इस जानकारी को छोड़ दें

सैकेंडरी मैन्यू को छोड़ दें

विषय-सूची को छोड़ दें

यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

याकूब की चिट्ठी

अध्याय

1 2 3 4 5

सारांश

  • 1

    • नमस्कार (1)

    • धीरज धरने से खुशी मिलती है (2-15)

      • परखा हुआ विश्वास (3)

      • विश्वास के साथ माँगते रहो (5-8)

      • इच्छाएँ पाप और मौत की तरफ ले जाती हैं (14, 15)

    • हर अच्छा तोहफा ऊपर से मिलता है (16-18)

    • वचन को सुनना; उस पर चलना (19-25)

      • आईने में चेहरा देखनेवाला (23, 24)

    • शुद्ध और निष्कलंक उपासना (26, 27)

  • 2

    • भेदभाव करना पाप है (1-13)

      • प्यार एक शाही नियम है (8)

    • कामों के बिना विश्वास मरा हुआ है (14-26)

      • दुष्ट स्वर्गदूत मानते और थर-थर काँपते हैं (19)

      • अब्राहम यहोवा का दोस्त कहलाया (23)

  • 3

    • जीभ को काबू में करना (1-12)

      • बहुत लोग शिक्षक न बनें (1)

    • स्वर्ग से मिलनेवाली बुद्धि (13-18)

  • 4

    • दुनिया से दोस्ती मत करो (1-12)

      • शैतान का विरोध करो (7)

      • परमेश्वर के करीब आओ (8)

    • घमंड से खबरदार (13-17)

      • “अगर यहोवा की मरज़ी हो” (15)

  • 5

    • अमीरों को चेतावनी (1-6)

    • सब्र रखने और धीरज धरने से परमेश्वर की आशीष मिलती है (7-11)

    • तुम्हारी ‘हाँ’ का मतलब हाँ हो (12)

    • विश्वास से की गयी प्रार्थना असर करती है (13-18)

    • पापी को लौटने में मदद देना (19, 20)