” यीशु ये बातें कहने के बाद चला गया और उनसे छिप गया। 37  उसने उनके सामने बहुत-से चमत्कार किए थे, फिर भी वे उस पर विश्‍वास नहीं कर रहे थे। 38  इस तरह भविष्यवक्‍ता यशायाह की कही यह बात पूरी हुई, “हे यहोवा,* किसने हमारे संदेश पर विश्‍वास किया है?+ यहोवा* ने अपनी ताकत* किस पर ज़ाहिर की है?”+ 39  उन्होंने क्यों यकीन नहीं किया, इसकी वजह बताते हुए यशायाह फिर कहता है, 40  “उसने उनकी आँखें अंधी कर दी हैं और उनके दिल कठोर कर दिए हैं ताकि न वे कभी अपनी आँखों से देखें और न ही अपने दिलों से समझें और न वे पलटकर लौट आएँ और मैं उन्हें चंगा करूँ।”+ 41  यशायाह ने मसीह के बारे में ये बातें इसलिए कहीं क्योंकि उसने मसीह की महिमा देखी थी।+ 42  हालाँकि बहुत-से धर्म-अधिकारियों ने भी यीशु पर विश्‍वास किया,+ मगर वे फरीसियों के डर से खुलकर उसे स्वीकार नहीं करते थे ताकि उन्हें सभा-घर से बेदखल न कर दिया जाए।+ 43  उन्हें परमेश्‍वर से मिलनेवाली महिमा से ज़्यादा इंसानों से मिलनेवाली महिमा प्यारी थी।+ 44  मगर यीशु ने ज़ोर से कहा, “जो मुझ पर विश्‍वास करता है वह मुझ पर ही नहीं बल्कि उस पर भी विश्‍वास करता है जिसने मुझे भेजा है।+ 45  और जो मुझे देखता है वह उसे भी देखता है जिसने मुझे भेजा है।+ 46  मैं इस दुनिया में रौशनी बनकर आया हूँ+ ताकि हर कोई जो मुझ पर विश्‍वास करता है वह अँधेरे में न रहे।+ 47  लेकिन अगर कोई मेरी बातें सुनता है मगर उन्हें मानता नहीं, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराऊँगा क्योंकि मैं दुनिया को दोषी ठहराने नहीं बल्कि बचाने आया हूँ।+ 48  जो कोई मुझे ठुकरा देता है और मेरे वचन स्वीकार नहीं करता, उसे दोषी ठहरानेवाला कोई और है। जो वचन मैंने कहा है वही उसे आखिरी दिन में दोषी ठहराएगा। 49  क्योंकि मैंने अपनी तरफ से कुछ नहीं कहा। मगर खुद पिता ने, जिसने मुझे भेजा है, मुझे आज्ञा दी है कि मैं क्या-क्या बताऊँ और क्या-क्या बोलूँ।+ 50  और मैं जानता हूँ कि उसकी आज्ञा मानने का मतलब हमेशा की ज़िंदगी है।+ इसलिए मैं सिर्फ वही बातें बताता हूँ जो पिता ने मुझे बतायी हैं।”+

कई फुटनोट

या “मेज़ से टेक लगाए थे।”
शा., “एक पौंड।” यानी रोमी पौंड। अति. ख14 देखें।
अति. ख14 देखें।
अति. क5 देखें।
या “स्मारक कब्र।”
अति. क5 देखें।
अति. क5 देखें।
शा., “बाज़ू।”