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यहोवा के साक्षी

हिंदी

ऑनलाइन बाइबल | पवित्र शास्त्र का नयी दुनिया अनुवाद

यहेजकेल 47:1-23

सारांश

  • मंदिर से बहती धारा (1-12)

    • पानी धीरे-धीरे गहरा होता है (2-5)

    • मृत सागर का पानी मीठा हो गया (8-10)

    • दलदली जगह का पानी मीठा न हुआ (11)

    • खाने और चंगाई के लिए फलदार पेड़ (12)

  • देश की सरहदें (13-23)

47  इसके बाद वह मुझे वापस मंदिर के प्रवेश पर ले गया।+ वहाँ मैंने देखा कि मंदिर की दहलीज़ के नीचे से पानी की एक धारा बहती हुई पूरब की तरफ जा रही है,+ क्योंकि मंदिर के आगे का हिस्सा पूरब की तरफ था। पानी की यह धारा मंदिर की दहलीज़ के नीचे से दायीं तरफ और वेदी के दक्षिण की तरफ बह रही थी।  फिर वह मुझे उत्तरी दरवाज़े से बाहर ले गया+ और घुमाकर पूरबवाले बाहरी दरवाज़े पर ले आया।+ मैंने देखा कि दरवाज़े के दायीं तरफ पानी की धारा हलकी-हलकी बह रही है।  वह आदमी हाथ में एक नापने की डोरी लिए पूरब की तरफ जाने लगा+ और उसने पूरब के दरवाज़े से 1,000 हाथ* की दूरी तक पानी की धारा नापी। फिर उसने मुझे पानी की धारा पार करने को कहा। वहाँ पानी टखनों तक था।  फिर उसने 1,000 हाथ की दूरी और नापी और मुझे पानी की धारा पार करने को कहा। वहाँ पानी घुटनों तक गहरा था। उसने 1,000 हाथ की दूरी और नापी और मुझे पानी की धारा पार करने को कहा। वहाँ पानी कमर तक गहरा था।  उसने 1,000 हाथ की दूरी और नापी। वहाँ पानी बढ़कर नदी बन गया था जिसे मैं पैदल पार नहीं कर सका। नदी इतनी गहरी थी कि उसे तैरकर ही पार किया जा सकता था। वह ऐसी नदी थी जिसे चलकर पार नहीं किया जा सकता था।  उसने मुझसे पूछा, “इंसान के बेटे, क्या तू यह सब देख रहा है?” फिर वह मुझे पैदल चलाकर वापस नदी किनारे ले आया।  वापस लौटने पर मैंने देखा कि नदी किनारे दोनों तरफ बहुत सारे पेड़ हैं।+  फिर उसने मुझे बताया, “नदी का यह पानी पूरब के इलाके की तरफ बहता है और फिर अराबा*+ से होता हुआ समुंदर में जा मिलता है। जब यह पानी समुंदर में जा मिलेगा+ तो उसका पानी मीठा* हो जाएगा।  अब उसका पानी जहाँ भी बहेगा वह समुद्री जीवों के झुंडों से भर जाएगा। वहाँ मछलियों की भरमार होगी क्योंकि वहाँ यह पानी बहेगा। समुंदर का पानी मीठा* हो जाएगा और जहाँ कहीं उसका पानी बहेगा, वहाँ हर तरह का समुद्री जीव ज़िंदा रह पाएगा। 10  एनगदी+ से लेकर ऐन-एग्लैम तक समुंदर किनारे मछुवारे खड़े रहेंगे, जहाँ बड़े-बड़े जाल सुखाने की जगह होगी। वहाँ तरह-तरह की मछलियों की भरमार होगी, जैसे महासागर*+ में होती है। 11  इसके पास कुछ जगह दलदली और कीचड़ से भरी होंगी। उनका पानी बदलकर मीठा* नहीं होगा, वह खारा ही रहेगा।+ 12  नदी किनारे दोनों तरफ हर तरह के फलदार पेड़ उगेंगे। उनके पत्ते कभी नहीं मुरझाएँगे और उनका फलना कभी बंद नहीं होगा। वे हर महीने नए फल देंगे क्योंकि वे पवित्र-स्थान से निकलनेवाले पानी से सींचे जाते हैं।+ उनके फल खाने के लिए होंगे और पत्ते रोग दूर करने के काम आएँगे।”+ 13  सारे जहान का मालिक यहोवा कहता है, “तुम देश का यह इलाका इसराएल के 12 गोत्रों को विरासत में बाँटोगे और यूसुफ को दो हिस्से मिलेंगे।+ 14  तुम यह इलाका विरासत में पाओगे और हर किसी को बराबर हिस्सा मिलेगा।* मैंने तुम्हारे पुरखों से शपथ खाकर कहा था कि यह देश उन्हें दिया जाएगा+ और अब तुम्हें विरासत में यह दिया जा रहा है। 15  देश की उत्तरी सरहद यह है: महासागर से लेकर हेतलोन की तरफ जानेवाले रास्ते+ से होते हुए सदाद+ तक और 16  सदाद से हमात+ तक और हमात से बेरोता+ तक और बेरोता से सिबरैम तक जो दमिश्‍क और हमात के इलाकों के बीच है और सिबरैम से हासेर-हत्तीकोन तक जो हौरान+ की सरहद के पास है। 17  इस तरह सरहद सागर से हसर-एनोन+ तक होगी। यह सरहद दमिश्‍क की सरहद के साथ-साथ आगे उत्तर तक और हमात की सरहद तक होगी।+ यह उत्तरी सरहद है। 18  पूरब की सरहद हौरान और दमिश्‍क के इलाकों के बीच है। यह यरदन नदी के किनारे-किनारे जाती है, जो गिलाद+ और इसराएल देश के बीच है। तुम सरहद* से लेकर पूर्वी सागर* तक नापना। यह पूर्वी सरहद है। 19  दक्षिणी सरहद तामार से मरीबोत-कादेश के सोतों+ तक, फिर घाटी* तक और महासागर तक होगी।+ यह दक्षिणी सरहद है। 20  पश्‍चिम में महासागर है और दक्षिणी सरहद से उस जगह तक पश्‍चिमी सरहद है जिसके सामने लेबो-हमात*+ है। यह पश्‍चिमी सरहद है।” 21  “तुम यह देश आपस में यानी इसराएल के 12 गोत्रों में बाँटना। 22  तुम विरासत में इसकी ज़मीन अपने लोगों में और अपने बीच रहनेवाले उन परदेसियों में बाँटना जिनके बच्चे तुम्हारे देश में पैदा हुए हैं। परदेसी भी तुम्हारी तरह पैदाइशी इसराएली माने जाएँगे। उन्हें भी तुम्हारे इसराएली गोत्रों के बीच विरासत की ज़मीन मिलेगी। 23  तुम हर परदेसी को विरासत की ज़मीन उस गोत्र के इलाके में देना जहाँ वह रहता है।” सारे जहान के मालिक यहोवा का यह ऐलान है।

कई फुटनोट

यह लंबे हाथ का माप है। अति. ख14 देखें।
या “वीराने।”
शा., “स्वस्थ।”
शा., “स्वस्थ।”
यानी भूमध्य सागर।
शा., “स्वस्थ।”
शा., “तुममें से हरेक अपने भाई की तरह यह इलाका विरासत में पाएगा।”
यानी उत्तरी सरहद।
यानी मृत सागर।
यानी मिस्र घाटी।
या “हमात का प्रवेश।”